शॉर्टकट की तलाश

LARK BIRD शॉर्टकट की तलाश

 

  शॉर्टकट की तलाश एक कहानी है चिड़िया की जो शॉर्टकट की तलाश करते करते मर ही  गई ।

 




एक बार एक लार्क(lark ) चिड़िया जंगल में गाना गए रही थी। तभी एक किसान उसके पास से कीड़ों से भरता एक संदूक लेकर गुजरा। लार्क चिड़िया ने उसे रोक कर पूछा -तुम्हार संदूक में क्या है , और तुम कहाँ जा रहे हो ? किसान ने जवाब दिया की उस संदूक में कीड़ें हैं , वह बाजार से उन कीड़ों के बदले पंख खरीदने जा रहा हूँ। लार्क चिड़िया ने कहा – पंख तो मेरे पास भी है मैं अपना एक पंख तोड़कर दे दूंगी , इस से मुझे कीड़े तलाशने नहीं पड़ेंगे।

किसान ने लार्क को कीड़े दे दिए,और लार्क ने बदले में उसे अपना पंख दे दिया। रोज यही सिलसिला चलता रहा और एक दिन ऐसा भी आया , जब लार्क के पास देने के लिए कोई पंख ही नहीं बचा था। वह उड़ के कीड़े तलाशने लायक नहीं रह गई वह भद्दी दिखने लगी , और उसने गाना छोड़ दिया। जल्दी ही वह मर गई।

सबक – कई बार जिंदगी में जो रास्ता आसान लगता है ,वही बाद में मुश्किल साबित होता

है।

 

भोजन मुफ्त में नहीं मिलता-एक राजा ने अपने सलाहकारों को बुलाकर उनसे इतिहास की सारी समझदारी भरी बातें लिखने के लिए कहा , ताकि वह उन्हें आने वाली पीढ़ीयों तक पहुंचा सके। उन्होंने काफी मेहनत करके समझदारी से भरी बातों पर किताबें लिखीं ,और उन्हें राजा के सामने पेश किया। राजा को वो किताबें भारी-भरकम लगी। उसने सलाहकारों से कहा की लोग इन्हें पढ़ नहीं पाएंगे इसलिए इन्हें छोटा करके लाओ।

सलाहकरों ने फिर से काम किया और और बहुत साडी किताब को मिलकर एक किताब बना दिया और केवल एक किताब लेकर राजा के पास पहुंचे। राजा को वह भी काफी मुश्किल लगी। राजा ने कहा इसे और छोटा करके लाओ। सलाहकारों ने उसे और छोटा किया और केवल एक अध्याय लेकर आये। राजा को वह भी काफी लम्बा लगा। तब सलाहकारों ने उसे और छोटा कर एक पन्ना पेश किया। लेकिन राजा को एक पन्ना भी लम्बा लगा।

आख़िरकार राजा के पास केवल एक वाक्य में लिखकर ले गए और राजा संतुष्ट हो गया। राजा ने कहा की अगर आने वाली पीढ़ियों तक समझदारी का केवल एक वाक्य पहुँचाना हो तो वह यह वाक्य होगा – भोजन मुफ्त में नहीं मिलता।

 

भोजन मुफ्त में नहीं मिलता। का मतलब दरअसल यह है की हम कुछ दिए बिना कुछ प् भी नहीं सकते हैं। दूसरे लफ्जों में कहें , तो हम जो लगाते हैं बदले में वही पाते हैं। बेशक हमारे समज में ऐसे मुफ्तखोर होते हैं जो बिना कुछ किये पाने की उम्मीद में रहते हैं।

 

दोस्तों आज का पोस्ट मैंने लिखा है शिव खेड़ा जी के शानदार किताब जो हर इंसान को एक बार अपनी जिंदगी पड़ने ही चाइये जीत आपकी। आप इसको अपने घर पे मगवा सकते हैं निचे लिंक दिया गया है।

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How to Remove Holi Colours of your Face And Hair

DESI TIPS

HOLI

 how to remove holi colours of your face and hair -(अपने चेहरे और बालों के रंग को कैसे छुड़ाएं )होली(holi) अब हमारे नजदीक है पर उसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं , होली आता है तो रंग का डर भी सताने लगता है क्यूंकि आज कल के केमिकल्स  जल्दी निकलते ही नहीं हैं हमारे फेस और हेयर से। यहाँ पे कुछ टिप्स देने की कोसिस कर रहा हूँ आपके काम में आएँगी –

१ ) गेहूं के आटा और किसी भी प्रकार के खाने में उपयोग होने वाले तेल – आप एक पात्र में आटे को लेकर उसमें मिक्स होने लायक तेल मिलाएं अगर आपको पिम्पल्स है तो एलोवेरा मिलाएं और इसे उस जगह लगाएं जहाँ पे रंग लगा हो। नहाने से पहले।

२ ) बनाना पैक – अगर आपके होली खेलने के बाद आपके चेहरे का त्वचा सूखा-सूखा लगे तो आपके लिए ये जरूर काम आएगा। इसमें एक केला और इसे मैश लें एक बोन में और उसमें शहद एक चमच्च मिला लें और एक चमच्च दही मिला लें और इसे मिक्स कर लें अच्छी तरह और इसे अपने चेहरे पर लगाएं और इसे १० मिनट के लिए छोड़ दें। जब १० मिनट हो जाये तब इसे अच्छी तरह साफ़ कर लें

३ ) मेथी पाउडर – होली में आपके बालों पे रंग के कारण बहुत बुरा असर होता है ,और इसके लिए आप एक चमच्च मेथी पाउडर और चार चमच्च दही इसे अच्छी तरह मिला लें और इसे अच्छी तरह से अपने बालों पे अच्छी तरह अपने बालों पे लगाएं और इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें आपके बालों में शाइनिंग आ जायेगा।

 

४) लोगों को गलत फहमी होती है की रंग गर्म पानी से आसानी से छूट जाता है जबकि आप ये गलती न करें क्यूंकि हमेशा ठंढा पानी ही रंग को हटाने के लिए प्रयोग में लाएं।

५ ) साबुन का इस्तेमाल बिलकुल भी न करें क्यूंकि साबुन डैमेज स्किन को और ज्यादा डैमेज कर देता है या अच्छे फेस पैक क्लीन्ज़र का इस्तेमाल करें या फिर मॉइस्चाइजर क्रीम का इस्तेमाल करें

६ ) पपीता – होली का रंग उतारने  के लिए आप पका हुआ पपीता ले सकते हैं और इसे जहाँ पे रंग लगा हुआ है उस जगह पे इस्तेमाल  करें और इस पेस्ट को अपने सरीर और चेहरे पर १० मिनटों के लियू छोड़ देना है और फिर अपने शरीर और चेहरे को पानी से धो लेना है इस से आपका रंग  निकल  जायेगा

७ )  आप मुल्तानी मिटटी और गुलाब जल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं इन दोनों अच्छे से मिलकर एक गाड़ा सा पेस्ट बना लें और इसे भी अपने शरीर और चेहरे पे लगा लें और इसे लगभग ५-१० मिनटों के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धो लें ऐसा करने से भी आपका रंग उतर जायेगा।

उम्मीद करता हूँ दोस्तों आपको मेरा ये टिप्स काम आएगा। इसे मैंने कई वीडियो और ब्लॉग से लिया है आपके लिए। धन्यवाद।

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Arnold Alois Schwarzenegger

 Arnold Alois Schwarzenegger-आज के पोस्ट में ऐसे व्यक्ति विशेष के बारे में मैं बताने जा रहा हूँ , जिन्होंने लीक से हटकर काम किया और आज वो सफलता की नई ऊँचाई पर हैं , आज वो कइयों के रोल- मॉडल हैं। मिस्टर अर्नोल्ड स्वरजेनेगर

उनका जन्म 30 जुलाई 1948 को हुआ था । उनके पिता एक पोलीस ऑफ़िसर थे । अर्नोल्ड एक कथोलिक परिवार में पले-बड़े । जो की हर रविवार को मास ( Mass) अटेंड करते थे । जब वो छोटे थे तो कई गेम खेलते थे । लेकिन पहली बार उन्होंने बारबेल को पकड़ा था 1960 में जब उनकी आयु 15वर्ष की थी उनके फ़ुट्बॉल कोच लेकर गए थे पहली बार जिम ।

