बाज का बच्चा

 आपका बहुत-बहुत स्वागत है , आपका KADVEPRAVACHAN.COM PAR , आज हम एक बहुत शानदार प्रेरणादायी कहानी – बाज का बच्चा ( Motivational story in Hindi ) 

बाज का बच्चा-

एक घने जंगल में एक बार एक बाज का अंडा किसी तरह जंगली मुर्गी के अण्डों के बिच चला गया और  बाकि अण्डों के साथ मिला गया ,

चूँकि अंडे तो सभी सामान होते हैं क्या मुर्गी और क्या बाज के ।

जैसे मुर्गी अपने अन्य अंडे का सेवा कर रही थी वैसे ही उसने बाज के अंडे का भी सेवा किया

और कुछ दिनों के बाद समय आने पर अंडा फूटा। 

 

सभी अण्डों से चूजे निकले और बाज के अंडे से भी चूजा निकला।

बाज का बच्चा भी अंडे से निकला और अंडे से निकलने के बाद यही सोंचता हुआ बड़ा हुआ की वह एक मुर्गी है।

 

बाज का बच्चा भी वही काम करते जो अन्य मुर्गी के बच्चे  करते थे।

जैसे अन्य बच्चे जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता और मुर्गी के बच्चे की तरह चूं-चूं करता था।

जब बच्चे खेल-खेल में कुछ फिट तक उड़ते थे और बाज का बच्चा भी वही कोसिस करता था और वह भी कुछ फिट तक उड़ता था।

 

एक बार की बात है जब बाज का बच्चा उन मुर्गी के बच्चे और मुर्गी के साथ जंगल में अपने दिनचर्या में लगे थे

तभी सभी ने आकाश में एक बाज को उड़ते हुए देखा और उन्होंने देखा की बाज आकाश में कुलांचे भर भर रहा था ,

मंडरा रह था। 


बाज का बच्चा  ने पूछा माँ से पूछा कि  

इस सुब्दर सी चिडयां का क्या नाम है ?

मुर्गी ने कहा – उस सुन्दर चिड़िया का नाम है बाज।

वो बहुत ऊँचा आसमान में उड़ सकता है ।

फिर उस बच्चे ने -मुर्गी  जिसे वह अपनी माँ समझ रहा था

-माँ क्या मैं भी इस बाज की तरह ही उड़ सकता हूँ ?

मुर्गी  ने कहा-कभी नहीं !

तुम मुर्गी हो और मुर्गी उस बाज की तरह नहीं उड़ सकते हो। 

उस बाज के बच्चे ने बिना सोंचे-

विचारे इस बात को मान लिया और विडंबना देखिये की वह बाज का बच्चा ने मुर्गी के बिच में रहकर मुर्गी की तरह जिया और मुर्गी की तरह ही वह मर गया।

जबकि वह बाज का बच्चा था । 

आप कहीं भी हों पर विचार हमेशा ऊँचा रखें आप उड़ सकते हैं । 

सोंचने की विरासत को मत खोना ।

सोंचने की क्षमता न होने के कारन वह विरासत को खो बैठा। कितना बड़ा नुकसान हुआ।

वह जितने के लिए पैदा हुआ था , पर वह दिमागी रूप से हार के लिए तैयार हुआ।

 

 

शिक्षा –

अधिकतर लोगों के लिए यही बात सच है। जैसा की ओलिवर बेंडहाल होम्स ने कहा है –

हमारे जिंदगी का दुर्भाग्यपूर्ण पहलु यह है की ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इक्षा लिए ही कब्र में चले जाते हैं।

हम अपनी ही दूरदर्शिता की कमी के कारण से ही बेहतरी हासिल नहीं कर पाते हैं।

हमें यह बात हमेशा याद रखना चाहिए आप भी एक बाज हैं और आप उड़ने के लिए पैदा हुए हैं ,

जब कोई काम अन्य कोई कर सकता है ,सफल हो सकता है तो आप क्यों नहीं।



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धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है जित आपकी किताब से जिसके लेखक है –शिव खेड़ा

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निवेदन –  आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें। 

 

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