सर्गे ब्रिन और लेरी पेइज

सर्गे ब्रिन और लेरी पेइज

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सर्गे ब्रिन और लेरी पेइज-गूगल आज विश्व का अव्वल नंबर का वेब सर्च एंजन है। इंटरनेट पर  ढूंढने के लिए हम जिस प्रोग्राम का उपयोग  करते हैं,उसे सर्च एन्जिन कहते हैं। विश्व के 43 प्रतिसत लोग गूगल का इस्तेमाल करते हैं।

 

किन्तु सर्गे ब्रिन और लेरी पेइज नाम के दोस्तों ने गूगल बनाया तब उसे बेचने के लिए यह दोनों मित्रों ने महीनों तक बड़ी-बड़ी कंपनियों का संपर्क लिया था लेकिन किसी भी कंपनी ने उसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

 

सर्गे और लेरी जब इंटरनेट पर कुछ ढूंढने के लिए बैठते थे। तब सबसे बड़ी कठिनाई समय की रहती थी। उस ज़माने  की गति बहुत मंद थी और सर्च एंजिन आपके टाइप किये हुए स्पेलिंग के मुताबिक ही पेज  निकालते थे। स्पेलिंग में अगर गलती हो तो गलत चीजों का ढेर इकठ्ठा कर देते थे।

 

वो एंजिन जो चीजें ढूंढ लाते थे वो सब अस्त-व्यस्त स्थिति में आती थी। इसी वजह से हमें हजारों पेज में से अपनी आवश्यकता के अनुसार पेज ढूंढने में समय गवाँना पड़ता था।

सर्गे और लेरी ने सर्च एंजिन में ऐसा सुधार किया की जैसे आप सर्च के बॉक्स में एक-एक अक्षर टाइप करते जायेंगे वैसे-वैसे उनमें  बनते हुए नाम बॉक्स निचे  दीखता जाये।

 

इसी वजह से आपको पूरा शब्द वाक्य टाइप करने की आवश्यकता ना रहे। सिर्फ उसे पसंद करके खोज सके। इस इंजिन को आपकी टाइप करने की पद्धति और उसके साथ पसंद किये हुए शब्दों से पता  था की आपको दरअसल क्या चाहिए।

 

बाद  हुई चीजों को आपकी आवश्यकता के अनुसार क्रम में रख देता है,जिससे आप अपना समय बचा सकें।

 

इस सर्च   एंजिन को खरीदने के लिए कोई राजी नहीं था,इसलिए दोनों मित्रों ने  स्वयं मिलकर,पैसे उधार लेकर,अपना पहला सर्च एंजिन बना लिया। उनका सर्च एंजिन हाल में सबसे लोकप्रिय है। 

 

आज यह दोनों मित्र अरबपति हैं और 40 साल कम उम्र वाले धनपतियों उनका द्वितीय स्थान है। फिलहाल सादगीपूर्ण जीवन जी रहे हैं। 

 

गूगल अपने कर्मचारियों  बेहतरीन कार्य वातावरण और विश्व में श्रेष्ट वेतन देती है। 

 

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उठना सीखो

इंसान जो सोंचता है वही बन जाता है।

 

 

उनका मुद्रालेख है-

अपने ग्राहकों को  अधिक से अधिक सुविधाएँ दें 

और नियंत्रण कम से कम रखें और अपने कार्य में श्रद्धा रखें।   

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प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला

लोक  व्यवहार- प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला -दिलचस्प शैली और सरल भाषा में अंतरास्ट्रीय बेस्टसेलिंग लेखक डेल कारनेगी प्रैक्टिकल सलाह देते हैं और लोगों को प्रभावित करने के आजमाए हुए अचूक तरीके बताते हैं जिन पर अमल करने के बाद आपका जीवन पहले से अधिक सुखद और संपन्न हो जायेगा। 

 

 

यह पुस्तक आपके लिए आठ काम करेगी –

 

1 – आपके दिमाग पर लगी जंग साफ़ करेगी ,नए विचार देगी ,आपमें नए सपने जगाएगी और नई महत्वकांछाओं को प्रेरणा देगी। 

2 -आपको ऐसा तरीका बतएगी जिससे आप जल्दी से और आसान दोस्त बना सकेंगें। 

3 -आपकी लोकप्रियता बढ़ाएगी। 

4 – लोगों से आपकी बात मनवाने में मदद करेगी। 

5 आपका मान -सम्मान  प्रभाव को बढ़एगी और काम करने  और कराने की योग्यता बढ़एगी। 

6 – शिकायतों से निपटने ,बहस से बचने ,और संबंधों को मधुर बनाने के तरीके सिखयेगी। 

7 -एक अच्छा वक्ता और दिलचस्प बातें करने वाला बनाएगी। 

8 -आपके साथियों में उत्साह भरने का तरीका सिखयेगी। 

इस पुस्तक ने छत्तीस से भी ज्यादा भाषाओं में एक करोड़ से भी ज्यादा पाठकों के लिए काम किया है। 

 

 

लोक  व्यवहार- प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला पुस्तक में  सिद्धांत दिए गए हैं 

 

खंड एक 

लोगों को प्रभावित करने के मूलभूत तरीके 

अगर शहद इकठ्ठा करना हो –तो मधुमक्खी के छत्ते पर लात न मारें 

 

सिद्धांत -1 

बुराई मत करो ,निंदा मत करो ,शिकायत मत करो –लोगों के साथ व्यवहार करने का अचूक रहस्य  

 

सिद्धांत -2 

सच्ची तारीफ करने की आदत डालें –जो यह कर सकता है उसके साथ पूरी दुनिया है 

 

सिद्धांत -3 

सामने वाले व्यक्ति में प्रबल इच्छा जगाएं। 


खंड दो 

 

लोगों का चहेता बनने के  छह तरीके –

 

हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएं 

 सिद्धांत -1 दूसरे लोगों में में सचमुच रूचि लें – तत्काल प्रभावित करने का आसान तरीका 

 

तत्काल प्रभावित करने का आसान तरीका

 सिद्धांत -2 मुस्कुराएं 

 

अगर आप यह नहीं कर सकते हैं तो मुश्किल में हैं 

सिद्धांत -3 –याद रखें किसी व्यक्ति का नाम सबसे महत्वपूर्ण और मधुरतम शब्द होता है। 

 

अच्छा वक्ता बनने का आसान तरीका 

सिद्धांत -4 अच्छे श्रोता बनें। दूसरों को खुद के बारे में बातें करने के लिए प्रोत्साहित करें। 

 

लोगों की दिलचस्पी कैसे जगाएं 

सिद्धांत -5  सामने वाले व्यक्ति की रूचि के विषय में बात करें। 

 

किस तरह लोगों को तत्काल आकर्षित करें 

सिद्धांत -6 सामने वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण कराएं -और ईमानदारी से कराएं। 

 

खंड तीन 

लोगों से अपनी बात कैसे मानवाएँ 

बहस से कोई फायदा नहीं होता 

सिद्धांत -1 बहस से एक ही फायदा हो सकता है और वह है इससे बचना। 

 

