तरुण सागर जी के प्रवचन-KADVE PRAVACHAN IN HINDI

तरुण सागर जी के प्रवचन-KADVE PRAVACHAN IN HINDI

आज का मैंने पोस्ट लिया है मुनि श्री तरुण सागर जी के प्रवचन से जो की मथुरा में ज्ञान ज्ञान वर्षा कर रहे थे। उम्मीद करता हूँ की ये पोस्ट आपको पसंद आएगा।

श्री तरुण सागर जी वे शरीर मात्र नहीं वे विचार हैं , एक ऊर्जा-पुंज हैं ।उन्होंने इस दुनिया में अपना स्थान युगों के लिए बना लिया है ।

 तरुण सागर जी के प्रवचन-KADVE PRAVACHAN IN HINDI
तरुण सागर जी के प्रवचन-KADVE PRAVACHAN IN HINDI

मुनि श्री तरुण सागर जी के प्रवचन

अपनी सेहत का ध्यान रखो क्यूंकि ये सच है अगर आपका सेहत अच्छी है तो

सब कुछ हैऔर आपका सेहत अच्छा नहीं सबकुछ होते हुए भी उसका कोई मतलब नहीं।

अकबर ने पूछा – बीरबल !

मेरी हथेली में बाल क्यूँ नहीं है ?

बीरबल : महाराज ! आप अत्यधिक दान देते हैं , इसलिए आपकी हथेली के बाल देते-देते झर गए ।

अकबर : ठीक है , पर तुम्हारी हथेली में बाल क्यूँ नहीं है ?

बीरबल : महाराज ! आप देते हैं और मैं लेता हुँ ।

आपके देते-देते झर और मेरे लेते-लेते ।

सभी दरबारियों के के हथेली में बाल ज्यूँ नहीं ?

बीरबल बोला – महाराज ! इनके हाथ मसलते-मसलते झर गए की राज बीरबल को क्यूँ दे रहा है ?

कड़वे प्रवचन

-अनीति से कमाया हुआ पैसा १० साल से ज्यादा नहीं रुकता है। इसलिए हमेशा निति और ईमानदारी का कमाइए।

 

कड़वे प्रवचन – एक आदमी सिगरेट पर भासन देता था लम्बे लम्बे भाषण देता था

एक दिन वो खुद ही सिगरेट पि रहा था तो उसे मुनिश्री ने कहा -आप ही सिगरेट पि रहे हो ?

तो वो कहता है -मैं सिगरेट कहाँ पी रहा हूँ ? मैं तो इसे जला कर राख कर रहा हूँ।

कड़वे प्रवचन

जलता हुआ दिया ही दूसरों को रौशनी दे सकता है जो खुद ही बुझा हुआ है तो वो दूसरों को क्या रौशनी देगा ?

तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन

-मुल्ला नसरुद्दीन एक बार सुबह -सुबह उठकर अपनी बीवी से से कहने लगा

अगर मैं प्रधानमंत्री बन गया तो मैं इस दुनिया की तस्वीर बदल दूंगा -उसकी बीवी बोलती है की

पहले आप अपना पजामा तो बदल लो सुबह से उल्टा पहने हुए हो।

कड़वे प्रवचन

हमारे जीवन में तरह तरह की घटनाएं घटती है यह तो मानव जीवन का हिस्सा है इनका का क्या ये तो आते जाते रहेंगे।

आप उन परिस्ठिओं में क्या करते हो कैसी बातें करते हो ? बड़ी बात वो है।

कड़वे प्रवचन

मुनि श्री कहते हैं की – दहेज लेना और देना दोनों पाप है।आप कमाई खाओ पाप कमाई नहीं।

आप कमाई खाओ ससुर कमाई खाएंगे तो ससुर के घर में अगले जन्म में आपको नौकर बनकर पैदा होना होगा।

तरुण सागर जी के प्रवचन

संसार में नगद-सुख कभी नहीं मिलता ।

हमेशा उधार मिलता है ।तुम बच्चे थे तो  सोचते थे बड़े हो जाएँगे तो सुखी हो जाएँगे ।

बड़े हुए तो सोचते  हो बचपन में भी क्या मज़े थे ।

मन जवान आदमी को बूढ़े सुखी लगते हैं ।

कहते हैं – ओह ! क्या मज़े की ज़िंदगी जीते हैं और हम हैं की सारे  दिन गधा- मजूरी करते हैं ।

इन्हें हर महीने पेंशन आ जाती है , घर बैठे खाते हैं ।

उधर बूढ़े कहते हैं – जवानी में क्या मज़े थे , अब तो बुरा हाल है ।

प्रार्थना प्राणों से करो ।

प्राणों से की गई प्रार्थनाएँ कभी व्यर्थ नहीं जाती ।

प्रार्थना में प्राण ज़रूरी है ।

फल मिलने तक अपने मन को शांत रखें ।

अगर प्रार्थना का फल ना दिखे तो इसका अर्थ यह नहीं की प्रार्थना प्रभु को स्वीकार नहीं हुई ।

प्रार्थना आपकी ईश्वर ने स्वीकार की है पर फल तो समय पर ही मिलेगा ।

ज़मीन पर आज बीज डाला , तो इसका अर्थ यह तो नहीं फल भी आज ही मिल जाएगा ।

बीज को वृक्ष बनने में और वृक्ष पर लगने में तो वक्त लगेगा ना ।

 

 

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निवेदन -आपसे निवेदन है की अगर यह मुनि श्री तरुण सागर जी के प्रवचनआपको पसंद  कमेंट  करना ना भूलें।

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