उनके पिता चाहते थे की अर्नोल्ड बड़े होकर एक पोलिस ऑफ़िसर बने और उनकी माँ चाहती थी बड़े होकर मेरा बेटा एक शिक्षक बने । उन्होंने कई बार अपने पिता से जिम जाने के कारण कई बार पिटे भी थे । वो अपने पिता से छुप-छुपाकर कर जिम जाया करते थे । वो अपने बायआग्रफ़ी में कहते हैं की ” जब मेरे पिता मेरे बाल को पकड़ कर खिंचते थे और अपने बेल्ट से मारते थे , तो मुझे बुरा नही लगता था और कभी नहीं लगा की बॉडीबिल्डलिंग छोड़ दूँ। वहीं मैं देखता हूँ और बच्चों को थोड़ा सा विरोध क्या होता है मम्मी- पापा या समाज का लोग अपने पैशन, शौक़ को छोड़ देते हैं । अगर मैं भी छोड़ देता जिम को आज जो हूँ वो कभी नहीं बन पाता । वो कहते हैं कभी भी ज़िंदगी में आपको कुछ पाना है तो आपको अपने लीक से हटकर चलना चाइए , अलग रास्ता चुनिए , अपना रास्ता ख़ुद बनाइए । अपने आप पर बिस्वास करें ।

वो १९७५ में आर्मी में भर्ती हो गए थे और आर्मी के सर्विस के दौरान ही वो मिस्टर युरोप ( जूनीयर ) का ख़िताब जीता । वो कई बार मिस्टर ओलम्पिया रहे । पहली बार जब उन्होंने मिस्टर ओलम्पिया में हिस्सा लिया 1969 में सेकंड पज़िशन रहे फिर उन्होंने 1980 में अगले साल ही प्रथम आए मिस्टर ओलम्पिया में । वो कई बार मिस्टर ओलम्पिया बने ।


वो पहली बार बॉडी- बिल्डिंग के लिए मोटिवेट हुए थे बड़े पर्दे मूवी के कारण सो उनकी वो मिस्टर ओलम्पिया बन्ने के बाद वो बड़े पर्दे पर अपना करियर बनाने के लिए निकल पड़े । उन्हें वहाँ पे बहुत रिजेक्शन का सामना करना पड़ा क्यूँकि इतना बड़े शरीर वाले के साथ कोई हेरोयन काम करना नहीं चाहती थी , आज तक कोई ऐसा हीरो नहीं बना था । कई डाइरेक्टर के पास गए सबने उनको सलाह दिया की आपका शरीर हीरो के लायक नहीं है और आपका आवाज़ भी हीरो की तरह नहीं है ।क्यूँकि उनकी आवाज़ बॉडीबिल्डिंग के कारण पूरी तरह बैठ गया था , और अजीब तरह से निकलता था ।
पर वो ज़िद्दी थे उन्होंने ठाना था की सबको ग़लत साबित करके रहूँगा , उन्होंने फिर मेहनत किया अपने आवाज़ और शरीर के अपर में । बहुत मेहनत , टूइशन लिया आवाज़ ठीक करने के लिए । और लगातार डाइरेक्टर से मिलते रहे और उनको रिजेक्शन मिलता रहा । आख़िरकार एक दिन उनको कामयाबी मिली 1990 में HERCULES मूवी में रोल मिला । और फिर उन्होंने पलट कर नहीं देखा आज वो दुनिया के सबसे महँगे फ़िल्मस्टार के रूप में जाने जाते है । उन्होंने अपना मुक़ाम बनाया ।
वो रिपब्लिक पार्टी से जुड़े और अमेरिका के एक शहर के मेयर भी बनें ।
आप कोई भी चीज़ पाने के लिए ठान लेते हैं तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की साज़िश रचती ।
हिम्मत ना हारें और विरोध से ना डरें , प्राकृत अंततःन्याय करती ।

धन्यवाद दोस्तों ,
उम्मीद करता हूँ की आपको मेरा ये Arnold Alois Schwarzenegger पोस्ट  पसंद आया होगा । अगर अच्छा लगा हो तो प्लीज़ लाइक और शेयर करना ना भूलें ।

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Impotant Nine Things IN Network Marketing For Success

राजीव चतुर्वेदी

Impotant Nine Things IN Network Marketing For Success ये सभी network marketing company में काम करने वालों के लिए है ।

 

आपने नेटवर्क मार्केटिंग में कितना कैपिटल बनाया है यह जरुरी चीज नहीं है पैसा से आप भविस्य नहीं बना सकते हैं हाँ कौशल से आपका भविस्य जरूर बनेगा , अगर पैसा है और आपके पास कौशल नहीं है तो आप अभी भी गरीब ही हैं। पैसा है पर महत्वाकांक्षा नहीं तो ! कहाँ हैं आप ? पैसा है लेकिन साहस नहीं , टूटे हुए हैं आप! थोड़े से पैसा और बहुत सारे साहस की जरुरत होती है।


अगर आप कोई व्यक्ति को ढूंढ रहे हैं तो सिर्फ पैसा मत देखिये पैसा कुछ भी नहीं है इक्षाशक्ति देखिये।

मुझे विश्वास है कि वास्तव में कुछ चीजें हैं जो पूंजी से अधिक मूल्यवान हैं जो आपके एंटरप्रेन्यियर को आगे बढ़ा

सकते हैं एक उत्कर्ष नेटवर्क बनाने और आपको सफलता दिलाने में निचे दिए गए लिस्ट हैं-

समय – समय ज्यादा महत्वपूर्ण है धन से। अगर आप अपने समय को सेट नहीं कर रहे हैं अपने काम पे ,अपने लक्ष्य के लिए तो आप अपने समय का व्यर्थ कर रहे हैं

समय कितना महत्वपूर्ण है ?ठीक तरह से निवेश किया जाने वाला समय एक भाग्य है। समय का आपने सही निवेश किया तो यह आपके लिए चमत्कार कर सकता है ,इसलिए एक एक सेकंड का सही निवेश करें।

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निराशा- मेरे एक मित्र का नाम है, जो उनके नेटवर्क विपणन व्यवसाय में पहली बार निराशा के कारण ही प्रवेश किया था। उसने गरीबी को बहुत पास से देखा था उसे सख्त जरुरत थी पैसे की। निराशा शक्तिशाली प्रेरक हो सकता है जब आप कहते हैं ये जरुरी है मेरे लिए।


चित्त की दृढ़ता- आपका चित्त शांत होना चाहिए। अगर आपको निराश ग्राहक मिलता है आप दृढ़ रहिये बेचने के लिए। डटे रहें सफलता मिलने तक।

साहस –

अद्भुत चीज है सहस , साहस के बिना आप कभी भी बेच नहीं सकते हैं। सहस किसी भी परिस्ठी में जादुई परिणाम ला सकता है। साहसी बने।

महत्वाकांक्षा –

वाह ! यदि मैं एक बेच सकता हूँ तो 10 भी और 1000 भी बेच सकता हूँ। भविस्य देखना चाहिए। यह आपको प्रेरित करता रहेगा।



आस्था –

अपने प्रोडक्ट्स पे आस्था ,अपने अपलाइन पे आस्था ,अपने डाउन लाइन पे आस्था और सबसे जरुरी अपने आप पे। क्या हो अगर आपके पास करोड़ों रूपये हों और विस्वास ही न हो किसी पे कोई आस्था न हो।

सरलता-

आपकी सरलता को काम करने दीजिये। अगले को महसूस होने दीजिये आप जैसे दिख रहे हैं आप वाकई में वैसे ही सरल है। अपने दिमाग को सिर्फ काम पे लगाइये।

दिल और आत्मा-

दिल और आत्मा का कोई विकल्प है क्या ? पैसा तो नहीं सकता है। पैसा कभी भी किसी का दिल और आत्मा को खरीद नहीं सकता है अगर आपके अरबों रुपया है और आपके पास दिल और आत्मा ही नहीं है तो क्या आप इसे जिंदगी कहेंगे ? आप हो सकता है अप्रभावी हों पर आपका दिल और आत्मा अनदेखा जादू करता है वो लोगों को खरीदने पे मजबूर करता है वो फैसला लेने में मदद करता है। इसलिए

 

व्यक्तित्व-




आपको अपने व्यक्तिव को सजाइये और अपने व्यक्तित्व को बढाइये। आप विशिष्ट व्यक्तित्व के स्वामी हैं बस इसे विकसित करना होगा चाहे आप किसी से बात करते हों या तो अपने बच्चों से या किसी बिज़नेस मैन से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

