दादी माँ की कहानी -यमराज का डिस्पेंसरी

दादी माँ की कहानी -यमराज का डिस्पेंसरी

यमराज का डिस्पेंसरी -आज मैं आपको दादी माँ की कहानी बताने जा रहा हूँ ,

जिसमें आपको सिख मिलेगी की आप किसी भी बड़े डर का सामना अगर सूझबूझ से करें तो आप जीत जाते हैं।

दादी माँ की कहानी -यमराज का डिस्पेंसरी
दादी माँ की कहानी -यमराज का डिस्पेंसरी

दादी माँ की कहानी-यमराज का डिस्पेंसरी

एक बार यमराज ने सोंचा की पृथ्वी जाकर वहां के पापी आत्माओं को वो खुद ही दंड देंगे।

इसलिए यमलोक में उन्होंने  एक सहायक को नियुक्त किया।

फिर अगले दिन अपने वे पृत्वी ( पापियों का घर )पर भ्रमण को निकल गए।

यमराज अनुभव करना चाहते थे

आखिर ऐसी कौन सी बात है ,जिसके प्यार के कारण लोग पाप कर बैठते  हैं ?

पृथ्वी पर यमराज भटक गए। और भटकते-भटकते शहर जा पहुंचे

शहर में यमराज एक औरत से मिले जिसका नाम यामिनी था।

यमराज को वो महिला अच्छी लगी और उन्होंने   उस महिला से शादी कर लिया।

बहुत जल्द उनको एक सुन्दर सा बेटा यमनन्दन हुआ।

अब  यामिनीं अपने बेटे में ज्यादा व्यस्त रहने लगी।

समय के साथ उनका आपस का प्यार कम होता चला गया यहाँ तक वो आपस में लड़ने लगे

अपने जीवन यापन के यमराज ने पृथ्वी  डिस्पेंसरी खोल लिया था ,

जहाँ पे वो लोगों का इलाज करते थे और वहां से अच्छी कमाई कर लेते थे।

फिर भी यामिनी के स्वाभाव में कोई बदलाव नहीं आया।

बात-बात पे वह चीखती चिल्लाती रहती थी यहाँ तक खाने के समय भी आपस में लड़ते थे।

उनका लड़का यमनन्दन,अपनी माँ के ज्यादा लाड़-प्यार के कारण बहुत बिगड़ गया।

धीर-धीरे समय बीतता गया और वो दोनों बूढ़े हो गए।

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यमराज अपने लड़के और पत्नी से तंग आकर एक दिन घर छोड़कर चुपके से  भाग गए।

एक दिन, यमराज ने उन्हें स्वप्न में यह कहते हुए दर्शन दिया यमनन्दन से बोले –

हे पुत्र! डिस्पेंसरी को पूरी तरह से चलाओ ,इस डिस्पेंसरी के लिए मात्र तुम ही आशा की  किरण हो।

मैं तुम्हारी मदद करूँगा। जाओ रोगिओं का इलाज करो।

उंहोने कहा की जिस मरीज के तकिये के पास मैं तुमको खड़ा दिखूं ,तो तुम उसका इलाज करने  मना कर देना क्यूंकि वह जिन्दा नहीं रहने वाला है ,और जिसके पास मैं ना दिखूं तो तुम उसका इलाज करना वह जिन्दा रहेगा।

 

इस प्रकार से वह बहुत चर्चित वैद बन गया ,क्यूंकि वह जिसका भी इलाज करता था सभी ठीक हो जाते थे।

एक बार उस शहर की राजकुमारी बीमार पड़ गई। यमनन्दन को उस राजकुमारी के इलाज  बुलाया गया।

वह जैसे ही राजकुमारी के पास पहुंचा वह बहुत आष्चर्य में पड़ गया ,क्यूंकि उनके पिता यमराज राजकुमारी के तकिये पास बैठे थे।

वह धीरे से अपने पिता यमराज के पास पहुंचा और उनके कान में फुसफुसाया की

डैड यह मरीज मेरी सफलता  के लिए टिकट है। प्लीज ! आप चले जाएँ

तब यमराज ने कहा-

बेटा मृत्यु तो अटल है लेकिन तुम्हारे लिए मैं इसे एक सप्ताह और देता हूँ।

यमनन्दन ने राजा से कहा – अभी के लिए  ! राजकुमारी ठीक है ,

मैं आपको निश्चित परिस्थिति के बारे में एक सप्ताह के बाद बताऊंगा।

एक सप्ताह बाद ,

राजकुमारी  के पास पहुंचा तो उसने अपने पिता को देखा।

अचानक से उसे एक विचार आया और उसने अपनी माँ को बुलवाया -माँ आप अपनी उम्र बढ़ाने के लिए पिता  खोज रही थी ना !

पिता मेरे साथ हैं। वह देखो। 

यमराज अपनी पत्नी को देखते ही वहां से भाग गया।

राजकुमारी बहुत जल्द ठीक हो गई यमनन्दन ने  बड़े  गर्व से घोषणा किया की राजकुमारी अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

राजा ने बड़े धूम-धाम से उस राजकुमारी की शादी यमनन्दन से करवा दिया

शिक्षा – डरना नहीं चाहिए ,डर का मुकाबला करें। मृत्यु से भी खतरनाक डर होता है। 

 

निवेदन – आपसे निवेदन है दादी माँ की कहानी -यमराज का डिस्पेंसरी अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट जरूर करें।

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