बिक्री में सफलता

बिक्री में सफलता कैसे प्राप्त करें ?-बिक्री करते समय मिनटों का अभ्यास करें।

यह सिद्धांत कहता है की यदि आप ग्राहकों के साथ कुछ मिनट रहकर पैसे कमा रहे हैं तो इस काम में ज्यादा समय या मिनट लगाकर आप अपनी बिक्री बढ़ा सकते हैं। 

जब कोई सलेसपर्सन संभावित ग्राहकों के साथ फोन पर या आमने-सामने बिताये गए मिनटों की संख्या को दोगुना कर लेता है,तो प्रायः हर प्रकरण में उसकी बिक्री दोगुनी हो जाती है। यह कोई संयोग नहीं है। यह तो एक नियम के कारण होता है : संभानाओं का नियम। 

बिक्री में सफलता की कुंजियाँ –

बिक्री के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मामले में आपकी दो जिम्मेदारियां हैं :

1. सबसे पहले तो  आपकी  छन्नी हमेशा भरी होनी चाहिए। दिन भर में आप जितने  प्रॉस्पेक्ट्स से मिल सकते हों , आपके पास उससे ज्यादा प्रॉस्पेक्ट्स की सूचि होनी चाहिए। कभी भी आपकी छन्नी खली न रहने दें। कभी प्रॉस्पेक्ट्स की कमी न पड़ने दें। 

2. दूसरी बात , बिक्री के हर चरण में निरंतर बेहतर बनते रहें। प्रोस्पेक्टिंग , प्रस्तुति और सेल्स क्लोज करने की अपनी योग्यताओं को लगातार निखारते रहें। इसके लिए ऑडियो प्रोग्राम सुनें। आप जितने ज्यादा निपुण बनते हैं ,छन्नी के निचे से बिक्री निकालने के लिए आपको छन्नी के ऊपर उतने ही कम प्रॉस्पेक्ट्स की जरुरत पड़ेगी। 

बिक्री में सफलता के लिए जल्दी सुरु करें-

खुद को अनुशासित करके अपनी पहली कॉल सुबह 7 – 8  बजे तक कर लें। जब आप संभावित ग्राहक को सामान बेचकर अपना दिन सुरु करते हैं तो आपमें ज्यादा ऊर्जा होगी और आप दिन भर बेचते रहने के लिए प्रोत्साहित होंगें। 

स्वयं को सेल्स कारपोरेशन का प्रेजिडेंट माने ,जो बिक्री के परिणामों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। सर्वोच्च आमदनी वाले सेल्स पीपल का यही नजरिया होता है। 

सटीकता से तय करें आपको वास्तव में अपनी मनचाही आमदनी कमाने के लिए कितने प्रोडक्ट्स या सेवाएं बेचने की जरुरत है ?

खुद को समर्पित कर  दें ,आप हरदिन पुस्तकें पढ़कर ,कार यात्रा में ऑडियो टेप सुनकर और सेल्स सेमिनार्स में हिस्सा लेकर बिक्री निरंतर बेहतर करते बनेंगे। 

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आत्म- अनुसासन और लगन

आत्म- अनुसासन और लगन – लगन सक्रीय आत्म-अनुसासन है। जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है आप कितनी बार निचे गिरते हैं। सारा फर्क तो इस बात से पड़ता है की आप कितनी बार उठकर दोबारा खड़े होते हैं। अगर आप किसी काम में आत्म- अनुसासन और लगन –  के साथ जुटे रहेंगे तो अंत में आप सफल हो जायेंगे। 


 लगन एक सक्रीय अनुशासन है।

विपत्तियों और अस्थायी असफलताओं के वावजूद काम करने की क्षमता जीवन में सफलता पाने के लिए अनिवार्य है। 

नेपोलियन हिल ने कहा था -लगन चरित्रवान व्यक्ति के लिए वैसी ही है ,जैसे कार्बन स्टील के लिए। लगन सफलता का प्राथमिक कारण है। 

जल्दी से महान बनने के प्रयास से सचेत रहें। 10000 में से एक प्रयास ही कामयाब हो सकता है। यह बहुत भयावह अनुपात है।

                           – बेंजमिन डिजराइल। 

पहचाने की आपके जीवन का वह क्षेत्र कौन सा है ,जिसमें आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने केलिए ज्यादा लगन से काम करना चाहिए। फिर उस क्षेत्र में काम सुरु करें। 

अपने जीवन का लक्ष्य पहचाने ,जिसे प्राप्त करने में आप सिर्फ इसलिए नाकाम रहे ,क्यूंकि आप अंत तक लगन नहीं रख पाए। उस क्षेत्र में सफल होने के लिए आप आज कौन से कदम उठा सकते हैं ?

