राजधर्म या पत्निधर्म-पंचतंत्र की कहानी 

आपका बहुत बहुत स्वागत है KADVE PRAVACHAN.COM पर ,आज के पोस्ट में हम पढ़ेंगे एक शानदार कहानी – राजधर्म या पत्निधर्म एक कहानी है

एक राजा की जो अपना राजधर्म को भूल कर पत्निधर्म में लग जाता है ।

राजधर्म या पत्निधर्म-

राजा राम सिंह अपने समय के पराक्रमी राजा माने जाते थे । उनका विशाल राज्य समुद्र तट तक फैला हुआ था , उनकी वीरता के चर्चे चारों ओर फैले हुए थे ,

लोगों का यह मत था की राजा रामसिंह की सफलता के पीछे उसके मंत्री चन्द्रसेन  हाथ है । राजा अपने मंत्री के बहुत आदर करते थे । उसकी हर बात मानते भी थे ।

राजा नाराज़ हो गए

एक दिन किसी बात को लेकर राजा अपने रानी से नाराज़ हो गए , रानी ने भी राजा से बोलना बंद कर दिया , हालाँकि राजा ने रानी को बहुत मनाने की कोसिस की परंतु रानी नहीं मानी ।

तब राजा ने बड़े प्यार से समझाया -देखो रानी , छोटी-छोटी बात को लेकर नाराज़ नहीं होते , अब ग़ुस्सा छोड़ो और अब मान भी जाओ मैं आपकी हर इक्षा पूरी करूँगा ।

 

क्या आप हर इक्षा मेरी पूरी करोगे ?

हाँ ।

रानी ने राजा के पीठ पर बैठकर घूमने की इक्षा जाहिर की

तो फिर ठीक है , आज आप घोड़े बन जाओ , मैं आप पर सवारी करूँगी और आप मुझे अपने पीठ पर बिठाकर पूरे महल के चक्कर लगाना ।

हाँ-हाँ तुम्हारी ख़ुशी के लिए हर काम कर सकता हूँ यह तो बहुत छोटा सा काम है ।

इसी के साथ राजा घोड़ा बन गए और रानी उनके पीठ पर सवार होकर पूरे महल का चक्कर काटकर  बहुत ख़ुश हुई ।

मंत्री चन्द्रसेन की पत्नी भी यह देखकर नाराज़ हो गई

लेकिन राजा  को ऐसे चौपाया देखकर  मंत्री चन्द्रसेन की पत्नी भी यह देखकर नाराज़ हो गए , जब मंत्री चन्द्रसेन ने पूछा तुम मुझसे क्या चाहती हो ? मैं चाहती हूँ की तुम अपना सर मुंडवा दो ।

यह कौन सी बड़ी बात है प्रिये , यदि तुम ख़ुश होती हो तो अभी मैं अपना सिर मुंडवा लेता हूँ । यदि राजा महारानी के लिए चौपाया बन सकते हैं तो मुझे सिर मुंडवाने में क्या दिक़्क़त ?

मंत्री चन्द्रसेन मुंडवा लिया

और मंत्री ने नाई को बुलाकर अपना सिर मुंडवा लिया । क्यूँ प्रिये अब तो ख़ुश हो ? हाँ अब मैं ख़ुश हूँ । अब तो नाराज़ नहीं होगी ?

सुबह जैसे ही मंत्री राजदरबार में पहुँचे तो सभी दरबारीगण मुँह छिपाकर हँसना सुरु कर दिया ।

राजा ने भी उनके मूँडे सिर को देख मुस्कुराने लगे । तब

मंत्री चन्द्रसेन को ग़ुस्सा आ गया और बोला- जब राजा चौपाया बन सकता है अपने राजधर्म को भूल कर तो

एक मंत्री को सिर मुंडवाने में भला क्या दिक़्क़त होती ?

 

राजा को हमेसा पाने राजधर्म ही पालन करना चाहिए

 

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