आत्म- अनुसासन और लगन – लगन सक्रीय आत्म-अनुसासन है। जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है आप कितनी बार निचे गिरते हैं। सारा फर्क तो इस बात से पड़ता है की आप कितनी बार उठकर दोबारा खड़े होते हैं। अगर आप किसी काम में आत्म- अनुसासन और लगन –  के साथ जुटे रहेंगे तो अंत में आप सफल हो जायेंगे। 


 लगन एक सक्रीय अनुशासन है।

विपत्तियों और अस्थायी असफलताओं के वावजूद काम करने की क्षमता जीवन में सफलता पाने के लिए अनिवार्य है। 

नेपोलियन हिल ने कहा था -लगन चरित्रवान व्यक्ति के लिए वैसी ही है ,जैसे कार्बन स्टील के लिए। लगन सफलता का प्राथमिक कारण है। 

जल्दी से महान बनने के प्रयास से सचेत रहें। 10000 में से एक प्रयास ही कामयाब हो सकता है। यह बहुत भयावह अनुपात है।

                           – बेंजमिन डिजराइल। 

पहचाने की आपके जीवन का वह क्षेत्र कौन सा है ,जिसमें आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने केलिए ज्यादा लगन से काम करना चाहिए। फिर उस क्षेत्र में काम सुरु करें। 

अपने जीवन का लक्ष्य पहचाने ,जिसे प्राप्त करने में आप सिर्फ इसलिए नाकाम रहे ,क्यूंकि आप अंत तक लगन नहीं रख पाए। उस क्षेत्र में सफल होने के लिए आप आज कौन से कदम उठा सकते हैं ?

पहचाने की आप किस बड़े लक्ष्य को सिर्फ इसलिए प्राप्त कर पाए ,क्यूंकि आप लगन से जुटे रहे और अपने मुश्किलों के वावजूद हार मानने से इंकार कर दिया। 

जीवन में अपना प्रमुख लक्ष्य तय करें -वह लक्ष्य जिसे प्राप्त करने से आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा। 

आज ही निर्णय लें की चाहे जो हो जाए ,आप सफलता मिलने तक जुटे रहेंगे ,क्यूंकि मुझे सफल होने से रोक नहीं सकता। 

 

महत्वपूर्ण लक्ष्य तय करने और उसे प्राप्त करने का संकल्प करें। यह संकल्प करें की आप राह में आने वाली अवश्यम्भावी मुश्किलों ,समस्याओं और विपत्तियों के वावजूद तब तक जुटे रहेंगे ,जब तक की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल न हो जाएँ।

यह प्रक्रिया बार-बार तब तक दोहराते रहें ,जब तक की लगन की आदत न पड़ जाए। 

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