आख़िरी शब्द

एक परिवार के बुज़ुर्ग व्यक्ति अपनी अंतिम साँस को गिन रहे थे लग रहा था कि अब गए की तब गए लेकिन मरते-मरते वो भून-भुनाना सुरु किया लेमन, लेमन लेमन । कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था कि दादा जी अचानक से लेमन-लेमन क्यूँ कर रहे हैं और वही उनके आख़िरी शब्द थे ।

 

उनके आख़िर शब्द लेमन बोलने के आगे और कुछ भी बोल नहीं पाए और वो इस दुनिया से चले गए । वो परिवार काफ़ी सम्पन्न परिवार था उन्होंने उस बुज़ुर्ग व्यक्ति की धूम-धाम विदाई की और चूँकि उनके दादा जी के आख़िरी शब्द लेमन था उन्होंने बहुत सारे लेमन दान में दिया । उनके शैया पे भी लेमन चढ़ाया ।

उनके अंतिम विदाई के बाद भी उस परिवार के मन में शंका थी आख़िर दादा जी आख़िरी शब्द लेमन क्यूँ था ? लेकिन उनके जाने के बाद उन लोगों ने ( परिवार वाले ) उस घर को बेचने का फ़ैसला किया और एक बिल्डर को बुलाकर घर को बेच दिया ।




बिल्डर उस घर को तोड़कर वहाँ पे एक बहुमंज़िला इमारत खड़ी करना चाहता था । सो उस बिल्डर ने काम सुरु किया और उस मकान को तोड़कर नींव के लिए वहाँ पे खुदाई किया । जान बिल्डर ने खुदाई का काम सुरु किया तो वहाँ से बहुत बड़ा एक ख़ज़ाना मिला । जिसमें हीरे- जवाहरत और बहुत सारे सोने के सिक्के के पेटियाँ ।

उस घर के पडोशी को बात जब पता चली तो उन्होंने उस घर के मालिक को संदेशा भिजवाया । जब वो घरवाले ने उस ख़ज़ाने पर अपना हक़ जताया तो उस बिल्डर ने उस ख़ज़ाने को देने से इंकार कर दिया । बिल्डर ने साफ़ कहा – मैंने प्रॉपर्टी ख़रीदी है , अब इसमें से जो निकले उस मालिक मैं हुआ ।

उस परिवार ने उस बिल्डर पे केस किया लेकिन फ़ैसला भी उस बिल्डर के हक़ में आया । केस के दौरान ही बिल्डर ने उस परिवार को बताया की , मैंने एक लेमन tree को जब उखाड़ तो उसी के नीचे ख़ज़ाना मिला था ।

उस परिवार के पैरों के नीचे से जैसे ज़मीन निकल गई क्यूँकि वो परिवार उसी लेमन tree के नीचे क्रिकेट खेलता था , उस लेमन tree से निम्बू तोड़ता था । लेकिन अब क्या वो जा चुका था ।




दोस्तों इसी तरह से ख़ज़ाना हमारे अंदर हमारे हृदय में छुपा है । बहुत क़ीमती आपके अंदर है ख़ज़ाना जिसे किसी ने खोजा नहि है । आप खोज सुरु करो । आज से क्यूँकि आपके जैसा पूरी दुनिया में कोई नन्हीं है ।

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