गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों होती -जाने रोचक कहानी

गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों होती -जाने रोचक कहानी -मैं कोई आपसे वेद पुराण वाली बात नहीं करूँगा ,लेकिन मुझे लगता है की ये कहानी आपको बहुत कुछ सीखा सकती है।

 

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ? मैं इसका कोई धार्मिक जवाब देने वाला नहीं हूँ । मैंने एक प्रवचन में सुना था अच्छा लगा तो मैंने सोंचा क्यूँ ये आपलोगों से शेयर किया जाए ।

हम अपने ग्रंथों से बहुत कुछ सिख सकते हैं ।इसका एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ । इनके कहानी से एक सकरात्मक मेसज देना चाहता हूँ ।

जन्म –

आप देखिए लोगों को सबकुछ मिलता है , उनके माँ-पिताजी दिल से अपना सबकुछ देना चाहते हैं , कितना दे पाते हैं वो बड़ी बात नहीं पर कोसिस तो सबकुछ और १०० प्रतिशत देने की होती है । पर गणेश जी मामले में कुछ अलग था ।

आप  देखिए गणेश जी का जब जन्म हुआ , तब वो ( शंकर भगवान उनके पिता ) तपश्या में लीन थे । वो जब तपस्या से लौट कर आए तो एक – दूसरे को पहचान नहीं रहे होते हैं ।

पिता-पुत्र का झगड़ा –

आप देखिए फिर दोनो पहली बार मिले और आपस में लड़ाई होती है और ग़ुस्से में गणेश जी का गर्दन काट देते हैं । गर्दन काट कर जब उन्हें पता भी चलता है की उन्होंने ग़लत किया , ये तो अपना फ़र्ज़ निभा रहे थे और पार्वती माँ का आदेश का पालन कर रहे थे ।

 

 

हाथी का सर

शंकर भगवान जो की उनके पिता थे चाहते तो वो वापस उनका सर अपनी जगह पर लगा सकते थे । पर उन्होंने वैसा नहीं किया उन्होंने उनके सर पे हाथी का सर लगा दिए ।

 

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सवारी –

शंकर भगवान के दो संतान थे उन्होंने कार्तिकेय को सवारी के रूप में उनको मोर दिया और गणेश जी को सवारी के रूप में मिला चूहा ।

फिर भगवान ने आपस में प्रतियोगिता करवाया की जो सबसे पहले ब्रह्मांड का चक्कर लगा कर आएगा वो विजेता ।

 

इतना आज के कलयुग में दो संतानों के बीच भेदभाव किया जाता तो शायद रो-रोकर पूरी दुनिया को अपनी दर्दभरी कहानी सुनाता और अपने माँ-पिता से कभी बात नहीं करेगा ।

पर गणेश भगवान ने  अपने माँ- पिता जी का चक्कर लगा कर , अपने दोनो हाथों को जोड़कर उनके आगे खड़े हो गए और कहा – हमारे लिए तो पूरा ब्रह्मांड आप ही हैं ।

कितना सकरात्मक विचार ! क्या हम ऐसे हो सकते हैं । मुझे ऐसा लगता है इसलिए वो प्रथम ही पूजे जाने ही चाहिए और पूजे जा भी रहे हैं ।

 

दोस्तों आप देखिए हम चार भाई हो या दो भाई या दो बहन हों लेकिन हमारे माँ-पिता जी अपने बच्चों को पाल ही लेते हैं । लेकिन हम अपने माँ-पिता जी को पाल नहीं पाते । उनके लिए वृद्धाआश्रम बना दिया गया ।

आप भी अपने माँ-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड मानकर उनके साथ गणेश जी की तरह ही वर्ताव करना सिख नहीं सकते हैं ? अब तो समझ आ गया होगा की गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ,क्यूंकि उन्होंने हर हाल में माँ -पिता को ही सबसे ऊपर रखा।

 

 

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