तीन भाइयों की कहानी-आप किस श्रेणी के हैं

तीन भाइयों की कहानी से आप जान पाएंगे की आप कौन सी श्रेणी में हैं ?आपको ईमानदारी से सोचना है कि आप किस श्रेणी में हैं और भविष्य में आप किस श्रेणी में जाना चाहते हैं ।

तीन भाइयों की कहानी-आप किस श्रेणी के हैं
तीन भाइयों की कहानी

तीन भाइयों की कहानी

तीन भाई पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए शहर चले गए । संयोगवश तीनों को एक ही कम्पनी में नौकरी लग गई ।

 

 

कुछ दिनो के बाद जब उनके पिता गाँव से फ़ोन किया और तीनों पुत्रों की सैलरी पूछी ।

बड़े ने कहा – तीस हज़ार , मँझले भाई ने कहा – चालीस हज़ार , और सबसे छोटे भाई ने कहा – साठ हज़ार ।

पिता चकित हो गए क्यूँकि तीनों के पास एक ही डिग्री , एक ही कॉलेज से निकले थे और संयोगवश कम्पनी भी तीनों को एक हि मिली फिर सैलरी में इतना फ़र्क़ कैसे ?

अगले दिन वो गाँव से शहर आ गए और कम्पनी के मैनेजर से इसका कारण पूछा । तब मैनेजर ने कहा मैं आपको बताऊँगा नहीं आप स्वयं ही इसका कारण देखें ।

बड़े पुत्र को बुलाया

कम्पनी का मैनेजर ने बड़े पुत्र को बुलाया और कहा – पास ही समुद्र में एक जहाज़ में कुछ माल है , जिसकी नीलामी होने जा रही है ।तुरंत पता करो क्या माल है ? और यही कार्य अन्य दोनो भाइयों को दिया ।

सबसे बड़ा भाई १० मिनट बाद लौटकर चला आया और जानकारी दी कि जहाज़ में कपड़ा एर कुछ इलेक्ट्रोनिक सामान है । मैनेजर ने पूछा कैसे पता किया ? तब बड़े भाई ने कहा – मैंने अपने परिचित से फ़ोन करके पूछा है ।

मंझला भाई दो घंटे बाद लौटा

मंझला भाई दो घंटे बाद लौटा उसने बताया जहाज़ में १०० टी॰वी॰ हैं , लगभग १० हज़ार मीटर कपड़ा है और ५०० कम्प्यूटर है । मैनेजर ने पूछा – टी॰वी॰चालू है या बंद । मंझले भाई ने कहा – मैंने इतने बारीकी से नहीं देखा ।

सबसे छोटा भाई शाम को लौटा उसने बताया

सबसे छोटा भाई शाम को लौटा उसने बताया – बॉस , जहाज़ में १०० टीवी हैं , जिसमें से ८० नए और बीस पुराने हैं और लगभग १० हज़ार मीटर कपड़ा है जो की ऊँचे दर्जे का सिल्क है ।

मैंने कुछ कपड़ा व्यापारियों से बात की है । वो हमें अच्छे भाव देने को तैयार हैं । पाँच सौ जापानी कम्प्यूटर हैं और पूरे नए हैं ।

मैं अपने साथ कुछ कम्प्यूटर साथ ले गया था वो लोग कम्प्यूटर हमसे ले लेंगे ।

हमारा पूरा माल निकल जाएगा । इस सौदे में लगभग १० लाख का मुनाफ़ा होगा । बेचने और ख़रीदने वाले तैयार हैं , बस आपका हाँ का इन्तज़ार है ।

इतना कहते ही मैनेजर ने मुस्कुरा कर पिता की ओर देखा । वहाँ बैठे पिता का उनके प्रश्न का जवाब मिल चुका था ।

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तीन भाइयों की कहानी से सिख-

संसार के अधिकांश लोग इन्हीं तीन श्रेणी में आते हैं । सबसे बड़े भाई वाली पहली श्रेणी वह है जिसे काम सौंपा जाए तो वह कभी ज़िम्मेदारी नहीं निभाता । इनसे काम करवाने के लिए इनके पीछे पड़ना पड़ता है ।

मँझले भाई वाली श्रेणी जितना कार्य सौंपा जाए बस उतना ही करते हैं । उसके आगे बिलकुल दिमाग़ नहीं लगते । ये अच्छे स्टाफ़ बन सकते हैं पर लीडर नहीं ।

तीसरी श्रेणी को हम प्रोआक्टिव श्रेणी कहते हैं

छोटे भाई वाली तीसरी श्रेणी को हम प्रोआक्टिव श्रेणी कहते हैं । इस श्रेणी वाली व्यक्ति को काम सौंपा जाए तो ये अपनी पूरी ताक़त झोंक देते हैं । ये अधिकांशतःसफल होते हैं और इनमें लीडर्शिप होती है ।

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