दुश्मन बनाने का अचूक तरीका – और इससे कैसे बचा जाये 

सिद्धांत -2 दूसरे व्यक्ति के विचारों के प्रति सम्मान दिखाएँ। 

 

यह कभी न कहें की ,आप गलत हैं अगर गलती आपकी हो ,तो मान लें 

सिद्धांत -3  अगर गलती आपकी हो ,तो तत्काल और पूरी तरह अपनी गलती मान लें। 

याद रखें लिंकन ने क्या कहा था :एक गैलन सिरके के बजाय शहद की एक बूँद से ज्यादा मक्खियाँ पकड़ी जा सकती है। 

 

सिद्धांत -4 दोस्ताना तरीके से शुरुआत करें। 

 

सुकरात का रहस्य 

सिद्धांत-5 सामने वाले व्यक्ति से तत्काल हाँ ,हाँ  कहलवाएं। 

 

शिकयतों से निपटने का आसान तरीका 

 

सिद्धांत-6 सामने वाले व्यक्ति को ज्यादा बातें करने दें। 

 

सहयोग हासिल कैसे किया जाए 

सिद्धांत-7  दूसरों व्यक्ति को यह लगने दें की यह विचार उसी का है।

 

एक फार्मूला जो आपके लिए चमत्कार कर दे 

 

सिद्धांत -8 ईमानदारी  सामने वाले व्यक्ति का नजरिया समझने की कोशिस करें। 

 

लोग क्या चाहतें है ?

सिद्धांत -9 सामने वाले व्यक्ति के विचरों और इच्छाओं के प्रति सहानभूति पर्दर्शित करें। 

 

हर व्यक्ति यह आग्रह पसंद करता है 

 

सिद्धांत -10 आदरसवादी सिद्धांतों का सहारा लें। 

 

फिल्मों और टीवी में यह होता है ,आपसे क्यों नहीं ?

सिद्धांत-11 अपने विचारों को नाटकीय तरीके से प्रस्तुत करें। 

 

जब कुछ और काम न आए तो यह करें 

 

सिद्धांत-12 चुनौती दें। 

 

खंड चार 

 

ठेस पहुंचाए बिना लोगों को कैसे बदलें 

 

अगर गलती ढूंढनी है तो ऐसे ढूंढे

 

सिद्धांत -1 

तारीफ और सच्ची प्रंशंसा से बात शुरू करें।आलोचना करें , पर ऐसे की सब आपकी तारीफ करें 

 

सिद्धांत -2 

 

लोगों की गलतियां सीधे तरीके से न बताएं-पहले अपनी गलतियां बताएं 

 

सिद्धांत -3 

 

किसी की आलोचना करने से पहले अपनी गलतियां बताएं। कोई नहीं चाहता की आप उस पर हुक्म चलाएं 

 

सिद्धांत -4 

 

सीधे आदेश देने के बजाय –प्रश्न पूछें –सामने वाले व्यक्ति को अपनी लाज रखने दें 

 

सिद्धांत -5 

सामने वाले व्यक्ति को अपनी लाज रखने दें –सफलता के लिए लोगों को प्रेरित करने की विधि 

 

सिद्धांत -6

 

थोड़े से सुधार की भी तारीफ करें और हर सुधार पर तारीफ करें। दिल खोल कर तारीफ करें और

 मुक्त कंठ से सराहना करें बुरे को भला नाम दे दें 

 

सिद्धांत -7 

 

सामने वाले व्यक्ति को एक ऐसी इमेज दे दें ,जिसे वह सही साबित करना चाहे। गलती सुधारना आसान लगना चाहिए 

 

सिद्धांत -8 

 

प्रोत्साहित करें– यह बताएं की गलती सुधारना आसान है। वह तरीका जिससे लोग आपका काम खुशी खुशी कर दें

 

सिद्धांत -9 

सामने वाले व्यक्ति को कोई काम इस तरह सौंपे की वह आपका कहा काम खुशी-खुशी कर दे। 

 

 

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New latest products

NEW LATEST PRODUCTS OF SAFE SHOP -आर्थिक विशेषज्ञों की राय में आगामी 10 वर्षों में अमीरों की संख्या 1 करोड़ से भी ऊपर पहुँच जाएगी।

विश्व प्रशिद्ध अर्थशास्त्री पॉल जेन पिंजर के अनुसार- अमीरों की संख्या में यह बढ़ोतरी Direct selling व्यवसाय के चलते होगी। आने वाले वर्षों में वर्ष 1990 के मुकाबले हमारी आर्थिक उछाल आएगा तथा इंटरनेट लाखों लोगों के लिए रोजगार मुहैया का माध्यम बनेगा। 

 

प्राकृतिक और नेचुरल। आप इस प्रोडक्ट्स को खरीदकर पार्ट टाइम एक बिज़नेस भी कर सकते हैं जो आपके फुल टाइम नौकरी या बिज़नेस पे आगे चलकर भारी पड़ेगा। विशेष जानकारी के लिए कमेंट बॉक्स में अपना मोबाइल नंबर छोड़ दें , या मेल कर सकते हैं हैं -mail id -kadvepravachan73.com  

आपके मन में जो भी सवाल हों आप पूछ सकते हैं। यह कंपनी पिछले 18 साल से धुआंधार काम कर रही है। 

 



एक बार मीटिंग के बाद एक वयक्ति के बाद आया और पूछा -अगर हम ईमानदारी से बात करें, तो इस काम को करने के लिए कुछ विशेष किस्म के लोगों की आवश्यकता होती है। जो आपने हासिल किया है वो हर कोई हासिल नहीं कर सकता। मैंने उसे जवाब दिया -आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं इस काम को कुछ विशेष तरह के  ही कर सकते हैं। ऐसे लोग जो सुनने और सिखने के लिए तैयार हों और मेरा यकीन है की आप इसे कर सकते हैं। 


बिज़नेस किसके लिए है ?


अगर आप आमिर होते तो क्या आप तब भी वही स्कूल में पढ़ाते जिस स्कूल में अपने बच्चों को भेज रहे हैं ?
क्या आप अमीर होते तो क्या आप वही कपडे पहनते जो आप अभी पहन रहे हैं ?


