कड़वे वचन - मुनि श्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन

कड़वे वचन – मुनि श्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन

कड़वे वचन – मुनि श्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन आज पुरे दुनिया में फ़ेमस हैं ।उनके कड़वे प्रवचन मानव कल्याण के लिए बहुत उपयोगी है ।

कड़वे वचन-

कड़वे वचन - मुनि श्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन
कड़वे वचन – मुनि श्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन

व्यक्ति ने सोंचा : समुद्र में स्नान कर लूँ तो सभी तीर्थों के स्नान का फल मिल जाएगा ।

समुद्र के किनारे गया और बैठ गया । शाम होने को आयी लेकिन वह अब भी बैठा है ।

किसी ने पूछा – नहाते क्यूँ नहीं ?

बोला सोंचता हुँ की लहरें उठना बंद हो जाए तो फिर नहाऊँ ।

समुद्र में नहाना है तो लहरों का त्रास तो सहना पड़ेगा ।

धर्म ध्यान करने के लिए इस दिन जा इंतज़ार करो ,

जब सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा होगा , क्यूँकि ऐसा दिन कभी आने वाला नहीं है ।

 

कड़वे वचन-मेरी वाणी कठोर हो सकती है ।

लेकिन ज़िंदगी जा सार इसी कठोर वाणी में है । तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे ज़ख्मों पर मरहम -पट्टी कर दूँ  और छोड़ दूँ ।

पर ऐसा नहीं करूँगा क्यूँकि यह ज़रूरी है ।बीमारी का लक्षण मिटाने से बीमारी नहीं मीटती ।

तुम्हें बुख़ार चढ़ा हो और ठंढे पानी में बैठ जाओ तो शरीर तो ठंढा हो जाएगा ।

साथ ही तुम भी ठंढे हो जाओगे ।

लक्षणों का इलाज नहीं करना है , बल्कि बीमारी का इलाज करना है ।

10 साल के हो जाओ तो माँ की उँगली छोड़ दो ।

20 के हो जाओ तो खिलौनों से खेलना छोड़ दो । 30 के हो जाओ तो आँखो को इधर-उधर घुमाना छोड़ दो ।

40 के हो जाओ तो रात में खाना छोड़ दो ।50 के हो जाओ तो होटल जाना छोड़ दो ।

60 के हो जाओ तो व्यापार करना छोड़ दो ।70 के हो जाओ तो विस्तर पर सोना छोड़ दो ।

80 के हो जाओ तो लस्सी पीना छोड़ दो ।90 के हो जाओ तो जीने की आशा छोड़ दो ।

100 के हो जाओ तो दुनिया को छोड़ दो ।

 

कड़वे वचन –

पत्नी और पैसा भक्ति के साधन है , भोग के साधन नहीं है ।

गृहस्थ जीवन में अकेला पुरुष हो या अकेली स्त्री समुचित भक्ति नहीं कर सकता ।

पुरुष को स्त्री की और स्त्री को पुरुष की ज़रूरत है ।

पत्नी-पति का सम्बन्ध परमात्मा की भक्ति के लिए और सम्पत्ति सेवा के लिए है , ना की भोग के लिए ।

पुण्य के प्रभाव से अगर तुम्हें सम्पत्ति मिले तो अपनी सेवा के लिए  भले ही नौकर रख लेना ,

लेकिन प्रभु की भक्ति , गुरु और माँ-बाप की सेवा के लिए नौकर मत रखिए ।

कठिनाओं से घबराइए मत ।

रात से भयभीत हो गए तो सुबह कभी नहीं आएगी ।मजबूती से आगे बढ़िए । बस !

सुबह होने को ही है ।अपने मन को मज़बूत कीजिए । कमजोर मन से यहाँ कुछ नहीं होता ।

याद रखें – मन से हार गया समझ लो , उसकी नैया डूब गई और जो मन से मंज़बूत हो गया समझ लो वह सिकंदर बन गया ।

श्री कृष्ण का जन्म हुआ तो कोई हँसने वाला नहीं था ।

जीवन में कोई साथ देने वाला नहीं था और मरे तो कोई रोने वाला नहीं था ।

फिर भी वे बांसुरी बजाते थे । फिर तुम क्यूँ रोते हो ?

लड़का कहना ना माने तो परेशान मत होना बस उससे अपनापन छोड़ देना ।

सब चिंताएँ ख़त्म हो जाएगी ।शरीर से जूं भी पैदा होती है तो क्या तुम जूं को अपनी मानते हो ?

मांसाहार पाप है ।

मांसाहार ने कुछ मनुष्यों को कुछ अंशों में जानवर बना दिया है ।

उसमें पाशविक वृत्तियाँ पैदा कर दी हैं ।यही कारण है की मनुष्य पशु जैसा व्यवहार करने लगा है ।

जब आप किसी पशु का मांस खाते हैं तो सिर्फ़ पशु- मांस नहीं खाते बल्कि पशु के संस्कार को भी खाते हैं ।

मेरे भाई ! मांसाहार करके अपने पेट को चलता-फिरता क़ब्रिस्तान क्यों बनाते हो ?

धर्म क्रूरता नहीं , करुणा है ।

आज धर्म के नाम पर संसार में जो हत्याएँ और युद्ध हो रहे हैं , वह धर्म नहीं ,

धर्म की लाश है और जब तक इस लाश को घर से बाहर नहीं निकाला जाएगा ,

तब तक देश और दुनिया में सुख-शांति नहीं होगी ।

हिंदुस्तान में 20 लाख देवी-देवता हैं जिनकी सभी लोग पूजा करते हैं ।

देवी-देवता सिर्फ़ पूजा के लिए नहीं है , वरण उनसे प्रेरणा भी लेनी चाहिए ।

सुबह उठो तो प्रार्थना करना मत भूलो ।

सुबह की प्रार्थना में। बड़ी ताक़त होती है ।

सारे फूल सुबह खिलते हैं ।ज़्यादातर बच्चे सुबह जन्मते हैं ।मरीज़ की पीड़ा सुबह-सुबह कम हो जाती है ।

सुबह झगड़े कम होते हैं , सुबह उठते ही किसी के घर में आग लगाने का काम मत करो ।

सुबह आग नहीं सिर्फ़ बाग लगाओ, आग लगाने के लिए तो पूरा दिन पड़ा है , 

आख़िर इतनी भी जल्दी क्या है ? 

 

RELATED POST-

तरुण सागर जी के कड़वे वचन-KAVDE VACHAN IN HINDI

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *