सुझाव और आत्म-सुझाव

सुझाव और आत्म-सुझाव-दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है KADVEPRAVACHAN.COM पर आज हम इस पोस्ट में सुझाव और आत्म-सुझाव के बारे में जानेंगे।

 

सुझाव और आत्म-सुझाव-

सुझाव ज़्यादा असरदार होता है ,इसलिए किसी को सुझाव देना चाहिए ना की आदेश । सुझाव आदेश से ज़्यादा असरदार होता है 

अगर आप अंडे को बाहर से फोड़ेंगे तो आप ऑमलेट बनाएंगे लेकिन यदि वह अंडा स्वयं अपने भीतर से फूटा तो एक नया जीवन आएगा इस दुनिया में।

 

सुझाव मनोविज्ञान का वह सिद्धांत है , जिसके ज़रिए हम दूसरे के मस्तिष्क को प्रभावित , निर्देशित कर सकते हैं ।

यह विज्ञापन और सेल्ज़मैनशिप में इस्तेमाल होने वाला मुख्य सिद्धांत है ।

इसी सिद्धांत के ज़रिए मार्क एंटोनि ने अपने अदभूत भाषण से रोम की भीड़ को आंदोलित किया था ,

जैसा द साइकोलोजि ऑफ़ सेल्ज़मैनशिप ( नीयपोलियन हिल द्वारा ख़ुद के मन को प्रभावित करते हैं । )

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सुझाव और आत्म-सुझाव में फ़र्क़ होता है –

सुझाव से हम दूसरे के मन को प्रभावित करते हैं जबकि आत्म-सुझाव से हम अपने ख़ुद के मन को प्रभावित करते हैं ।सुझाव ज़्यादा असरदार होता है ।

अगर आपकी किसी को अपना प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं तो सुझाव दें -लोग बहुत जल्दी निर्णय नहीं कर पाते हैं।

निर्णय लेना बहुत बड़ी बात है और ये सबकी बस की बात नहीं ,

आप लीडर बनकर अपना कदम आगे बड़ा कर सुझाव दें ,सर मेरे हिसाब से ये प्रोडक्ट्स आपको तो अभी खरीदना चाहिए।

सुझाव मनोविज्ञान के सबसे सूक्ष्म और शक्तिशाली सिद्धांतों में से एक है ।विज्ञान ने साबित कर दिया है की इस सिद्धांत कर दिया है

इस सिद्धांत के विनाशकारी इस्तेमाल में किसी की जान तक ली जा सकती है ,

जबकि इसके सृजनतमक इस्तेमाल से सभी तरह के रोग ख़त्म किए जा सकते हैं ।

सुझाव और आत्म-सुझाव

किसी काम करने वाले को फटकार लगाने के वजाय उसकी प्रशंसा की जाये और

खुद को अच्छा समझने के लिए प्रेरित किया जाये ( सुझाव के जरिये ) तो ज्यादा अच्छे परिणाम हासिल किये जा सकते हैं।

जब हम अपने विचार दूसरों के मन में रखते हैं उन्हें यह महसूस कराते हैं की वे उनके मन में उत्त्पन्न हुए हैं तो इससे जबरदस्त फायदा।

मन उस वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करता है जिस पर सबसे अधिक केंद्रित रहता है। मष्तिस्क को कुछ भी सुझाव देने से पहले इसे प्रभावहीन बनाना चाहिए

और हम अपने मन को प्रभावहीन बनाने से पहले सामान्य से ज्यादा विस्वास की स्तिथि पहुँचाना होगा। क्यूंकि सम्मोहन और कुछ नहीं है बल्कि प्रभावहीन मन के जरिये काम करने वाला सुझाव है।

हाँ कल्पना इतना शक्तिशाली है की आप अपने आपको बीमार भी कर सकते हैं और रोगमुक्त भी कर सकते हैं।

काल्पनिक दर्द भी उतना ही खतरनाक होता है जितना की वास्तविक हमारे दिमाग में वो ताकत है बस इसका इस्तेमाल करना सीखना होगा और इस्तेमाल करने से पहले आपको अपने आप पर  विस्वास।

सुझाव ज़्यादा असरदार होता है ।

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