सिनर्जी क्या है ? सिनर्जी की परिभाषा और इसके फायदे

आपका बहुत बहुत स्वागत है KADVE PRAVACHAN.COM पर ,आज के पोस्ट में हम पढ़ेंगे -सिनर्जी क्या है ? सिनर्जी की परिभाषा और इसके फायदे -यह अतिप्रभावशीली लोगों की 6 ठी आदत है।

 

सिनर्जी क्या है ?

सिनर्जी सिद्धांत-केंद्रित लीडरशिप का सार है। यह बच्चों के  सिद्धांत-ादाहृत पालन-पोषण का।  यह लोगों की महानतम शक्तियों को उत्प्रेरित करती है ,एकात्मक बनाती है और मुक्त करती है।

सिनर्जी परिभाषा-

इसका सीधा सा परिभाषा यह  है  कोई पूर्ण चीज अपने हिस्सों के योगफल से अधिक बड़ी है।

इसका अर्थ है हिस्सों का एक-दूसरे के साथ सम्बन्ध है ,वह भी अपने आप में एक हिस्सा है।

यह सिर्फ हिस्सा नहीं है ,बल्कि सबसे शक्तिदायी ,सबसे एकात्मक और सबसे रोमांचक हिस्सा है।

ये हमारे चरों तरफ है –

अगर आप दो पौधों को नजदीक लगा देते हैं,तो उनकी जड़ें आपस  जाती हैं और मिटटी की गुणवत्ता को बढ़ा देते हैं,ताकि दोनों पौधें बेहतर तरीके से बढ़ सके।

एक और एक मिलकर तीन कैसे ?

अगर आप लकड़ी के दो टुकड़ों को आपस में जोड़ देते हैं ,तो वो मिलकर पहले से अधिक बोझ उठा सकते हैं।

एक और जुड़कर तीन हो सकते हैं  उससे भी अधिक।

पारिवारिक जीवन में सिनर्जी को देखने और अमल लाने  अवसर प्रदान करता है।

एक महिला और पुरुष जिस तरह एक बच्चे को दुनिया में लाते हैं ,वह सिनर्जी का रूप है।

सिनर्जी का मतलब है

इसका  मतलब है मतभिन्नताओं को महत्व देना -उनका सम्मान करना ,शक्तियों को बढ़ाना ,कमजोरियों की भरपाई करना।

अगर आपको सिर्फ दो विकल्प ही दिखाई दे -एक खुद  विकल्प और दूसरा गलता विकल्प -तो आप सिनरिजिस्टिक तीसरे विकल्प की तलाश कर सकते हैं।

लगभग हमेसा तीसरा विकल्प है और अगर जीत-जीत से हम करते हैं और सचमुच समझने की कोसिस करते हैं ,

तो हम कोई-न-कोई समाधान ढूंढ लेते हैं। जो की सभी उस से सम्बंधित व्यक्तियों के लिए बेहतर होगा।

 

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नकरात्मक सिनर्जी  –

जब लोग परस्पर-निर्भर वास्तविकता में  समस्यायों को सुलझाने या कोई न कोई निर्णय पर पहुँचने की कोशिश करते हैं ,

तो आमतौर पर कितनी नकरात्मक ऊर्जा खर्च होती है-दूसरों की गलतियों को गिनवाने में ,

चालाकियां करने में ,सघर्ष में ,अपनी चमड़ियों को बचाने में ,

रणनीतियां बनाने में कितना ज्यादा समय बर्बाद होता है ?

ब्रेक से पैर हटाएँ

यह तो ऐसा ही है जैसे कार चलाते समय हमारा एक पैर एक्सीलेटर पर और दूसरा ब्रेक हो !

और ज्यादातर लोग ब्रेक पर से पैर हटाने के वजाय एक्सीलेटर पर दबाव बढ़ा देते हैं।

वे अधिक दबाव डालकर ,अधिक वाक्पटुता दिखाकर और अधिक जानकारी देकर अपनी स्थति को सुदृढ़ बनाने की कोशिश करते हैं।

अमल में लाने के सुझाव :-

अगली बार जब आपकी किसी से मतभिन्नता का टकराव हो,तो उस व्यक्ति की स्थतियों की समझने की कोशिश करें।

उन चिंताओं पर रचनात्मक और परस्पर लाभकारी तरीके से प्रतक्रिया दें।

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