ऊपर दिया हुआ सूची महत्वपूर्ण है आपके नेटवर्क के लिए पैसा से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह एक छिपा हुआ धन है जो की पैसे से भी अधिक मूल्यवान है

धन्यवाद दोस्तों

 

उम्मीद करता हूँ की आपको मेरी Impotant Nine Things IN Network Marketing For Successपोस्ट  अच्छी लगी हो लगी हो। इसे शेयर करना न भूलें और यदि आपके मन में नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ा कोई भी सवाल हो अवस्य पूछे आप कमेंट या मेल कर सकते हैं। आज का जो पोस्ट है मैंने लिया है द अल्टीमेट गाइड टू नेटवर्क मार्केटिंग। दोस्तों यदि आप नेटवर्क नेटवर्क मार्केटिंग में सफल होना चाहते हैं बुक्स पड़ना जरुरी है। सफलता हमेसा ही अच्छे किताबों से होकर गुजरती है।


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हार के आगे जीत की कहानी

आज के पोस्ट में मैं हार के आगे जीत की कहानी है बहुत सारे जो आज सफल हैं कभी वो भी आपकी तरह असफल थे आप हिम्मत मत हारो क्यूँकि हर हार के आगे जीत की कहानी बाक़ी होती है आप ख़ुद इसे लिखें ।




होंडा – होंडा कंपनी के संस्थापक सोइचिरो होंडा ने जिंदगी के कई मोड़ पे असफलता देखी। उन्होंने जब टोयोटा कंपनी में इंटरव्यू दिया था तो उन्हें असफल घोसित किया गया था। वे गरीबी में पीला-बड़े ,पिता को साइकिल-रिपेयर की छोटी सी दुकान थी।

 

उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी ,16 वर्ष की उम्र में वे टोकियो पहुंचे। वहां पे अप्रेंटिशिप के लिए आवेदन दिया ,उम्र एक वर्ष कम थी ,इसलिए उन्होंने कंपनी मालिक के घर में एक साल काम किया। बाद में एक साल कंपनी मालिक घर पे काम करने के वावजूद अप्रेंटिशिप भी न मिली।

 

  फिर निराश होकर गॉव पहुंचे। जल्द ही उन्होंने निराशा छोड़कर रिपेयरिंग की छोटी दूकान खोली। कई दिनों तक वहीँ काम किया आगे कुछ ही दिनों में कई पार्ट्स जोड़कर मोटरसाइकल बना दी। यह  मोटरसाइकल   की सबसे बेहतरीन मोटरसाइकल मणि गई थी। फिर इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

न्यूटन -किसी भी स्कूली छात्र के मुँह पहले वैज्ञानिक के तौर पर न्यूटन का नाम आता है। न्यूटन बचपन में ठीक से नहीं पद पाए थे। उनकी माँ ने दुरी सदी की थी इसलिए वे अकेलापन महसूस करते थे किसी तरह बी.ए.पड़ने मशहूर ट्रिनिट्री कॉलेज पहुंचे। काफी कोसिस की थी बी.ए. में लेकिन औसत नंबर ही आये। पास में पैसे नहीं थे

 

हॉस्टल में दूसरे छात्रों के लिए चाय-पानी पहुँचाने का काम किया ,पहले लॉ करना चाहा फिर दर्शन पड़ने लगे। बी.ए. के बाद दो साल तक घर में ही गणित पढ़े इसी बिच बगीचे में सेब गिरते देखा और दिमाग में गुरुत्वाकर्षण की बात आई। लेकिन इसे सिद्धांत का रूप दने में 20 साल लग गए। न्यूटन ने अपने जीवन में अनेक वैज्ञानिक खोज की।




रामानुज – रामानुज पहली से मेट्रिक पास हुए ,इसके बाद में बारहवीं की परीक्षा में दो-दो बार फेल हुए। फेल होने के कारण स्कॉलरशिप बंद हो गई। पास में पैसे नहीं थे पड़ने के लिए उन्होंने क्लर्क की नौकरी कर ली ,लेकिन उन्होंने घर में अध्यन करना नहीं छोड़ा।

 

कुछ ही दिनों बाद उन्होंने महान गणितज्ञ जिएच हार्डी को पेपर भेजा पेपर में 120 थ्योरम थे। इन्हे देख कैंब्रिज विश्वविद्यालय से बुलावा आया। इंग्लैंड में इन्हें फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी से सम्मनित किया गया। आगे उनके थ्योरम कई खोजो के लिए आधार बनें। जिस स्कूल में वो दो-दो बार फेल हुए थे ,उसी स्कूल का नाम रामानुज के नाम पर रखा गया।




लियोनार्डो द विन्ची-लियोनार्डो द विन्ची ने मोललीसा बनाने में 17 साल लगाए। ऐसा नहीं की उन्होंने ऐसा जान-बूझकर किया। वे डिस्लेक्सिया और एडीडी यानि अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर से पीड़ित थे। डिसक्लेसिया के कारण वे पड़ने-लिखने में कमजोर थे और एडीडी के कारण उनका ध्यान एक चीज पर केंद्रित नहीं हो पाता था।

 

इसी कारण वे अपनी 30 पेंटिंग पूरी नहीं कर पाए। शिक्षा केंद्र में मुर्ख छात्र माना गया। सब उन्हें सुस्त-कामचोर समझते थे। उन्हें क्लास  में पीछे बैठना होता ,लेकिन उन्होंने ठान राखी थी की चीजों को समझने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे बाद में चित्रकार, मूर्तिकार और इंजीनियर ही नहीं-शरीर विज्ञान के भी मास्टर बने। यहाँ तक की उन्होंने आज के हलोकॉप्टर की पहली डिजाइन भी तैयार की।

मिस्टर बीन -हमसब का चहेता करैक्टर मिस्टर बीन जब भी हँसे ,तब भी हंसी आती है और रोये तब भी। मीटर बीन का साली नाम रोवान एट्किंसन है। स्कूल में उन्हें मुर्ख समझा जाता था। पड़ने में मन नहीं लगता था। बस केवल उट-पटांग हरकते करते थे। बच्चे ही नहीं ,टीचर्स भी उनकी हंशी उड़ाते थे ,वे पढ़ाई के दौरान अपने ही दुनिया में खोये हुए रहते थे।

 

उनकी शक्ल और हरकतों को देखकर सभी एलियन कहकर मजाक उड़ाते थे। बाद में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी गए वहां पे भी उनका लोग मजाक उड़ाते थे। वहां पे उन्होंने पहली बार थियेटर ज्वाइन किया और लगातर कोसिस करने के बाद उनको थियेटर में एक ऐसा रोल मिला जो गूंगा था और चूंकि बोलने में हकलाते थे लेकिन इस किरदार को उन्होंने शानदार तरीके से निभाया और खूब तालियां बटोरी। इसके बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखे।





मुझे उम्मीद है दोस्तों की आपको आज का ये पोस्ट हार के आगे जीत की कहानी पसंद आया होगा ।

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कड़वे प्रवचन-kadve pravachan

कड़वे प्रवचन- मुनिश्री तरुण सागर जी  कहते हैं आपसे निवेदन है की जीवन  लिए जीवन के परिवर्तन के लिए इस मुल्क के आधत्यम ने कहा- चेहरों को कितना का कितना भी चमका लो दोबारा कल फिर से वैसा ही हो जायेगा इस से अच्छा है मन को चमका लो जीवन अपने आप चमक जाते हैं।

कड़वे प्रवचन– मुनिश्री तरुण सागर जी  कहते हैं लोग मंदिर कपडे बदल-बदल कर जाते हैं मेरा अपना मानना  है की सिर्फ कपड़ों को बदल कर मत जाइये अपना मन बदल कर जाइये ,लेकिन आज का आदमी इतना बईमान है ,मंदिर में बैठा है और मन में बोल रहा होता है -हे भगवान मैं सुखी रहूं मेरे  बच्चे सुखी रहें बाकि दुनिया जाये भाड़ में ,लेकिन उसको पता नहीं है की दुनिया भाड़ में जाये न जाये तू जरूर जायेगा भाड़ में।

