•1 . चरित्र सिर्फ शब्दों से नहीं बनता है– कोई भी खुद को ईमानदार कह सकता है ,लेकिन कार्य ही चरित्र के वास्तविक सूचक होते हैं आपका चरित्र ही तय करता है की आप क्या दरअसल कौन है ? इसी बात से तय होता है की आप क्या देखते हैं। आप क्या देखते हैं उसी से तय होता है की आप क्या करते हैं। इसलिए लीडर के चरित्र को उसके कार्यों से अलग से अलग कभी नहीं किया जा सकता है। यदि लीडर के कार्य और कथन एक दूसरे के निरंतर विरोध में हों तो वास्तविकता पता लगाने के लिए उसके चरित्र की ओर देखें। 

•. प्रतिभा एक वरदान है ,जबकि चरित्र आका चयन है – जीवन में बहुत सी चीजों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हम अपने माता-पिता को नहीं चुन सकते। हम अपने जन्म और परवरिश की जगह या परिस्थतियाँ नहीं चुन सकते। हम अपनी प्रतिभा या आईक्यू को नहीं चुन सकते। लेकिन अपने चरित्र का चुनाव हम खुद करते हैं। वास्तव में हम जब भी कोई चयन करते हैं ,तो हम हर बार अपने चरित्र का निर्माण करते हैं -या हम किसी मुश्किल स्थिति से मुकबला करते हैं या इससे बचकर निकल जाते हैं ; या तो हम आसानी से मिलने वाला धन ले लेते हैं या फिर हम कीमत चूकते हैं। अपना जीवन जीते और चयन करते समय आज भी आप अपने चरित्र का निर्माण कर हैं।  

चरित्रवान होने से लोगों के साथ  सफलता  मिलती है। -सच्चे नेतृत्व में हमेसा दूसरे लोग शामिल होते हैं। ( जैसे की नेतृत्व की एक एक कहावत है ,अगर अगर आप सोंचते हैं की आप नेतृत्व कर रहे हैं ,लेकिन कोई भी आपका अनुसरण नहीं कर रहा है ,तो सिर्फ आप टहल रहे हैं। ) अनुयायी उन लीडर्स पर विस्वास नहीं करते हैं जिनका चरित्र उन्हें दोषपूर्ण लगता है। इसलिए वे आपका अनुसरण भी नहीं करेंगे। 

लीडर्स अपनी चारित्रिक सीमाओं से ऊपर नहीं उठ सकते।  –

क्या आपने देखा है की बहुत से प्रतिभाशाली लोग एक निश्चित स्टार सफलता हासिल करने के बाद अचानक धड़धड़ाकर गिर गए ? इसका मूल  कारण है -चरित्र। 


हारवर्ड मेडिकल स्कूल के मनोवैज्ञानिक और द सक्सेस सिंड्रोम के लेखक स्टीवन बर्गलेस कहते हैं की जो लोग ऊँचे शिखर पर पहुँच जाते हैं ,लेकिन उनके पास तनाव के बिच शक्ति देने वाले चरित्रिक नीवं नहीं होती है ,वे दरअसल तबाही की ओर बढ़ रहे हैं। 

सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ बनें।

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