बुनियादी डर के छह भूतों को हरा दें

बुनियादी डर –छठी इंद्री  कभी काम नहीं करेगी ,जब तक की इन तीन – अनिर्णय ,शंका और डर ,नकरात्मक चीजों में से एक भी आपके  रहेगी। 

इन सूक्ष्म शत्रुओं की आदतों से धोखा न खाएं कई बार वे अवचेतन मन छिपे रहते हैं जहाँ उनका पता लगाना मुश्किल होता है और उनका उन्मूलन करना और भी मुश्किल होता है। 

छह बुनियादी डर –

छह बुनियादी डर होते हैं ,जिनके तालमेल से हर इंसान किसी न किसी समय कष्ट उठाता है। ज्यादातर लोग सौभग्यशाली हैं ,अगर वे सभी छह डरो से कष्ट न उठाते हों। 

  • गरीबी का डर 
  • आलोचना का डर 
  • बीमारी का डर 
  • प्रेम  खोने का डर 
  • बुढ़ापे का डर 
  • मृत्यु का डर 

गरीबी का डर – गरीबी और अमीरी में कोई मिलाप नहीं हो सकता ! अगर आप दौलत चाहते हैं तो आपको गरीबी की ओर ले जाने वाली परिस्थति को स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए। गरीबी का डर  कुछ नहीं ये  मानसिक अवस्था है ! लेकिन यह किसी काम में सफलता के अवसरों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। 


इसके लक्षण – उदासीनता ,अनिर्णय शंका ,चिंता ,अति-सावधानी ,टालमटोल। 
आलोचना का डर – आलोचना होने पर ज्यादातर लोग बेहद असहज होते हैं और कुछ मामलों में वे बेहद निराश और और उदाश भी हो सकते हैं। आलोचना आपकी पहलशक्ति ( लीडर का प्रमुख हथियार ) छिन  लेता है , आपकी कल्पना शक्ति को आपसे दूर कर देगा। आलोचना मानव ह्रदय में डर या द्वेष का बीज  बो देगी ,लेकिन इससे प्रेम या स्नेह उत्पन्न नहीं होगा। 

बीमारी का डर – यह डर शारीरिक और सामजिक दोनों तरह की अनुवांशिकता में मिलता  है। एक प्रतिष्ठित चिकत्सक का अनुमान था की वह डॉ के पास इलाज के लिए जाने वाले 75 प्रतिसत लोग ह्य्पोकोंड्रिया ( काल्पनिक बीमारी ) से पीड़ित होते हैं। 
डॉ कई बार रोगियों की सेहत के  किसी नए माहौल में भेज देते हैं क्यूंकि मानसिक  नजरिये बदलना जरुरी होता है। 

चिंता का डर – चिंता डर पर आधारित मानसिक अवस्था। है यह धीरे-धीरे लेकिन लगातार काम करती है। यह हानिकारक और सूक्ष्म होता है। कदम दर कदम यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह इंसान की तर्कशक्ति को पंगु नहीं कर देती है। यह ऐसी मानसिक अवस्था है जिसे नियंत्रित किया जा। 

 जिस व्यक्ति के मन में डर भरा होता है ,वह न सिर्फ बुद्धिमतापूर्ण कामों के अवसरों को नष्ट कर देता बल्कि ये विनाशकारी कम्पन्न दूसरों के मन तक पहुंचाकर उनके अवसरों को नष्ट कर देता है। 

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प्रॉस्पेक्ट्स -प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया

प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया 

प्रॉस्पेक्ट्स का विचारमग्नता तोड़ें  – आपकी निति यह होनी चाइये की आप सामने वाले की विचारमग्नता तोड़ दें। आप जिस से भी संपर्क करते हैं ,वह व्यस्त है और दूसरी  में सोंच रहा है।

वह पूरी तरह से अपने काम-काज ,खुद की समस्यायों ,परिवार ,स्वास्थ्य या बिलों में उलझा हुआ है। जब तक आप प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता को न तोड़ दें ,आपको कभी प्रस्तुति देने का मौका ही नहीं मिलता। 

