नेतृत्व करने के सात सिद्धांत

नेतृत्व करने के सात सिद्धांत

दोस्तों आज का पोस्ट जिस किताब से मैंने लिया उस किताब का नाम है आत्म-अनुशासन की शक्ति।




यहाँ प्रभावी लीडर बनने के सात सिद्धांत बताए जा रहे हैं , जिन्हे आपको अपने व्यवहार और कार्यों में शामिल करना चाहिए।

1 . स्पस्टता :

यह शायद सबसे बड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।आपको पूरी तरह स्पस्ट पता होना चाहिए की आप कौन हैं और किन सिद्धांतों के लिए खड़े हैं। आपकी भविष्य दृस्टि स्पस्ट होनी चाहिए। आपको सटीकता से पता होना चाहिए की आप अपने टीम का नेतृत्व करके उन्हें कहाँ ले जाना चाहते हैं। आपको पूरी तरह से स्पस्टता से मालूम होना चाहिए की संघठन के लक्ष्य और उद्देश्य क्या हैं उन्हें  कैसे प्राप्त किया जायेगा।

 

2 . क्षमता :

लीडर के रूप में आपको उत्कृष्ट प्रदर्शन का पैमाना बनाना होगा। साथ ही आपको कंपनी के हर असोसिएट्स का रोल मॉडल भी बनना होगा। आपका लक्ष्य होना चाहिए की आपकी कंपनी अपनी प्रतिस्पर्धी सर्वश्रेष्ठ कंपनी जितनी या उससे ज्यादा अच्छी बने। आपको अपने प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और अपने ग्राहकों की सेवा करने के बेहतर तरीके खोजने में निरंतर जुटे रहना चाहिए।




3. समर्पण : लीडर संघठन की सफलता के लिए पूरी तरह समर्पित होता है। उसे पूरा विस्वास होता है कंपनी अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ है या भविष्य में सर्वश्रेठ बनेगी। संघठन के प्रति – और सफलता तथा उपलब्धि के प्रति – इस उत्साही समर्पण से असोसिएट्स को कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। तभी वे काम में पूरा दिल लगते हैं।

3. बाधाएं :

लीडर का काम उन बंधनों या बाधक तत्वों को पहचानना है , जिनसे कंपनी की आमदनी और लाभ के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पे असर पड़ता है। लीडर उन बंधनों और बाधाओं को दूर करने की जिम्मेदारी लेता है।

 

5. रचनात्मकता :

लीडर सभी तरह के और सभी स्त्रोतों से आने वाले नए विचरों के प्रति खुला होता है और उन्हें ग्रहण करता है। लीडर उत्कृष्ट प्रोडक्ट्स बनाने , बेहतर सेवाएं देने और ग्राहकों की बेहतर देखभाल करने से ज्यादा तेज , बेहतर सस्ते और आसान तरीके खोजता है और खोजने के असोसिएट्स को प्रोत्साहित करता है।




6 . निरन्तर सीखना :

लीडर में पड़ने और ऑडियो टेप सुनने की आदत होती है। एक्सक्यूटिव के रूप में वह अपने व्यक्तिगत ज्ञान और योग्यताओं को बढ़ाने के लिए समर्पित होता है। अपनी योग्यताओं को बढ़ाने के लिए और बेहतर बनाने के लिए उसे अतिरिक्त सेमिनार्स और कोर्सेज में भी हिस्सा लेना चाहिए।

साथ ही , लीडर संघठन के हर कर्मचारी को सिखने और विकाश करने के लिए प्रोत्शाहित करता है। वह इसे व्यवसायिक जीवन का सामान्य और सहज हिस्सा बना देता है। वह प्रशिक्षण और विकाश के लिए समय तथा संशाधन प्रदान करता है। लीडर जनता है सर्वश्रेठ कंपनियों के पास सर्वश्रेठ-प्रशिक्षित कर्मचारी होते हैं। दूसरे दर्जे के कंपनी में दूसरे दर्जे के प्रशिक्षित कर्मचारी होते हैं। और तीसरे दर्जे के कंपनियों के पास सबसे काम प्रशिक्षित कर्मचारी होते हैं -और वे कंपनियों दिवालियेपन की कगार पर होती है।

 

7 . एकरूपता :

लीडर सभी स्तिथियों में एकरूप , विश्वसनीय , शांत और एक सा रहता है। वह इसके लिए स्वयं को अनुशासित करता है लीडर किसी भी नयी परिस्तिथि समस्या या आपत्कालीन परिस्तिथि के झोंके से डगमगाता नहीं है। इसके विपरीत वह शांत , सकरात्मक और आत्म-विस्वशी होता है – खास तौर पर दबाव में।

 

8 श्रोता :

वे एक अच्छा श्रोता होते हैं। क्यूंकि वह अच्छी तरीके से जनता है की एक अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता रहता है।




धन्यवाद् दोस्तों

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