चिंता छोड़ो सुख से जियो

चिंता छोड़ो सुख से जियो – एक ऐसी किताब जो मुझे लगता है की हर घर में होना ही चाहिए।  आप देख रहे हैं की अभी कोरोना वायरस एक महामारी के रूप में पुरे संसार में फैला हुआ है ,अभी भारत में भी 21 दिनों का लॉकडाउन हो रखा है ,वैसे में घर पे खाली बैठे हैं ,मन में तरह-तरह के विचार आने लगते हैं। भविष्य को लेकर वायरस को लेकर ,अपने परिवार  में चिंता होना सुरु हो जाता है। 

वैसे में यह किताब चिंता छोड़ो सुख से जियो आपके लिए मार्गदर्शिका का काम करेगी , में हर चिंता पर विजय  प्राप्त कर सकते हैं इसके  बहुत ही अच्छे तरीके से बताया गया है ,जैसे -चिंता के बारे में मूलभूत तथ्य ,जो आपको पता होने चाहिए। 

चिंता छोड़ो सुख से जियो-वर्तमान में एक-एक दिन जियें -हमारा काम यह देखना नहीं की दूर धुधंलके में क्या दीखता है , करना है  सामने है।

 बाइबल के शब्द -आने वाले कल की चिंता मत करो। वही खुस है और केवल वही खुस है ,जो आज को अपना कह सकता है ,जो आत्मविश्वास से कह सकता है ;कल तुम्हें जो करना है कर लेना ,मैंने आज जी लिया है। 

चिंता छोड़ो सुख से जियो-चिंताजनक स्थतियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला के बारे में बताया गया है –

पहला कदम – बिना डरे ,ईमानदारी से स्थिति का विश्लेषण करें और अनुमान लगाएं की बुरा-से-बुरा क्या हो सकता है ?

दूसरा कदम – बुरे-से बुरे परिणाम के लिए खुद को तैयार करें 

तीसरा कदम -इसके बाद अपनी पूरी ऊर्जा लगा दें की इस स्थति को कैसे सुधारा जा सकता है ,बुरे-से-बुरे परिणाम को कम कैसे किया जा सकता है ?


चिंता आपका क्या बिगाड़ सकती है ? जो चिंता से लड़ना नहीं जानते ,वे जवानी में ही मर जाते हैं -डॉ अलेक्सिस कैरेल। 


चिंता आपके साथ क्या कर सकती है चिंता से हाई ब्लड प्रेसर होता है चिंता से गठिया हो सकता है आपको पेट की बीमारी हो सकती है चिंता से थॉयरॉइड की बीमारी हो सकती है चिंता से डाईबिटिज की बीमारी हो सकती है। 
इससे पहले की चिंता आपको खत्म कर दे आप चिंता को ही खत्म कर दें। चिंता छोड़ो सुख से जियो

मैं तो आपको बोलूंगा की आप इस किताब को आज ही मंगवाएं ,इसे जरूर पढ़ें। मैंने निचे लिंक दे दिया है आप चाहो तो किताब को यहाँ से भी आर्डर कर सकते हैं ,इस शानदार किताब चिंता छोड़ो सुख से जियो  के लेखक डेल कार्नेगी जी जो विश्विख्यात लेखक हैं। 

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निन्याबे का चक्कर 

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निन्याबे का चक्कर

निन्याबे का चक्कर 

एक सेठ हवेली थी। बगल में एक गरब का छोटा सा घर थे। दोनों घर की औरतें जब आपस में  मिलती थीं तब एक दूसरे से पूछती थी की आज तुमने क्या रसोई में बनाया ?

सेठ की स्त्री कहती की आज तो पापड़ की सब्जी बनाई है अथवा दाल बनायी है। गरीब घर की स्त्री कहती की आज हलवा-पूड़ी बनाया है अथवा खीर बनायी है !

सेठ की स्त्री अपनी अपने पति से कहती थी हमलोग इतने पैसेवाले और हम इतना साधारण भोजन करते हैं और वो लोग इतने गरीब इतना सुंदर-सुन्दर पकवान कहते हैं ,कैसे ?

जीवन एक भेलपुरी है- KADVE PRAVACHAN

सेठ ने कहा की वो लोग अभी निन्याबे के चक्कर में नहीं पड़े हैं ,जब उनको निन्याबे का चक्कर लग जायेगा तब ऐसा नहीं होगा स्त्री ने पूछा की ये निन्याबे का चक्कर क्या होता है ?

सेठ ने कहा तुम देखती  जाओ !

दूसरे सेठ ने अपने स्त्री से कहा निन्यानबे रुपए लाओ। सेठ की स्त्री निन्यानबे रुपये लेकर आई ,सेठ ने उस  निन्यानबे रुपये को एक कपडे की  पोटली में बाँध दी और अपने स्त्री से कहा की रात में मौका देखकर यह पोटली उस गरीब के घर में फ़ेंक देना रात होने पर सेठ की स्त्री ने वैसा ही किया। 

सुबह होने पर गरीब आदमी को आँगन में एक पोटली दिखाई दी उसने उस पोटली को अपने कमरे में लेकर गया और खोला तो उसमें रुपये मिले। 

उसने बीस -बीस करके पांच जगह रख दिया और देखा की जो उसने पांच बिस रखें हैं उसमें से एक बीस में एक रुपया कम है ,सभी बीस को जब वह गईं रहा था तो निन्यानबे हो रहे थे।

 बार-बार गिना ,कई बार ,पर वह तो निन्यानबे ही हो रहे थे। पति-पत्नी ने विचार किया की दो-तीन दिन घर का खर्च कम करके एक रूपया अगर हमलोग बचा लेंगे तो निन्यानबे  पुरे सौ हो जायेंगे। 

और वैसा ही हुआ है चार दिन  उनलोगों ने एक रुपया  बचा लिया। अब  रुपये हो चुके थे। अब उन्होंने सोंचा हमने मात्र-दो तीन दिन में एक रुपया बचा लिया।

यदि पहले  तरफ धयान देते तो आजतक कितने पैसे जमा होते ! इतने दिन व्यर्त गवाएं अब ध्यान रखेंगे। कुछ दिन बीतने पर सेठ ने अपनी स्त्री से कहा की आज तुम गरीब के स्त्री पूछना की आज घर बनाया है ?

जब  आपस  तो सेठ की स्त्री ने पूछा की आज तुमने घर में क्या बनाया ? उसने कहा-चटनी पीस ली है ,उसके साथ रोटी खा लेंगे। 

सेठानी अब समझ में आ गया निन्याबे का चक्कर !

