बहुमुखी शिक्षा क्या है-आज का पोस्ट शिव खेरा जी के किताब जीत आपकी से लिया है और इसमें आज के हमारे समाज में जो शिक्षा प्रणाली है उसपे जोरदार प्रहार है आज के समय में विद्यार्थी पे कितना ज्यादा दबाव होता है और वो चाहते हैं कुछ और बनना पड़ता है उनको कुछ और जहाँ पे उनको काम करना पसंद नहीं लेकिन पैसे के कारन वो वहां काम करते हैं।
शिक्षित होने का मतलब क्या है ?

 

हमें शिक्षित किसे माननी चाहिए ? पहले वो जो रोजाना आने वाले हालात का सामना सही ढंग से करते हैं और वे जो हालात से सामना होने पर सही निर्णय लेने अउ सही कदम उठाने में शायद कभी चूकते हों।




दूसरे वे, जो दूसरों के व्यवहार में बड़प्पन दिखाते हैं दूसरों के अप्रिय व्यवहार और बातों का बुरा नहीं मानते हैं अपने सहयोगियों के साथ उतने भले होते हैं जितना की एक इंसान हो सकता है।और वे अपनी खुशियों पर काबू रखते हैं , और कठिनाइओं को अपने ऊपर हावी नहीं होने दते हैं

और सबसे बड़ी बात है की वे लोग जो सफलता मिलने पर बिगड़ते नहीं ,जो अपनी असलियत से मुँह नहीं मोड़ते हैं। साथ ही बुद्धिमान व्यक्ति की तरह जमीन पर पैर गड़ाए रहते है तुक्के में मिली अच्छी चीजों पर खुश होने के वजाय जन्म से मिली काबिलियत और बुद्धि से प्राप्त कामयाबिओं पर खुश होते हैं। खुश होने की प्रवृति उनकी बचपन से होती है।

बहुमुखी शिक्षा क्या है ?

एक जंगल में कुछ जानवरों में स्कूल सुरु करने का फैसला किया। छात्रों में एक चिड़िया ,एक गिलहरी एक मछली , एक कुत्ता एक खरगोश और दिमागी तौर पर कमजोर ईल मछली शामिल थी।

पाठ्यक्रम तय करने के लिए एक बोर्ड बनाया गया। बोर्ड ने तय किया की छात्रों को बहुमुखी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें उड़ना पेड़ पर चढ़ना , तैरना एवं बिल खोदना सिखाया जायेगा। हर जानवर को सभी तालीम हासिल करने की पाबंदी थी।

चिड़िया उड़ान भरने में माहिर थी। उसने इस विषय में ए ग्रेड हासिल किया , लेकिन बिल खोदने की बरी आयी तो वह अपनी चोंच और पंख तोड़ बैठी और और असफल साबित होने लगी।

इस नाकामयाबी का उस पर असर ऐसा पड़ा की जल्दी ही उसे उड़ान में भी सी-ग्रेड मिलने लगा। पेड़ पर चढ़ने और तैरने में तो वह फेल ही हो गई। मछली सबसे अच्छी तैराक थी , लेकिन वह पानी के बहार निकल ही नहीं सकती थी ,इसलिए बाकि सभी विषयों में फेल हो गई। कुत्ता स्कूल गया ही नहीं ,उसने फ़ीस भी जमा नहीं की , और प्रबंधकों से इस बात को लेकर झगड़ता रहा की पाठ्यक्रम में भोंकना भी शामिल किया जाये। खरगोश को बिल खोदने में ए ग्रेड मिला , लेकिन उसके लिए पेड़ पर चढ़ना एक बहुत समस्या थी। वह बार-बार असफल होता रहा , एक दिन जमीन पर इस प्रकार बुरी तरह गिरा की उसे ब्रेन-डैमज हो गया। वह बच गया , लेकिन उसके दिमाग पर ऐसा असर पड़ा था की उसे बिल खोदने में भी दिक्कत होने लगी। और उसे इस विषय में भी सी ग्रेड मिलने लगा।




आख़िरकार , दिमागी तौरपर बीमार ईल को जिसने हर काम आधे-अधूरे ढंग से किया था , कक्षा का सबसे उत्तम छात्र घोषित के दिया गया। बोर्ड खुश की हर छात्र को बहुमुखी शिक्षा मिल रही थी।

सही मायने में बहुमुखी शिक्षा छात्रों को जिंदगी के लिए इस ढंग से तैयार करती है की उनमें मौजूद किसी क्षेत्र-विशेष से सम्बंधित योग्यता और क्षमता भी बरक़रार रहे।

 

दोस्तों मैं आपसे पूछता हूँ क्या ऐसी शिक्षा सही है ? उम्मीद करता हूँ आपको आज का बहुमुखी शिक्षा क्या है ?  पसंद आया होगा । 

 

 

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