पहचाने की आप किस बड़े लक्ष्य को सिर्फ इसलिए प्राप्त कर पाए ,क्यूंकि आप लगन से जुटे रहे और अपने मुश्किलों के वावजूद हार मानने से इंकार कर दिया। 

जीवन में अपना प्रमुख लक्ष्य तय करें -वह लक्ष्य जिसे प्राप्त करने से आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा। 

आज ही निर्णय लें की चाहे जो हो जाए ,आप सफलता मिलने तक जुटे रहेंगे ,क्यूंकि मुझे सफल होने से रोक नहीं सकता। 

 

महत्वपूर्ण लक्ष्य तय करने और उसे प्राप्त करने का संकल्प करें। यह संकल्प करें की आप राह में आने वाली अवश्यम्भावी मुश्किलों ,समस्याओं और विपत्तियों के वावजूद तब तक जुटे रहेंगे ,जब तक की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल न हो जाएँ।

यह प्रक्रिया बार-बार तब तक दोहराते रहें ,जब तक की लगन की आदत न पड़ जाए। 

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मन गांठें खोलो

आज के पोस्ट में एक शानदार कहानी जो की मैंने सूर्या सिन्हा के किताब कहानी बोलती है से लिया है ,कहानी का शीर्षक है – मन  गांठें खोलो

मन  गांठें खोलो -पुराने ज़माने की बात है। एक व्यापारी ऊंटों पर सामान लादकर शहर-शहर जाता और व्यापर करता। एक बार सामान बेचकर वह वापस अपने देश लौट रहा था रास्तें में रात हो गई वह एक सराए पर रुका।

सराए के बहार एक पेड़ के निचे व्यापारी अपने ऊंटों को बाँधने लगा। चार ऊंट बाँध दिए ,मगर पांचवे ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई। जो ऊंट खड़ा था ,उसे इन्तजार था की मालिक भी उसे खूंटे से बांधेगा तो वह भी बैठकर जुगाली करे और थकन मिटायें ,मगर मालिक परेशान था। 
 कहीं ,रास्ते में खो गई थी अब ऊंट को बांधे कैसे ? यदि ना बंधा ऊंट तो दर था की ऊंट रात को कहीं चला ना जाये ,अब व्यापारी क्या करे !


जब कुछ ऊंट के मालिक को कुछ नहीं सुझा तो उसने सोंचा की क्यों ना सराय के मालिक से मदद मांगी जाये और यही सोंचकर आगे बड़ा तो उसने देखा की एक मस्तमौला फ़क़ीर सीधी पे बैठा हुआ था। वह काफी देर से व्यापारी को देख रहा था। व्यापारी करीब आया तो उसने पूछा की क्या परेशानी है ?

बाबा ऊंट की हिफाजत कैसे करूँ , एक ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई है। 


फ़क़ीर हंसा ,मगर व्यापारी उसकी हंसी का अर्थ नहीं समझा – जैसे ही व्यापारी आगे  तो ,क्यूंकि वयापारी ने सोंचा की सराय के मालिक से रस्सी मांगू। 
इसकी कोई जरुरत नहीं है ,जाओ पांचवें ऊंट को वैसे ही बांधों जैसे चार ऊंट को बाँधा है। 
मगर रस्सी…… ?


मैंने कहा न , रस्सी की कोई जरुरत नहीं है ,तुम जाओ और सिर्फ बाँधने का अभिनय करो ऊंट को ऐसे लगे की सच में तुम रस्सी से बाँध रहे हो ,वह फिर कहीं नहीं जायेगा। 


वयापारी ने फ़क़ीर की बात मान ली और वापस जाकर वैसा ही जैसा की फ़क़ीर ने कहा था ,उसने कल्पना की रस्सी से बाँधने का अभिनय किया और कमल की बात यह थी की काल्पनिक रस्सी से बांधते ही वह ऊंट इत्मीनान से बैठ गया और जुगाली करने लगा अन्य ऊंटों की तरह ही।