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गर्म पानी की थैरिपी

गर्म पानी की थैरिपी-

आज मैं एक समाचार चैनल देख रहा था जिसमें एक आर्मी के कर्नल रैंक अधिकारी बता रहे थे उन्होंने गर्म पानी की थैरिपी से 11 कोरोना वायरस से ग्रसित लोगों का उपचार किया है ऐसा नहीं है उन्हें दवाइयां नहीं दी गई थी पर वो कर्नल साहब बता रहे थे की गर्म पानी से ज्यादा असर हुआ ,

गर्म पानी का अनुभव कुछ ऐसा ही  है,मनो आपने सोना बाथ लिया हो। इससे शरीर की शुद्धि होती है,कैसे ?

तब मुझे यह पोस्ट लिखने का विचार आया जब गर्म पानी में इतना फायदा है तो क्यों और भी लोगों को इसके बारे में बताया जाये –

गर्म पानी का अनुभव कुछ ऐसा ही  है,मनो आपने सोना बाथ लिया हो। इससे शरीर की शुद्धि होती है,कैसे ? यह इस प्रकार से हमें मदद करता है –

जब आप गर्म पानी पीते हैं तो आपका शरीर का तापमान बढ़ जाता है।   

गर्म पानी का औसत तापमान 98.6  डिग्री फॉरेनहाइट तक बनाये रखने से आपके शरीर से पसीना छूटने लगता जो की आपको सोना बाथ का आनंद देता है। बॉडी पसीना निकलकर खुद को ठंढा करता है। 

गर्म पानी पिने से से नर्वस सिस्टम सही रहता है ,उसमें डिपॉज़िट भी खत्म होते हैं ,माना जाता है की ये डिपॉज़िट हमारे शरीर पर नकरात्मक प्रभाव डालता है। 

गर्म पानी पिने से आप अपने बॉडी और मन को शुद्ध कर सकते हैं। 

इससे शरीर के जोड़ ठीक रहते हैं,लचीलापन बना रहता है ,आपको जोड़ों में दर्द की शिकायत नहीं होगी। 

आपका वजन भी कम करने में सहायक होता है ,सहन शक्ति बढ़ता है। 

इससे मांशपेशियां की सूजन घटती है 

खुद की शुद्धि के लिए हर रोज गर्म पानी ही पिने कोसिस करें ,पानी इतना गर्म हो की पसीना छूटने ,पर आपका मुँह नहीं जलना चाहिए। शरीर अपना तापमान घटना पसीना छूटने लगेगा। जब पसीना आना बंद हो जाये फिर पानी पिने की कोसिस करें जिससे आपके शरीर का तापमान का संतुलन बना रहे। 

अगर आप बीमार हैं तो गर्म पानी आपके लिए दवा का काम करेगी। 

यदि आपको सादा गर्म पानी पिने का मन  है तो आप नीबू मिला लें। 

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नेपोलियन की जीत का रहस्य 

प्रार्थना 

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जीत का रहस्य

नेपोलियन की जीत का रहस्य 

आधी रत बिट चुकी थी। अपनी शिविर में नेपोलियन गहरी नींद में था। अचानक आपातकाल की घंटी बजी। तत्क्षण नेपोलियन की आँखें खुली और उठ कर बैठ गया। 

तभी हड़बड़ाए हुए सेनापति उनके कक्ष में आये 

नेपोलियन ने  पूछा -क्या बात है ?

महाराज जिस पडोसी को हम अपना मित्र समझते थे ,उसी ने हमारे ऊपर हमला कर दिया है। मेरी समझ में नहीं आ रहा ऐसे में क्या करना चाहिए क्यूंकि हम मित्र -देश की तरफ से पूरी तरह निश्चिंत थे ,इसलिए हमने कोई रणनीति भी नहीं बनाई है। 

नेपोलियन की जीत का रहस्य
pick taken from google

“तुम निश्चिंत थे सेनापति लेकिन नेपोलियन कभी भी निश्चिंत नहीं था ,और वो कभी बेखबर नहीं रहता है। यह ठीक है की वह हमारा मित्र है ,लेकिन मित्रता की बुनियाद कितनी मजबूत है ,यह देखना  होता है।

मुझे  संदेह था की भविष्य में विश्वासघात हो सकता है ,इसलिए मैंने इस स्थति से निपटने के लिए पहले से रणनीति बना रखा है। मेज पर रखे उस नक्से को देखो और चिन्हित किये गए ठिकानों पर मोरच्बंदु करके हमला करो। जीत आज भी हमारी ही होगी। “

सेनापति तेजी से मेज की और दौड़ कर पंहुचा और नक़्शे तरफ देखा ,और नक़्शे का अध्यन करने लगा। 

सेनापति को आश्चर्यचकित देखकर नेपोलियन मुस्कुराया और बोला -विचारसील लोग अच्छी से अच्छी आशा करते हैं ,किन्तु बुरी से बुरी परिस्थति के लिए भी तैयार रहते हैं। 

जिस बात की कल्पना नहीं थी ,नेपोलिया को पहले अंदेशा था। उसने मित्र समझे  के विरुद्ध ठोस रणनीति बना राखी थी। कारण था नेपोलियन हमेसा विजता रहता था। और इस युद्ध में भी नेपोलियन ही जीता। 

इस कहानी नेपोलियन की जीत का रहस्य  से  शिक्षा मिलती है –

जो सदैव चौकन्ने ,सतर्क और जागे रहते ,उन्हें  कोई नहीं हरा सकता। 

नेपोलियन की दूरदर्शिता और सूझबूझ ने ही उसे विजेता बनाया। 

जीवन संग्राम में मित्रों को शत्रु और शत्रुओं को मित्र बनते देर नहीं लगती ,अतः व्यक्ति को नेपोलियन की भांति हर स्थिति के लिए स्वयं को पहले से तैयार रखना चाहिए। 

सफलता के नसे में चूर होकर लापरवाह नहीं हो जाना चाहिए। 

जीत का रहस्य-सफलता पाना बड़ी बात है पर सफलता को बरकरार रखना उससे भी बड़ी और अहम् बात है।

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करसन भाई पटेल

यह कहानी मैंने सूर्या सिन्हा जी के किताब कहानियां बोलती से लिया है उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आया होगा। 

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प्रार्थना -आप जितना सोंचते हैं ,प्रार्थना आपकी उससे ज्यादा मदद कर सकती है

