बड़ा सोंचिये

जब आपको यह लगे की मेरे पास काबिलियत नहीं है जो मैं सफल नहीं हो सकता हूँ तो बड़ा सोंचें।

अगर आप खुद को कमजोर समझेंगे तो कमजोर बन जाते हैं। अगर आप अपने को अक्षम मानेगे तो अक्षम बन जाते हैं। अगर आप अपने आपको सेकंड क्लास समझते हैं तो सेकंड क्लास बन जाते हैं। हमेशा बड़ा सोंचें बड़ा ही होगा।


जब आप लड़ाई से बच न सकें तो सोंचें –

 

बहस और लड़ने के प्रलोभन का इस तरह सफल प्रतिरोध करें-

 

1 .  खुद से पूछें – क्या यह चीज वास्तव में इतनी महत्वपूर्ण है की इसके बारे में बहस की जाये?

2 .  खुद को याद दिलाएं की आप बहस में कुछ भी हासिल नहीं करेंगे,बल्कि आप है,हमेशा कुछ न कुछ खो दते हैं। इतना बड़ा सोंचे की आप यह जान लें की

 

लड़ाई,झगडे,और किसी तरह की फालतू बातों से आप अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाएंगे।

 

जब आप पराजित महसूस करें तो बड़ा सोंचें – बिना मुश्किलों और असफलताओं के बड़ी सफलता हासिल करना संभव नहीं है। परन्तु बिना हारे बाकि जिंदगी गुजार देना संभव है। महान चिंतक पराजयों को इस तरह से सामना करते हैं –

 

1 पराजय को  एक सबक के रूप में लें इससे से सीखें।  लिए पराजय को प्रेरणा बनायें। हर पराजय से कुछ न कुछ बचा लें आगे बढ़ने के लिए।

2  जुटे रहने के  प्रगतिशीलता दें। पीछे हटकर नए सिरे से शुरुआत दें। इतना आप बिस्वास करें की हार एक मानसिक अवस्था है , इससे ज्यादा कुछ नहीं।

जब आपको लगे की काम धंधे में प्रगति नहीं हो रही तो बड़ा सोंचे -चाहे आपका धंधा कुछ भी हो ,ऊँचा स्टेटस और ज्यादा तनख्वाह सिर्फ एक चीज से आती है ,आपके प्रदर्शन की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने से। यह करें –

 

सोंचे – मैं इसे बेहतर तरीके कर सकता हूँ ,सर्वश्रेष्ट काम करना मेरे लिए संभव है। हर काम को बेहतर तरीके से कर सकता हूँ। सोंचने से आपको रचनात्मक शक्ति जागृत हो जाती है।

प्युबिलियस के शब्दों में –

बुद्धिमान मनुष्य अपने दिमाग का मालिक होता है और मुर्ख इसका गुलाम।


निश्चित रूप से दुनिया में ऐसे लोग हैं जो चाहते हैं की आप हार जाएँ ,आपके जीवन में दुर्भाग्य हो जाए। परन्तु कोई भी आपको नुकसान पहुंचा नहीं सकता जब तक आप ये तीन बातों को याद रखेंगे –

 

1.  अगर आप घटिया लोगों से लड़ने से इंकार कर देते हैं तो आप जित जाते हैं और अच्छे लोगों से लड़ने से आपका आकर छोटा हो जाता है ,इसलिए महान बने रहें।

 

2.  पीठ पीछे बुराई का बुरा ना माने। यह तो विकास और प्रगति का सबूत है।

 

याद रखें की पीठ पीछे बुराई करने वाले मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार होते हैं। उनके प्रति सहानभूति रखें। अपनी सोंच को इतना बड़ा रखें की ओछे लोगों का हमलों का आप पर असर ना हो।

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