सुबह हुई। व्यापारी को अब सफर में आगे वापस अपने देश निकलना था। उसने ऊंट भी हांका ,जिसे काल्पनिक रस्सी से बनवा वह ऊंट उठा ही नहीं बाकि सभी ऊंटों के रस्सी खोलते ही उठ खड़ा हुआ। 
उसने ऊंट को डंडे से पीटने लगा क्यूंकि ऊंट के अड़ियलपन पे बहुत गुस्सा आया ,ये उठ नहीं रहा है। 


तभी फ़क़ीर वहां आ गया -इस बेजुबान पर जुल्म क्यों कर रहे हैं ?


देखिये न बाबा ! यह कम्बख्त उठ ही नहीं रहा है  , यह उठेगा कैसे तुमने कल रात को काल्पनिक रस्सी इसके  था खोला तुमने ? 

अगर तुमने रात को रस्सी से नहीं बंधा होता कहीं चला जाता न ऊंट तुम्हारा ,हाँ बाबा पर मैंने तो सिर्फ अभिनय किया बांधने का। 

बिलकुल ठीक जैसे तुंमने बाँधने का अभिनय किया था उसी तरह खोलने का भी करो। व्यापारी ने ठीक वैसे ही खोला जैसे रात को काल्पनिक रस्सी से बंधा था ,उसने पेड़ से रस्सी खोलने और फिर उसके बाद ऊंट के गले से रस्सी खोलने का अभिनय किया। 


आश्चर्यजनक तरीके से ऊंट उठ खड़ा हुआ और अपने साथियों  से जा मिला। व्यापारी ने फ़क़ीर को देखा तो वह मुस्कुरा रहा था। 
जिस तरह यह ऊंट अदृश्य रस्सी  बंधा था और उठ नहीं रहा था , उसी तरह लोग रूढ़ियों से बंधे हैं

इसलिए एक ही जगह पर चलना चाहते हैं यह संसार इसलिए दुखी है और कास्ट में है ,क्यूंकि रूढ़ियों से बंधा है ,मन से बंधा है। 
यह कहकर फ़क़ीर चला गया और व्यापारी ुसवके शब्दों में छिपे गूढ़ रहस्य को समझने की कोसिस करने लगा। 
शिक्षा – इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की –


हमारी असफ़लतों का मूल कारण यही है की हलोग मन से बंधे हैं। पुराणी और घिसी-पीती परम्परओं और रूढ़िवादी विचारों से बंधे हैं। इसलिए चल नहीं रहे हैं। घिसत रहे हैं। यह ऊंट भी ोइन्तेजार में है की रस्सी खोले कौन ?

सभी बंधे पड़े हैं काल्पनिक रस्सी के गांठों से। 
अपने मन से असफ़लता का काल्पनिक भय निकालो। कारण यह वह रस्सी है बांधे हुए हैं और आगे बढ़ें से रोक रही है ,उस रस्सी को तोड़ो और आगे बढ़ने के लिए कमर कस लो।

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बाज का बच्चा

एक घने जंगल में एक बार एक बाज का अंडा किसी तरह जंगली मुर्गी के अण्डों के बिच चला गया और बाकि बाकि अण्डों के साथ मिला गया ,चूँकि अंडे तो सभी सामान होते हैं क्या मुर्गी और क्या बाज। 

जैसे मुर्गी अपने अन्य अंडे का सेवा कर रही थी वैसे ही उसने बाज के अंडे का भी सेवा किया और कुछ दिनों के बाद समय आने पर अंडा फूटा। 

सभी अण्डों से चूजे निकले और बाज के अंडे से भी चूजा निकला। बाज का बच्चा यह अंडे से निकलने के बाद यह सोंचता हुआ बड़ा हुआ की वह एक मुर्गी है।

बाज का बच्चा भी वही काम करते जो अन्य मुर्गी के बाचे करते थे। जैसे अन्य बच्चे जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता और मुर्गी के बच्चे की तरह चूं-चूं करता था।

जब बच्चे खेल-खेल में कुछ फिट तक उड़ते थे और बाज का बच्चा भी वही कोसिस करता था और वह भी कुछ फिट तक उड़ता था।