क्या आप अमीर होते तो आप उसी घर में रहते जहाँ अभी रह रहे हैं ?
अगर आप आमिर होते तो क्या उसी गाड़ी से चलते जिस से चल रहे हैं ?
क्या आपके पास प्रयाप्त समय है ,अपने बच्चों के साथ बिताने के लिए ?
क्या आप boss से परेशान हैं ? 
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मुट्ठी में तक़दीर

मुट्ठी में तक़दीर

मुट्ठी में तक़दीर

यह प्रेरक उद्धरण मैंने लिया रॉबिन शर्मा जी के शानदार किताब मुट्ठी में तक़दीर ( THE MASTER MANUAL ) व्यक्तिगत तथा पेशेवर महानता के जीवन बदल देने वाली मारदर्शिका-

मुट्ठी में तक़दीर-

आप जब यह किताब अपडेंगे तो सच में आपको अहसास हो जायेगा की आपकी तक़दीर आपकी मुट्ठी में हैं।

 

पृथ्वी पर कोई वेवजह लोग नहीं हैं,इससे मेरा मतलब यह है की हम में से हरएक व्यक्ति जो यहाँ एक वजह और खास मिसन से है।

-रॉबिन शर्मा

आप पानी में गिरने से नहीं डूबता ,आप उसी में रह जाने की वजह से डूबता हैं।

-एडविन लुइस कोल।

 

एक बड़ी पहाड़ी पर चढ़ने के बाद एक व्यक्ति हमेशा यह पाता है की चढ़ने को और भी कई पहाड़ियां बाकि हैं। मैं विश्राम के लिए एक पल रुका हूँ,ताकि मैं अपनी चारों ओर फैली शानदार  द्रिश्यवाली की एक झलक ले सकूँ और अपने द्वारा अब तक तय की गई दुरी पर नजर फेर सकूँ। किन्तु मैं केवल एक पल ही रुक सकता हूँ,क्यूंकि आजादी के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। मैं रुके रहने की जोखिम नहीं ले सकता,क्यूंकि ,मेरा लम्बा सफर अभी सम्पत नहीं हुआ है। 

-नेल्सन मंडेला। 



जितना तेज चमकना आपकी नियति रही है,यदि आप उतनी तेजी से नहीं ,चमक सकते,तो आप न केवल खुद के साथ विश्वासघात करते हैं,बल्कि दुनिया को कमतर छोड़ देते हैं,जितनी यह  हो सकती थी। 

-रोबिन शर्मा। 

बेहतर जानकारी के साथ आप बेहतर विकल्प चुन सकते हैं और जब बेहतर विकल्प चुनेंगे ,तो बेहतर नतीजे दिखेंगे।

-रॉबिन शर्मा

 

एक अर्थहिन, लक्ष्यहीन तथा उद्देश्य्हीन जीवन जीने को सहमत होने जैसा अक्षम्य और कुछ नहीं होता। 

-हेलन केलर। 

आप यह जान लें की जोखिम हमेशा फायदेमंद होती है। आप यह जान लेते हैं की क्या करना है और क्या नहीं। 

– जोनस साल्क।

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शिखर तक पहुँचने के सात क़दम

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जो व्यक्ति सबकुछ हासिल करने की कोसिस करता है ,वह  हासिल नहीं करता। 

 – रोबिन शर्मा। 

हम जो पाते हैं ,उससे अपनी जीविका चलाते हैं ; हम जो देते हैं,उससे अपना जीवन बनाते हैं। 

– सर विंस्टन चर्चिल। 

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Kadve pravachan-अपने घर बहुरानी मत लाना

Kadve pravachan- कड़वे प्रवचन को ज़रूर सुनें । इसे सुनने के बाद आप अपने रिश्ते में बहुत सुधार होगा ।इसे ज़रूर सुनें । 
https://youtu.be/_f8llc9ol1A

 

अपने घर बहुरानी मत लाना । 

 

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कड़वे प्रवचन -kadve pravachan

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ?

 

लगनशील व्यक्तियों के पुरस्कार उस कष्ट से ज़्यादा बड़े होते हैं , जो विजय से पहले ज़रूर आता है । 

                                              – टेड एंग्ट्रामें 

 

शब्दों में वक़्ता की मानसिक अवस्था, चरित्र एर स्वाभाव की झलक दिख जाती है ।

       – पलूटार्क

ऐसे शब्द चुने जो आपको अपने लक्ष्य की दिशा में प्रेiरित करें ।

            – जेफ़ केलर 

मुस्कान चेहरे को सुंदर बनाने का सबसे सस्ता उपाय है । 

                       अज्ञात ।

अगर आप कहते हैं की आप अच्छे हैं या आपके साथ सबकुछ अच्छा है , तो ईश्वर आपके शब्द सुन लेगा और सच कर देगा । 

     – एल्वा वहिलर विलिकोक्स । 

बच्चों की तरह ही मुश्किलें भी पालने से बड़ी होती है – लेडी हौलैंड । 

 

हंसी के हमले के खिलाफ कुछ भी खड़ा नहीं हो सकता है।

हमेशा सही करो। यह कुछ लोगो को संतुष्ट करेगा और बाकी लोगों को चौंका देगा।

यदि आप करेंगे तो अपने कपड़े में सावधान रहें, लेकिन एक साफ आत्मा रखें।

किसी भी तरह से एक टूटा वादा बेहतर नहीं है।

कोशिश करके हम आसानी से विपत्ति सहन कर सकते हैं। एक और आदमी, मेरा मतलब है।

कपड़े आदमी की पहचान बनते हैं। नग्न लोगों के समाज पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

साहस डर का प्रतिरोध है, डर की निपुणता, डर की अनुपस्थिति नहीं है।

शिक्षा में मुख्य रूप से जो हम अनजान हैं, शामिल होते हैं।

एक अच्छे उदाहरण की परेशानी के मुकाबले कुछ चीजें कठिन होती हैं।

सब कुछ इसकी सीमा है – लौह अयस्क को सोने में शिक्षित नहीं किया जा सकता है।

                            -mark twain.

 

 

 

jain muni tarun sagar ji maharaj ke Kadve pravachan-अपने घर बहुरानी मत लाना । 

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छठवाँ स्तर

छठवाँ स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

छठवाँ स्तर तक विकाश करने वाले लोग विरले ही होते हैं। अगर आपने लोगों को इस स्तर तक लेन में मदद की है ,उनके साथ सर्वाधिक प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। वे ऐसे लीडर्स हैं ,जो कहीं भी सफल हो सकते हैं। उनके पास ऐसी योग्यतयें व् दक्षताएं हैं ,जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या उद्योग तक सिमित नहीं हैं।  

अपने जीवन कल में अगर ईश्वर आपको ऐसे एक या दो व्यक्ति प्रदान करता है ,तो आपमें प्रबल सामूहिक क्षमता होगी। जो आपकी व्यक्तिगत क्षमताओं से कहीं आगे जाकर प्रभाव छोड़ सकती है। 

 

स्तर जितना ऊँचा होगा ,वहाँ पर उतने कम लोग होंगे। आप यह भी पाएंगे की स्तर बढ़ने के साथ छलाँग ज्यादा मुश्किल होती जाती है। ऊँचे स्तर  पर पहले वाले स्तर से ज्यादा संकल्प,समर्पण और लगन की जरुरत होती है। 

 

आप जिन व्यक्तियों का विकास कर रहे हैं ,उनमें से प्रत्येक के बारे में आपको कठोर निर्णय लेना होंगे। सिर्फ छठे स्तर तक पहुँचने वाले व्यक्ति को छोड़ कर। जब आप लोगों का विकाश करते हैं ,तो आप हर व्यक्ति से उस स्तर पर मिलते हैं जहाँ पे वह होता है ,आम तौर पर पहले स्तर पर।

