चाणक्य नीति -For success in Life

चाणक्य नीति -For success in Life-चाणक्य नीति में आज के समय में भी काम आने वाली २३०० साल पहले लिखी गई बातें हैं ।

 

चाणक्य को भारत के एक महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है । जन्म के समय में ही चाणक्य के मग में पूरे दाँत थे ।यह राजा या सम्राट बनने की निशानी थी ।

 

लेकिन चूँकि उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था इसलिए ये बात सच नहीं हो सकती थी । इसलिए उनके दो दाँत उखाड़ दीए गए । और यह भविष्यवाणी की गई वे किसी और को राजा बनाएँगे और उसके माध्यम से वे शासन करेंगे ।

 

वे बचपन से ही अपने साथियों से ज़्यादा बुद्धिमान थे और तार्किक भी । चाणक्य कटु सत्य कहने में भी नहीं चूकते थे । और इसी कटु सत्य के कारण पाटलिपुत्र के राजा उनको अपने दरबार से निकाल दिया था ।

 

तभी चाणक्य ने प्रतिज्ञा की थी वे नंद वंश को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे ।

 

अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए चाणक्य ने  बालक चंद्रगुप्त को चुना क्यूँकि उसमें जन्म से ही राजा बनने सभी गुण मौजूद थे ।

 

चाणक्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते थे , जो भौतिक आनंद से आत्मिक आनंद को अधिक महत्व देता हो , उनका कहना था कि आंतरिक शक्ति और चरित्रिक विकाश आवश्यक है ।

२३०० वर्ष पहले लिखे गए चाणक्य के ये शब्द आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है ।

चाणक्य नीति- मूर्ख शिष्यों को उपदेश देने , दुष्ट स्त्री का भरण-पोषण करने अथवा दुःखी व्यक्तियों की संगत से विद्वान मनुष्य भी कष्ट भोगते हैं ।

 

इसलिए बुद्धिहीन व्यक्तियों को सत कार्यों के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए । चरित्र हीन स्त्री से दूर रहे अन्यथा वह बदनामी का कारण बन जाएगी । इसी प्रकार दुःखी व्यक्ति से कभी सुख प्राप्त नहीं हो सकता है । अतः उसकी संगत से बचें ।

चाणक्य नीति- जिस स्थान पर मनुष्य का आदर-सम्मान ना हो , आजीविका के साधन न हो , अनुकूल मित्र एवं सम्बंधी न हो , विद्या अर्जन के उपर्युक्त साधन न हो – ऐसा स्थान सर्वथा अनुपयुक्त है । इसलिए विलम्ब किए उसे छोड़ देना चाहिए ।

चाणक्य को भारत के एक महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है । जन्म के समय में ही चाणक्य के मग में पूरे दाँत थे ।यह राजा या सम्राट बनने की निशानी थी । लेकिन चूँकि उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था इसलिए ये बात सच नहीं हो सकती थी ।

 

चाणक्य नीति -For success in Life

जिस व्यक्ति का पुत्र आज्ञाकारी , पत्नी पतिव्रता एवं अनुकूल आचरण करने वाली हो तथा जो परिश्रम द्वारा अर्जित धन से पूर्णत: संतुष्ट हो , वह जीवित अवस्था में स्वर्ग का सुख अनुभव कर लेता है । अर्थात वह सदैव परम संतुष्ट एवं सुखी रहता है ।

अतिथि के विषय में चाणक्य अपने विचार व्यक्त करते हुए कहते हैं की अतिथि का महत्व एक क्षणिक विराम में निहित है । निसंकोच या निर्लज होकर एक हाई स्थान पर निवास करते रहना अतिथि के लिए अशोभनिय है ।

इसलिए जिस प्रकार वेश्या निर्धन पुरुष को , प्रजा पराजित हुए राजा को तथा पक्षी सूखे हुए वृक्ष को छोड़ देते हैं , उसी प्रकार भोजन के उपरांत अतिथि को भी साधुवाद करके वहाँ अतिथि घर से चले जाना चाहिए ।

 

चाणक्य नीति -For success in Life

 

मूर्ख व्यक्ति दो पैरों वाले पशु के समान होता है । उसे न तो उचित -अनुचित का ज्ञान होता है ना हि कुछ समझाया जा सकता है । अतः ऐसे मनुष्य का अतिशीघ्र त्याग कर देना चाहिए ।

जिस प्रकार पैर में घूँसा काँटा दिखाई ना देने के पर भी पीड़ा पहुँचता है । उसी प्रकार मूर्ख व्यक्ति द्वारा कहे गए मूर्खतापूर्ण वचन निरंतर सज्जन मनुष्य को भेदते रहते हैं और कष्ट पहुँचते रहते हैं ।

 

चाणक्य नीति -For success in Life

चाणक्य ने किसी भी वस्तु को या करम को हानिकारक बताया है । उनके अनुसार , अति सुंदर होने के कारण ही रावण द्वारा सीता का हरण हुआ ।

अहंकार और गर्व की अति हाई महाविद्वान रावण की मृत्यु का कारण बनी । दैत्यराज बलि की अति दानशीलता ने ही उसे सबकुछ गवाँकर पाताल जाने के लिए विवश कर दिया । यदि स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो अति द्वारा मनुष्य का अंत निश्चित है । अतः अति से बचें ।

चाणक्य नीति 

चाणक्य के अनुसार जिस राज में मूर्ख को आदर समान न मिलता हो , जो प्रचुर धन-धन्य से परिपूर्ण हो , पति -पत्नी में परस्पर विवाद ना होता हो , वहाँ लक्ष्मी का वाश होता है । उस स्थान पर किसी भी वस्तु का अभाव नहीं होता है ।

 

स्त्रियों के बारे  चाणक्य कहते हैं की पुरुषों के उपेक्षा आहार दोगुना लज्जा चारगुना साहस छह गुणा और काम-भाव आठ गुणा अधिक होता है । 

 

 

यह मैंने आज का पोस्ट  चाणक्य नीति -For success in Life  चाणक्य नीति नामक किताब से लिया है ।

 

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