अतिप्रभावशाली लोगों की चौथी आदत -एक इंसान की सोंच कैसी होनी चाहिए ?

दोस्तों वैसे तो आज टॉपिक बहुत गहन है और इसके बारे में जितना बातें करें उतना कम है लेकिन मैंने आपको यहाँ पर बहुत शार्ट में समझाने की है -अतिप्रभावशाली लोगों की चौथी आदत -एक इंसान की सोंच कैसी होनी चाहिए ? -जीत /जीत वाली ,सबकी जीत के बारे में सोंचें।

 

मैंने यह टॉपिक लिया है -अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदतें से आप इस किताब को जरूर पढ़ें। आइये सुरु करते हैं –

अतिप्रभावशाली लोगों की चौथी आदत -एक इंसान की सोंच कैसी होनी चाहिए ?
अतिप्रभावशाली लोगों की चौथी आदत

जीत /जीत  मस्तिष्क और ह्रदय की ऐसी मनोदशा है ,जो समस्त मानवीय व्यवहार में सभी की लाभ और पारस्परिक जीत ( दोनों की जीत ) के बारे में निरंतर सोंचते हैं।

 

 

 

 

 

अलग अलग की लोगों चार प्रकार के सोंच होती है –

  • जीत /जीत
  • जीत /हार
  • हार/जीत
  • हार /हार

 

जीत /जीत –

इस सोंच वाला व्यक्ति सभी का भला चाहता है , जीत /जीत  जीवन को प्रतयोगी क्षेत्र  में ना देखकर सहयोगी क्षेत्र के रूप में देखती है।यह सोंचने का सबसे उच्च तरीका है

जीत /हार –

यह एक तानाशाही की लीडरशिप शैली है, ये हमेसा अपनी जीत के बारे में अग्रसर होते हैं।,यहाँ पर मनुष्य की दिमाग की प्रोग्रामिंग बचपन से ही जीत /हार की हो जाती है ,उनकी सोंच होती –

अगर मैं अपने भाई से अच्छा बन जाऊंगा तो माता-पिता मुझसे ज्यादा प्यार करेंगे।

मेरे माता-पिता मुझसे उतना प्यार नहीं  जितना की मेरे भाई-और बहन से  करते हैं।

ऑफिस मेरा नाम सबसे ऊपर होना चाहिए ,

इनमें मैं -मैं भरा होता है। इस मानसिकता वाले सहयोग के विरोधी होते हैं।

 

हार /जीत

कुछ लोगों की प्रोग्रामिंग हार/जीत  की होती है। ये बेचारे बनने में अपनी जीत देखते हैं

मैं हार जाता हूँ ,आप जीत जाएँ।

आगे निकल जाइये ,जो सलूक करना है मेरे साथ कीजिये

मुझ पर पैर रखकर चढ़ जाइये। सब मेरे साथ ऐसा ही करते हैं।

मैं हारने वाला हूँ मैं हमेसा हारता हूँ

मैं तो शांति चाहता हूँ ,

हार /जीत तो जीत /हार से भी बुरी है।

हार / हार

जब जीत हार की मानसिकता वाले दो लोग आमने-सामने होते हैं -यानी दो संकल्पवान ,जिद्दी ,और अहंकारी व्यक्ति आपस में  व्यवहार करते हैं तो परिणाम हार/हार ही होगा।
हार/हार उस व्यक्ति की मनोदशा भी बन जाती है जो हमेसा दूसरों पर आधारित रहते हैं।

याद रखिये की चरित्र जीत /जीत की नींव है

 

जीत /जीत वाले व्यक्ति जब किसी समस्या का समाधान ढूंढते हैं तो उनकी मनोदशा होती है-

  1. समस्या को दूसरे दृध्टिकोण से देखें। दूसरे पक्ष की आवश्यताओं और चिंताओं को समझने व रखने की करते हैं।
  2. शामिल मुख्य मुद्दों  चिंताओं ( स्थितियों ) की बात करते हैं।
  3. तय करते हैं की पूरी तरह स्वीकार करने योग्य समाधान में कौन से परिणाम होंगे।
  4. उन परिणामों को हासिल करने के लिए संभावित नए विकल्प को पहचानने की कोसिस करते हैं।

अतिप्रभावशाली लोगों की चौथी आदत -जीत /जीत व्यक्तित्व की कोई तकनीक नहीं है।  यह मानवीय व्यवहार का सम्पूर्ण पैराडाइम है। जीत /जीत  कोई तकनीक नहीं है; यह तो मानवीय व्यवहार का समूचा दर्शन है।

 

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