कुछ सेल्स पीपल फ़ोन करके अपना परिचय देते हैं और तुरंत ही अपना प्रोडक्ट्स या सेवा के बारे में बात करने लगते हैं इससे बेहतर तरीका यह है की आप अपना परिचय दें और फिर पूछें मुझे आपका दो मिनट समय चाहिए। क्या यह बात करने के लिए सही समय है ? जब प्रॉस्पेक्ट कह दे की उसके पास दो मिनट का समय है ,तभी आप कोई सवाल पूछते हैं ,जिसका उद्देश्य आपके प्रोडक्ट्स के परिणाम या लाभ को बताना है। 

प्रोडक्ट्स नहीं ,अपॉइंटमेंट बेचें 

कभी भी फ़ोन अपने प्रोडक्ट्स या अपने भाव के बारे में बात न करें जब तक आप प्रॉस्पेक्ट्स नहीं मिले पूरी बिक्री नहीं हो सकती है। यह महत्वपूर्ण नियम है। 

अपने शब्द  सावधानी से चुनें 

जब कोई सलेसपर्सन किसी प्रॉस्पेक्ट्स से पहली बार मिलता है,तो वह तुरंत ही अपने प्रोडक्ट्स के बारे में बताने लगता है हालाँकि प्रॉस्पेक्ट सुन रहा हो या नहीं आपको ,इससे आपको कोई लेना देना नहीं ये गलत है। 

आपके शब्द तो उतने ही धमाकेदार होने चाहिए मानो किसी ने कांच पे पत्थर माफर दिया हो। ऐसा कथन तैयार करें जिससे उसका पूरा ध्यान आपके ऊपर केंद्रित हो जाये। इस वाक्य का लक्ष्य हमेशा वह परिणाम या लाभ बताना होना चाहिए ,जो ग्राहक को आपके प्रोडक्ट्स या सेवा से मिलेगा ,लेकिन प्रोडक्ट्स का उल्लेख नहीं होना चाहिए। 

लाभ दिखाएँ – आप जब तक लाभ नहीं दिखायेंगे आपकी बिक्री हो नहीं सकती है। 

अच्छी शुरुआत आधा अंत है 

अच्छी शुरुआत ,एक प्रबल प्रश्न जिसका लक्ष्य आपके प्रोडक्ट्स का परिणाम या लाभ बताना हो ,आपको बिक्री के क्लोज तक ले जा सकता है ,प्रबल शुरुआत प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता तोड़ती है। 

 आपका समय सिमित है

प्रॉस्पेक्ट्स का पूरा ध्यान खींचने के लिए मुलाकात के सुरु में आपके पास तीस सेकण्ड्स का समय होता है। पहले तीस सेकण्ड्स में ही प्रॉस्पेक्ट्स यह निर्णय ले लेता है की वह आपकी बात सुनने वाला है , अगर आप भटकते है और इधर-उधर की बातें करने लगते हैं तो आपका प्रॉस्पेक्ट्स बैचैन।  दोबारा फिर पटरी पर लाना बड़ा मुश्किल है। 

 आपके मुँह से निकले पहले पंद्रह से पच्चीस शब्द बाकि बातचीत का माहौल तैयार कर देते हैं। 

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चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –

चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –
क्या आप चिंताजनक स्थितियों का  फार्मूला जानना चाहते हैं ,तो तत्काल काम करें -एक ऐसा  उपाय जिसे आप अभी आजमा सकते हैं ,जिसे आप आगे ध्यान से  करें।  तीन कदम जो आपके चिंता को दूर करने के लिए अचूक बातें है जिसे मैंने एक –  चिंता छोड़ो सुख से जियो ,जिसके लेखक है – डेल कार्नेगी। 


पहला कदम – बिना डरे ,ईमानदारी से स्थति का विश्लेषण करें और अनुमान लहाएं की  असफलता के परिणामस्वरुप  बुरा से बुरा  क्या हो सकता है ?-कोई असफल  पर आपको जेल नहीं भेजने वाला है और न ही कोई आपको फांसी पर लटकाने वाला है। हो सकता है आपको कुछ पैसों का घाटा हो  रहा हो। 
अगर कोई बीमारी है तो ज्यादा से ज्यादा क्या  है आपकी मौत ! ( जो की आज नहीं तो कल हर किसी के साथ होना है ये प्रक्रिया। ) 

जो हमारे सामने है ,उसका पूरा आनंद ले लो ,

इससे पहले की हम मिटटी में मिल जाएँ ;

 माटी मिलेगी माटी में ,और माटी के निचे दब जाएगी ,

बिना शराब ,बिना गीत ,बिना साकी और बिना अंत के !