 

इसके बाद आप अपनी यात्रा  सुरु करते हैं। आपका काम यह है की जब तक वह व्यक्ति आगे बढ़ना और विकास करना चाहे ,तब तक आप उसके साथ चलें और उसकी मदद करें। जब वह आगे बढ़ना बंद कर दे ,

तब आपको कठोर निर्णय लेना पड़ता है-आपको उस व्यक्ति को पीछे छोड़ना होता है। हो सकता है आप उससे सम्बन्ध बनाये रखें,परन्तु अब उसका विकास करना छोड़ देते हैं। 

 

लोगों के विकासकर्ता के रूप में यह बहुत मुश्किल काम होता है। हम लोगों को इतना ज्यादा समय , ध्यान,और परवाह देते हैं की किसी को पीछे छोड़ना अपने बच्चे को छोड़ने की तरह मुश्किल होता है ,परन्तु आप किसी को सबसे ऊँचा स्तर तक विकास करने के बाध्य नहीं कर सकते हैं।

 

आपको उस व्यक्ति को उसी के स्तर पर छोड़ने का कठोर निर्णय लेना होता है। यह मुश्किल होता है ,परन्तु लोगों का विकास करने के लिए यह कीमत  चुकाना ही पड़ता है। 

 

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लीडर्स के छह

बहुमुखी शिक्षा क्या है

 

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लीडर्स के छह स्तर

लीडर्स के छह स्तरकिसी भी लीडर्स का विकास उसके स्तर के अनुसार ही होता है। जॉन सी. मैक्सवेल के अनुसार लीडर्स के छह स्तर होते हैं। 

 

पहला स्तर : धीमा विकास 

कुछ लोग बहुत धीमी गति से विकास करते हैं और उनके विकास में दिशा नहीं होती है। ये लोग इतनी धीमी गति से यह करते हैं की नजर ही नहीं आता है। हो सकता है वो अपने काम में निपुण हों,परन्तु वे कभी उभर कर नहीं आ पाते हैं। 

 

दूसरा स्तर : विकास उन्हें सक्षम बनाता है 

कई लोग यह गलती से यह मान लेते हैं अपने काम को अच्छी तरह से करना ही उनके विकास का अंतिम लक्ष्य है। ऐसा नहीं है। अच्छे विकासकर्ता या व्यक्तिगत विकास की प्रबल इच्छा के बिना लोग विकास की प्रक्रिया में यहीं रुक जाते हैं। 

 

तीसरा स्तर : विकास उन्हें स्वयं को बहुगुणित करने में समर्थ बनाता है 

विकास के इस स्तर पर लोग अपने मूल्य में वृद्धि करते हैं ,क्यूंकि वे अपनी विशेसग्यता के क्षेत्र में दूसरों को प्रशिक्षित करने में समर्थ हैं। जो लोग तकनिकी रूप से शसक्त होते हैं ,परन्तु जिनमें लीडरशिप की योग्यताएं काम होती हैं ,

 

वे ऐसा करने में समर्थ होते हैं ,प्रबल लीडरशिप योग्यताओं वाले दूसरे लोग यह कर सकते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं काम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं कम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,वे अगले स्तर तक आगे बढ़ जाते हैं। 

 

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लीडर के अनिवार्य २१ गुण

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चौथा स्तर : विकास उन्हें ऊँचे स्तर वाले काम तक ले जाता है 

तीसरे स्तर से चौथे स्तर तक की छलाँग मुश्किल होती है। इसके लिए यह जरुरी होता है की लोग व्यक्तिगत और व्यवसायिक दोनों दृष्टियों से विकाश करने हेतु स्वयं को समर्पित करने के लिए तैयार हों।

 

जब वे अपनी सोंच और अनुभव को व्यापक बना लेते हैं ,तो वे ज्यादा सक्षम बन जाते हैं और अपने संगठन तथा लीडर्स के लिए अधिक मूलयवान भी बन जाते हैं। 

पांचवां स्तर  : विकाश उन्हें दूसरों को ऊंचाई पर ले जाने में समर्थ बनाता है 

इस स्तर पर महान लीडर्स उभरते हैं। वे दूसरों के सच्चे विकाशकर्ता होते हैं और वे सिर्फ अपने लीडर्स तथा संघठन के मूल्यों में वृद्धि नहीं करते हैं-वे इसे बहुगुणित करते हैं। 

 

 

छटवां स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

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नेटवर्क मार्केटिंग

आज 21 वी सदी का सबसे क्रन्तिकारी तरीका है नेटवर्क मार्केटिंग है। लेकिन लोगों के मन में बहुत से सवाल होते हैं इन कंपनियों को लेकर। लेकिन मैं आपको बता देना चाहता हूँ की सच में नेटवर्क मार्केटिंग एक बहुत ही शानदार और बिज़नेस की तरह ही है

जिसे आप बहुत कम इन्वेस्टमेंट के साथ शुरुआत कर सकते हैं। इस बिज़नेस की खास बात यह है की आपको जो भी चैलेंज आने वाला है पहले ही पता चल जाता है और परिणाम भी।


नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी आज के समय की जरुरत है क्यूंकि आपको पता है जॉब की मारामारी और यदि आपका कैसे करके लग भी जाये तो बॉस जीना हराम कर देता है।

तो यदि आपको समय की आजादी और पैसे की आजादी चाहिए तो आपको अपना नेटवर्क बनाना पड़ेगा। और नेटवर्क बनाने के लिए आपको सीखना पड़ेगा।

 

चेतावनी -एक महत्वपूर्ण बात इसमें भी और बिज़नेस की तरह ट्रेनिंग की जरुरत होती है और उसके बाद भी अन्य व्यवसाय के तरह ही कोई गरंटी नहीं होती है की आप सफल हो ही जाएँ।

 

स्कोप इन इंडिया -अगर मैं भारत में बात करें तो बहुत कम लोग नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में जुड़े है अगर एक सर्वे के अनुसार और एक किताब में छपे लेख के अनुसार भारत की जनसंख्या है 1 अरब 30 करोड़ लेकिन इसमें सिर्फ ५ करोड़ लोग ही नेटवर्क मार्केटिंग में ज्वाइन हुए हैं और सफल चंद मुट्ठी भर लोग।

लेकिन धीरे-धीरे सफल लोगों की संख्या बढ़ रही हैं और लोग जागरूक भी हो रहे हैं।

कौन सी कंपनी भागती है– आप भी सोंचते होंगे की कौन सी कंपनी में जुड़े और कौन से में नहीं। मैं इस परिस्थिति को समझ सकता हूँ ,क्यूंकि मुझे भी नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी में आने पहले ऐसी बहुत सी बातों का असमंजस था।


लेकिन आप भी जानते हैं की दुनिया में चीजें एक सामान नहीं होती है। अगर रूपया असली है तभी उसका नकली बनता है। एक पानी का गिलास होता है और एक बुलेट प्रूफ सीसा होता है ,पानी के गिलास वाला सीसा तुरन्त टूट जाता है और बुलेट प्रूफ सीसा पे आप गोली भी मारो तो टूटता नहीं है।

