हार के आगे जीत की कहानी

आज के पोस्ट में मैं हार के आगे जीत की कहानी है बहुत सारे जो आज सफल हैं कभी वो भी आपकी तरह असफल थे आप हिम्मत मत हारो क्यूँकि हर हार के आगे जीत की कहानी बाक़ी होती है आप ख़ुद इसे लिखें ।




होंडा – होंडा कंपनी के संस्थापक सोइचिरो होंडा ने जिंदगी के कई मोड़ पे असफलता देखी। उन्होंने जब टोयोटा कंपनी में इंटरव्यू दिया था तो उन्हें असफल घोसित किया गया था। वे गरीबी में पीला-बड़े ,पिता को साइकिल-रिपेयर की छोटी सी दुकान थी।

 

उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी ,16 वर्ष की उम्र में वे टोकियो पहुंचे। वहां पे अप्रेंटिशिप के लिए आवेदन दिया ,उम्र एक वर्ष कम थी ,इसलिए उन्होंने कंपनी मालिक के घर में एक साल काम किया। बाद में एक साल कंपनी मालिक घर पे काम करने के वावजूद अप्रेंटिशिप भी न मिली।

 

  फिर निराश होकर गॉव पहुंचे। जल्द ही उन्होंने निराशा छोड़कर रिपेयरिंग की छोटी दूकान खोली। कई दिनों तक वहीँ काम किया आगे कुछ ही दिनों में कई पार्ट्स जोड़कर मोटरसाइकल बना दी। यह  मोटरसाइकल   की सबसे बेहतरीन मोटरसाइकल मणि गई थी। फिर इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

न्यूटन -किसी भी स्कूली छात्र के मुँह पहले वैज्ञानिक के तौर पर न्यूटन का नाम आता है। न्यूटन बचपन में ठीक से नहीं पद पाए थे। उनकी माँ ने दुरी सदी की थी इसलिए वे अकेलापन महसूस करते थे किसी तरह बी.ए.पड़ने मशहूर ट्रिनिट्री कॉलेज पहुंचे। काफी कोसिस की थी बी.ए. में लेकिन औसत नंबर ही आये। पास में पैसे नहीं थे

 

हॉस्टल में दूसरे छात्रों के लिए चाय-पानी पहुँचाने का काम किया ,पहले लॉ करना चाहा फिर दर्शन पड़ने लगे। बी.ए. के बाद दो साल तक घर में ही गणित पढ़े इसी बिच बगीचे में सेब गिरते देखा और दिमाग में गुरुत्वाकर्षण की बात आई। लेकिन इसे सिद्धांत का रूप दने में 20 साल लग गए। न्यूटन ने अपने जीवन में अनेक वैज्ञानिक खोज की।




रामानुज – रामानुज पहली से मेट्रिक पास हुए ,इसके बाद में बारहवीं की परीक्षा में दो-दो बार फेल हुए। फेल होने के कारण स्कॉलरशिप बंद हो गई। पास में पैसे नहीं थे पड़ने के लिए उन्होंने क्लर्क की नौकरी कर ली ,लेकिन उन्होंने घर में अध्यन करना नहीं छोड़ा।

 

कुछ ही दिनों बाद उन्होंने महान गणितज्ञ जिएच हार्डी को पेपर भेजा पेपर में 120 थ्योरम थे। इन्हे देख कैंब्रिज विश्वविद्यालय से बुलावा आया। इंग्लैंड में इन्हें फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी से सम्मनित किया गया। आगे उनके थ्योरम कई खोजो के लिए आधार बनें। जिस स्कूल में वो दो-दो बार फेल हुए थे ,उसी स्कूल का नाम रामानुज के नाम पर रखा गया।




लियोनार्डो द विन्ची-लियोनार्डो द विन्ची ने मोललीसा बनाने में 17 साल लगाए। ऐसा नहीं की उन्होंने ऐसा जान-बूझकर किया। वे डिस्लेक्सिया और एडीडी यानि अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर से पीड़ित थे। डिसक्लेसिया के कारण वे पड़ने-लिखने में कमजोर थे और एडीडी के कारण उनका ध्यान एक चीज पर केंद्रित नहीं हो पाता था।

 

इसी कारण वे अपनी 30 पेंटिंग पूरी नहीं कर पाए। शिक्षा केंद्र में मुर्ख छात्र माना गया। सब उन्हें सुस्त-कामचोर समझते थे। उन्हें क्लास  में पीछे बैठना होता ,लेकिन उन्होंने ठान राखी थी की चीजों को समझने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे बाद में चित्रकार, मूर्तिकार और इंजीनियर ही नहीं-शरीर विज्ञान के भी मास्टर बने। यहाँ तक की उन्होंने आज के हलोकॉप्टर की पहली डिजाइन भी तैयार की।

मिस्टर बीन -हमसब का चहेता करैक्टर मिस्टर बीन जब भी हँसे ,तब भी हंसी आती है और रोये तब भी। मीटर बीन का साली नाम रोवान एट्किंसन है। स्कूल में उन्हें मुर्ख समझा जाता था। पड़ने में मन नहीं लगता था। बस केवल उट-पटांग हरकते करते थे। बच्चे ही नहीं ,टीचर्स भी उनकी हंशी उड़ाते थे ,वे पढ़ाई के दौरान अपने ही दुनिया में खोये हुए रहते थे।

 

उनकी शक्ल और हरकतों को देखकर सभी एलियन कहकर मजाक उड़ाते थे। बाद में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी गए वहां पे भी उनका लोग मजाक उड़ाते थे। वहां पे उन्होंने पहली बार थियेटर ज्वाइन किया और लगातर कोसिस करने के बाद उनको थियेटर में एक ऐसा रोल मिला जो गूंगा था और चूंकि बोलने में हकलाते थे लेकिन इस किरदार को उन्होंने शानदार तरीके से निभाया और खूब तालियां बटोरी। इसके बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखे।





मुझे उम्मीद है दोस्तों की आपको आज का ये पोस्ट हार के आगे जीत की कहानी पसंद आया होगा ।

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