एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी

 

जन्म – जून 23 , 1940

मृत्यु-नवंबर 12 ,1994

निकनेम- स्किटर

एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी – विल्मा रुडोल्फ का जन्म टेनेसी के एक गरीब परिवार में हुआ था। चार साल की उम्र में डबल निमोनिया और  काला बुखार ने गंभीर रूप से बीमार कर दिया था।  इसकी वजह से पोलियो हो गया। वह पैरों को सहारा देने के लिए ब्रेस पहना करती थी। डॉक्टरों ने तो यहाँ तक कह डाला था की वह जिंदगी भर चल फिर नहीं सकेगी। लेकिन विल्मा की माँ उसकी हिम्मत बड़ाई और कहा की भगवान की दी हुई छमता ,मेहनत  और लगन से वो जो कर सकती है।




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 यह सुनकर विल्मा ने कहा वह दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती है।  नौ साल की उम्र में डॉक्टरों के मना करने के वावजूद विल्मा ने ब्रेस को उतर फेंका और उसने पहला कदम उठाया , जबकि डॉक्टरों ने कहा था की वह कभी नहीं चल पायेगी 13 साल की उम्र होने पर उसने अपनी पहली दौड़ प्रतियोगिता मरण हिस्सा लिया और सबसे पीछे रही। उसके बाद दूसरी ,तीसरी ,चौथी दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही और हमेसा आखरी स्थान पर आती रही और सबसे पीछे रही।  वह तब तक कोसिस करती रही जबतक की वह दिन नहीं आ गया।  जब वह फर्स्ट आई।

 

15  साल की उम्र में विल्मा टेन्नेस्सी स्टेट यूनिवर्सिटी गई। जहां वह एड टेम्पल नाम के कोच से मिली। विल्मा ने ख्वाहिस बताई की मैं दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती हूँ।

तब टेम्पल ने कहा तुम्हारी इक्षाशक्ति  की वजह से तुम्हे कोई नहीं रोक सकता और मैं तुम्हारे साथ हूँ मैं भी तुम्हारी मदद करूँगा

 

आखिर वह दिन आ ही गया जब विल्मा ने ओलिंपिक में हिस्सा लिया। ओलिंपिक में दुनिया के सर्वश्रेष्ट खिलाडियों से मुकबला होता है विल्मा का मुकबला जुटता हैन से था ,जिसे कोई भी हरा नहीं पाया था।  पहली दौड़ 100 मीटर की थी।  इसमें विल्मा ने जुत्ता को हरा कर पहला गोल्ड मेडल जीता। दूसरी दौड़ 200 मीटर की थी।  इसमें विल्मा ने जुत्ता को दूसरी बार हराया और दूसरा गोल्ड मेडल जीता। तीसरी दौड़ 400 मीटर रिले रेस की थी विल्मा का मुकबला फिर से जुत्ता से ही  था।

 

रिले में रेस के आखरी हिस्सा टीम का सबसे तेज एथिलीट ही दौड़ता है इसलिए विल्मा और जुत्ता , दोनों अपनी-अपनी टीमों के लिए दौड़ आखरी हिस्से में दौड़ना था विल्मा की टीम में तीन लोग रिले रेस के सुसुआती बेटन तीन हिस्से में दौड़े और आसानी  से बेटन बदली।

जब विल्मा के दौड़ने की बारी आई , तो  उसके हाथ से बेटन ही छूट गया। लेकिन विल्मा ने देख लिया की दूसरे छोर पे जुत्ता हैन तेजी से दौड़ चली है।  विल्मा ने गिरी हुई बेटन उठाई और मशीन की तरह ऐसी तेजी से दौड़ी की जुत्ता  तीसरी बार हराया और अपने नाम तीसरा गोल्ड मैडल जीता।

यह बात इतिहास के पन्ने पे दर्ज हो गई की एक लक्वाग्रस्त महिला 1960  के ओलिंपिक में दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गई।

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शिक्षा – विल्मा की कहनी से क्या सीखना चाहिए ? इससे हमें शिक्षा मिलती है की कामयाब लोग कठिनाइओं के वावजूद सफलता हासिल करते हैं , न की तब जब कठिनाइयां नहीं होती है।




एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी आज का ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा । धन्यवाद ।

 

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One thought on “एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी

  1. subodh kumar says:

    bahut sundar kahani thi.thanks for share this beautiful story

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