 

इससे यह सिद्ध होता है की दुनिया में दो तरह की कम्पनियां होती है एक रहने वाली और एक बहगने वाली। कंपनी के बग्ने के पीछे मूलतः कुछ कारण होते हैं –

जो गैर क़ानूनी हो – आपको बता दें वैसे तो भारत सरकार भी बहुत प्रयास कर रही है की ग्राहक को जागरूक करें और समय-समय पर लोगों के लिए advisroy और gudielines पारित करती रहती है। आपको बता दें की अभी-अभी कुछ दिन पहले कंस्यूमर अफेयर ने गाइडलाइन्स निकला है की

अगर ये-ये पॉइंट्स है तो ये कंपनी लीगल है 209 कंपनियों की लिस्ट निकाला है।

 

जो घाटे में आ जाये – नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी ही नहीं कोई भी कम्पनी बंद हो अजयेगी यदि वो घाटे में आ जाये तो।

जिसका मैनजेमेंट फेल हो जाये – यदि कम्पनी का मैनजमेंट सही ना हो तो।

वो कंपनी को जो बहुत सारा पैसा इकठ्ठा कर ले -ऐसी कम्पनी जो आपको प्रयास करती है की आपको कुछ करना नहीं पड़ेगा बस आपको तो जुड़ जाना है और बैठे-बैठे पैसा आएगा। हर महीना निश्चित तौर पर आपको पैसा आता रहेगा।

आपको पता होना चाहिए की नटवर्क मार्केटिंग भी एक आम बिज़नेस की तरह ही है और इसमें भी अप -डाउन होता है अगर कोई फिक्स पैसे देने का वादा करती है तो आप सावधान हो जाएँ।

 

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अपलाइन पुराण

उठना सीखो 

21 वी सदी का व्यवसाय

 

 

ऐसी कम्पनी का मकसद ही भागने का होता है। लालच में ना आएं। अपनी अक्ल लगाएं बिना काम के पैसा नहीं आता काम तो आपको करना ही होगा।


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आकर्षण के नियम

आकर्षण के नियम

एक महान किताब

सप्ताह के सात दिन लें और आकर्षण के नियम के शक्तिशाली इस्तेमाल से आप पूरी जिंदगी बदल सकते हैं ।अगर आप चाहें तो सिर्फ एक दिन से शुरुआत करें और कुछ सप्ताह तक उस दिन को अपनी आदत बना लें ,इसके बाद दूसरा दिन जोड़ें। वही करें ,जो आपके लिए सबसे अच्छी तरह काम करता हो ,क्यूंकि अहम् बात यह है की आप इसे करें। 

सुविचार वाला सोमवार 

 

हर सोमवार यह इरादे करने का दिन है की आप सिर्फ अच्छे विचार ही सोंचेंगे। अपने लिए अच्छे विचार  सोंचें दूसरे के लिए अच्छा सोंचें। इंसान हर दिन 50000 से ज्यादा विचार सोंचता है ,इसलिए आपके पास मौके हैं की आप 50000 से भी ज्यादा अच्छे विचार सोंच सकते हैं। 

प्रशंसा वाला मंगलवार -

हर मंगलवार प्रशंसा ,प्रशंसा और केवल प्रशंसा का दिन है। मौसम ,अपने कपड़ों, परिवहन के साधनों ,महान अविष्कारों ,अपने घर ,अपने भोजन, बिस्तर ,कामकाजी सहकर्मियों ,वेटर, स्वास्थ्य , शरीर , आँखों ,कानों और अपनी सभी इन्द्रियों की प्रशंसा करें। 

खास तौर पर अपने अतीत और भविष्य के बेहतरीन समय की प्रशंसा करें। और अंत में यह प्रशंसा करें की हर प्रशंसा वाले मंगलवार को आप एक आश्चर्यजनक जीवन का सृजन कर रहे हैं !

 

सतकार्य वाला बुधवार -


हर बुधवार सृष्टि के बैंक के खाते को अच्छे कर्मों से भरने का दिन है। जब आप सत्कार्य वाले बुधवारों को सबकुछ देते हैं , श्रिस्टी प्रतिक्रिया और यह  सप्ताह का अब तक का सबसे अच्छा दिन बन जायेगा। 

 

धन्यवाद वाला गुरुवार -

 

हर गुरुवार धन्यवाद कहने और महसूस करने ,  तरीकों से आप कर सकते हैं। लोगों और घटनाओं की सूचि बनायें ,जिन्हें आप धन्यवाद कहना चाहते हैं। धन्यवाद-एक शब्द आश्चर्यजनक शक्ति है और इसे बोलकर इसमें शक्ति बाहरणे की जरुरत है। धन्यवाद !

 

अच्छी भावनाओं वाला शुक्रवार

हर शुक्रवार आपके लिए वह दिन है ,जब आप अपने भीतर की सभी अच्छी भावनाओं का उपयोग और विस्तार करते हैं।

आज जब आप दिन में आगे बढ़ें ,तो पूरा ध्यान इस बात पर दें की आप कैसा महसूस कर रहे हैं। अपने अंदर अच्छे भावनाओं को भरते रहें बार-बार। आप अच्छी बहवनाओं से इतने ओत-प्रोत हो जायेंगे की आप दिन भर प्रफूल्लित रहेंगे।

 

तनाव से मुक्ति वाला शनिवार

हर शनिवार आपके लिए वह दिन है,जिसमें आप खुद को किसी पक्षी जितना स्वतंत्र महसूस करें ; जितना बचपन में करते थे। खेलें!मौज करें ! यह दिन आपके अंदर आनंद खोजने का दिन है। याद रखें की जीवन कभी भी न खत्म होने वाला खेल है और आप यह खेल अनंत काल तक खेलने वाले हैं !

सब अच्छा करने वाला रविवार

हर रविवार एक पल निकालकर पिछले सप्ताह को देखें और सभी अच्छी चीजों को याद करें। फिर अपने भविष्य की ओर ध्यान दें। आने वाले सप्ताह को देखें और उसमें होने वाले सभी अच्छी चीजें देखें।

अब आप आराम कर सकते हैं क्यूंकि आपका सृजन आदर्श है और आप संतुष्ट है की यह सब अच्छा है।

 

 

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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

 

 

 

आज के पोस्ट में मैं आपके लिए एक शानदार किताब से कुछ अंश लिया हूँ जिसका किताब का नाम है दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार , इसके लेखक हैं रॉन्डा बर्न

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आज के सुविचार

आज के सुविचार-चाहे आप जो भी सोंचें ,आपका हर दिन बेहतर से बेहतर बनता जा रहा है। कोई भी इंसान पीछे की तरफ नहीं जा सकता है। आप सिर्फ आगे जा सकते हैं और ऊपर की तरफ ही जा सकते हैं। 

जब आप आपको महसूस हो की आपकी परिस्थितियां बेहतर नहीं हो रही हैं,तो खुद को याद – आप जो थे वो आज नहीं हैं। आज कहीं ज्यादा अच्छे हैं। 

