भय क्या होता है

Muni Shree Tarun Sagar ji

भय को आत्मविश्वास में बदलें ,डर को आस्था बनायें ,कम्पन को स्थिरता बनायें। डर अपनी कमजोरी से आता है ,विस्वास अपनी शक्तियों को जानने से उपजता है। आपके मन में भय क्या है ? व्यापार-उद्योग हेतु धन नहीं है। सरकारी नौकरियों के प्रवेश द्वार बंद है। आगे क्या होगा,बेरोजगारी,नौकरी मिल नहीं रही है।



 

 

भय क्या होता है ?बाह्यपूर्ण विचार एवं भययुक्त व्यवहार होता है। इसके अतरिक्त कोई भय नहीं होता। भय के राक्षसों से बचें,सबसे बड़ा भूत डर का है। बाह्य नाम की कोई चिड़िया नहीं होती है। यह एक मानसिक अवस्था है। आत्मविश्वास का विलोम है।भय को आत्मविश्वास में बदलें




 

आदतवश मन आभाव जीता है। कमियों को याद करता है। मन नकरात्मक है। सकरात्मक मन सदैव आशा में जीता है। उक्त प्रकार की सोंच से आपकी ऊर्जा का विकिरण हो जाता है। उसको सकरात्मक रूप देना है। हम आगे बढ़ेंगे,नौकरी मिलना कम हुआ है, पर बंद नहीं। अपने नकरात्मक पहलु को पहचानने की कोसिस करें।

आमतौर छह प्रकार के भय होते हैं –

 

असफलता का भय – असफलता एक घटना है,दुर्घटना है। यह स्थिति है व्यक्ति का असफल होना नहीं है। यह तो आपको बताता है आपको और मेहनत करना है। असफलता को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करें।

असफलता की घटना से स्वयं को अलग करें। ज्यों ही आप भेद करेंगे भय आपका समाप्त हो जायेगा।

आलोचना का भय – आलोचना दो प्रकार की होगी या तो सही या गलत। अगर आपकी आलोचना कोई कर रहा है और आपके बारे में आलोचना कर रहा है तो दर कैसा ? ,जब आलोचना उचित है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। आगे सुधार करें।

 

दूसरा आलोचना हो सकता है वो अनुचित हो ,तो यह याद रखें की यह आलोचना करना उस व्यक्ति की कमजोरी है ,उस पर ध्यान न दें। अपना कर्म करते रहें। आपकी कोई बुराई कर रहा है उसका मतलब है साफ है की आपमें कुछ दम है ,इसलिए यह आपकी अप्रत्यक्ष रूप से आपकी तारीफ कर रहा है और वो ईर्ष्या वश ऐसा कर रह है।

 

 

धन की कमी का भय -यह हम सबको रहता है पर इसको तो आप धन को कमाकर  ही दूर कर सकते हैं। पार्ट टाइम जॉब करें,टूयशन पदाएँ,बिज़नेस करें । खतरे मोल लें डरे नहीं।

 

 

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बीमारी का डर – योगसन प्राणायाम ,सुबह आधा घंटा दौड़ना स्वास्थ्य हेतु जरुरी है। अगर आप ऐसा करेंगे तो बीमारी का भय दूर हो जायेगा।

 

 

प्रिय को खो जाने का डर – प्यार में एक बात ध्यान दें ,वास्तव में कोई प्यार करता है तो खोने का प्रश्न ही नहीं है एवं प्रेमी की स्थति बिगड़ने पर बदल जाता है तो अच्छा हुआ की उसका पता चला की आपसे उसे प्यार था ही नहीं ,तो खोने में कोई हर्ज नहीं है। स्वार्थी व्यक्ति समय और परिस्थितिओं के अनुसार बदलने वाला होता है।

 

मृत्य का भय -यह आदिकाल से है। यह प्राकृतिक है इसे स्वीकारो और वर्तमान में जियो। आज तक कोई दूसरी बार मरा नहीं है मृत्यु तो सभी समस्याओं को सम्पत कर देती है।

आपको यह याद रखना चाहिए की आप सिर्फ एक देह नहीं है ,आप एक शक्तिपूज हैं ,ऊर्जा के भंडार हैं। ऊर्जा कभी समाप्त नहीं होता है उसका रूपांतरण होता है।



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