जो चिंता से नहीं लड़ना नहीं जानते ,वे जवानी में ही मर जाते हैं। – डॉ अलेक्सिस कैरेल। 


दूसरा कदम -बुरे से बुरे परिणामों का अनुमान लगाने के बाद आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को स्वीकार करने के लिए अपने आपको  तैयार करें-  आप जब भी बुरे से बुरे स्थति को स्वीकार कर लेंगे तो आपका मन शांत हो जायेगा।  आप एक बेहतर स्थति में पहुंच जायेंगे। 


तीसरा कदम – अपना पूरा समय और पूरी ऊर्जा शांति के साथ इस काम में लगा दें की बुरे से बुरे स्थति और बुरे परिणामों को कैसे सुधारा जा सकता है – इस कदम को उठा कर आप देखें की आप अपने घाटे को कैसे कम कर सकते हैं। 

NOTE- अपने आपको ऐसी छोटी-छोटी बातों में विचलित न होने की अनुमति न दें ,जिन्हें हमें नजर अंदाज कर देना चाहिए। याद हम नजर अंदाज कर देना चाहिए और भूल जाना चाहिए। याद रखें ,जिंदगी है की घटिया नहीं होना चाहिए। 

धनवान कैसे बने 

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जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी के 16 पायदान –

जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी में कोई ऐसी बात तो जरूर है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इसे पढ़ने वाले सभी लोग ,चाहे वो आमिर हों या गरीब सभी आकर्षित होते ही हैं। 

शक्ति सच्ची शिक्षा से मिलती है ! जिस किसी व्यक्ति ने किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति मन की शक्तियों को व्यवस्थित करना ,श्रेणीबद्ध करना और बुद्धिमता पूर्वक निर्देशित करना नहीं सीखा वो शिक्षित नहीं है। 

आइये एक एक करके 16 पायदान सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं –

पायदान : 1 : जीवन में निश्चित लक्ष्य। 

निश्चित शब्द के महत्व को नजरअंदाज न करें ,क्यूंकि यही शब्द जीवन  निश्चित लक्ष्य वाक्यांश का सबसे अहम् शब्द है। निश्चित के बिना वाक्य में कोई डैम नहीं है ,क्यूंकि सफल होने के लिए अस्पस्ट लक्ष्य तो सभी के पास होते हैं। 

निचित लक्ष्य और उसे हासिल करने की योजना लिखें ,मैं लिखने पर जोर दे रहा हूँ क्यूंकि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है ,जिसे आप आगे के पायदान में  समझेंगें। 

पायदान :2 – आत्मविश्वास 

जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य बनाना या इसे हासिल करने की योजना बनाना तब तक कारगर नहीं ,जब तक व्यक्ति  में आत्मविश्वास न हो वैसे तो सभी व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है लेकिन चंद लोगों में उस  खास तरह का आत्मविश्वास होता है जिसे जादुई सीढ़ी का दूसरा पायदान कहते हैं। 

पायदान :3 – पहल 

पहल एक दुर्लभ गुण है। इसका मतलब है की किसी दूसरे के कहे बिना ही वह काम करना ,जो किया जाना चाहिए। सभी महान लीडरों में पहल एक अनिवार्य गुण है। पहल के बिना कोई सेनापति नहीं बन सकता ,न कोई तो कोई युद्ध में न ही कारोबार में ,क्यूंकि गहन कर्म पर आधारित सेनापतित्व ही सफल होता है। 

पायदान 4 : कल्पना 

कल्पना मानव मस्तिष्क की वह कार्यशाला है जिसमें पुराने विचार नए विचार के तालमेलों और योजनाओं को ढलते हैं। सारे महान अविष्कार का अस्तित्व ही कल्पना है। चाहे वो बल्व का हो या हवाई जहाज ,चाहे इंटरनेट या कुछ भी आज जो आप धरातल पर देख प् रहे हैं पहले वह किसी की कल्पना ही थी। 