 

 

आज के सुविचार-आप जिस भी शब्द का इस्तेमाल करते हैं ,इसमें शक्तिशाली अंकुर होता है। यह अंकुर उस दिशा में फ़ैल जाता है,जिधर आपका शब्द संकेत करता है। अंततः  विकसित होकर भौतिक अभिव्यक्ति में बदल  जाता है। मिसाल के तौर पर  चैतन्य आनंद की कामना करते हैं। इसलिए आनंद शब्द के दोहराव से  कम्पन्न की गुणवत्ता तय होती है।

 

जिसे आनंद का अंकुर फैलता है और एक समय ऐसा आता है, आपका पूरा अस्तित्व आनंदमय हो जाता है। यह कोरी कल्पना नहीं ,बल्कि सत्य है।

  •                                         – जेणेवीव बेहरेंड ( 1881 -1960 ) यॉर इनविजिबल पावर।

दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

 

1 प्रतिसत फार्मूला -परिवर्तन का समय आ गया है हम सभी सैंकड़ों चीजों में 1 प्रतिसत बेहतर बन सकते हैं। 1 प्रतिसत फार्मूला का प्रयोग आप अपनी जिंदगी के हर क्षेत्र में कर सकते हैं। हर कोई महान नहीं बन सकता ,लेकिन हर कोई जहाँ भी है,उससे बेहतर जरूर बन सकता है। 

 

बदलाव के लिए तैयार रहें – जब कोई बच्चा छोटा रहता है और वो अपनी माँ की गॉड में आराम महसूस करता है लेकिन जैसे ही कोई उसे माँ की गोद से लेने की कोसीस करता है तो वो बच्चा रोने लगता है।

 

क्यूंकि वो बदलाव को सहन नहीं कफर पाता है और यही हमारी आदत बड़े होने पर भी बनी रहती है,थोड़ा सा बदलाव होता नहीं है की चीखना-चिल्लाना सुरु कर देते हैं वो बच्चे की तरह ही। लेकिन हमें याद रखना चाहिए अब आप बच्चे नहीं रहे। आप बड़े हो चुके हैं इसलिए बदलाव के लिए तैयार रहें।

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पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?

पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?

FROM WIKI

पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?
महिलाओं को यह याद रखना चाहिए की पुरुष दूसरे गृह से आये हैं इसलिए उनका सोंचने का तरीका अलग है। बिना मांगी सलाह देने या हानिरहित आलोचना से भी पत्नी अनजाने में ही  पति का दिल दुखा सकती हैं। 


निचे कुछ वाक्य दिए गए हैं जिन्हें सुनकर पुरषों को चोट पहुँचती है और ऐसा लगता है जैसे उनकी जिंदगी पर नियंत्रण करने की कोसिस हो रही है –

    1. तुमने इसे खरीदने की बात सोंच कैसे ली ? तुम्हारे पास तो पहले से ही ऐसी शर्ट है। 

    2. बर्तन अभी गीले हैं। जब वे सूखेंगे तो उनमें धब्बे पड़ जायेंगे। 

    3. तुम्हारे बाल बढ़ हैं ,इन्हें कब कटवाओगे ?

    4. वहां पर कार कड़ी करने की जगह है,कार को उसी तरफ मोड़ लो। 

    5. तुम अपने दोस्तों के साथ समय गुजरना चाहते हो ?और मेरा क्या होगा ?

    6. तुम्हें इतना ज्यादा काम नहीं करना चाहिए। 

  1. इस चीज को यहाँ मत रखो। यह गुम हो जाएगी। 

  2. तुम्हें प्लम्बर को बुला लेना चाहिए। वह जनता होगा की इसे कैसे ठीक किया जाये। 

  3. हम टेबल खली होने का इंतजार क्यों कर रहे हैं ?क्या तुमने रिजर्वेशन  नहीं करवाया था ?

  4. तुम्हें बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए। उन्हे तुम्हारी कमी अखरती है। 

  5. तुम बहुत तेज गाड़ी चलाते हो। धीमे चलना चाहिए नहीं तो एक दिन जुर्माना जरूर होगा। 

  6. अपनी उँगलियाँ मत खाओ। देखने वाला तुम्हें फूहड़ समझेगा। 

  7. तुम्हें थोड़ा पहले बताना चाहिए था। अब मैं अपना सारा काम छोड़कर तुम्हारे साथ लंच पर तो नहीं चल सकती। 

  8. तुम्हारे शर्ट तुम्हारे पेंट से मैच नहीं कर रही है। 

बिल ने तीसरी बार फोन किया था। तुम उससे कब बात करोगे ?

 

 

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महिलाओं को पुरुषों की कौन सी बात पसंद नहीं आती ?

 

अगर आप महिला हैं तो मैं आपको यही सुझाव दूंगा की आप अगले सप्ताह अपने पति को किसी किस्म की बिना मांगी सलाह न दें ,उसकी किसी तरह की आलोचना न करें। इसमें न सिर्फ आपका मूड अच्छा रहेगा ,बल्कि वह आपका मूड भी अच्छा रहेगा। 

 


अगर आप पति हैं तो मैं आपको सलाह देना चाहूंगा की आप अगले सप्ताह यह करें ,जब भी आपकी पत्नी बोले तो उसकी भावनाओं को समझने की कोसिस करें। पूरी बात सुने। 

 

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आज के अनमोल विचार

भगत सिंह एक ऐसा नाम जो सुनकर हरेक भारतीय  गर्व से भर जाता है और खून में उबाल आ जाता है। एक क्रांतिकारी जिसने पूरी अंग्रेज सेना  हिला डाला। जिन्होंने हर एक भारतीय को जगा दिया । आज भी उनके सुविचार मनुष्य के हृदय में क्रांति भर देती है ।

 

 

भगत सिंह के विचार

भगत सिंह के विचार- जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती दूसरों के सहारे तो सिर्फ जनाजे उठते हैं।

 

व्यक्तियों को कुचल कर आप उसके विचारों को नहीं मार सकते हैं। 

 

जो भी व्यक्ति विकास के खड़ा है उसे  हर एक  रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी ,उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी। 

 

अगर मुझे सरकार बनाने का मौका मिलेगा तो किसी के पास प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं होगी सबसे पास काम होगा और  धर्म व्यक्तिगत चीज  होगी सामूहिक नहीं।

 

सरफ़रोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है ,देखना है अब जोर कितना बाजुए कातिल में है  

 

सच में इनके जैसे महामानव कभी- कभी जन्म लेते है । लेकिन आज के देश की हालत को देख कर उनकी आत्मा को भी तकलीफ़ होती होगी ।

 

सभी नेता भी अपने-अपने पेट भरने में लगे हैं ।आज देश आज़ाद होने के कई साल के बाद भी काला बाज़ारी, स्कैम, घोटाले से आज़ादी नहीं मिल पाई है । 

काश आज ज़िंदा होते हम सबके चहेते ,लोकप्रिय नेता भगत सिंह ।तो हमें ऐसा नहीं लगता है की देश की ये हालत होने देते । 

आज हम सभी चाहते हैं भगत सिंह होने चाहिए और जन्म लेने चाहिए पर पड़ोसी के घर में , अपने घर में नहीं । 

हम सभी चाहते हैं देश की गंदगी साफ़ होना चाहिए पर साफ़ करेगा कौन ? क्या हमें पहल नहीं करनी चाहिए ? 

