मंदबुद्धि शेर-पचतंत्र की कहानी

मंदबुद्धि शेर -भूखा शेर जंगल में मारा-मारा फिर रहा था ,उसे बहुत जोरों की भूख लगी थी। जब भटकते-भटकते वह थक गया तो  पर थोड़ी देर रूककर सोंचने लगा की अब क्या करूँ किधर जाऊं ?

 

काश ! हम भी दूसरे शाकाहारी जानवरों की भांति घास-पात ,फल-फूल खा लेते तो आज मुझे इस प्रकार भूख तड़पना नहीं पड़ता। 


खड़े-खड़े उसने देखा की सामने एक बड़ी सी गुफा है ,मन ही मन सोंचने लगा की अवश्य ही इस गुफा में कोई जानवर रहता होगा ,मैं इस गुफा के बाहर ही बैठ जाता हूँ और जैसे गुफा से बाहर कोई भी जानवर आएगा मैं उसे खा कर अपनी भूख मिटा लूंगा। 


काफी इन्तजार के बाद गुफा  वाला गीदड़ जैसे ही बाहर आया तो शेर एकदम से चौकस हो गया ,अपने सीकर देखकर उसकी भूख और भी तेज हो गई। 

 

गीदड़ की जाती तो सबसे तेज दिमाग की मानी जाती है ,उसके दिमाग ने गुफा के द्वार पर से अंदाजा लगा लिया था की अंदर शेर है।

अब मौत उससे अधिक दूर नहीं है ,परन्तु  देखकर भी उसने अपना शंयम नहीं खोया ,बल्कि उसकी बुद्धि उस दिशा में काम करना सुरु कर दिया की शेर से कैसे बचा जाए ?उसकी बुद्धि ने काम किया ,उसकी बुद्धि में एक बात आई ,

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वह गुफा के बाहर खड़ा होकर बोल;ने लगा ओ गुफा। ओ गुफा। जब अंदर से कोई उत्तर नहीं आया तो गीदड़ ने बोलै –

हे गुफा !तेरी मेरी संधि है की जब भी बाहर से आऊंगा तो तेरा नाम लेकर तुझे बुलाऊंगा ,जिस दिन तुम मेरी बात का उत्तर नहीं डौगी उस दिन मैं तुम्हें छोड़कर किसी और गुफा में चला जाऊँगा। 

अंदर बैठे मंदबुद्धि शेर ने  गीदड़ के मुँह से यह बात सुनी ,तो यह समझ बैठा की यह गुफा गीदड़ के आने पर जरूर होगी ,लगता है मैं इस गुफा में पहले से ही हूँ तो शायद  गुफा अभी बोल नहीं रही है ,इसलिए  क्यों न मैं ही गुफा के बदले बोल देता हूँ ,

उसी समय शेर ने जोर से दहाड़ मारी उसकी दहाड़ सुनकर पूरा जंगल काँप उठा। गीदड़ का संदेह अब विस्वास में बदल गया ,वह गुफा के द्वार से ही मुड़कर बिजली की गति से  निकला। शेर मुर्ख बनकर बैठा रह गया ,


सिख -इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है की संकट के समय में भी शंयम का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। संकट भूलकर उसके निवारण पर बुद्धि लगानी चाहिए। 

 

 

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