चाहे आप प्रकृति या आदत की वजह से धार्मिक ना हों ,चाहें आप संदेहवादी हों- आप जितना सोंचते हैं ,प्रार्थना आपकी उससे ज्यादा मदद कर सकती है ,क्यूंकि यह प्रैक्टिकल चीज है।

प्रैक्टिकल से मेरा मतलब है की तीन बहुत ही मूलभूत मनोवैज्ञानिक जरूरतों को पूरा करती है ,जो  होती है ,चाहे आप ईश्वर पर विस्वास करते हों या नहीं :-

प्रार्थना -आप जितना सोंचते हैं ,प्रार्थना आपकी उससे ज्यादा मदद कर सकती है
  1. प्रार्थना हमें अपनी समस्या को शब्दों में स्पस्ट करने में मदद करती है ,हम अपनी समस्या को यदि स्पष्ट कर लें आधी समस्या का समाधान समझो हो गया। प्रार्थना करना यानि एक तरह से समस्या को पेपर पर लिख लेना होता है। 

अगर हम समस्या सुलझाने के लिए मदद मांग रहे हैं-चाहे ईश्वर से ही-तो हमें इसके लिए शब्दों का इस्तेमाल करना ही पड़ेगा। 

2. प्रार्थना हमें अहसास दिलाती है की हम अकेले नहीं हैं ,कोई है जो बोझ उठाने में हमारी मदद कर रहा है। हममें से बहुत कम लोगों में इतनी शक्ति होती है की अपने दम पर मुश्किलों और मुसीबतों का भारी और   दर्दनाक बोझ उठा सकें 

3. प्रार्थना कर्म के सक्रीय सिद्धांत  कार्यरूप में ले आती है। यह कर्म के तरफ पहला कदम है। मुझे लगता की शायद ही किसी ने हर रोज प्रार्थना में कोई चीज  मांगी हो और उसे  लाभ न हुआ  हो -दूसरे शब्दों में उसने उसके लिए प्रयास ना किया हो। 

विश्वप्रशिद्ध वैज्ञानिक डॉ अलेक्सिस कैरेल का कहना है,प्रार्थना इंसान द्वारा उत्पन्न की जा सकने वाली ऊर्जा का सबसे शसक्त रूप है।

तो क्यों ना हम इसका प्रयोग करें -चाहे आप इसे अल्लाह का नाम दे दें या ईश्वर कह लें ,भगवान कह लें , परमात्मा कह लें -नाम पर बहस करने से क्या फायदा ?

प्रकृति की रहष्यमयी शक्तियां –

विश्वप्रशिद्ध वैज्ञानिक डॉ अलेक्सिस कैरेल का कहना है,प्रार्थना इंसान द्वारा उत्पन्न की जा सकने वाली ऊर्जा का सबसे शसक्त रूप है। तो क्यों ना हम इसका प्रयोग करें -चाहे आप इसे अल्लाह का नाम दे दें या ईश्वर कह लें ,भगवान कह लें , परमात्मा कह लें -नाम पर बहस करने से क्या फायदा ? प्रकृति की रहष्यमयी शक्तियां   हमें अपने संरक्षण में ले लें ?

क्यों अब पड़ना बंद करके दरवाजे को बंद करके घुटने पर बैठ जाएँ और अपने दिल का गुब्बार निकाल दें ? अगर आपकी आस्था खत्म हो गई है , की प्रार्थना करें की वह आपकी आस्था जगा दें। 

आप सौ साल पहले लिखी असीसी के सेंट फ्रांसिस द्वारा लिखी गई यह सुंदर प्रार्थना दोहराएं –

हे ईश्वर ,मुझे अपनी शांति का का जरिया बना लें। जहाँ नफरत हो ,वहां प्रेम के बीज बोने  दें। 

जहाँ चोट  ,हो वहां मुझे क्षमा करने दें। 

जहाँ शंका हो ,वहां मुझे विस्वास भरने दें 

जहां निराशा हो वहां आशा भरने दें। 

जहां अंधकार हो वहां उजाला भरने दें। 

जहाँ दुःख हो ,वहां सुख लेन दें। 

हे ईश्वर इतना कर दो की सांत्वना हासिल करने के वजाय मैं सांत्वना देने का प्रयास करूँ ,

दूसरे को समझने के वजाय खुद समझने का प्रयास कर सकूँ ,

दूसरों का प्रेम हासिल करने के वजाय दूसरे को प्रेम देने का प्रयास करूँ ,

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मंदबुद्धि शेर

मंदबुद्धि शेर -भूखा शेर जंगल में मारा-मारा फिर रहा था ,उसे बहुत जोरों की भूख लगी थी। जब भटकते-भटकते वह थक गया तो  पर थोड़ी देर रूककर सोंचने लगा की अब क्या करूँ किधर जाऊं ?

काश ! हम भी दूसरे शाकाहारी जानवरों की भांति घास-पात ,फल-फूल खा लेते तो आज मुझे इस प्रकार भूख तड़पना नहीं पड़ता। 


खड़े-खड़े उसने देखा की सामने एक बड़ी सी गुफा है ,मन ही मन सोंचने लगा की अवश्य ही इस गुफा में कोई जानवर रहता होगा ,मैं इस गुफा के बाहर ही बैठ जाता हूँ और जैसे गुफा से बाहर कोई भी जानवर आएगा मैं उसे खा कर अपनी भूख मिटा लूंगा। 


काफी इन्तजार के बाद गुफा  वाला गीदड़ जैसे ही बाहर आया तो शेर एकदम से चौकस हो गया ,अपने सीकर देखकर उसकी भूख और भी तेज हो गई। गीदड़ की जाती तो सबसे तेज दिमाग की मानी जाती है ,उसके दिमाग ने गुफा के द्वार पर से अंदाजा लगा लिया था की अंदर शेर है।

अब मौत उससे अधिक दूर नहीं है ,परन्तु  देखकर भी उसने अपना शंयम नहीं खोया ,बल्कि उसकी बुद्धि उस दिशा में काम करना सुरु कर दिया की शेर से कैसे बचा जाए ?उसकी बुद्धि ने काम किया ,उसकी बुद्धि में एक बात आई ,

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वह गुफा के बाहर खड़ा होकर बोल;ने लगा ओ गुफा। ओ गुफा। जब अंदर से कोई उत्तर नहीं आया तो गीदड़ ने बोलै –

हे गुफा !तेरी मेरी संधि है की जब भी बाहर से आऊंगा तो तेरा नाम लेकर तुझे बुलाऊंगा ,जिस दिन तुम मेरी बात का उत्तर नहीं डौगी उस दिन मैं तुम्हें छोड़कर किसी और गुफा में चला जाऊँगा। 