अभी ऐश करने के दिन हैं 

दिन में १० सेल्फ़ी लो 
इन्स्टग्रैम पे ,फ़ेस्बुक पे लाइक गिनो मेरे २५ ज़्यादा हैं तुमसे ।
वहतसप्प स्टैटुस १० बार चेंज करो अभी तो खेलने कूदने के दिन हैं ।
पार्टी करो , दारू पीओ ।टी॰वी॰ देखो रोज ६ सात घंटे रोज ।यू टूब पर धिंचक पूजा के विडीओ देखो ।सो जाओ २ बजे  उठो ।
यही तो लाइफ़ है यार , सब लोग इसी लिए जीना चाहते हैं ना तो हम अभी ऐश कर रहे हैं ।
 
लोग पागल हैं carier बना रहे हैं मंत्र तो मुझे PTA चल गया है टेन्शन नहीं लेने का ।
फिर आप ३० के हो जाओगे । रोक नहीं पाओगे ।फिर दुनिया से जाने का समय हो जाएगा ।
 
 
जागो 
इंडिया 
जागो ।
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आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति

आदत रस्सी की तरह होती है। हम हर दिन इसका एक धागा बुनते हैं और अंत में यह इतनी मजबूत हो जाती है की हम इसे तोड़ नहीं सकते। – होरेस मान 

आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति

आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति का नियम है की प्रकृति सभी आदतों को स्थायी बना देती है,ताकि एक बार आदत पड़ जाने के बाद वे अपने आप चलती रहें। यह ब्रह्माण्ड के बारे में भी उतना ही सच है , जितना की इंसान की आदतों के बारे में। 

व्यक्ति चाहे कहीं भी हो और कुछ भी हो,अपने विचार और काम करने की आदतों के कारण होता है। इस पूरी फ़ॉलोसोफी का उद्देश्य यह है की व्यक्ति ऐसी आदत डाल ले, ताकि वह वर्तमान स्थिति से आगे बढ़कर अपनी मनचाही स्थिति तक पहुँच जाये। ताकि वह जो है,उसे आगे बढ़कर व्यक्ति वह बन जाये,जो वह जिंदगी में बनना चाहता है। 

 

सभी वैज्ञानिक और कई अन्य लोग यह सच्चाई अच्छी तरह जानते हैं  प्रकृति पुरे ब्रह्माण्ड में पदार्थ और ऊर्जा के सभी तत्वों के बिच आदर्श संतुलन बनाए रखती है। पूरा बरह्माण्ड अटूट नियमों पर चलता है।

 

इस ब्रह्माण्ड की आदतें कभी नहीं बदलती है और इंसान उन्हें किसी तरह से नहीं बदल सकता है। ब्रह्माण्ड की पांच वास्तविकताएं ये है: (1 ) समय , (2 ) आकाश , (3 ) ऊर्जा, (4 ) पदार्थ और (5 ) बुद्धि। ये पांच बाकि तत्वों को व्यवस्थित आकार देती हैं और उन्हें निश्चित आदतों पर आधारित तंत्र में बदल देती है। 

 

आदत की ब्रह्मांडीय शक्ति प्रकृति की नियंत्रक है,जिसके द्वारा बाकि सभी प्राकृतिक नियम तंत्रों के माध्यम से  संयोजित, व्यवस्थित और क्रियन्वित होते हैं।  इसलिए सबसे बड़ा प्राकृतिक नियम कहा गया है। 

 

आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति – आदत की शक्ति का अर्थ स्पष्ट है। यह ऐसी शक्ति है जो स्थापित आदतों के माध्यम से काम करती है। इंसान से काम बुद्धि वाले प्राणी आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति से संचालित होकर सहज बुद्धि (instinct ) के माध्यम से अपना वंश चलते हैं।

 

सिर्फ इंसान को ही अपनी आदतें  का अधिकार दिया गया है। सिर्फ इंसान ही अपनी आदतों को अपने विचारों के अनुरूप ढाल सकता है। यह एक महत्वपूर्ण बात है,क्यूंकि इंसान को सिर्फ विचरों पर ही पूरा नियंत्रण और अधिकार मिला है। 

 

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अगर व्यक्ति डर,शंका,ईर्ष्या ,लोभ और गरीबी की सीमाओं के बारे में सोंचेगा ,तो आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति उसके विचारों को उनके भौतिक रूप में बदल देगी। दूसरी तरफ ,अगर व्यक्ति समृद्ध और प्रचुरता के बारे में सोंचेगा ,तो यही नियम उसके विचारों को उनके भौतिक आकार देने का अधिकार का इस्तेमाल करके अपनी किस्मत को आश्चर्य जनक सीमा तक नियंत्रित कर सकता है। 

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धीरूभाई अंबाणी 

16 वे साल में मैट्रिक पास करने के बाद यमन देश के ऐडन सहर में क्लर्क की नौकरी की और पेट्रोल भी भरने का काम किया था। वहां से 10 साल काम करने के बाद 1958 में मुंबई लौटे। मुंबई 15000 रुपये उधार लेकर मस्जिद बन्दर पर 300 SQUARE फ़ीट की ऑफिस से अपना व्यवसाय सुरु किया। 

 


धीरूभाई अंबाणी का विवाह कोकिला नाम की संस्कारी सुशिल महिला के साथ हुआ। उनके दो पुत्र और दो पुत्री है। दोनों पुत्रों में बड़ा मुकेश अंबाणी और छोटा अनिल अंबाणी। उन दोनों के पढाई में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी बाद में दोनों पुत्रों को व्यवसाय में शामिल कर लिया। 

 

वे सफल स्वप्नदृष्टा थे। जिन्होंने भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडिया लिमिटेड की नीवं डाली।

 

धीरे-धीरे उन्होंने पेट्रो-केमिकल्स ,इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी ,एनर्जी पावर ,रिटेल टेक्सटाइल्स ,इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज, कैपिटल मार्केटेड एंड लॉजिस्टिक में पदार्पण किया। इसी तरह से धीरूभाई अंबाणी ने जीरो से हीरो का विकास यात्रा सुरु की। शेयर बाजार को आम इंसान को आकर्षित करने का श्रेय श्री धीरूभाई अंबाणी को जाता है।


उनकी कॉंवेर्टिवल डिवेंचर की स्किम ने शेयर बाजार में लोकप्रियता के स्वर्णिम सिखर बैठा दिया। 1992 में उन्होंने रिलायंस कंपनी को सर्वप्रथम बना दिया। रिलायंस कम्पनी सर्वप्रथम ऐसी कम्पनी थी जिसने फ़ोर्ब्स मैगजीन 500 कंपनियों के लिस्ट में गौरवपूर्ण स्थान पाया। 


