जीवन में शिखर पर कैसे पहुंचे -शिखर पर पहुँचने के उपाय

आपका बहुत बहुत स्वागत है KADVE PRAVACHAN.COM पर ,आज के पोस्ट में हम पढ़ेंगे -जीवन में शिखर पर कैसे पहुंचे .

आप स्पष्ट रूप से समझ लें की असफलता मात्र एक घटना है कोई व्यक्ति नही है ; की आपका पिछली रात को समाप्त हो चुका है और आज आपका बिलकुल नया दिन है ।

जीवन में शिखर पर पहुँचने के लिए इन 14 पॉइंट्स को फॉलो करें आप जीवन में शिखर पर तब पहुंचते हैं  , जब ….

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आप शिखर पर तब होते हैं , जब ….आपने अतीत के साथ मित्रता की है , आपका ध्यान वर्तमान पर केंद्रित है और अपने भविष्य के प्रति आशावादी हैं ।

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आप शिखर पर तब होते हैं , जब ….आप जानते हैं कि सफलता ( एक जीत ) आपको बनाती नहीं है और असफलता ( एक हार ) आपको तोड़ती है नहीं है ।

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आप शिखर पर तब होते हैं , जब ….आप विश्वास , आशा और प्रेम से परिपूर्ण है , और क्रोध , लालच अपराधबोध, ईर्ष्या या बदले की भावना से अलग रह कर जीते हैं ।

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आप शिखर पर तब होते हैं , जब ….आप पर्याप्त रूप से इतने परिपक्व हैं की अपनी संतुष्टि को थोड़ी देर के टाल सकते हैं और अपना ध्यान अधिकारों से दायित्वों की ओर स्थान्तरित कर सकते हैं ।

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आप यह बात जानते हैं की जो चिज नैतिक रूप से सही है , उसका समर्थन करने में असफल रहना, आपराधिक रूप से ग़लत चीज़ का शिकार होने की शुरुआत है ।

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आप जो कुछ भी हैं , उसी में निश्चिन्त हैं , इसलिए आप ईश्वर के साथ सुकून से हैं और आप का मनुष्य के साथ भाईचारा है ।

7

आपने अपने विरोधियों को भी अपना मित्र बना लिया है और आपने उन लोगों से स्नेह और सम्मान अर्जित किया है , जो आपको सबसे अच्छीतरह जानते हैं ।

8

आप इस बात को समझते हैं कि दूसरे लोग आपको आनंद दे सकते हैं , लेकिन असली ख़ुशी तब मिलती है , जब आप दूसरों को के काम आते हैं ।

9

आप अप्रिय लोगों को प्रेम करते हैं, नाउम्मीदों को उम्मीद देते हैं , अशहायों के मित्र हैं और निरुत्साहित व्यक्तियों को प्रोत्साहन देते हैं ।

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आप क्षमा के लिए अतीत की ओर देख सकते हैं , आशा के लिए भविष्य में करुणा के लिए नीचे और आभार के लिए ऊपर देख सकते हैं ।

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आप जानते हैं कि आप में से जो भी व्यक्ति सबसे महान बनेगा , वह सभी लोगों की सेवा करेगा ।जो लोगों की सच्चे दिल से सेवा कर रहा है वह शिखर पर है

13

आप ईश्वर की महिमा के लिए और मानव जाति के कल्याण के लिए ईश्वर की दी हुई शारीरिक, मानशिक व आध्यात्मिक क्षमताओं को समझते हैं, स्वीकार करते हैं, विकसित करते हैं और उनका उपयोग करते हैं …..वह शिखर पर है

14

आप इस ब्रह्मांड के रचियता के सामने खड़े हैं और आपसे कहता है, शबास तुम बहुत अच्छे और वफ़ादार सेवक हो

 

 

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