अंदर बैठे मंदबुद्धि शेर ने  गीदड़ के मुँह से यह बात सुनी ,तो यह समझ बैठा की यह गुफा गीदड़ के आने पर जरूर होगी ,लगता है मैं इस गुफा में पहले से ही हूँ तो शायद  गुफा अभी बोल नहीं रही है ,इसलिए  क्यों न मैं ही गुफा के बदले बोल देता हूँ ,

उसी समय शेर ने जोर से दहाड़ मारी उसकी दहाड़ सुनकर पूरा जंगल काँप उठा। गीदड़ का संदेह अब विस्वास में बदल गया ,वह गुफा के द्वार से ही मुड़कर बिजली की गति से  निकला। शेर मुर्ख बनकर बैठा रह गया ,


सिख -इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है की संकट के समय में भी शंयम का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। संकट भूलकर उसके निवारण पर बुद्धि लगानी चाहिए। 

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नियम -ऐसा नियम जो आपकी चिंताओं को देगा

ऐसा नियम जो आपकी  चिंताओं को  देगा 

 जो हो गया है उसे स्वीकार कर लें 

 दुनिया की हर बीमारी का या तो इलाज है,या फिर नहीं है ;

अगर इलाज है तो। उसे ढूंढने की कोसिस करें,

अगर इलाज नहीं है ,तो परवाह मत करो। 

 जो हो गया उसे स्वीकार कर लो। स्वीकार करना ही किसी दुर्भाग्य के परिणामों से उबरने का पहला कदम है। 

इससे पहले की चिंता आपको खत्म कर दे ,आप चिंता को खत्म कर दें 

अपने दिमाग को व्यस्त रखकर चिंता को बाहर निकल फेंके। काम में जुटना ही चिंता का ऊतम इलाज है। 

छोटी -छोटी बातों का बतंगड़ ना बनायें छोटी-छोटी चीजों यानि जीवन की दीमकों को अपनी खुसी बरबाद करने ना दें। 

अपनी चिंताओं को जितने के लिए औसत के नियम का प्रयोग करें खुद से पूछें ,इस बात के होने की कितनी सम्भवना है ? 

अवश्यभावी के साथ सहयोग करें। अगर आप जानते हैं की किसी प्रस्थति को बदला या सुधारना संभव नहीं है तो खुद से कहें ,यह हो चुकी है है। बदल नहीं सकती। 

अपनी चिंताओं पर स्टाप लॉस ऑर्डर लगा दें। यह फैसला करें  किसी चीज पर कितनी चिंता करनी चाहिए -और फिर उससे ज्यादा चिंता ना करें। 

अतीत को दफ़न कर दें। आरी से बुरादा न चीरें। 

आपने आपको छोटी-छोटी बातों से विचलित होने की अनुमति न दें ,जिन्हें हमें नजरअंदाज कर देना चाहिए और भूल जाना चाहिए। याद रखें ,जिंदगी जितनी छोटी है की घटिया नहीं चाहिए। 

कड़वे प्रवचन – मंगल  (ग्रह ) पर जीवन है या नहीं दुनिया में इस बात पर बहस चल रही है लेकिन जीवन में मंगल है या नहीं इस बात की किसी को कोई फ़िक्र नहीं 

मैं निवेदन नहीं करुँगा की मंगल पर जीवन ढूंढने के वजाय जीवन में यदि मंगल ढूंढा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। जीवन मंगल है। मगर नासमझी के कारण वह दंगल बना हुआ है। 

आपको जिंदगी में यह चुनाव करना है की आप अनुसासन की कीमत चुकाएंगे  अफ़सोस की। 
-टीम कोनर।

– 

अनुरोध-आपसे अनुरोध है की आप सभी घर पे ही रहें। 

confirm cases of corona – 1000 crossed in india.

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आकर्षण का नियम

आकर्षण का नियम अचूक है-आकर्षण का नियम अचूक है और हर व्यक्ति को वही मिल रहा है जो वह मांग रहा है ,हालाँकि ज्यादातर समय हर व्यक्ति को ईस बारे में जानकारी ही नहीं होती है की वह मनचाही चीजें मांग रहा है। 

कृतज्ञ महसूस करते हुए दिन की शुरुआत करें। जिस विस्तर पर आप सोए थे ,उसके लिए कृतज्ञ बनें। यह आकर्षण के नियम को मजबूत करेगा। 

इस नियम की सुंदर है की बहुत प्रतिक्रियाशील है और हर पल देता रहता है ताकि हम अपने जीवन का अनुभव कर सकें। 

यह नियम कभी नहीं बदलता है -हमें यह सीखना होता है की हम इस नियम के सामंजस्य में कैसे रहें। यह हर इंसान के लिए सबसे बड़ा कार्य है। 

यह याद रखना महत्वपूर्ण है की  हमारे विचार और भावनाएं आकर्षण के नियम के साथ मिलकर सृजन करते हैं। 

कल्पना शक्ति को पहचाने

आप इन दोनों को अलग-थलग नहीं कर सकते। यह भी याद रखें की आपकी समस्त आवर्ती तरंगों का सार बता रही है और यह भी की आप इस पल क्या आकर्षित करके उसका सृजन कर रहे हैं। 

तो आप इस वक़्त कैसा महसूस कर रहे हैं ? क्या इससे ज्यादा अच्छा महसूस कर सकते हैं ? तो फिर बेहतर महसूस करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं ,करें। 

आपको याद रखना चाहिए की हमारे विचरों के अलावा कोई भी चीज पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं। 

आप जब भी गाड़ी में कहीं जाएँ ,तो सृष्टि की शक्ति का इस्तेमाल करें। यात्रा सुरु करने से पहले यह इरादा कर लें की ट्रैफिक बाधारहित रहेगा ,आप तनावरहित व् खुश होंगें और सही समय पर गंतव्य स्थान तक पहुँच जायेंगे यह आकर्षण नियम है। 

आप कभी नहीं कह सकते की आकर्षण का नियम काम नहीं कर रहा है ,क्यूंकि यह हर वक़्त काम कर रहा है। अगर आप यह समझ लेते हैं ,तो आप अपनी अविश्वसनीय शक्ति को नई दिशा दे सकते हैं। ताकि आपकी मनचाही चीज को आप आकर्षित करे।  