कड़वे प्रवचन – हमारा बच्चा रोता  है तो दिल में दर्द  होता है और दूसरे  का बच्चा रोता  है तो सर में दर्द। अपना बच्चा रोये तो दिल  में दर्द ये तो राग है और दूसरे का रोये तो सर में दर्द ये द्वेष है और ये राग द्वेष की वृद्धि ही संसार है।  इसलिए तो इस मुल्क के मुनियों ने,ऋषियों ने ,संतों ने कहा संतों ने कहा -आदत को कोई सुधर ले तो बस हो गया भजन ,मन सुधारिये ,मन को मँजिये , मन को सम्भालिये। मन पे नजर रखिये।

 

कड़वे प्रवचन-आप  सबको दंड देते हैं जब किसी और से गलती होती है तो चाहे वो आपके बच्चे हों,आपके पत्नी नौकर हो, लेकिन कभी तो अपनी गलती के लिए खुद को भी दंड दीजिये।  मैं आज का चाय नहीं पिऊंगा ,अगर आपके मुँह से कोई अप्सब्द निकल जाये तो आधे घंटे के लिए मौन रह कर दंड दीजिये ,अपने आपको दंड देने के लिए तैयार रहिये , समय बहुमूल्य है ,या यूँ कहूं -समय अमूल है। लेकिन आज किसी से पूछो उसके पास समय नहीं है ,वो बीवी-बच्चों के साथ तीन घंटे की मूवी देख लेगा ,घर बैठकर सबसे बहस करने के लिए समय है लेकिन समय नहीं है तो किसके लिए नहीं है तो, सत्संग के लिए नहीं है ,अच्छे कामों के लिहये नहीं है

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अर्धजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियाँ

sub concious mind

 

अर्धजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियाँ के बारे में जानकार आपको आश्चर्य होगा ।

इक्षा  मृत्यु -control of

Death आपको यह जानकार ताज्जुब होगा की आप यह भी निश्चित कर सकते हैं की आपको कहाँ , कब और कैसे मृत्यु चाहिए ।हमारे धर्मशास्स्त्रों में बहुत से उदाहरण दिए गए हैं जिसमें कुछ व्यक्तियों को इच्छा मृत्यु शक्ति प्राप्त थी । जैसे की महाभारत में भीष्म पितामह ।

आज के समय का एक ताज़ा उदाहरण देता हूँ आप सभी अब्दुल कलाम जी का नाम तो ज़रूर सुना होंगें । उन्होंने एक बार कहा था की मैं चाहता हूँ की मेरी मृत्यु लोगों के बीच में और पड़ाना मुझे बहुत पसंद है सो पढ़ाते-पढ़ाते दम निकले ।और आप सभी को पता है कि उनकी मृत्यु हिमाचल में पढ़ाते-पढ़ाते हुई थी ।
और भी ऐसे कई उदाहरण आपके पास भी मौजूद होगा ।मृत्यु यानी की शरीर में चलने वाली सभी सभी स्वयं संचालित क्रिया का बंद होना अर्थात अर्धजाग्रत मन की सभी क्रियाओं को रोक देना ।
इससे तह बात साबित होता है की हम अपने अर्धजाग्रत मन को सूचना देकर अपनी इच्छा अनुसार मृत्यु प्राप्त कर सकते हैं ।



संवेदना – संवेदना विशेष रूप से जाग्रत मन का नियंत्रण होता है लेकिन हम जब सोते हैं तब भी कुछ अंश तक हमारी संवेदना चलती रहती है । उदाहरण के रूप में आप सो रहे हैं और टेलीफ़ोन की घंटी बजे तो आप जाग जाते हैं । मच्छर काटता है तब भी हमें पता चलता है । यह बात दर्शाती है की संवेदना के ऊपर जागृत मन की अनुपस्थिति में अर्धजग्रात मन का नियंत्रण होता है ।

हलन-चलन – हलन- चलन के स्नायू भी मुख्य रूप से जाग्रत मन के आदेश से काम करता है । लेकिन कई बार अर्धजाग्रत मन का आदेश भी मानना पड़ता है , यदि ऐसा नहीं होता तो हम नींद में करवट न बदल पाते और और मच्छर काटता तो उसे मारने के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ा पाते । अर्थात संवेदना और हलन-चलन के ऊपर दोनो ( जाग्रत और अर्धजाग्रत ) मन का नियंत्रण होता है ।

 

परिवर्तित क्रिया ( Refleax action) – हम रास्ते पर नंगे पैर चल रहे हों और यदि जलती हुई सिगरेट के टुकड़े पर पैर पढ़ जाए तो एक क्षण का भी विलम्ब किए बिना हम पैर उठा लेते हैं ।

धन्यवाद दोस्तों ,

ऐसे ही बहुत सारी ताकत अर्धजाग्रत मन के पास है जिसका इस्तेमाल करके आप अपनी जिंदगी में सफलता और खुशियां से भर सकते हैं। हम उन सभी वस्तुओं को प्राप्त कर सकते हैं जिनकी हम इक्षा रखते हैं।

इस से जुड़ा हुआ कोई भी प्रश्न आपके  तो जरूर करें और इसके अगले भाग में अर्धजाग्रत मन की और भी शक्तियों के बारे में बात करेंगे।

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अपलाइन पुराण 

दुआ है की कामयाबी के सिखर पर आपका ही नाम हो

आपके  हर कदम पर दुनिया का सलाम हो

दिल आपके लिए करते हैं प्रार्थना की

वक़्त भी एक दिन आपका गुलाम हो

अपलाइन आपको  सफल होते देखना चाहते हैं – वो आपको हर हाल में आपको सफल होते देखना चाहते हैं , इसलिए आप अपलाइन पर दिल से भरोषा नहीं श्रद्धा रखें। 

अपलाइन  के साथ वक़्त बिताइए – यदि आप सफल अपलाइन के साथ वक़्त बिताएंगे तो नकरात्मकता आपको कभी प्रभावित नहीं कर पायेगी। आपको लगातार श्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलेगा।

अपलाइन का अनुकरण करके आप छोटे नहीं होंगे – कुछ अति बुद्धिमान व ईगो वाले नेटवर्कर अपलाइन का अनुशरण  करने में हीनता महसूस करते हैं , शुरुआत में कुछ दिनों तक तो वो अनुकरण करने का दिखावा करते हैं परन्तु बाद में अपलाइन की उपेक्षा करने लगते हैं। अपलाइन की मीटिंग में , ट्रेनिंग में तथा अन्य कार्यकर्मों में सिरकत नहीं करते और स्वयं आयोजित कार्यकर्मों में भजि अपलाइन को नहीं बुलाते।  ये उनकी असफलता की गॅरंटी है।

अपलाइन को डुप्लीकेट कीजिये – सफल अपलाइन की प्रस्तुति के तत्व को समझिये , पूरी तरह से उसके व्यक्तित्व में घुस जाइये। इसके बाद अपने व्यक्तिगत गन उसमें मिला दीजिये , फिर आपकी सफलता को कोई रोक नहीं सकता।

जो व्यवहार अपलाइन से करेंगे वैसा ही डाउनलाइन से पाएंगे -आप नए नेटवर्कर हों या वरिष्ठ हों , परन्तु एक सिद्धांत याद रखिये की जो भी आदत या तरीका या सिद्धांत अपने समूह में फैलाना हो , सबसे आप पालन शुरू कीजिये। यदि आप सिर्फ भाषण दे रहे हैं और आपका आचरण विपरीत है तो आपके भाषण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अपलाइन की आय पर टिपण्णी मत कीजिए -कभी-कभी यह देखने में आता है की नेटवर्कर अपनी मीटिंग में अपलाइन की आय का विस्तृत लेखा-जोखा देकर श्रोताओं को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।  कुछ नेटवर्कर तो यहाँ तक कह देते हैं की हम काम करते हैं और अपलाइन उनकी वजह से कहते हैं। मीटिंग में कभी कभार अपलाइन या अपनी आय का संकेत देना गलत नहीं है,लेकिन हर बार इस विषय को बिच में लाना नुकसानदेह है।

डाउनलाइन पुराण

डाउनलाइन को चेला या भक्त मत समझिये – जिस प्रकार डाउनलाइन की सफलता में अपलाइन का योगदान होता है ,उसी तरह अपलाइन की सफलताओं में डाउनलाइन का योगदान होता है यह सच आपको समझना होगा।