नोट – लीडर हमेशा कल्पना और पहल वाले होते हैं। 

पायदान : 5 – कर्म 

संसार केवल आपको एक ही चीज के बदले में पैसा देता है ,यह है कर्म। संगृहीत ज्ञान का कोई मोल नहीं है ,इससे तबतक कोई फायदा नहीं होता जब तक की इसे कर्म में न बदल दिया जाये। 

हो सकता है आप बहुत ज्ञानी हैं ,आप सबसे कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ें हो -यह भी मुमकिन हो आपके दिमाग में सरे विवकोशों के सरे तथ्य भरे पड़ें हों -लेकिन तब तक इस ज्ञान का कोई फायदा नहीं जब तक इसे आप कर्म न बदलें। 

आगे के पायदान के बारे आगे के ब्लॉग में जानेंगे सफलता के  जादुई सीढ़ी ,पर दोस्तों आपसे रिक्वेस्ट है की अगर आपको मेरा पोस्ट पसंद आ रह है तो लाइक और शेयर करना न भूलें धन्यवाद। 

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•हर लीडर को चरित्र के बारे में कौन सी बातें मालूम होनी चाहिए


•1 . चरित्र सिर्फ शब्दों से नहीं बनता है– कोई भी खुद को ईमानदार कह सकता है ,लेकिन कार्य ही चरित्र के वास्तविक सूचक होते हैं आपका चरित्र ही तय करता है की आप क्या दरअसल कौन है ? इसी बात से तय होता है की आप क्या देखते हैं। आप क्या देखते हैं उसी से तय होता है की आप क्या करते हैं। इसलिए लीडर के चरित्र को उसके कार्यों से अलग से अलग कभी नहीं किया जा सकता है। यदि लीडर के कार्य और कथन एक दूसरे के निरंतर विरोध में हों तो वास्तविकता पता लगाने के लिए उसके चरित्र की ओर देखें। 

•. प्रतिभा एक वरदान है ,जबकि चरित्र आका चयन है – जीवन में बहुत सी चीजों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हम अपने माता-पिता को नहीं चुन सकते। हम अपने जन्म और परवरिश की जगह या परिस्थतियाँ नहीं चुन सकते। हम अपनी प्रतिभा या आईक्यू को नहीं चुन सकते। लेकिन अपने चरित्र का चुनाव हम खुद करते हैं। वास्तव में हम जब भी कोई चयन करते हैं ,तो हम हर बार अपने चरित्र का निर्माण करते हैं -या हम किसी मुश्किल स्थिति से मुकबला करते हैं या इससे बचकर निकल जाते हैं ; या तो हम आसानी से मिलने वाला धन ले लेते हैं या फिर हम कीमत चूकते हैं। अपना जीवन जीते और चयन करते समय आज भी आप अपने चरित्र का निर्माण कर हैं।  

चरित्रवान होने से लोगों के साथ  सफलता  मिलती है। -सच्चे नेतृत्व में हमेसा दूसरे लोग शामिल होते हैं। ( जैसे की नेतृत्व की एक एक कहावत है ,अगर अगर आप सोंचते हैं की आप नेतृत्व कर रहे हैं ,लेकिन कोई भी आपका अनुसरण नहीं कर रहा है ,तो सिर्फ आप टहल रहे हैं। ) अनुयायी उन लीडर्स पर विस्वास नहीं करते हैं जिनका चरित्र उन्हें दोषपूर्ण लगता है। इसलिए वे आपका अनुसरण भी नहीं करेंगे। 

लीडर्स अपनी चारित्रिक सीमाओं से ऊपर नहीं उठ सकते।  –

क्या आपने देखा है की बहुत से प्रतिभाशाली लोग एक निश्चित स्टार सफलता हासिल करने के बाद अचानक धड़धड़ाकर गिर गए ? इसका मूल  कारण है -चरित्र। 


हारवर्ड मेडिकल स्कूल के मनोवैज्ञानिक और द सक्सेस सिंड्रोम के लेखक स्टीवन बर्गलेस कहते हैं की जो लोग ऊँचे शिखर पर पहुँच जाते हैं ,लेकिन उनके पास तनाव के बिच शक्ति देने वाले चरित्रिक नीवं नहीं होती है ,वे दरअसल तबाही की ओर बढ़ रहे हैं। 

सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ बनें।

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