Kadve pravachan

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नियति की शक्ति

नियति की शक्ति -जिस ब्रह्माण्ड का हम हिस्सा हैं वो सौर्य मंडल का हिस्सा है ,वो सौर्य मंडल एक गैलेक्सी का हिस्सा है गैलेक्सी पुरे ब्रह्माण्ड में करोड़ों हैं।

आपको पता है की इतने बड़े ब्रह्माण्ड को कोई न कोई ऊर्जा एक दूसरे को जोड़े हुए है और हर किसी का अपना एक नियति है , बिना नियति के इस ब्रह्माण्ड में कुछ भी नहीं है। 

नियति की शक्ति-एक कृष्णा नाम का व्यापारी था वह एक किराना दुकान चलाता था। एक दिन एक संत कृष्णा के दुकान पे आये और अनाज लेने की इक्षा जाहिर की। संत बहुत अनुभवी थे।

कृष्णा से थोड़ी देर बात करने के बाद ये उनको पता चल गया की यह व्यापारी अन्य व्यापरियों की तरह चंट-चालाक नहीं है। यह भोला भाला ,सीधा-सादा है। 

तब महर्षि बोले कृष्ण तुम्हारा गुरु कौन हैं ? क्यूंकि जिस तरह का स्वभाव है ,इस तरह के स्वाभवा बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है ,कोई न कोई महान गुरु के तुम शिष्य लगते हो। 

संत की बात सुनने के बाद कृष्णा ने दुकान की तरफ इसारा करते हुए  उत्तर दिया की महाराज मेरा गुरु मेरा व्यापर ही है। 

मैं समझा नहीं मुझे विस्तार से समझाओ। तब कृष्णा ने तराजू उठाया और तराजू में लगी केंद्र में ऊपर की तरफ पॉइंटर की और इसारा किया और बोला मेरा गुरु यही तराजू में लगा पॉइंटर और मेरा ध्यान हमेसा यही होता है बाबा जी की मैं जब भी वजनकरता  हूँ तो तराजू के एक पलड़े पर अनाज और दूसरे पर वजन मापने वाला वाट रखता हूँ। जब काँटा सीधा होता है वजन ठीक है। मैं हमेशा ध्यान रखता हूँ तराजू में कांटा एकदम सीधा हो।

 मैं हमेसा इसी पॉइंटर की तरह ही अपना ध्यान ऊपर यानि ईश्वर की ओर रखता हूँ ,मुझे लगता है की हर ग्राहक एक ईश्वर के रूप में मेरे पास आया है।

मैं उनके साथ ईश्वर  तरह  व्यवहार करता हूँ ,मेरे मन में कोई भी छल-कपट नहीं होता है। मैं अपने ईश्वर के साथ कैसे छल कर सकता हूँ ?

वो तो ठीक है -तुम्हारी दिनचर्या है ?तो कृष्णा बोला रोज सुबह अपना नित्यकर्म करके स्नानधर्म करता हूँ फिर अपना दुकान आ जाता हूँ और इसी दुकान की दिवार पे एक छोटा सा मंदिर लगा है ,

उसी में मैं अपने ईश्वर के दर्शन करता हूँ और आने के बाद  दुकान सौंप देता हूँ ,मैं उनसे कहता आप ही हो दुकान के मालिक मैं तो सिर्फ केयर टेकर हूँ ,मैं तो नौकर हूँ ,अपनी दुकान को सम्भालो। 

संत और ज्यादा उत्साहित हो रहे थे कृष्णा की बात को सुनकर और फिर यह सब सुनकर संत बोले -फिर मुनाफे का क्या करते हो ? 

कृष्णा बोला – मुनाफा सारा मैं  ऊपर खर्च नहीं करता हूँ ,मैं अपना खर्चा निकलता हूँ और जो बचता है उसे जरूरतमंदों की मदद के लिए लगा देता हूँ अच्छे कर्म में लगा देता ,हूँ  ध्यान रखता हूँ की मेरे अंदर कोई अहंकार नहीं आ जाये। मैं अभी हमेशा प्रशन्न रहता हूँ। 

जब तक मैं मालिक अपने-आपको समझता था हमेशा चिंता में रहता था ,आज मैं खुश हूँ क्यूंकि की नियति की शक्ति को मैं जनता हूँ। मैं अपना नियति सही रखता हूँ। 

संत जो कृष्णा के दुकान पर आये थे वो कृष्णा को तो प्रत्यक्ष रूप से तो आशीर्वाद दिया और मन ही मन में प्रणाम भी किया। 

नियति की शक्ति -आप जो भी काम कर रहे हैं बस अपना नियति सही कर लें उस ऊपर वाले की तरफ। अपने ग्राहक में सच में भगवान देखना सुरु कर दें। 

एक सवाल जिसका उत्तर अपने ऊपर वाले को जरूर दें की आपके साथ आज क्या अच्छा हुआ ? इसी उत्तर को देकर भगवान का सुक्रिया अदा करके सोएं। 

यह पोस्ट इससे सम्बंधित है –

आप ग्राहक को राजी कैसे करें ?

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आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है

आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !-एक पिता का पत्र दुनिया के नाम –

ए दुनिया ,आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !

ए दुनिया मेरे बच्चे का हाथ थम लो ,आज उसका पहला दिन है। कुछ देर के लिए हर चीज नई और अजनबी होगी ,इसलिए मैं उम्मीद करता हूँ की आप नरमी से पेश आएं। आप तो जानते हैं की इसका संसार अब तक घर तक ही सिमित था। इसने अपने चारदीवारी के बाहर कभी झाँका नहीं था। यह अब घर का राजा रहा है। अब तक इसकी चोट पर मरहम लगाने और इसकी ठेस लगी भावनाओं को प्यार का लेप लगाने के लिए मैं हमेसा मौजूद था।

लेकिन अब बात  दूसरी होगी। आज सुबह यह सीढ़ियों से उतरकर अपना नन्हा हाथ हिलायेगा और अपना साहसिक यात्रा सुरु करेगा।

जिसमें शायद शायद संघर्ष भी होगा ,दुःख भी होगा और निराशा भी होगी।

इस संसार में जीने के लिए विस्वास,प्यार,और साहस की जरुरत होगी। इसलिए ए दुनिया मैं उम्मीद करता हूँ की आप इसके नन्हें हाथों को पकड़कर वे सब सिखाएंगे जो इसे जानना चाहिए। सिखाएं जरूर,मगर हो सके तो प्यार से।