उनके साथ भेदभाव मत कीजिये -अपनी डाउनलाइन शृंखला के साथियों को सिर्फ परिणाम और लगन के तराजू पर तौलिए। उनके साथ भेदभाव मत कीजिए , किसी भी प्रकार से नहीं। सच कहा जाये तो सबको सामान अवसर और सबको कार्य के अनुसार परिणाम ही नेटवर्क मार्केटिंग की खूबी है।

स्मार्ट और सामान्य का पूर्व निर्धारण न करें -अक्सर देखने में आता है की हम किसी व्यक्ति को खास या प्रभावशाली मानकर उस व्यक्ति को अपने नेटवर्क से जोड़ने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं। जब वह नेटवर्क में जुड़ जाता है तो हम उस से ढेर साडी उम्मीद जोड़ लेते हैं  , उसे तव्जब्बो देते हैं , उसका जायदा ध्यान देते हैं , उसकी तुलना में हम अन्य को विशेष ध्यान नहीं देते हैं।  जबकि नेटवर्क मार्केटिन में होता उल्टा है जिसके बारे में हम सोंचते हैं की ये काम करेगा वो ही नहीं करता है और  सोंचते हैं की ये नहीं करेगा वो ही धूम मचा देता है।

डाउनलाइन के बिच में राजनीती मत कीजिये – कुछ अपलाइन अपनी डाउन लाइन श्रृंखला में बांटों और राज करो की निति अपनाते हैं , वे अपने निचे किसी का कद खड़ा नहीं होने देना चाहते हैं। यह मिलजुलकर करने का व्यापार है अगर यहाँ पर जोड़ तोड़ की राज निति करेंगे तो पूरा ग्रुप तबाह हो जायेगा।

आलोचना में नियमों का पालन कीजिये – 

  • प्रसंशा सबके सामने करें , आलोचना अकेले में ,
  • आलोचना कार्य व परिणाम की करें , वयक्ति की नहीं।
  • आलोचना करते हुए भाषा सयंमित रखें।
  • आलोचना करते समय हितैषी नजर आएँ।
  • आलोचना करते हुए पुराने मुद्दों को न घसीटें।
  • आलोचना ठोस आधार अपर ही करें।
  • आलोचना संछिप्त व सीधी हो।

डाउनलाइन की सफलता पर जश्न मानाइए – जिस तरह से आपकी सफलता पर आपके डाउनलाइन हंगामा मचा देते हैं , नारे लगते हैं आपको कंधे पे उठाते हैं , आपको विजय को अपनी विजय समझते हक़ीन उसी तरह आप भी उनकी सफलता पर खुल कर जश्न मनाइए। अपने भाषणों में उनका उदाहरण दीजिये। दूसरों के बिच में उनकी सफलता के उदाहरण दीजिये।

धन्यवाद दोस्तों




उम्मीद करता हूँ की आज  का ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा जिसे मैंने लिया था डॉक्टर उज्जवल पाटनी के शानदार किताब नेटवर्क मार्केटिंग कितना सच कितना झूट।  यदि आप नटवर्क मार्केटिंग ,में हैं हैं तो इसे अवस्य पड़ें। मैंने यही किताब को 190 /- में रेलवे स्टेशन से लिया था लेकिन आप चाहे तो इसे निचे दिए गए लिंक से घर बैठे आर्डर कर किताब को मंगवा सकते हैं , जो की मात्र 75 /- में उपलब्ध है।  

 

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दिमाग और मन में फर्क

हकीकत यह है की दिमाग और मन बिच फर्क के विषय में लोगों को पूरा ज्ञान नहीं है। लेकिन कंप्यूटर की भाषा में दिमाग हार्डवेयर है और मन सॉफ्टवेयर। मन के बारे में आगे समझने से पहले यह स्पष्ट रूप से जान लें की मन के दो प्रकार हैं

जाग्रत मन ( concious mind )

अर्धजाग्रत मन ( subconcious mind )




हम जब जाग्रत अवस्था में होते हैं तब जाग्रत मन कार्यरत होता है और जब सो जाते हैं अथवा मूर्छा की अवस्था में होते तब वह काम करना बंद कर देता है। जबकि अर्धजाग्रत मन २४ घंटे काम करता है अर्धजाग्रत मन विषय में लोग अज्ञात हैं और जबकि अर्धजाग्रत मन ही हमें सुख समृद्धि और इक्षित वस्तु दिलवाने में सक्षम होता है।

जाग्रत मन के पास १० प्रतिसत और अर्धजाग्रत मन के पास प्रतिसत शक्ति है। जबकि जाग्रत मन मालिक और नौकर होता है , अर्धजाग्रत जाग्रत मन के सभी आदेशों का पालन करता है बिना फ़िल्टर किये।

कजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियां

संवेदना (SENSES ) – हमारी पाँचों ज्ञाननेद्रियाँ को जाग्रत मन नियंत्रित करता है। जैसे-देखना.सूंघना ,स्वाद लेना। और स्पर्श का अनुभव करना।

 

2 हलन-चलन ( MOVEMENT)- हमरे हिलने चलने तथा बोलने के स्नायु पर जाग्रत मन का नियंत्रण होता है।

 

3 विचार ( थिंकिंग )- हम जाग्रत अवस्था में तब निरंतर विचारशील होते हैं। जिसके ऊपर जाग्रत मन का नियंत्रण है। अर्थात हम नकरात्मक सोंचें या सकरात्मक हमारे हाटों में है। प्रत्येक कार्य का आरम्भ विचार के द्वारा ही होता है।

 

तर्क (लॉजिक )- प्रत्येक विचार के साथ तर्क जुड़ा हुआ है। यह तर्क शक्ति जाग्रत मन के पास है तर्क हमें कई बार गलत निर्णय लेने से बचाता है और सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करता है।

पृथक्करण – हमें कई बार निर्णय लेने से पहले परिस्तिति का पृथक्करण करना पड़ता है।

बुद्धि का अंक -I.Q.

 

हम कई बार देखते हैं की कुछ लोगों का I.Q. ऊँचा होता है तो कुछ लोगों का I.Q. निचा होता है और अधिकांश लोगों का I.Q. सामान्य।

समाज में ऐसी मान्यता है की व्यक्ति का I.Q. जितना ऊँचा उसके सफल होने की सम्भावना उतनी अधिक। I.Q. स्कूल और कॉलेज के दौरान अधिक खिलता है।

 

लेकिन इसके साथ यह समझना जरुरी है की जीवन में सुखी और समृद्ध होने के लिए I.Q. से ज्यादा ( E.Q.- EMMOTIONAL QUOTIENT – भावना का अंक ) का महत्व अधिक है और ज्यादा आदिक महत्त्व आध्यत्मिक अंक ( S.Q.- SPRITUAL QUOTIENT ) का है।

 

अवसर ( मौका पहचानना और झपटना , न्याय करना , निर्णय , अमल करना , पसंद नापसंद , ईक्षा की उत्पत्ति ,अर्धजाग्रत मन दरवाजे पर चौकीदारी

 

आज का ये पोस्ट मैंने लिखा है प्रेरणा का झरना के किताब से जिसके लेखक हैं डॉ जीतेन्द्र हड़िया।




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पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है

पंचतंत्र की कहानी आपका किया अपमान आपका पीछा करती है ।ये कहानी है दंतिल की ।

 

बहुत समय पहले की बात है एक शहर था जिसका नाम वर्धमान था, वहां पे एक अमीर  बिजनेसमैन रहा करता था उसका नाम दांतिल और उस राज्य का वो का मुखिया था ,

दांतिल ने अपने काम से राजा को खुश किया था  अपनी  शादी के दौरान,दांतिल ने राजा, रानियों और मंत्रियों को आमंत्रित किया और उन सभी को सम्मान दिया। उसी समय एक मेहतर उसका नाम था  गोरंभ और उसने सबसे उच्च सीट पर कब्जा कर लिया यह राजा का अपमानजनक था इसलिए स्वीपर को दांतिल ने हवेली से निकाल दिया।





गुस्सा और अपमान महसूस करते हुए, गोरंभ कई रातों को नहीं सोया नहीं था , गोरंभ प्रतिशोध के लिए मौके की तलाश में था वह हमेशा राजा और दांतिल के बीच दरार पैदा करने के तरीकों के बारे सोंचता रहता और वो दरार पैदा करने में कामयाब रहा ।

एक दिन सुबह में ,जब राजा सो रहा था गोरंभराजा के शयनकक्ष खिड़की के नजदीक जाकर जोर से कहा : यह आश्चर्यजनक है कि डांटिल इतने बोल्ड हो गए हैं कि वह रानी को जाता है और गले लगाता है।

यह सब सुनकर राजा उठा और उसने गोरंभ से पूछा अभी जो कह रहे थे क्या वो सब सही है क्या सच में दांतिल ने रानी को गले लगाया ?

