अपना रोल मॉडल सावधानी से चुनें

सफलता के लिए ले जाने वाला सातवां महामंत्र है -अपना रोल मॉडल सावधानी से चुनें। अपना रोल मॉडल चुनना यानि की अपना आदर्श चुनना। यह आपकी सफलता के लिए बेहद जरुरी है।

ये माना हम आपसे बेहतर नहीं हैं। 

हाँ मगर हम लघुतर नहीं हैं। 

हम हिले तो हिल उठेंगे गगन चुम्भी कलश। 

नींव के पत्थर हैं हम कोई राह के पत्थर नहीं हैं। 

 

 

 

यदि आपने गलत रोल मॉडल चुन लिया तो सबकुछ गलत हो जायेगा। इसलिए पूरी सावधानी से ,जिम्मेदारी से और गंभीरता से अपना रोल मॉडल चुने।

 

आप जिस सेक्टर में भी सफल होना चाहते हैं ,उस सेक्टर के किसी सफल व्यक्ति को चुने। उनके बारे में पड़ें। उनको बारे में समझने की कोसिस करें उनका पसंद नापसंद। अगर संभव हो सके तो उनसे बात करें। उनसे पूछे ,उनसे सफलता के रहस्य।

 

 

जब भी आप अपना रोल मॉडल चुने तो याद रखें की कार्यशैली ,सक्षमता ,ईमानदारी ,कर्त्तव्यपरायणता ,मिलन सरिता और अथक मेहनत से जिसने अपना जीवन खास बनाया है वही व्यक्ति आपका रोल मॉडल हो सकता है। जब आप रोल मॉडल तय कर चुके हैं तब आपका अवचेतन मन उस तस्वीर को सपने में अंकित कर लेता है और वह ( अवचेतन मन ) आपको रोल मॉडल सा बनाना सुरु कर देता है।

 

जब भी आप अपना रोल मॉडल चुने तो उनकी बातों को माने ,दिल से। क्यूंकि आपको याद होगा की महभारत में कौरव कहीं ज्यादा ताकतवर थे पांडवों से लेकिन जीता कौन पांडव उसका कारण कहीं न कहीं मेंटर ( रोल मॉडल ) हैं।

 

 

पांडव तो वही करते जो श्री कृष्ण कहते जबकि कौरवों में ऐसा नहीं था वहां सभी अपनी मनमानी चलाते। कोई किसी का नहीं नहीं सुनता ,जिसकी वजह से कौरवों का सर्वनाश हुआ। जबकि कौरवों के पास एक से बढ़कर के योद्धा थे पर कोई एक दिशा देने वाला नहीं था ,अगर थे भी तो उनकी बात को कोई सुनता नहीं था।

 

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