उम्मीद के क़ैदी

उम्मीद के क़ैदी

 

निश्चित रूप से जीवन का सबसे दुखद अनुभव किसी को यह कहते सुनना है , काश मैं उसकी तरह दौड़ सकता . उसकी तरह बात कर सकता , गा सकता , नाच सकता सोंच सकता आदि , और आवाज़ धीरे-धीरे सन्नाटे में गुम हो जाती है । संदेश यह है , अगर मेरे पास किसी अन्य की योग्यता होती तो मैंने क्या-क्या नहीं कर दिया होता ?



 

इस सवाल का जवाब दोस्त , यही है कि किसी दूसरे की योग्यता से भी आपने कुछ नहीं किया होता , क्यूँकि आपके पास पहले से दिए योग्यता का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं ।

 

आप अपने आप को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं और यह ईमानदार नहीं है । अगर आप सावधानी नहीं बरतेंगे तो आप उम्मीद के क़ैदी बन कर रह जाएँगे जो हर शहर में मिलते हैं ।

 

ये उम्मीद के क़ैदी वो हैं जो उम्मीद करते हैं की किसी दिन सड़क पर चलते हुए किसी बक्से या थैले को ठोकर लगेगी जिसमें व्यक्तिगत सौभाग्य रखा होगा ।
वे किसी बड़े अवसर की उम्मीद लगाए रहते हैं जो तुरंत ख्याति और सौभाग्य देगा । आप उन्हें किसी समुद्र किनारे पर भी यह उम्मीद के क़ैदी मिल जाएँगे इस इन्तज़ार में की उनका सौभाग्य का जहाज़ आने वाला है पर वो भी जानते हैं उनका जहाज़ अभी बंदरगाह से चला ही नहीं । और ऐसे लोग सपना देखते रहते हैं अथवा कामना करते रहते हैं ।



 

सच्ची बात यह है की सफलता के लिए ज़रूरी योग्यता आपके पास पहले से ही है । ज़िंदगी आपको बार-बार आश्वस्थ कराती है जो कुछ आपके पास है आप उसका उपयोग करेंगे तो आपको उपयोग करने के लिए और मिलेग जीवन आपसे यह भी कहता है की यदि आप इसका उपयोग नहीं करेंगे तो आप इसे गवाँ देंगे । जैसे आपको पता है कुछ हज़ार साल पहले इंसानों के पास भी पूँछ हुआ करती थी लेकिन हमने इसका इस्तेमाल नहीं किया तो वो धीरे-धीरे ग़ायब हो गई ।



आपको याद रखना होगा की आदमी की अभिकल्पना उपलब्धि के लिए की गई है , इसका निर्माण सफलता के लिए किया गया और इसे महानता के बीज सहायतार्थ प्रदान किए गए हैं ।

आप आपने हाथों में विफलता के और सफलता के  बीज थामें हुए हैं ।

 

 

 

धन्यवाद दोस्तों ,
आज का पोस्ट मैंने लिया है शिखर पर मिलेंगे किताब से । इसके लेखक हैं जिग-जिगलर । बहुत ही शानदार किताब । आप ज़रूर पड़ें आपके में क्रांति ला सकता है यह किताब ।

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