एक बार की बात है जब बाज का बच्चा उन मुर्गी के बच्चे और मुर्गी के साथ जंगल में अपने दिनचर्या में लगे थे तभी सभी ने आकाश में एक बाज को उड़ते हुए देखा और उन्होंने देखा की बाज आकाश में कुलांचे भर भर रहा था ,मंडरा रह था। 


बाज का बच्चा  ने पूछा माँ इस सुब्दर सी चिडयां का क्या नाम है ? मुर्गी ने कहा – उस सुन्दर चिड़िया का नाम है बाज। फिर उस बच्चे ने -बाज के बच्चे ने पूछा -माँ क्या मैं भी इस बाज की तरह ही उड़ सकता हूँ ? बाज ने कहा-कभी नहीं ! तुम मुर्गी हो और मुर्गी उस बाज की तरह नहीं उड़ सकते हो। 

उस बाज के बच्चे ने बिना सोंचे-विचारे इस बात को मान लिया और विडंबना देखिये की वह बाज का बच्चा ने मुर्गी के बिच में रहकर मुर्गी की तरह जिया और मुर्गी की तरह ही वह मर गया।

सोंचने की क्षमता न होने के कारन वह विरासत को खो बैठा। कितना बड़ा नुकसान हुआ। वह जितने के लिए पैदा हुआ था , पर वह दिमागी रूप से हार के लिए तैयार हुआ।

Moral -अधिकतर लोगों के लिए यही बात सच है। जैसा की ओलिवर बेंडहाल होम्स ने कहा है – हमारे जिंदगी का दुर्भाग्यपूर्ण पहलु यह है की ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इक्षा लिए ही कब्र में चले जाते हैं।

हम अपनी ही दूरदर्शिता की कमी के कारण से ही बेहतरी हासिल नहीं कर पाते हैं।

हमें यह बात हमेशा याद रखना चाहिए आप भी एक बाज हैं और आप उड़ने के लिए पैदा हुए हैं ,जब कोई काम अन्य कोई कर सकता है ,सफल हो सकता है तो आप क्यों नहीं।

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धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है जित आपकी किताब से जिसके लेखक है –शिव खेड़ा। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज शेयर जरूर करें। सच में आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें। 


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तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द

आप शांति से विचार करेंगे तो ख्याल आएगा की आप आज जिस परिस्थिति में जी रहे हों उसमें कहीं ना कहीं ईश्वर का पावरफुल शब्द का इस्तेमाल आपने जाने या अनजाने में करवाया है – तथास्तु !ऐसा आपको काफी समय से से लग रहा था।

इसलिए तो लग कहते हैं की –

मैं जानता था की मुझे देर हो जाएगी –

मैं जनता ही था की हम ट्रैन चूक जायेंगे –

मैं जनता ही था की तू कुछ नहीं करने वाला नहीं है –

मैं जनता ही था की वहां कुछ मिलेगा नहीं 

मैं जनता था की ये  में टाइम पास कर रहा है कुछ खरीदेगा नहीं –

मैं जनता था की आप बीमार पड़ने  वाले हो-

मैं जनता था  उसकी बहुत लम्बी नहीं चलेगी –

मैं जनता अब धंधा  चलेगा अब बंद करने का समय आ गया है। 

मैं जनता था की तू परिवार का नाम डुबोएगी या डुबाएगा।

हम कितनी बातें ही क्यों ना जानते हों यह जानकारी या खबर कुछ नहीं है केवल अपने मन की कल्पना होती है।

पक्की कल्पना ही होती है ,श्रिस्टी के महान रहस्यों में एक रहस्य यह है की हमारी प्रत्येक कल्पना के ऊपर ईश्वर के पास देने के लिए सिर्फ  शब्द है वो है – तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

यूँ ही कुछ भी नहीं हुआ है ,हर कल्पना पर तथास्तु हुआ है। 

श्रिस्टी की सर्वोत्तम सत्ता यह नहीं देखती है आपको क्या चाहिए ये आपकी मन से उत्पन्न कल्पना की तरंगों को पहचानती है और आपकी ख़िदमती में इसे वास्तविकता में आपके सामने पेश करती है।

तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द है। वह तो मात्र तथास्तु करते हैं चाहे आपके मन की कल्पना आपके विचार आपके जीवन में खुशियां लेट हों या दुःख।

अनजाने में भी की गई कल्पना पर भी तथास्तु। जान बूझकर की गई कल्पना पर भी तथास्तु !

