आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है- By Abraham Lincoln

आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !-एक पिता का पत्र दुनिया के नाम –

ए दुनिया ,आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !

ए दुनिया मेरे बच्चे का हाथ थम लो ,आज उसका पहला दिन है। कुछ देर के लिए हर चीज नई और अजनबी होगी ,इसलिए मैं उम्मीद करता हूँ की आप नरमी से पेश आएं।

आप तो जानते हैं की इसका संसार अब तक घर तक ही सिमित था। इसने अपने चारदीवारी के बाहर कभी झाँका नहीं था। यह अब घर का राजा रहा है।

 

अब तक इसकी चोट पर मरहम लगाने और इसकी ठेस लगी भावनाओं को प्यार का लेप लगाने के लिए मैं हमेसा मौजूद था।

लेकिन अब बात  दूसरी होगी। आज सुबह यह सीढ़ियों से उतरकर अपना नन्हा हाथ हिलायेगा और अपना साहसिक यात्रा सुरु करेगा।


जिसमें शायद शायद संघर्ष भी होगा ,दुःख भी होगा और निराशा भी होगी।

 

इस संसार में जीने के लिए विस्वास,प्यार,और साहस की जरुरत होगी। इसलिए ए दुनिया मैं उम्मीद करता हूँ की आप इसके नन्हें हाथों को पकड़कर वे सब सिखाएंगे जो इसे जानना चाहिए। सिखाएं जरूर,मगर हो सके तो प्यार से।

मैं जानता हूँ की इसे एक दिन यह समझना पड़ेगा की सभी लोग अच्छे नहीं होते-सभी स्त्री-पुरुष सच्चे नहीं होते। इसे यह भी सिखाएं की संसार में हर धूर्त के लिए एक अच्छा इंसान भी है।

 

जहाँ एक दुशमन है वहां एक दोस्त भी है। शुरू में ही सिखने में मदद करें की बुरे और धौंस ज़माने वाले लोगों को ठिकाने लगाना सबसे आसान है। 

इसे किताबों की खूबियों के बारे में बताएं और पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

 

कुदरत के छिपे सौंदर्य जैसे-आसमान में उड़ते पंछी ,गुनगुन करते भौरें और हरीभरी वादियों में खिले फूलों को करब से देखने और जानने के लिए पूरा समय दें।

 

इसे यह भी सिखाएं की बेईमानी की जित से हार जाना कहीं अच्छा है। इसे तब भी अपने विचारों पर विस्वास रखना सिखाएं जब सब कह रहे हों की वह गलत है। 

 

मेरे बच्चे को वह शक्ति दें जिससे वह भीड़  का हिस्सा न बनकर भेड़चाल न चले ,जबकि सारा संसार चल रहा हो।

 

इसे यह तो सिखाएँ की दूसरे की बात  सुनें,लेकिन हर बात सच्चाई के तराजू  पर परखें और उनमें से सिर्फ सच्चाई को ही अपनाये। 

 

अपनी अंतरात्मा का आवाज को सोने -चाँदी के सिक्कों से न तौले। इसे यह सिखाएं की वह लोगों के कहने में न आये और  अगर अपनी सोंच में खुद को सही पाता है

 

तो सही इरादों पर डटा रहे और संघर्ष करे।  ईसे नरमी से सिखाएँ लेकिन ए दुनिया ,इसे बिगाड़ें मत और कमजोर न बनाएँ क्यूंकि लोहा आग में तपकर ही फौलाद बनता है। 


वैसे तो ऐसा कर पाना एक बहुत बड़ी बात है,मगर ए दुनिया ,फिर भी आप ऐसा करने की कोसिस जरूर करें। आख़िरकार वह एक बहुत प्यारा बेटा है। 

                                                                                               हस्ताक्षर 

                                                                                        – अब्राहम लिंकन। 

 

 

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