स्वाभिमान कैसे विकसित करें ?

 

अगर हम अच्छा स्वाभिमान जल्दी बनाना चाहते हैं तो , इसका सबसे अच्छा तरीक़ा यह है की कुछ काम ऐसे करें जो लोगों के मदद के लिए हो ,

उसका बदला न तो पैसा से और ना ही कुछ और देकर चुका सकते हैं ।

स्वाभिमान कैसे विकसित करें ?
स्वाभिमान कैसे विकसित करें ?

 

यह मेरी ज़िन्दगी है , मैं जो चाहूँगा , वही करूँगा – इस जुमले ने फ़ायदे से ज़्यादा नुक़सान किया है । ऐसे लोगों ने इस जुमले को स्वार्थ से जोड़ दिया है । जिसका बुरा असर न केवल उन पर बल्कि उनके आस-पास के पूरे माहौल पर पड़ता है ।

 

हम अलग नहीं हैं समाज से , हमें ज़िम्मेदारी का अहसास होना चाहिए ।

 

इन्सान होने के नाते लेन-देन हम सबको करना पड़ता है , लेकिन ऊँचे दर्जे के आत्मसम्मान वाला स्वस्थ व्यक्ति वह होता है , जिसे केवल लेने का ही नहीं बल्कि देने की भी आवश्यकता महसूस होती है ।

 

स्वाभिमान ख़ुद के बारे में महसूस करने का नज़रिया है ।

जब हम अपने बारे में अच्छा महसूस करते हैं , तो बेहतर काम करते हैं । घर और दफ़्तर के रिश्ते भी बेहतर हो जाते हैं । दुनिया हमें अच्छी लगने लग जाती है । यह ऐसा क्यूँ होता है क्यूँकि हम किसी चीज़ के बारे में जैसा महसूस करेंगे या सोंचेंगे , वैसा ही उसके प्रति व्यवहार करेंगे ।

एक आदमी अपनी नई कार धो रहा था , तभी उसके पड़ोसी ने पूछा।  “ आपने यह कार कब ख़रीदी ?”  उस आदमी ने जवाब दिया  इसे  मेरे भाई ने दिया है । इस पर पड़ोसी ने कहा – काश! मेरे पास भी ऐसी कार होती । इस पर आदमी ने कहा – आपको यह सोचना चाहिए था कि काश! मेरा कोई ऐसा भाई होता । पड़ोसी की पत्नी उनकी बातचीत को सुन रही थी । उसने बीच में टोककर कहा – मैं सोंचती हूँ की काश ! वह भाई मैं होती । यह सोंचने का कितना सकारात्मक नज़रिया है ।

 

लगातार सकरात्मक शिक्षा प्राप्त करने से सकारात्मक विचार आते हैं ।

 

लगातार बुक्स पढ़ने और सकरात्मक ऑडीओ प्रोग्राम सुनकर  और विडीओ प्रोग्राम देखकर आपके मन में सकरात्मक विचार आते हैं ।

विचार के कारण ही किसी के जीवन में परिवर्तन आता है ।

 

 

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