गोरंभ ने जवाब दिया : महाराज कल रात जब हम अपने दोस्तों के साथ पत्ते खेल रहा था इसलिए पूरी रात सो नहीं पाया था ,मेरा एक दोस्त है बार बार दांतिल के घर आता जाता रहता है।

वह कह रहा था है कि वह दांतिल को कहते हुए सुना था की रानी के साथ निकट संपर्कों का आनंद ले रहा है। लेकिन मुझे याद नहीं कि उसने सटीक शब्दों में क्या कहा था । मुझे अब बहुत नींद आ रही है, इसलिए मुझे नहीं पता कि मैं क्या बकवास करता हूं।

राजा ने सोचा कि ,गोरंभ रोज यहां आता जाता रहता है और दांतिल भी एक नियमित आगंतुक था। यह संभव हो सकता है कि शायद रानी को गपशप करते दांतिल के साथ देखा हो।

यह भी कहा जाता है कि वह व्यक्ति जो दिन के दौरान सचेत इच्छा रखता है, उनकी नींद के दौरान उन्हें बताता है पीने या सपने देखने के दौरान एक व्यक्ति की अव्यक्त भावना या भावना व्यक्त की जाती है।



यही कारण है कि किसी को महिलाओं को नहीं समझा जाना चाहिए क्योंकि वे एक से बात करते हैं और एक दूसरे को इच्छुक आँखों से देखते हैं और उनके दिल तीसरे के बारे में सोचते हैं।आग लकड़ी से संतुष्ट नहीं है ,

महासागर नदी से संतुष्ट नहीं हैं इसी तरह से, महिलाएं भी कई पुरुषों से संतुष्ट नहीं होती हैं।

महिलाओं के चरित्र पर विचार करते हुए, राजा ने खेद महसूस कर रहे थे और एक आदेश को पारित कर दिया कि दांतिल को अब अदालत की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

यह आदेश दांतिल को उलझन में डाल दिया और साथ ही दांतिल को आश्चर्यचकित कर रहा था।

वह इस अप्रत्याशित विकास के पीछे संभव कारण समझ नहीं सका। उसने कोई अपराध नहीं किया था जो राजा को नाखुश बना देगा।

एक दिन दांतिल ने अदालत में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन रक्षकों ने इसे रोक दिया।

यह देखकर, गोरंभ हँसे और गॉर्ड से कहा: हे सैनिक , आदमी खुद को दंड या माफी का फैसला करता है। यदि आप उसे रोकते हैं, तो आपको उसी तरह अपमानित किया जाएगा जिस तरह तुम उसका अपमान कर रहे हो।



दांतिल ने यह सुनकर सोचा कि हो सकता है गोरंभ ने राजा को कुछ कहा जिसके परिणामस्वरूप उनको निर्वासित किया गया हो । इसलिए दांतिल ने गोरंभ के घर और भेंट में कुछ गहने और कपड़ों को भेज आमंत्रित किया।

उनके दुर्व्यवहारों के लिए पश्चाताप किया , ने अपनी क्षमा मांगी गोरंभ ने दांटिल को माफ कर दिया और आश्वासन दिया कि राजा फिर से निवेदित करेगा और आपको अदालत में आमंत्रित करेगा।

सुबह में अगले दिन, गोरंभ राजा के बेडरूम से बाहर खिड़की के पास बड़बड़ाने लगा , वास्तव में यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि राजा एक बेवकूफ की तरह, जो कि खीरा खाता रहता है। उनसे कोई इसके बारे में पूछता है तो सभी को एक ही जवाब देते हैं हैं ये पृकृति का है।

राजा ने यह सुना और नाराज हुआ । उसने गुस्से से पूछा: तुम ये सब बकवास क्यों बोलते हो? आप इस घर के दास हैं, यही कारण है कि मैं आपको माफ़ करता हूं।

गोरंभ ने क्षमाप्रार्थी से जवाब दिया: मैं रात भर में जुए था । मुझे अभी भी बहुत नींद रही है हूँ मुझे नहीं पता कि मैं क्या कर रहा हूं, कृपया मुझे माफ कर दीजिये । मैं वास्तव में अपने होश में नहीं था

अचानक, उसने राजा को लगा कि जैसे स्वीपर ने उसके बारे में कुछ बेतुका कहा, वह दांतिल के बारे में कुछ भी मूर्खतापूर्ण कह सकता था, जब वह होश में नहीं था।

राजा ने सोचा – यह निश्चित था कि दांतिल एक अच्छा आदमी था, जो रानी के साथ कोई अवैध संबंध नहीं था। इसलिए उसे बहाल करने की आवश्यकता है।

उन्होंने अपने मंत्रियों को निरुपित किया और उन्हें आदर और सम्मान के साथ अदालत में आमंत्रित करने को कहा। जब दांतिल ने समाचार सुना तो वह खुश हुआ।

शिक्षा 1 – अफवाह या गपशप पर अपनी कार्रवाई का आधार न दें



निर्णय लेने से पहले सुनिश्चित करें तथ्य अन्यथा गैर-प्रतिकूल परिणामों और संबंधित लोगों से पीड़ित होना है और खुद को भी सामना करना पड़ सकता है ।

शिक्षा 2 – एक गलती के लिए अपमानजनक।

अपने सामाजिक आचरन में यह कठोर इलाज है और जो लीडर करता है वो नेता के योग्य नहीं है।

इस तरह के नेता को भी गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है क्योंकि अधीनस्थ शायद बदला लेने के लिए देखेंगे कि जिसने उसे अपमानित किया वह भी बचे नहीं।

पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है-उम्मीद है की आपको यह पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है पसंद आई होगी। अगर कहनी आपको अच्छी लगी हो तो शेयर न भूलें

धन्यवाद दोस्तों



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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

आज के पोस्ट में मैं आपके लिए एक शानदार किताब से कुछ अंश लिया हूँ जिसका किताब का नाम है दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार , इसके लेखक हैं रॉन्डा बर्न



 

अगर आप अपने जीवन को तेजी से बदलना चाहते हैं तो अपनी ऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए कृतग्यता व्यक्त करें। जब आप अपनी ऊर्जा कृतज्ञता में लगा देंगे तो अपने जीवन में चमत्कार होते दिखेंगे।

 

 

सृर्ष्टि के नैसर्गिक नियमों के अनुरूप अपना जीवन कैसे जिएँ और किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे अहम् बात यह है की इसे जिए। आप सिर्फ जीकर ही इसके स्वामी बन सकते हैं।

 

 

चिंता और अधिक चिंता को खींचती है। तनाव अधिक तनाव को खींचता है। दुःख अधिक दुःख को आकृष्ट करता है। असंतोष अधिक असंतोष को आकृष्ट करता है

 

अपनी प्रस्तिथियों को तुरंत बदलने के लिए हर दिन सौ ऐसी बातों का लिखने का संकलप लें , जिनके लिए आप धन्यवाद देना चाहते हैं। ऐसा तब तक करते रहें , जब तक दिखने लगे। और कृतग्यता को दिल से महसूस करें। आपकी शक्ति कृतग्यता के कोरे शब्दों में नहीं बल्कि आपके भावना में है।

 

 

आपके भीतर जो भावनाएँ होती हैं वही आने वाले कल को आकृष्ट कर रही हैं।और……

 

 

प्रसन्नता अधिक प्रसन्नता को लुभाती है। आनंद अधिक आनंद को आकर्षित करता है। शांति अधिक शांति को आकृषित करती है। कृतज्ञता अधिक कृतग्यता को आकृषित करती है। प्रेम अधिक प्रेम को आकर्षित करता है।




आपका काम अंदरूनी है। अपने संसार को बदलने के लिए आपको बस इतना काम करना है की अपने अंदर के अहसास को बदल लें। यह कितना आसान है !