मैं जानता हूँ की इसे एक दिन यह समझना पड़ेगा की सभी लोग अच्छे नहीं होते-सभी स्त्री-पुरुष सच्चे नहीं होते। इसे यह भी सिखाएं की संसार में हर धूर्त के लिए एक अच्छा इंसान भी है। जहाँ एक दुशमन है वहां एक दोस्त भी है। शुरू में ही सिखने में मदद करें की बुरे और धौंस ज़माने वाले लोगों को ठिकाने लगाना सबसे आसान है। 

इसे किताबों की खूबियों के बारे में बताएं और पढ़ने के लिए प्रेरित करें। कुदरत के छिपे सौंदर्य जैसे-आसमान में उड़ते पंछी ,गुनगुन करते भौरें और हरीभरी वादियों में खिले फूलों को करब से देखने और जानने के लिए पूरा समय दें। इसे यह भी सिखाएं की बेईमानी की जित से हार जाना कहीं अच्छा है। इसे तब भी अपने विचारों पर विस्वास रखना सिखाएं जब सब कह रहे हों की वह गलत है। 

मेरे बच्चे को वह शक्ति दें जिससे वह भीड़  का हिस्सा न बनकर भेड़चाल न चले ,जबकि सारा संसार चल रहा हो। इसे यह तो सिखाएँ की दूसरे की बात  सुनें,लेकिन हर बात सच्चाई के तराजू  पर परखें और उनमें से सिर्फ सच्चाई को ही अपनाये। 

अपनी अंतरात्मा का आवाज को सोने -चाँदी के सिक्कों से न तौले। इसे यह सिखाएं की वह लोगों के कहने में न आये और  अगर अपनी सोंच में खुद को सही पाता है तो सही इरादों पर डटा रहे और संघर्ष करे।  ईसे नरमी से सिखाएँ लेकिन ए दुनिया ,इसे बिगाड़ें मत और कमजोर न बनाएँ क्यूंकि लोहा आग में तपकर ही फौलाद बनता है। 

वैसे तो ऐसा कर पाना एक बहुत बड़ी बात है,मगर ए दुनिया ,फिर भी आप ऐसा करने की कोसिस जरूर करें। आख़िरकार वह एक बहुत प्यारा बेटा है। 

                                                                                               हस्ताक्षर 

                                                                                        – अब्राहम लिंकन। 

एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी 

कड़वे प्रवचन 

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कोरोना वायरस (COVID-19)-आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें

कोरोना वायरस (COVID-19)-आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें – एक नाविक की कहानी आज बताने जा रहा हूँ जो की मैंने शिव खेड़ा जी किताब जीत आपकी से लिया है। इस कहानी के माध्यम से एक शानदार सन्देश आप सभी को। 

एक नाविक तीन साल से एक ही जहाज पर काम कर रहा था। एक रात वह नसे में धुत हो गया। ऐसा पहली बार हुआ था। कप्तान ने इस घटना को रजिस्टर में इस तरह दर्ज किया नाविक आज रात नशे में धुत था। नाविक ने यह बात पढ़ ली।

वह जानता था की इस बात से उसके नौकरी पर असर पड़ेगा ,इसलिए वह कप्तान के पास गया ,माफ़ी मांगी और कप्तान से कहा की उसने जो कुछ भी लिखा है उसमें यह जोड़ दे की ऐसा तीन साल में पहली बार हुआ है ,क्यूंकि पूरी सच्चाई यही है। 

कप्तान ने मना कर दिया और कहा-मैंने जो कुछ भी रजिस्टर में लिखा है असली सच्चाई वही है। 

अगले दिन रजिस्टर भरने की बारी नाविक की थी। उसने लिखा ,आज कप्तान ने शराब नहीं पी। कप्तान ने यह पढ़ा और   नाविक से कहा इस वाक्य को वह या तो बदल दे अथवा पूरी बात लिखने के लिए आगे और कुछ लिखे क्यूंकि जो लिखा गया था ,उससे जाहिर होता था की कप्तान हर रात शराब पिता था। नाविक ने कप्तान से कहा उसने जो कुछ भी लिखा रजिस्टर में वही सच है। 

दोनों बात सही थी ,लेकिन दोनों से जो सन्देश मिलता है ,वह एकदम भटकाने वाला है,और उसमें सच्चाई की झलक नहीं है। 

बढ़ा-चढ़ाकर कहना -इससे हमारी बात का असर कम होता है ,और हमारी विश्वसनीयता घटती है। 

यह एक तरह की लत है। यह आदत बन जाती है। कुछ लोग बात को बढ़ाये-चढ़ाये बिना  सच कह ही नहीं पाते हैं। 

अभी आप सबको पता है कोरोना वायरस (COVID-19) बहुत बुरी तरह से पैर पसार चूका है और इसमें गलत अफवाह या अधूरी जानकरी बहुत खतरनाक है आज की ही न्यूज़ है है की कई लोग ईरान में शराब पिने से उनमें ये गलतफहमी हो गई की उनको कोरोना वायरस (COVID-19) नहीं होगा। और कई मौत हो गई शराब को गलत तरीके से पिने से।

भारत में इसी तरह से कई गलत बातें फ़ैल रही है की आपको शराब या गांजा पिने  होगा कोरोना वायरस (COVID-19)ये बात पूरी तरह से गलत है, जबकि सच्चाई यह है की शराब और धूम्रपान से आपकी इम्मयून सिस्टम कमजोर होगा,आपको यदि एक बार करना वायरस पकड़ा तो आप जल्दी रिकवर नहीं कर पाएंगे।  

आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें 

नोट – आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें ,प्लीज् आप सभी भारतीय है या संसार के किसी भिओ कोने से आप पढ़ प् रहे हैं 21 दिन घर पे ही रहें। अपने फैमली के साथ इस पल को इंजॉय करें। घर पे रहकर किताब पढ़ें ,ऑनलाइन कोर्स करें। 

याद रखें आप ही कोरोना वायरस (COVID-19) को घर लाएंगे वह अपने आप नहीं आएगा।  

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सफलता के निश्चित नियम होते हैं

सफलता के निश्चित नियम होते हैंसफलता के  लिए केवल  तीन चीजें जरुरी हैं। सबसे पहले तो तय करें की आप जीवन में सचमुच क्या चाहते हैं दूसरी यह तय करें की  आप अपनी मनचाही चीजों को प्राप्त करने के लिए  कीमत चुकाने लिए तैयार हैं ,तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण चीज ,उस कीमत को चुकाने का संकल्प करें।

