मुनिश्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन हिंदी में

मुनिश्री तरुण सागर जी के कड़वे वचन हिंदी में -मुनिश्री जी का कड़वे वचन आपके जिंदगी में मिठास घोल देगी ,इनकी बातों को आँख बंद करके फॉलो कर सकते हैं आइये इनके कड़वे वचन पढ़ते हैं 

जीवन एक भेलपुरी है-

जीवन एक भेलपुरी है , बर्फी का टुकड़ा नहीं। जीवन भेलपुरी की तरह कभी खट्टा तो कभी मीठा है। हमें ध्यान रखना होगा की जिंदगी में सुख के साथ  दुःख होना लाजमी है।

 

दिन के बाद रात्रि और रात्रि के बाद दिन – यह शास्वत- नियम है। दिन ही नहीं टिकता तो रात कहाँ से टिकेगी ? सुख नहीं टिकते तो दुःख कहाँ से टिकेंगे ?

बुरे समय में बस यही याद रखें की जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे भी ज्यादा समय तक रहने वाले भी नहीं है। अँधेरा गहरा हो जाये तो समझना सुबह होने को है।

 

जीवन का एक-एक पल अमूल्य है। इसे व्यर्थ की निंदा में मत गवां देना।  , ऑफिस की छुट्टी है तो ऐसा नहीं सोंचना की कहीं घूम आते हैं ,किसी होटल में बढ़िया खाना खा लेते हैं।

 

नहीं  समय की हत्या है। छुट्टी है तो कहीं मत जाओ घर में ही बैठो भजन करो। भजन  में मन न लगे तो चादर तानकर सो जाओ लेकिन किसी की निंदा या बुराई मत करो।

 

आँख बड़ी नालायक है।  अनर्थों की जड़ मनुष्य की आँख ही है। आँख बिगड़ती है तो मन बिगड़ता है ,मन बिगड़ता है तो वाणी बिगड़ती है। वाणी बिगड़ती है तो व्यवहार बिगड़ती है ,व्यवहार बिगड़ता है तो पूरा जीवन बिगड़ जाता है।

 

सीता को देखकर रावण की आँख ही तो बिगड़ी थी तो उसका मन बिगड़ गया. फिर रावण का जीवन बिगड़ गया।

 

मन पर अंकुश रखने के लिए पतंग उड़ाना सीखिए। पतंगबाज जब हवा अच्छी होती है तो पतंग ढीली छोड़ देता है की , कहाँ जाती है ? मगर हवा कमजोर पड़ती है ,पतंग निचे आने लगती है तब वह डोर खिंच लेता है।

 

इसी प्रकार जब तुम्हारा मन शुभ और पुण्य की ओर जाता है तो जाने देना। मगर जब बुराई और पाप की ओर जाने लगे तो उसे उधर से तुरंत खिंच लेना।

 

चार चीजें कभी टिकती नहीं है। एक फ़क़ीर के हाथ में धन। दो चलनी में पानी। तीन श्रावक का मन और चार संत-मुनि के पैर।

 

चार चीजें जो कभी नहीं भरती है। एक – गाँव का शमसान। दो लोभ का गड्ढा। तीन पानी का समुद्र और चार मनुष्य का मन।

 

अंग्रजी के AND और END . AND का अर्थ और। थोड़ा है ,थोड़ा और चाहिए। जबकि END का अर्थ है – बस ! अब और नहीं।

 

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