 

 

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कहाँ हैं , न ही इस बात से की परिस्थितियां कितनी मुश्किल नजर आ रही है। आप हमेशा बैभव कि ओर बढ़ रहें हैं। हमेशा।

 

पृथ्वी और मानव जाति को आपकी जरुरत जरुरत है इसलिए आप यहाँ है हैं।

 

 

बहरी संसार के किसी भी व्यक्ति या शक्ति तुलना उस ताकत से नहीं की जा सकती , जो आपके भीतर है। शक्ति को खोजें ,क्यूंकि यह आपके लिए आदर्श राह जानती है।

 

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आज के सुविचार

आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति का नियम 

आख़िरी शब्द 

 

 

 

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद करता हूँ की आपको आज का ये पोस्ट पसंद आया होगा। आप दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार  

कियाब को अवश्य पड़ें क्यूंकि इसके अंदर बहुते अच्छे अच्छे विचार दिए गए हैं , जिसमें में मैंने कुछ ऊपर लिखने हैं ऐसे ही हर दिन के लिए अलग विचार। आप इस बुक को फोलो करके अपने जीवन में जब्बरदस्त बदलाव ला सकते हैं।


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पालतू तोते की कहानी

पालतू तोते की कहानी

safe shop

आज के इस पोस्ट में मैंने एक पालतू तोते की कहानी लिखा है जो network marketing और salesperson को ज़रूर पसंद आएगा ।

एक महिला पालतू जानवरों की दुकान में गई और उसने अपना दिल बहलाने के लिए एक तोता ख़रीद लिया । वह तोते को घर ले गई , परंतु अगले दिन उसने दुकान में आकर कहा , तोते ने एक शब्द नहीं बोला !

 

दुकान मालिक ने पूछा – क्या आपने तोते के पास आइना रखा है ? तोते आइने में ख़ुद को देखना पसंद करते हैं । इस सलाह पर अमल करते हुए उस महिला ने एक आइना ख़रीदा और लौट गई ।
अगले दिन वह दोबारा आइ । एक बार फिर उसने कहा की तोता अब भी बोल नहीं रहा है ।




दुकान के मालिक ने कहा की सीढ़ी क्यूँ नहीं ख़रीद लेती हैं ? तोते को सीडी पर चड़ना- उतरना पसंद करते हैं । इस सलाह पर अमल करते हुए उस महिला ने सीढ़ी ख़रीद लिया और घर लौट गई ।
ठीक उसी तरह अगले दिन वह फिर दुकान में उसी पुरानी कहानी के साथ लौट आइ – तोता कुछ नहीं बोल रहा है ।
क्या तोते के पास झूला है ? तोतों को झूले पर आराम करना पसंद है अच्छा लगता है । उस महिला ने झूला ख़रीद लिया और घर लौट गई ।
अगले दिन उसने दुकान में आकर यह दुखद सूचना दी कि तोता मर गया है । दुकान मालिक ने कहा , मुझे यह सुनकर बहुत अफ़सोस हुआ ! क्या तोता मरने से पहले कुछ कहा ?

 

हाँ , महिला ने जवाब दिया “ मरने से पहले उसने कहा था , क्या दुकान में कुछ खाने- पीने की चीज़ नहीं मिलती है ? ‘’

इसी तरह से लोग नेट्वर्क मार्केटिंग कम्पनी में जुड़ तो जाते हैं और वो सबकुछ करते हैं , फ़ंक्शन में जाते हैं हर ट्रेनिंग में जाते हैं मोटिवेशनअल ऑडीओ सुनते हैं विडीओ देखते हैं लेकिन कम्पनी का प्लान नहीं दिखाते हैं ।

 

और इसलिए उनका भी हाल तोते जैसा ही होता है । वो कम्पनी में ज़्यादा दिन तक टिक नहीं पाते हैं




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समय का प्रबंधन 

इंसान जो सोंचता है वही बन जाता है।

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद है आपको आज ये पोस्ट पसंद आया होगा । अगर आपको हमारा ये पोस्ट अच्छा लगा तो शेयर और लाइक करना ना भूलें ।

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समय का प्रबंधन करना

अगर आपको जीवन में सफलता चाहिए तो आपको समय का प्रबंधन करना आना ही चाइए । जिसे मैंने इस पोस्ट में बताने का कोसिस किया है ।

 

समय का प्रबंधन एक सरल तंत्र है , जिसका उपयोग करके आप टालमटोल की आदत से उबर सकते हैं। इसमें आत्म-अनुसाशन , इक्षाशक्ति और व्यक्तिगत व्यवस्थापन की आवश्यकता होती है , लेकिन पुरुस्कार भी बहुत बड़े होते हैं। इस तंत्र का उपयोग करने से आपकी उत्पादकता,प्रदर्शन ,परिणाम और आमदनी दो-तीन गुना बढ़ सकती है।

 

दिन की शुरुआत करने से पहले उस दिन करने वाले कार्यों की सूचि बना लें। सूची बनाने का सबसे अच्छा समय एक दिन पहले रात को होता है ,ताकि आपका अवचेतन मन आपके सोते समय भी इस गतिविधि-सूची पर काम कर सके। इसी वजह से सुबह जागने पर आपके मन में अक्सर ऐसे नए विचार आते हैं जिनसे आप दिन के कामों को ज्यादा कारगर तरीके से पूरा कर सकते हैं।

 

फिर अपनी सूचि में ए , बी ,सी , डी , ई विधि का उपयोग करें –

= करना ही होगा – न करने का गंभीर परिणाम ;

बी = करना चाहिए – करने या न करने के हल्के परिणाम ;

सी = करना अच्छा है – चाहे करें या न करें , कोई परिणाम नहीं होता ;

डी = सौंपें – जो काम दूसरों को सौंप सकते हैं , उन्हें लोगों को सौंप कर आप उन कामों के लिए जयादा खाली करते हैं , जिन्हें केवल आप ही कर सकते हैं।

= छोड़ें – वे सारे काम और गतिविधियां छोड़ दें , जो आपके उद्देश्य और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नहीं है।

अगले दिन की गतिविधि-सूचि की समीक्षा करें और काम सुरु करने से पहले हर कार्य के सामने ए , बी ,सी , डी , ई लिख लें।

यदि आपके पास ए श्रेणी के कई कार्य हैं ,तो उन्हें क्रम में जमा लें , जैसे ए-1 ,ए-2 आदि। बी और सी श्रेणी के कार्यों के साथ भी ऐसा ही करें।

 

इसके बाद खुद को अनुशासित करें ,ताकि किसी और अन्य कार्य को पहले सुबह सबसे पहले अपना ए-1 कार्य ही सुरु करें
जब आप अपने सबसे महत्वपूर्ण काम को सुरु कर दें , तो आपको अनुशासित रहकर पूरी एकाग्रता से अपना-सत प्रतिसत समय और ध्यान उस पर केंद्रित रखना होगा , जब तक की वह पूरा न हो जाये।

ए , बी ,सी , डी , ई विधि से पुरे दिन की योजना बनने में दस मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता है याद रखें काम करने से पहले योजना बनाने में एक मिनट का समय लगाते हैं , उससे काम के दौरान आपका दस मिनट का समय बच जाता है।

आज ही समय-प्रबंधन में माहिर होने का निर्णय लें इस दिशा में तब तक काम करें ,जब तक की इसकी आदत न पड़ जाए।

 

याद रखें आपके सपने ही महत्वपूर्ण होना चाहिए बाकि कामों को छोड़ दें अभी जान बूझकर क्यूंकि यदि गैर जरुरी कामों को करते रहेंगे तो आपके पास समय ही नहीं बचेगा , समय तो सभी के पास २४ घंटे ही होते हैं लेकिन जो उन समय का सबसे ज्यादा सद्पयोग करता है वो औरों से ज्यादा सफल होता है।

 

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद करता हूँ की आपको हमारे आज के पोस्ट से सेल्ज़ बड़ाने में फ़ायदा मिलेगा ।आज का समय का प्रबंधन करना पोस्ट  एक शानदार किताब आत्म-अनुशासन की शक्ति इसके लेखक ब्रायन ट्रेसी आपको पसंद आया होगा । अगर आपको ये पोस्ट आज का पसंद आया हो प्लीज़ इसे शेयर और लाइक करना ना भूलें ।

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Sales techniques

Sales techniques जानना ज़रूरी है बग़ैर उसके आप sales फ़ील्ड में सफल नहीं हो पाएँगे ।

