मन की प्रोग्रामिंग

मन की प्रोग्रामिंग
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आप अपने दिमाग़ की प्रोग्रामिंग करके मनचाही इक्षा पूरी कर सकते हैं ।आपको अपने मन की प्रोग्रामिंग के लिए तैयार होना पड़ेगा –

प्रोग्रामिंग करने से पहले की आवश्यकताएँ

ऑपरेटिंग सिस्टम – तीव्र इक्षा ( लगन )



जिस प्रकार कम्प्यूटर की दुनिया में कोई भी प्रोग्रामिंग चलाने के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम की आवयकता होती है जिसे DOS और WINDOWS कहते हैं, इसी प्रकार हमारे अर्धजाग्रत मन के कम्प्यूटर में भी एक ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है । थिंक एंड ग्रो रीच नाम की किताब में नेपोलियन हिल ने पूरा प्रकरण वर्निंग डिज़ाइअर पर लिखा है । हमें ध्येय के प्रति लगन होनी चाहिए । मीरा बाई श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए धनी बन गई तभी तो अर्धजाग्रत मैन की शक्ति द्वारा, वह ज़हर के प्याले को पीकर भी जीवित रह पाई थी ।


कम्प्यूटर के लिए बिजली       –  अर्धजाग्रत मन के लिए बिस्वास

 

जिस प्रकार कम्प्यूटर के लिए voltage fluctuation के बिजली की प्रवाह की आवश्यकता होती है उसी प्रकार अर्धजाग्रत मन को भी बिस्वास नाम की बिजली की प्रवाह की आवश्यकता होती है । बिस्वास नाम की बिजली के प्रवाह में यदि उतार-चढ़ाव आते रहे तो अर्धजाग्रत  मन ठीक से काम नहीं करता है । अगर आपको इक्षित परिणाम चाहिए तो अटूट बिस्वास नाम की बिजली के प्रवाह की निरंतर पूर्ति करनी पड़ेगी ।

 


कम्प्यूटर वाइरस    –               शंका

 

जिस प्रकार जीवित वाइरस हमारे शरीर में प्रवेश करके शरीर के किसी भी अंग को बिगाड़ देता है , कम्प्यूटर में वाइरस नाम का प्रोग्राम यदि कम्प्यूटर में प्रवेश कर जाए तो वह कम्प्यूटर के सभी प्रोग्राम बिगाड़ देता है ठीक उसी प्रकार अर्धजाग्रत मन में शंका नाम का वाइरस अर्धजाग्रत मन में प्रवेश कर जाए तो अर्धजाग्रत मन में हमारे प्रोग्रामिंग किए होते हैं वह भी ख़राब हो जाते हैं ।

श्री राम को मालूम हुआ की मेरी वानर सेना ने पत्थर के ऊपर मेरा नाम लिख कर उसे पानी में तैराया तब उन्हें इस बात की शंका हुई । इस शंका के समाधान के लिए एक बार अंधेरे में उठ कर पत्थर पर राम नाम लिखकर उसे पानी में डाला तो वह डूब गया । दूसरी बार प्रयत्न किया फिर से डूब गया । इसी प्रकार अनगिनत बार प्रयत्न करने के बाद भी पत्थर डूब गया और भगवान श्री राम भी असफल हुए क्यूँकि उन्हें शंका थी । वानर सेना ने अर्धजाग्रत मन की शक्ति से सम्भव बनाया क्यूँकि राम के नाम पर उनके बिस्वास का प्रवाह निरंतर बहता रहता था ।

  • प्रत्येक को बिना शर्त क्षमा दीजिए ।

  • प्रत्येक को बिना शर्त प्यार दीजिए ।

सावधानी – हमें अर्धजाग्रत मन को यह नहीं बताना है कि ध्येय किस प्रकार प्राप्त करना है । क्यूँकि यह तो उसका अपमान है और ऐसा करने से अर्धजाग्रत मन की मर्यादा ( लक्षमण रेखा ) निश्चित कर देते हैं । जिसकी वजह से वह निष्क्रिय हो जाता है और अपनी अमर्यादित शक्तियों का उपयोग नहीं कर पाता है ।

हमें अर्धजाग्रत मन पर हमारे काम के लिए दबाव डालने या विनती करने की आवश्यकता नहीं है केवल आदेश हाई देना है । हम अपने वफ़ादार सेवक से काम के लिए विनती नहीं करते हैं ।

 

 

अगले पोस्ट में आपको अर्धजाग्रत मन की प्रोग्रामिंग किस उम्र में हो सकता है और क्या अर्धजाग्रत मन का प्रोग्रामिंग कभी असफल हो सकता है ? ऐसे बहुत से सवाल का जवाब देने वाला हूँ ये पोस्ट मैंने लिया है प्रेरणा का झरना से । इसके लेखक हैं डॉक्टर जितेंद्र अड़िया आप इस किताब को ज़रूर पड़ें ।

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