निशा टीचर

एक समय की बात है एक स्कूल में एक प्ले टीचर जिनका नाम निशा टीचर था। वो अपनी पहली नौकरी में पहली क्लास को लेकर बहुत उत्साहित थी ।वो चाहती थी कि उनकी पहली क्लास बहुत अच्छी हो ।

 

वो अपने क्लास बहुत उत्साहित होकर गई और बच्चों को चेक करने के मक़सद से कुछ सवाल पूछे तो सभी बच्चे ने बढ़चर उत्तर दिया , लेकिन एक विद्यार्थी चिंटू जो बहुत होशियार था और हर सवाल का उत्तर दे रहा था । तो मैडम ने कहा- सबास चिंटू तुम तो बहुत होशियार हो ।

 

सभी बच्चे चिंटू के हाज़िर-जवाबी को देखकर बहुत ख़ुद हो रहे थे और चिंटू से दोस्ती भी करना चाह रहे थे ।तभी कक्षा समाप्त होने की घंटी बजती है ।

 

अभी निशा टीचर बोल हाई रही थी की चिंटू उठ खड़ा होता है और जल्दी से बाहर जाने लगता है , निशा टीचर चिंटू को पकड़ने के लिए पीछे दौड़ती हैं लेकिन वो चिंटू तो दरवाज़े से बाहर ना जाकर वो दीवार की तरफ़ दौड़ता हुआ दीवाल में ही ग़ायब हो जाता है । यह देखकर बच्चे और निशा टीचर दंग रह जाते हैं ।

 

बच्चे बहुत ज़्यादा घबरा जाते हैं । एक लड़की जो चिंटू के साथ बैठी वो बहुत ही ज़्यादा डर जाती है और मैडम से पूछती है – क्या चिंटू जो दीवाल में समा गया वो भूत था।

 

यह देखकर- सुनकर निशा टीचर बेहोश हो जाती है ।सभी बच्चे पहले से घबराए हुए थे अब बच्चे और ज़्यादा घबरा जाते हैं लेकिन उनमें से एक बच्चा मैडम के चेहरे पर पानी की छींटे मारता है ।

 

जब निशा टीचर को होस आता है तो वो उठकर स्टाफ़ रूम में जाती है और इस भूत वाले घटना को सभी स्टाफ़ से कहती हैं ।सभी स्टाफ़ से एक टीचर बोल उठा – हाँ मैंने भी देखा है जब स्कूल ख़ाली हो जाता है तो कुछ बच्चों के खेलने कूदने और बात करने की आवाज़ें आती हैं ।ये वो बच्चे हैं जिनकी मृत्यु स्कूल में हुई है और जिन्हें किसी ने देखा भी नहीं है ।

 

यह सुनकर अब निशा टीचर घबरा जाती अब उन्हें यह समझ नहीं आता है की वो अब क्या करे ।वो सींचती है की मेरी पहली नौकरी की पहली क्लास ही भूतिया थी , क्या अनुभव है हुआ ? मुझे अब समझ नहीं आ रहा है की अब क्या करूँ स्कूल में नौकरी करूँ या नहीं ।नहीं मैं इस तरह स्कूल की नौकरी नहीं छोड़ूँगी क्यूँकि बाक़ी लोग भी तो स्कूल आते हैं ।मुझे भी हिम्मत दिखानी होगी ।

 

अगले दिन वो हिम्मत जुटा कर स्कूल आइ तो देखा की आज चिंटू क्लास में नहीं आया है तो निशा टीचर को राहत महसूस हुई । कुछ दिन तक सब ठीक चलता रहा लेकिन एक दिन जब वो स्टाफ़ रूम में अकेली बैठी थी तो उन्हें कुछ आहट सुनाई दी ।उन्होंने इधर-उधर देखा लेकिन उन्हें कोई नज़र नहीं आया ।

 

मैडम अपने काम में फिर व्यस्त हो गई लेकिन थोड़ी देर के बाद निशा टीचर को पुकारा , जब निशा मैडम मुड़ी तो सामने चिंटू खड़ा था ।और बहुत जयदा डर गई ।

 

चिंटू बोला – डरिए मत मैडम , मैं आपको डराने नहीं , बल्कि आपसे बात करने आया हूँ ।पर तुम तो एक भूत हो और भला भूत को क्या बात करनी है तुम दूर रहो मुझसे – निशा टीचर बोली ।

 

चिंटू बोला- भला एक स्टूडेंट की बात अगर टीचर नहीं सुनेगी तो कौन सुनेगा ? यह कहकर चिंटू रोने लगा ।चिंटू को रोता देखकर मैडम को दया गई तो मैडम ने हिम्मत जुटाकर कहा – ठीक है कहो क्या बात है ?

 

चिंटू बोला – मैडम मुझे भी पड़ने-लिखने का बहुत शौक़ है , मैं भी पढ़ना चाहता हूँ लेकिन मैं जिस भी क्लास में जाता हूँ बच्चे डर जाते हैं । यह सुनकर निशा टीचर को बहुत हैरानी हुई ।

हले ये बताओ तुम्हारी मृत्यु कैसी हुई ? – निशा टीचर ने पूछा । चिंटू बोला – एक बार लंच ब्रेक में ,मैं अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था की तभी सीढ़ियों से गिर गया और नीचे लगे लोहे के रोड से मेरा सर टकरा गया और मेरी मृत्यु हो गई जिससे मेरी पड़ने की इक्षा अधूरी रह गई ।

 

अगर आप अपनी कक्षा में बैठने दें तो मैं भी पढ़ सकूँगा ।

 

चिंटू की बातें सुनकर निशा टीचर की घबराहट ख़त्म हो जाती है और चिंटू का ना पढ़ पाने का दर्द देखकर दया आ जाती है ।मैं तुमको पढ़ाऊँगी लेकिन रक शर्त है की तुम एक साधारण बच्चे की तरह रहोगे ।तब चिंटू बोला – इसका हल है मेरे पास , आज से मैं सिर्फ़ आपको ही दिखूँगा ।और आप ही सिर्फ़ मेरी अवाज सुन पाएँगी ।

 

यह ठीक रहेगा इससे तुम पढ़ भी सकोगे और बाक़ी बच्चे डरेंगे भी नहीं ।लेकिन तुम्हें कुछ पूछना हो तो तुम लिखकर देना ।और अकेले में पूछना । क्यूँकि अगर मैं सबके सामने बात करूँगी तो सब मुझे पागल समझेंगे ।

 

 

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