2000 की साल में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सर्वेक्षण और समीक्षा के अनुसार ग्रेटेस्ट क्रिएटर ऑफ़  वेल्थ इन द सेंचुरी के गौरव से धीरूभाई अंबाणी को सम्मनित किये गए।  

6 जुलाई 2002 में मुंबई की ब्रीच कैंडी अस्पताल में धीरूभाई अंबाणी  महामानव का देहांत हो गया। उनके जीवन ज्योत परम ज्योत में विलीन हो गई। 

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QUOTES OF DHIRUBHAI AMBANI –

 

बड़ा सोंचो ,तेज सोंचो ,आगे सोंचो ,आइडिआ पर किसी का एकाधिकार नहीं है। 

यदि आप दृढ़ संकल्प के साथ और पूर्णता के साथ करते हैं तो सफलता आपका पीछा पीछा करती है। 

जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं वो पूरी दुनिया को जित सकते हैं। 

समय सिमा में काम खत्म कर लेना काफी नहीं है ,मैं समय सीमा से पहले काम खत्म करने की उपेक्षा रखता हूँ। 

न शब्द मुझे सुनाई नहीं देता है। 

कठिन समय में भी अपने लक्ष्य का पीछा मत छोड़िये 

मेरी सफलता का राज मेरी महत्वकांक्षा अन्य पुरषों की इक्षा जानना है। 

अगर आप गरीबीमें  जन्म लेते हैं इसमें आपकी कोई गलती नहीं है पर यदी आप गरीबी 

में  मरते हैं तो आपकी गलती है। 

फायदे कमाने के लिए  न्योते की जरुरत नहीं होती। 

हम दुनिया को साबित कर सकते हैं की भारत एक सक्षम राष्ट्र है। हम भारतियों को प्रतियोगिता से दर नहीं लगता है। भारत उपलब्धियां प्राप्त करने वाला देश है। 

 

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जादुई घंटी

जादुई घंटीएक नदी के तट पर एक बहुत सुन्दर गाँव था। गांव के लोग मेहनत मजदूरी करके गुजारा करते थे। उस गॉंव में रामु नाम का गरीब चरवाहा था। वो आपकी मधुर आवाज के लिए प्रसिद्ध था,वो हर दिन गाना गाकर गाँव के सभी भेड़-बकरियाँ चराने पास के जंगल में ले जाता था।

 

जंगल में स्थित एक पर्वत था और उसकी चोटी पर एक विशाल पेड़ था। रामु इस पेड़ की छावों में गाना गाता और रामु सारी भेड़-बकरियाँ पे नजर रखता था। शाम होते ही रामु वापस गांव आ जाता था और सभी भेड़-बकरियाँ को गांव के सभी लोगों को सौंप देता था।

 

दिन भर कड़ी धुप में भेड़-बकरियाँ को चराने के लिए उसे हर घर से एक सिक्का मिलता था। ये सिक्का को रामु घर ले जाता था और अपने भाई और माँ का भूख मिटाता था ,क्यूंकि जो सिक्के कमाकर लाता था उसके कारण वो घर के लिए जरुरी चीजें ला पाता था,लेकिन छोटा भाई का अच्छा खाना खाने का दिल करता था वो हर दिन रुखा-सूखा खाकर ऊब चूका था।

 

यह बात रामु समझता था लेकिन वह कर भी क्या सकता था ? अगले सुबह उठकर फिर से वह भेड़-बकरियाँ चराने फिर से जंगल के चोटी पर पहुंचा तो उसने देखा की एक लकड़हारा उस पेड़ को काट रहा था जिसके निचे वह बैठकर भेड़-बकरियाँ चराता था। वह चिंतित हो गया। लेकिन वह एक तरकीब लगाया – अरे लकड़हारा भाई क्या तुम्हें नहीं पता है की इस पेड़ को श्राप है की कोई भी इस पेड़ को कटेगा तो इसमें बैठा चुड़ैल उस पे जा बैठेगा।

 

यह सुनकर लकड़हारा भाग खड़ा हुआ। लकड़हारा के भागते ही उस पेड़ की आत्मा प्रकट हुई और बोला-तुमने मेरी जान बचाई है इसलिए मैं बहुत प्रसन्न हुआ हूँ और तुम्हें उपहार के रूप में एक घंटी देता हूँ। रामु कहता है की मैं इस साधारण घंटी का क्या करूँगा ?

 

 यह साधारण सी घंटी दिख रही है पर ये जादुई घंटी है।  इससे तुम जो चाहो खाने के लिए मंगा सकते हो। लेकिन बस ध्यान रखना की दिन भर में  सिर्फ एक बार ही मंगवा सकते हो। 

 

रामु बहुत खुस हुआ और वो सोंचते हुए की अब कोई भूखा नहीं सोयेगा साथ ही छोटे को जो चाहिए होगा उसे खाने के लिए मिलेगा। 

 

शाम को जब घर पहुंचा घर पे माँ को छोटे भाई को सारी घटना बताया। उसकी माँ और भाई बहुत खुस हुए और उनलोगों ने उस जादुई घंटी को आदेश दिया और जो चाहिए जी भर  और सो गया। 

 

अगले सुबह उठकर रामु भेड़-बकरियों को लेकर चला गया जब वापस शाम  घर पहुंचा तो उसने देखा सभी बर्तन खली पड़े  हैं उसके लिए बस रूखी-सुखी रोटी है जो वो रोज खाता था। यह देखकर रामु गुस्से से कुछ नहीं खाया और सो गया। 

 

अगले सुबह वो अपने साथ ले गया जादुई घंटी को। इधर घर पे जब माँ और छोटे भाई को बहुत भूख लग गई तो उनलोगों ने उस घंटी को बहुत ढूंढा ,पुरा घर तलाश लिया पर वो घंटी नहीं मिली।  वो लोग बहुत उदास हुए उनलोगों ने सोचा शायद घंटी गुम हो गई है और अब घंटी नहीं मिलेगा। आखिर वो लोग भूखे ही सो गए।

 

शाम को जब रामु वापस आया तो रामु ने अपने जेब से घंटी निकाली और उसे जो चाहिए था उसने जादुई घंटी से मंगवा कर खा लिया। यह सब कुछ देखकर माँ और छोटे भाई को बहुत दुःख हुआ। छोटा भाई बहुत रोने लगा और कहने लगा-भाई आप स्वार्थी हो गए हो। आप पहले ऐसे नहीं थे। 

 

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अपमान आपका पीछा करती है 

 

 

छोटे भाई को रोते और माँ को उदास देखकर रामु को गलती का अहसास हो गया। वो जिंदगी में कभी स्वार्थी नहीं बनेगा ,उसने प्रण लिया। 

सिख – हमें इस कहानी से सिख मिलती है की दुनिया कुछ भी करे पर हमें स्वार्थी नहीं बनना चाहिए। 

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