जीवन कैसे जीना चाहिए-सफलता और ख़ुशियों से भरा जीवन जीने के सिद्धांत

दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है आपका कड़वे प्रवचन.com में  आज के पोस्ट में हम बात करेंगे जीवन को कैसे जीना चाहिए । 

एक -एक पल का आनंद लें । हमारे पास शरीर , मन , हृदय आत्मा इसका अपना एक सिद्धांत है । 

अपने काम में या आप जो भी कर रहे हैं 100% दें । अगर नहीं करना तब भी 100% ही दें , जिससे आपका क़ीमती समय बर्बाद ना हो । 

 

वास्तव में अधिकांश लोगों को पता ही नहीं की जीवन कैसे जिया जाए ? 

89 महिला की लेडी की एक शानदार quotes – 

 

यदि मुझे अपना जीवन फिर से प्रारम्भ करना पड़े तो मैं और अधिक निस्चिंतता से रहूँगी , मैं जितना शांत इस ट्रिप पे रही हुँ , इससे कहीं अधिक शांत मैं तब रहूँगी ।

 

मैं बहुत सारे पहाड़ों पहाड़ों की सैर करूँगी , बहुत सारी नदियों में तैरूँगी और बहुत सारे सूर्यास्त होते हुए देखूँगी ।

मुझे पहले से कहीं ज़्यादा तकलीफ़ें होंगी , लेकिन वे बनावटी कम और वास्तविक अधिक होंगी । 

अरे मैंने अपने सर्वोत्तम छनों को पा लिया , और यदि मुझे फिर से इस जीवन की शुरुआत करनी पड़े तो मैं और अधिक छणों को जीऊँगी । वास्तव में मैं कुछ भी पाने की कोशिश नहीं करूँगी , सिवाय उन छणों के जो एक बाद एक चले गए ।

-नडाइन स्टेयर , आयु ८९ 

 

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शरीर प्रवृति –

जीवनशैली बनायें रखें ; स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का उपचार ऑपरेशन या दवाई से करें।क्या ये सही होगा ? 

या 

सिद्धांत – स्वास्थ्य के स्थापित ,शस्वत रूप से स्वीकृति सिद्धांतों के समंजस्य में जीवनशैली ढालकर बिमारियों और समस्याओं की रोकथाम करें।

 

मस्तिष्क –

संस्कृति- टेलीविज़न देखें ,मेरा मनोरंजन करें, असंस्कारी बातें करना , नकरात्मकता फैलाना । क्या ये सही है ? 

या 

सिद्धांत – व्यापक और गहन अध्यन करें ,लगातार शिक्षा हासिल करें ,अपना काबिलियत बढ़ाएं।

ह्रदय –

संस्कृति – अपने व्यक्तिगत ,स्वास्थ्यपूर्ण  हितों को आगे बढ़ाने के लिए दूसरों के साथ अपने संबंधों का प्रयोग करें।क्या ये सही है ? 

मन-

सिद्धांत : दूसरों का दिल से हित चाहते हैं या किसी की दिल से निस्स्वार्थ मदद करते हैं तो संतुष्टि का भाव आता है ।

सबसे अधिक संतुष्टि और सुख गहराई तथा सम्मान से सुनने और  करने से मिलता है।

 

आत्मा :-


संस्कृति :-

बढ़ती सांसारिकता और दोषदर्शिता में फंस जाना।

 

सिद्धांत : यह पहचाने की सार्थकता की हमारी मूलभूत आवश्यकता और जीवन में हमारे द्वारा चाही गई सकरात्मक चीजों का स्त्रोत सिद्धांत है -और  मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ की ईश्वर इन प्राकृतिक नियमों का स्त्रोत है। 

 

मैं आपको आमंत्रित करता हुँ शानदार जीवन जीने के लिए । 

 

आज का पोस्ट जीवन कैसे जीना चाहिए , मुझे पूरा उम्मीद है आपको पसंद आया होगा । इसे दोस्तों को शेयर करना ना भूलें । 

 

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