शून्य से शुरू करना 

 अमेरिका के लगभग सभी अमीर लोग पहली पीढ़ी के अरबपति हैं ,जैसे बिल गेट्स ,वारेन वफ़ेट ,लैरी एलिसन ,;माइकल डेल और पॉल एलेन। 

80 प्रतिसत ;लखपतियों और  करोड़पतियों ने बहुत कम पैसे से अपने कैरियर की शुरू किया , शुरुआत में वे अक्सर कड़के रहे और कई बार तो वो क़र्ज़ में गले तक  डुबे रहे। 

अपनी पुस्तक द मिलिनेयर नेक्स्ट डोर में थॉमस स्टेनले और विलियम डेंको ने 500 करोड़पतियों के इंटरव्यू लिए और 25 साल से अधिक समय तक 11000 लोगों का सर्वेक्षण किया। 

उन्होंने उनसे पूछा की आखिर आर्थिक स्वतंत्रता कैसे प्राप्त कर ली ,जबकि उनके जैसी ही प्रस्थतियों में रहने वाले अधिकांश लोग अब भी संघर्ष कर रहे रहे हैं। 

 करोड़पतियों की इस नई पीढ़ी के 85 प्रतिसत लोगों का जवाब था ” मेरे पास दूसरों से ज्यादा बेहतर शिक्षा या ज्यादा बुद्धि तो नहीं थी ,लेकिन मुझमें बाकि लोगों से ज्यादा कड़ी मेहनत करने की इच्छा थी। 

नोट – कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है और इसके लिए आत्म-अनुसासन अनिवार्य है। 

सफलता का एक और सिद्धांत यह है -जिस चीज को आपने पहले कभी  प्राप्त नहीं किया उसे प्राप्त करने के लिए आपको ऐसे गुण और योग्यतयें सीखनी पड़ेगी ,जो आपमें पहले कभी नहीं था। 

सफलता के निश्चित नियम होते हैं-आज आप इतने सफल क्यों नहीं हैं ,जितना की होना चाहते हैं ? और कौन सा अनुसासन है ,जिससे आपको अपने सभी लक्ष्य प्राप्त करने में सबसे ज्यादा सहयता मिलेगी ? 

दूसरे आपसे जितनी उम्मीद करते हैं ,उससे ऊँचे पैमाने पर अपना मूल्याँकन करें ,कभी बहाने न बनायें। कभी भी खुद पर दया न करें। अपने प्रति कठोर और बाकि सबके प्रति दयालु रहें। 

सफलता के निश्चित नियम होते हैं-सफलता संयोग से नहीं मिलती। दुर्भाग्य से असफलता भी संयोगवस नहीं मिलती। आप सफल तब होते हैं ,जब आप सफल लोगों जैसे काम तब तक बार-बार करते हैं ,जब तक की आपको इसकी आदत ना पड़ जाती है।

इसी तरह आप असफल तब होते हैं ,जब आप सफल लोगों जैसे काम नहीं करते हैं। दोनों ही प्रस्थति में प्रकृति न पक्षपात करती है और न परवाह करती है। आपके साथ जो होता है ,वह सिर्फ नियम का  है-कारण और परिणाम के नियम का। 

 

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बुनियादी डर के छह भूतों को हरा दें

बुनियादी डर –छठी इंद्री  कभी काम नहीं करेगी ,जब तक की इन तीन – अनिर्णय ,शंका और डर ,नकरात्मक चीजों में से एक भी आपके  रहेगी। 

इन सूक्ष्म शत्रुओं की आदतों से धोखा न खाएं कई बार वे अवचेतन मन छिपे रहते हैं जहाँ उनका पता लगाना मुश्किल होता है और उनका उन्मूलन करना और भी मुश्किल होता है। 

छह बुनियादी डर –

छह बुनियादी डर होते हैं ,जिनके तालमेल से हर इंसान किसी न किसी समय कष्ट उठाता है। ज्यादातर लोग सौभग्यशाली हैं ,अगर वे सभी छह डरो से कष्ट न उठाते हों। 

  • गरीबी का डर 
  • आलोचना का डर 
  • बीमारी का डर 
  • प्रेम  खोने का डर 
  • बुढ़ापे का डर 
  • मृत्यु का डर 

गरीबी का डर – गरीबी और अमीरी में कोई मिलाप नहीं हो सकता ! अगर आप दौलत चाहते हैं तो आपको गरीबी की ओर ले जाने वाली परिस्थति को स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए। गरीबी का डर  कुछ नहीं ये  मानसिक अवस्था है ! लेकिन यह किसी काम में सफलता के अवसरों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। 


इसके लक्षण – उदासीनता ,अनिर्णय शंका ,चिंता ,अति-सावधानी ,टालमटोल। 
आलोचना का डर – आलोचना होने पर ज्यादातर लोग बेहद असहज होते हैं और कुछ मामलों में वे बेहद निराश और और उदाश भी हो सकते हैं। आलोचना आपकी पहलशक्ति ( लीडर का प्रमुख हथियार ) छिन  लेता है , आपकी कल्पना शक्ति को आपसे दूर कर देगा। आलोचना मानव ह्रदय में डर या द्वेष का बीज  बो देगी ,लेकिन इससे प्रेम या स्नेह उत्पन्न नहीं होगा। 

बीमारी का डर – यह डर शारीरिक और सामजिक दोनों तरह की अनुवांशिकता में मिलता  है। एक प्रतिष्ठित चिकत्सक का अनुमान था की वह डॉ के पास इलाज के लिए जाने वाले 75 प्रतिसत लोग ह्य्पोकोंड्रिया ( काल्पनिक बीमारी ) से पीड़ित होते हैं। 
डॉ कई बार रोगियों की सेहत के  किसी नए माहौल में भेज देते हैं क्यूंकि मानसिक  नजरिये बदलना जरुरी होता है। 

चिंता का डर – चिंता डर पर आधारित मानसिक अवस्था। है यह धीरे-धीरे लेकिन लगातार काम करती है। यह हानिकारक और सूक्ष्म होता है। कदम दर कदम यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह इंसान की तर्कशक्ति को पंगु नहीं कर देती है। यह ऐसी मानसिक अवस्था है जिसे नियंत्रित किया जा। 

 जिस व्यक्ति के मन में डर भरा होता है ,वह न सिर्फ बुद्धिमतापूर्ण कामों के अवसरों को नष्ट कर देता बल्कि ये विनाशकारी कम्पन्न दूसरों के मन तक पहुंचाकर उनके अवसरों को नष्ट कर देता है। 