लोग ख़रीदते क्यूँ हैं ?
कोई आपका प्रॉडक्ट्स या सेवा क्यूँ ख़रीद सकता है , इसके बहुत से कारण होते हैं । आपको यह बात समझ लेनी चाइए की लोग आपके नहीं , उनके कारणों की वजह से ख़रीदते हैं । नौसीखिए सेल्ज़ पीपल एक बहुत बड़ी ग़लती यह करते हैं की वे ग्राहक को अपने कारणों से बेचना चाहते हैं , उन कारणों से नहीं , जो ग्राहक को सचमुच क़दम उठाने के लिए प्रेरित करते हों ।

लोग प्रॉडक्ट्स और सेवाएँ इसलिए ख़रीदते हैं , क्यूँकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनकी स्तिथि बेहतर हो जाएगी । साथ ही उन्हें यह लगता है की वह प्रॉडक्ट्स या सेवा बिलकुल ना ख़रीदना या किसी दूसरे से ख़रीदना उतना लाभकारी नहीं होगा , जितना की आपसे ख़रीदना होगा । वे यह महसूस करते हैं की आपसे वह प्रॉडक्ट्स या सेवा ख़रीदना उनके लिए अच्छा सौदा है ।

बिक्री के हर प्रस्ताव पर हर ग्राहक के पास तीन विकल्प होते हैं । वह आपसे ख़रीद सकता है , वह दूसरे से ख़रीद सकता है या इस वक़्त विलकुल भी नहीं ख़रीदता है । आपका काम ग्राहक को समझ के इस बिंदु तक लाना है कि उसे आपके प्रॉडक्ट्स की कितनी ज़रूरत है की वह ख़रीदारी के प्रतिरोध से उबर जाए , जो बिक्री को पटरी से उतार सकता है ।
यदि कोई प्रॉडक्ट्स आपसे कोई भी ख़रीदता है तो , वह उस स्वतंत्रता को थोड़ा- बहुत गवाँ देता है , जो उसके पास आपको पैसा देने से पहले थी । अगर वह आपसे प्रॉडक्ट्स ख़रीदता है , जिस से वह संतुष्ट नहीं होता , तो स्तिथि और ख़राब हो जाती है । अब उसके पास पैसा भी नहीं बचा है और वह प्रॉडक्ट्स के साथ अटक भी गया है । चूँकि हर प्रास्पेक्ट्स को यह अनुभव एक से ज़्यादा बार हुआ है , इसलिए वह ख़रीदने का एक निश्चित मात्र में प्रतिरोध करता है ।
प्रास्पेक्ट्स इस बात की रत्ती बाहर परवाह नहीं होती जी आपका प्रॉडक्ट्स क्या है । उसे तो सिर्फ़ इस बात की परवाह होती है की आपका प्रॉडक्ट्स उसके लिए क्या करेगा ।

ग्राहक की आवश्यकताओं के प्रति आग्रह करना –

धन – हर कोई ज़्यादा पैसा चाहता है । यह बुनियादी आवश्यकता है । पैसा ही संसार को चलाता है । जब भी आप अपने प्रॉडक्ट्स को या सेवा का सम्बंध इस बार्ंज़ जोड़ेंगे की ग्राहक पैसे कमा या बचा सकता है तो उसका पूरा ध्यान आकिर्शित कर लेंगे ।
सुरक्षा – हर व्यक्ति में सुरक्षा की बुनियादी आवयकता होती है । ज़्यादातर लोग महसूस करते हैं की अगर उनके पास पर्याप्त पैसा होगा तो , वो पूरी तरह सुरक्षित होंगे । इसलिए यदि आप safe shop (wadmsafeshop) में हैं तो आप बताएँ कि वो यहाँ से कितना पैसा कमा सकते हैं ।

पसंद किया जाना – हर व्यक्ति चाहता है कि दूसरे उसे पसंद करें । इस बात की गहरी ज़रूरत होती है की हमारे आस-पास के लोग हमें स्वीकार करें और सम्मान करें । हम अपने मित्रों , पड़ोसियों और साथियों की प्रशंसा पाना चाहते हैं । इस से हमारी समूहिकता और आत्म- महत्व की आवयकता संतुष्ट होती है ।
आपका प्रॉडक्ट्स ता सेवा यह कैसे कर सकता है की इसकी वजह से दूसरे लोग आपके प्रॉडक्ट्स की वजह से कैसे मिलेगा ?
ओहदा और प्रतिष्ठा – ओहदा या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा लोगों के लिए शक्तिशाली प्रेरणा है । हम चाहते हैं की लोग हमें सम्मान दें और हमारी संपतियों या उपलब्धियों की प्रसंशा करें ।

जब आपके प्रास्पेक्ट्स को यह विश्वास हो जाता है की उसे आपके प्रॉडक्ट्स या सेवा का इस्तेमाल से ज़्यादा प्रशंसा या मान्यता मिलेगी , तो दाम को लेकर उसका प्रतिरोध काफ़ी कम हो जाता है ।
जब आप किसी मित्र , सलाहकार और शिक्षक के रूप में बिक्री की स्तिथि में जाते हैं , तो आप नाटकीय रूप से उस तनाव को कम कर लेंगे , जो प्रतिस्पर्धी बिक्री में होता है ।

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The Leader Who Had No Title

आज के पोस्ट में The Leader Who Had No Title ( लीडर जिसकी उपाधि नहीं ) से लिया है ।आप शिखर पर तब होते हैं

आप शिखर पर तब होते हैं , जब …..

1. आप स्पष्ट रूप से समझ लें की

असफलता मात्र एक घटना है कोई व्यक्ति नहि है ; की आपका पिछली रात को समाप्त हो चुका है और आज आपका बिलकुल नया दिन है ।

2. आपने अतीत के साथ मित्रता की है , आपका ध्यान वर्तमान पर केंद्रित है और अपने भविष्य के प्रति आशावादी हैं ।

3. आप जानते हैं कि सफलता ( एक जीत ) आपको बनाती नहीं है और असफलता ( एक हार ) आपको तोड़ती है नहीं है ।

4. आप विश्वास , आशा और प्रेम से परिपूर्ण है , और क्रोध , लालच अपराधबोध, ईर्ष्या या बदले की भावना से अलग रह कर जीते हैं ।

5. आप पर्याप्त रूप से इतने परिपक्व हैं की अपनी संतुष्टि को थोड़ी देर के टाल सकते हैं और अपना ध्यान अधिकारों से दायित्वों की ओर स्थान्तरित कर सकते हैं ।

6. आप यह बात जानते हैं की जो चिज नैतिक रूप से सही है , उसका समर्थन करने में असफल रहना, आपराधिक रूप से ग़लत चीज़ का शिकार होने की शुरुआत है ।

7. आप जो कुछ भी हैं , उसी में निश्चिन्त हैं , इसलिए आप ईश्वर के साथ सुकून से हैं और आप का मनुष्य के साथ भाईचारा है ।

8. आपने अपने विरोधियों को भी अपना मित्र बना लिया है और आपने उन लोगों से स्नेह और सम्मान अर्जित किया है , जो आपको सबसे अच्छीतरह जानते हैं ।

9. आप इस बात को समझते हैं कि दूसरे लोग आपको आनंद दे सकते हैं , लेकिन असली ख़ुशी तब मिलती है , जब आप दूसरों को के काम आते हैं ।

10. आप अप्रिय लोगों को प्रेम करते हैं, ना उम्मीदों को उम्मीद देते हैं , अशहायों के मित्र हैं और निरुत्साहित व्यक्तियों को प्रोत्साहन देते हैं ।

11. आप क्षमा के लिए अतीत की ओर देख सकते हैं , आशा के लिए भविष्य में करुणा के लिए नीचे और आभार के लिए ऊपर देख सकते हैं ।

12. आप जानते हैं कि आप में से जो भी व्यक्ति सबसे महान बनेगा , वह सभी लोगों की सेवा करेगा ।

13. आप ईश्वर की महिमा के लिए और मानव जाति के कल्याण के लिए ईश्वर की दी हुई शारीरिक, मानशिक व आध्यात्मिक क्षमताओं को समझते हैं, स्वीकार करते हैं, विकसित करते हैं और उनका उपयोग करते हैं ।

14. आप इस ब्रह्मांड के रचियता के सामने खड़े हैं और आपसे कहता है, शबास तुम बहुत अच्छे और वफ़ादार सेवक हो ।

वैसे तो रॉबिन शर्मा सर की सभी  किताबें उनकी अच्छी होती है लेकिन आज का पोस्ट मैंने लिया रॉबिन शर्मा जी शानदार किताब The Leader Who Had No Title से ।

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