लीडर्स के छह स्तर

लीडर्स के छह स्तरकिसी भी लीडर्स का विकास उसके स्तर के अनुसार ही होता है। जॉन सी. मैक्सवेल के अनुसार लीडर्स के छह स्तर होते हैं। 

 

पहला स्तर : धीमा विकास 

कुछ लोग बहुत धीमी गति से विकास करते हैं और उनके विकास में दिशा नहीं होती है। ये लोग इतनी धीमी गति से यह करते हैं की नजर ही नहीं आता है। हो सकता है वो अपने काम में निपुण हों,परन्तु वे कभी उभर कर नहीं आ पाते हैं। 

 

दूसरा स्तर : विकास उन्हें सक्षम बनाता है 

कई लोग यह गलती से यह मान लेते हैं अपने काम को अच्छी तरह से करना ही उनके विकास का अंतिम लक्ष्य है। ऐसा नहीं है। अच्छे विकासकर्ता या व्यक्तिगत विकास की प्रबल इच्छा के बिना लोग विकास की प्रक्रिया में यहीं रुक जाते हैं। 

 

तीसरा स्तर : विकास उन्हें स्वयं को बहुगुणित करने में समर्थ बनाता है 

विकास के इस स्तर पर लोग अपने मूल्य में वृद्धि करते हैं ,क्यूंकि वे अपनी विशेसग्यता के क्षेत्र में दूसरों को प्रशिक्षित करने में समर्थ हैं। जो लोग तकनिकी रूप से शसक्त होते हैं ,परन्तु जिनमें लीडरशिप की योग्यताएं काम होती हैं ,

 

वे ऐसा करने में समर्थ होते हैं ,प्रबल लीडरशिप योग्यताओं वाले दूसरे लोग यह कर सकते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं काम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं कम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,वे अगले स्तर तक आगे बढ़ जाते हैं। 

 

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चौथा स्तर : विकास उन्हें ऊँचे स्तर वाले काम तक ले जाता है 

 

 

छटवां स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

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