असली या नक़ली- असली और नकली की पहचान Hindi Kahani

असली या नक़ली-आपका बहुत बहुत स्वागत है KADVE PRAVACHAN.COM पर ,आज के पोस्ट में हम पढ़ेंगे एक शानदार कहानी -असली या नक़ली 

असली या नक़ली- असली और नकली की पहचान Hindi Kahani
असली या नक़ली

असली या नक़ली- 

एक राजा के पास एक व्यक्ति आया

और बोला – राजा साहब मुझे काम चाइए ।

तब राजा ने पूछा तुम क्या कर सकते हो ?

क्या तुम्हारे अंदर कुछ गुण हैं ?

उस व्यक्ति ने जवाब दिया – राजा साहब मैं  यह बता सकता हूँ

की कोई भी चीज के बारे में की यह असली या नक़ली

 

 

 

राजा ने उस व्यक्ति को नौकरी पे रख लिया  –  

राजा उसकी बात से प्रभावित होकर उसे नौकरी पे रख लिया और उसे नौकरी दी अस्तबल में घोड़ों की देखरेख को ।

वह व्यक्ति बहुत दिल से उन घोड़ों की सेवा करने लगा ।

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कुछ महीने बीतने के बाद एक दिन अचानक से राजा आया और पूछा उस व्यक्ति और भाई – क्या ख़याल इन घोड़ों के बारे में ?

और यह घोड़ा कैसा है जिसे मैंने सबसे महँगे दाम पे ख़रीदा है , जो सबसे ख़ास घोड़ा है मेरा ।

असली या नक़ली

यह असली नस्ल का है या नक़ली ?

उस व्यक्ति ने जवाब दिया राजा साहब – यह घोड़ा जिसे आपने इतने महँगे दाम पे आपने ख़रीदा तो है पर यह असली नस्ल का घोड़ा नहीं है ।

राजा चौंक गया और पूछा कैसे ?

यह तो आप उन्हीं से पूछो जिससे आपने यह घोड़ा ख़रीदा है ।

राजा ने उस घोड़े बेचने वाले को बुलवाया और पूछा – सच बता क्या यह घोड़ा नक़ली है ?

और बिलकुल सच बताना ।

वह व्यक्ति घबरा गया राजा की बातों से ।और बोला – राजा साहब जान सलामती की दुआ करता हूँ आपसे और यह सच है ये असली नस्ली घोड़ा नहीं है ।बचपन में ही इसकी माँ मर गई थी, तो इसे हमने पाला था गाय और भैंसों के बीच में ।

घोड़े की नश्ल कैसे पहचाना 

राजा को बहुत उस आश्चर्य हुआ और उस व्यक्ति को दरबार में बुलाया और पूछा – तुम्हें कैसे बात पता चली की यह घोड़ा असली नस्ल का नहीं है ।

तब उस व्यक्ति ने कहा – राजा साहब कोई भी घोड़ा घास खाते समय अपनी गर्दन को ऊपर करके खाता है, जबकि यह घोड़ा तो अपनी गर्दन नीचे करके खाता था ।

अब तो राजा उसके  काम से बहुत ख़ुश हुआ और राजा ने बहुत सारे मुर्ग़ी , अंडे और बहुत भेड़- बकरियाँ उसे दान में दे दिया ।

राजा ख़ुश हुआ

राजा उस व्यक्ति के जवाब से बहुत ख़ुश हुआ और उसे उन्नति देकर रानी के महल में नौकरी दे दी ।

रानी असली है या नकली 

कुछ दिनों के बाद राजा जब रानी के महल में आया तो राजा ने उस व्यक्ति से पूछा क्यूँ रानी के बारे में क्या ख़याल है।

ये असली हैं या नक़ली ?

व्यक्ति ने कहा – हुजूर जान की माफ़ी चाहिए ,

राजा ने कहा – हाँ दी । और बोलो ।

राजा साहब रानी भी नक़ली है ।

राजा के तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई । उसने पूछा कैसे ? राजा साहब ये तो आप इनके माँ-पिता से ही पूछो ।

राजा ने रानी के माँ को बुलवाया

राजा ने रानी के माँ को बुलवाया तो रानी के माँ ने कहा – जी हुजूर रानी भी नक़ली है ।

बचपन में ही जो लड़की हमारी हुई थी उसे बहुत तेज़ बुखार आया और बहुत उसे।

बचाने की कोसिस किया हमलोगों ने लेकिन वह नहीं बची , जिस राजकुमारी के साथ बचपन में ही आपका विवाह हुआ था ।

हमलोग बहुत डर गए की अब क्या करें सो हमने एक नौकरानी की लड़की को गोद ले लिया और यह वही नौकरानी की लड़की है ।

अब तो राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ पर उसके काम से बहुत ख़ुश हुआ और राजा ने बहुत सारे मुर्ग़ी , अंडे और बहुत भेड़- बकरियाँ उसे दान में दे दिया ।

राजा ने उसे अपने पास रख लिया उसकी उन्नति हो गई ।

कुछ दिनो के बाद राजा ने फिर पूछा कि तुम काफ़ी दिनो से मेरे साथ हो तुम्हारा क्या ख़याल है ?

मैं असली हूँ या नक़ली ।

तब फिर उस व्यक्ति ने बोला – हुज़ूर जान की सलामती का वरदान चाहिए तब ही बोल पाउँगा ,

हाँ दिया जान की सलामती  – राजा ने कहा ।

हुज़ूर माफ़ करें आप भी नक़ली है ?

राजा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई पूछा कैसे ?

आप तो अपने माँ – पिता से पूछिए ।

राजा ने अपने माँ- पिता से पूछा

तो उन्होंने बताया कि पड़ोसी राजा के डर से हमने आपका परवरिश एक भेड़ पालने वाला गदेड़िया के यहाँ पर करवाया । और आपका बचपन वही उसी भेड़ पालने वाले के पास बिता ।

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ – तुम्हें कैसे पता चला ?

महाराज आप यदि असली महाराज होते तो आप किसी काम से ख़ुश होते तो हीरे देते , जवाहरत देते , ज़मीन देते ।

लेकिन आप तो जब भी ख़ुश होते हमारे काम से तो आप भेड़- बकरियाँ , अंडे मुर्ग़ी दान में देते थे ।

 

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