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प्रॉस्पेक्ट्स -प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया

प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया 

प्रॉस्पेक्ट्स का विचारमग्नता तोड़ें  – आपकी निति यह होनी चाइये की आप सामने वाले की विचारमग्नता तोड़ दें। आप जिस से भी संपर्क करते हैं ,वह व्यस्त है और दूसरी  में सोंच रहा है।

वह पूरी तरह से अपने काम-काज ,खुद की समस्यायों ,परिवार ,स्वास्थ्य या बिलों में उलझा हुआ है। जब तक आप प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता को न तोड़ दें ,आपको कभी प्रस्तुति देने का मौका ही नहीं मिलता। 

कुछ सेल्स पीपल फ़ोन करके अपना परिचय देते हैं और तुरंत ही अपना प्रोडक्ट्स या सेवा के बारे में बात करने लगते हैं इससे बेहतर तरीका यह है की आप अपना परिचय दें और फिर पूछें मुझे आपका दो मिनट समय चाहिए। क्या यह बात करने के लिए सही समय है ? जब प्रॉस्पेक्ट कह दे की उसके पास दो मिनट का समय है ,तभी आप कोई सवाल पूछते हैं ,जिसका उद्देश्य आपके प्रोडक्ट्स के परिणाम या लाभ को बताना है। 

प्रोडक्ट्स नहीं ,अपॉइंटमेंट बेचें 

कभी भी फ़ोन अपने प्रोडक्ट्स या अपने भाव के बारे में बात न करें जब तक आप प्रॉस्पेक्ट्स नहीं मिले पूरी बिक्री नहीं हो सकती है। यह महत्वपूर्ण नियम है। 

अपने शब्द  सावधानी से चुनें 

जब कोई सलेसपर्सन किसी प्रॉस्पेक्ट्स से पहली बार मिलता है,तो वह तुरंत ही अपने प्रोडक्ट्स के बारे में बताने लगता है हालाँकि प्रॉस्पेक्ट सुन रहा हो या नहीं आपको ,इससे आपको कोई लेना देना नहीं ये गलत है। 

आपके शब्द तो उतने ही धमाकेदार होने चाहिए मानो किसी ने कांच पे पत्थर माफर दिया हो। ऐसा कथन तैयार करें जिससे उसका पूरा ध्यान आपके ऊपर केंद्रित हो जाये। इस वाक्य का लक्ष्य हमेशा वह परिणाम या लाभ बताना होना चाहिए ,जो ग्राहक को आपके प्रोडक्ट्स या सेवा से मिलेगा ,लेकिन प्रोडक्ट्स का उल्लेख नहीं होना चाहिए। 

लाभ दिखाएँ – आप जब तक लाभ नहीं दिखायेंगे आपकी बिक्री हो नहीं सकती है। 

अच्छी शुरुआत आधा अंत है 

अच्छी शुरुआत ,एक प्रबल प्रश्न जिसका लक्ष्य आपके प्रोडक्ट्स का परिणाम या लाभ बताना हो ,आपको बिक्री के क्लोज तक ले जा सकता है ,प्रबल शुरुआत प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता तोड़ती है। 

 आपका समय सिमित है

प्रॉस्पेक्ट्स का पूरा ध्यान खींचने के लिए मुलाकात के सुरु में आपके पास तीस सेकण्ड्स का समय होता है। पहले तीस सेकण्ड्स में ही प्रॉस्पेक्ट्स यह निर्णय ले लेता है की वह आपकी बात सुनने वाला है , अगर आप भटकते है और इधर-उधर की बातें करने लगते हैं तो आपका प्रॉस्पेक्ट्स बैचैन।  दोबारा फिर पटरी पर लाना बड़ा मुश्किल है। 

 आपके मुँह से निकले पहले पंद्रह से पच्चीस शब्द बाकि बातचीत का माहौल तैयार कर देते हैं। 

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चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –

चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –
क्या आप चिंताजनक स्थितियों का  फार्मूला जानना चाहते हैं ,तो तत्काल काम करें -एक ऐसा  उपाय जिसे आप अभी आजमा सकते हैं ,जिसे आप आगे ध्यान से  करें।  तीन कदम जो आपके चिंता को दूर करने के लिए अचूक बातें है जिसे मैंने एक –  चिंता छोड़ो सुख से जियो ,जिसके लेखक है – डेल कार्नेगी। 


पहला कदम – बिना डरे ,ईमानदारी से स्थति का विश्लेषण करें और अनुमान लहाएं की  असफलता के परिणामस्वरुप  बुरा से बुरा  क्या हो सकता है ?-कोई असफल  पर आपको जेल नहीं भेजने वाला है और न ही कोई आपको फांसी पर लटकाने वाला है। हो सकता है आपको कुछ पैसों का घाटा हो  रहा हो। 
अगर कोई बीमारी है तो ज्यादा से ज्यादा क्या  है आपकी मौत ! ( जो की आज नहीं तो कल हर किसी के साथ होना है ये प्रक्रिया। ) 

जो हमारे सामने है ,उसका पूरा आनंद ले लो ,

इससे पहले की हम मिटटी में मिल जाएँ ;

 माटी मिलेगी माटी में ,और माटी के निचे दब जाएगी ,

बिना शराब ,बिना गीत ,बिना साकी और बिना अंत के !


जो चिंता से नहीं लड़ना नहीं जानते ,वे जवानी में ही मर जाते हैं। – डॉ अलेक्सिस कैरेल। 


दूसरा कदम -बुरे से बुरे परिणामों का अनुमान लगाने के बाद आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को स्वीकार करने के लिए अपने आपको  तैयार करें-  आप जब भी बुरे से बुरे स्थति को स्वीकार कर लेंगे तो आपका मन शांत हो जायेगा।  आप एक बेहतर स्थति में पहुंच जायेंगे। 


तीसरा कदम – अपना पूरा समय और पूरी ऊर्जा शांति के साथ इस काम में लगा दें की बुरे से बुरे स्थति और बुरे परिणामों को कैसे सुधारा जा सकता है – इस कदम को उठा कर आप देखें की आप अपने घाटे को कैसे कम कर सकते हैं। 

NOTE- अपने आपको ऐसी छोटी-छोटी बातों में विचलित न होने की अनुमति न दें ,जिन्हें हमें नजर अंदाज कर देना चाहिए। याद हम नजर अंदाज कर देना चाहिए और भूल जाना चाहिए। याद रखें ,जिंदगी है की घटिया नहीं होना चाहिए। 

धनवान कैसे बने 

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