और हाँ यह तथास्तु का जादू आपके जीवन में 24 घंटे चलता रहता है चाहे आप या न ,ध्यान आप देते हैं या नहीं कोइ फर्क नहीं पड़ता है इसपर। 

दोस्तों ,हमें यह तय करना है की हम तथास्तु किस पे कराना चाहते हैं वो भी सुबह जागते ही। हमें तय करना ही होगा।

आप या जिंदगी जैसी चल रही वैसी ही चलने दें या अपने मुताबिक आप डिज़ाइन करें।

आपको पता चल चूका है की तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

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धनवान कैसे बने 

उम्मीद है आपको मेरा आज का पोस्ट पसंद आया होगा। अगर आपने यह पोस्ट पढ़ा है और आपके मन में कोई भी प्रश्न उत्पन्न हुए हैं आप कमेंट बॉक्स में डालकर पूछ सकते हैं। और प्लीज अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करना न भूलें। 

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नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका – 
अपनी नियामतें गिने – दस नियामतों की सूचि बनायें। लिखें की आप क्यों कृतज्ञ हैं। अपने सूचि दोबारा पड़ें और हर नियामत के अंत में कहें धन्यवाद ,धन्यवाद ,धन्यवाद धन्यवाद। उस नियामत के अधिकतम कृतग्यता महसूस करें। 

कृतज्ञ सभी परिस्थितिओं में कृतज्ञ होता है। 

– बहाउल्ला ( 1817 – 1892 ) 

चाहे सम्बन्धोंए में उलझन हो , आर्थिक दबाव हो, स्वास्थ्य की गड़बड़ी हो या नौकरी की समस्या लम्बे समय तक कृतग्यता की कमी के कारण नकरात्मक परिस्थितयां उत्पन्न हो जाती है।

चीजों को नजरअंदाज करना नकरात्मकता का एक प्रमुख कारण है,क्यूंकि जब हम चीजों को नजरअंदाज करते हैं

तो हम  धन्यवाद नहीं दे रहे हैं और इसके फलस्वरूप अपने जीवन में आप जादू सक्रीय होने से रोक रहे हैं।

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका , आप जब भी किसी नकरात्मक स्थिति में हो तो आप क्या कह सकते हैं ,इसके उदाहरहण दिए जा रहे हैं :

मैं बहुत कृतज्ञ हूँ की इस दौरान मेरे पास अपने परिबार के लिए अधिक समय है।

मैं कृतज्ञ हूँ की खाली समय होने के कारण अब मेरा जीवन बेहतर जीवन बेहतर व्यवस्थित हो गया है – जब आपको यह लगे की आपका जीवन अव्यवस्थित हो रहा है।

मैं कृतज्ञ हूँ की मेरे पास जीवन में अधिकतर समय नौकरी रही है और मैं अनुभवी हूँ – जब आपको नौकरी में कोई दिक्कत लग रही हो तो।

मैं कृतज्ञ हूँ की रोजगार के नए-नए अवसर आ रहे हैं और हर दिन नै नौकरियां सामने आ रही है – जब आप बेरोजगार हों और नौकरी की तलाश हो। 

मैं अपने परिवार के प्रोत्साहन और समर्थन के लिए कृतज्ञ हूँ – जब आपको ऐसा लगे की आपको अपने परिवार का साथ न मिल रहा हो तो।

मैं सचमुच में कृतज्ञ हूँ की मेरे पास  क्यूंकि कठिन समय के बिच अच्छे समय भी रहे हैं और पिताजी के साथ आगे भी और अच्छे समय रहेंगे और मैं इस बात के लिए ईश्वर का कृतज्ञ हों।

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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

धन्यवाद दोस्तों ,मुझे उम्मीद है आपको मेरा आज का यह पोस्ट पसंद आया होः तो इसे शेयर करना और अपने मित्रों को बताना ना भूलें। यह पोस्ट में लिया है बेस्ट सेल्लिंग बुक्स जादू ( the secret ) रांडा बर्न। इसके लेखक हैं

और मैंने भी इस जादू को अपने जीवन में महसूस किया है शायद आपने भी। कृतग्यता में जादू है आप भी इसे महसूस करेंगे आप  से किसी को धन्यवाद और कृतज्ञ होते हैं तो आप जादू का निर्माण करते हैं जिस से कुछ भी संभव है। 


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