गुरु ज़रूरी क्यूँ है


मुनिश्री तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन – किसी ने पूछा – गुरु ज़रूरी क्यूँ है ? मैंने प्रति प्रश्न किया – माँ क्यूँ ज़रूरी है ? वे बोले माँ ना हो तो इस संसार में नहीं आ सकते । मैंने कहा – गुरु ना हो तो मुक्त नहीं हो सकते । गुरु कि मतलब फ़ैमिली डॉक्टर । गुरु मन की चिकित्सा करता है । शिस्य के लिए गुरु का द्वार किसी भी मंदिर की चौखट से अधिक महत्वपूर्ण होता है ।

 

 

गांधीजी से किसी वक़ील ने कहा – बापू! आप रोज प्रार्थना में जितना समय लगाते हैं, अगर आप यही समय समाज-सेवा में लगाएँ तो आप बड़ी सेवा कर सकते हैं ।

बापू मुस्कुराए और बोले – वक़ील साहब ! आप रोज दो घंटे खाने में लगते हैं । आप यही समय आप अपनी प्रैक्टिस में लगाएँ तो आप बड़े वक़ील बन सकते हैं ।

वक़ील ने कहा – यह कैसे सम्भव है ? बिना भोजन के शरीर नहीं चलेगा । बापू बोले – बस ! यही तो मैं कहता हूँ , बिना भोजन का आपका शरीर नहीं चलता और बिना प्रार्थना के मेरी आत्मा नहीं चलती ।

 

आज हर आदमी संघर्ष कर रहा है । सुबह से देर रात तक हर आदमी को संघर्ष से जूझना पड़ता है । संघर्ष तो कल भी था और आज भी है लेकिन थोड़ा सा फ़र्क़ है ।

आज़ादी से पहले जो संघर्ष था , वह समाज और राष्ट्र के भलाई के लिए था । आज जो संघर्ष है वह मैं और मेरा परिवार …. बस इसके लिए है ।

हमें आदर्शों के लिए संघर्ष करना है । अकेला पैसा नहीं कमाना है प्रसन्नता और प्रतिष्ठा भी कमाना है । अकेला पैसा तो वैश्य भी कमा लेती है ।

 

 

महावीर पेड़ के नीचे ध्यानमग्न थे । वो पेड़ आम का था और उस पेड़ के ऊपर आम लटक रहे थे । वहीं कुछ बच्चे खेल रहे थे । वे पत्थर फेंककर आम तोड़ने की कोसिस करने लगे की तभी एक पत्थर महावीर को जा लगा

 और उनके सर से रक्त बहने लगा । बच्चे डर गए ।बोले प्रभु! हमें क्षमा करें , हमारे कारण आपको कष्ट हुआ ।

प्रभु बोले -नहीं, मुझे कोई कष्ट नहीं हुआ है । तो फिर आपके आँखों से आँसू क्यूँ ? महावीर ने बताया – पेड़ को तुमने पत्थर मारा तो इसने तुम्हें मीठे फल दिए, पर मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका । इसलिए मैं दुःखी हूँ ।

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