अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदतें – 7 Habits of Successful People in Hindi

यह अद्भुत किताब है जो आपकी जिंदगी बदल सकती है ,इस किताब का नाम है अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदतें । यह किताब 15 मिलियन से ज्यादा बिक चुकी है जरूर पड़ें इस किताब को।इसके लेखक हैं -स्टीफन आर. कवी 

 

7 habits for success
अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदत

अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदतें –

पहली आदत – प्रोएक्टिव बनें।

अंत को ध्यान में रखकर शुरू करें

तीसरी आदत -पहली चीजें पहले रखें

चौथी आदत-जीत /जीत वाली ,सबकी जीत के बारे में सोंचें।

पांचवीं आदत -पहले समझने की कोशिश करें,फिर समझे जाने की

छठी आदत सिनर्जी का प्रयोग करें

 

पहली आदत :-          प्रोएक्टिव बने –

मानव स्वभाव के मूलभूत सिद्धांत की अपनी खोज के दौरान फ्रैंकल ने खुद का सटीक नक्शा बनाया।

इस नक़्शे के सहारे उन्होंने प्रोऐक्टिविटी की उस आदत को विकसित करना सुरु किया ,जो किसी भी तरह के परिवेश में अति प्रभावकारी लोगों की सबसे पहले मूलभूत आदत है।

 

प्रोएक्टिव का अर्थ है की इंसान के रूप में हम अपने स्वयं के लिए जिम्मेवार हैं। हमारा व्यवहार हमारी परिस्थतियों का नहीं ,बल्कि हमारी निर्णयों का परिणाम है हम अपने भावनाओं को जीवनमूल्यों के अधीन रख सकते हैं।

अपना मनचाहा परिणाम हासिल करने के लिए हमारे  पास पहल करने शक्ति जिम्मेदारी भी।

रेस्पोंसबिलिटी(जिम्मेदारी )  शब्द को देखें -रेस्पोंस-एबिलिटी यानि अपनी प्रतिक्रिया चुनने की योग्यता। अति प्रोएक्टिव व्यक्ति इस जिम्मेदारी को पहचानते हैं।

वे अपने व्यवहार के लिए परिस्थितियों ,स्तिथियों या कंडीशनिंग को दोष नहीं देते हैं।

करें या होने दें

पहल करने वाले और न पहल करने वाले लोगों के बिच दिन और रात जितना अंतर होता है और अंतर की बात करें प्रभावकारिता में सिर्फ 25 से 50 प्रतिसत  अंतर की बात नहीं है

बल्कि 5000 प्रतिसत से अधिक अन्तर की बात है,खासकर तब जब वे बुद्धिमान ,जागरूक और दूसरों के प्रति संवेदनशील हों।

अगर आप किसी दूसरे द्वारा खुद पर काम किये जाने का इंतजार करेंगे ,तो दूसरे आप परअपने  मनचाहे तरीके से काम करेंगे। विकास तथा अवसर के परिणाम आपको दोनों ही राहों में मिलेंगे।

अपनी भाषा चुनना

 रिएक्टिव भाषा

 प्रोएक्टिव भाषा

 मैं इन परिस्थियों में कुछ नहीं  कर सकता

 आइये,हम अपने विकल्पों को देखें।
 मैं इसी तरह का हूँ मैं किसी अलग निति का चुनाव कर सकता हूँ।
 मैं नहीं कर सकता मैं चुनता  हूँ
 काश मैं कर पाता ! मैं करूँगा !
 मुझे यह करना पड़ेगा मैं उपयुक्त प्रतक्रिया चुनूंगा।
 वे इसकी अनुमति नहीं देंगे मैं एक प्रभावकारी प्रस्तुति तैयार कर सकता हूँ।
 वह मुझे गुस्सा दिला देता है मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकता हूँ।
 मुझे मजबूरन करना पड़ता हैमैं इसे वरीयता देता हूँ

 

अमल में लाने के लिए सुझाव –

 

एक दिन के लिए अपने आसपास के लोगों की भाषा पर ध्यान दें ,कितनी बार इस तरह का रेअक्टिव भाषा का प्रयोग करते हैं जैसे -अगर,मैं नहीं कर सकता ,या मुझे करना पड़ेगा।

किसी ऐसे घटना का अनुमान लगाएं ,जिससे आपका निकट भविष्य में सामना हो सकता है और जिसमें अतीत के अनुभव के आधार पर आप शायद आप रिएक्टिव  तरीके से  व्यवहार करेंगे।

 

खुद से वादा करें आप विकल्प चुनने की अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करेंगे।

 

अंत में मैं आपको बोलूंगा की आप इस किताब को जरूर पड़ें। अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदत इसके लेखक हैं -स्टीफन आर. कवी।

 

 

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