चिंता छोड़ो सुख से जियो

चिंता छोड़ो सुख से जियो – एक ऐसी किताब जो मुझे लगता है की हर घर में होना ही चाहिए।  आप देख रहे हैं की अभी कोरोना वायरस एक महामारी के रूप में पुरे संसार में फैला हुआ है ,अभी भारत में भी 21 दिनों का लॉकडाउन हो रखा है ,वैसे में घर पे खाली बैठे हैं ,मन में तरह-तरह के विचार आने लगते हैं। भविष्य को लेकर वायरस को लेकर ,अपने परिवार  में चिंता होना सुरु हो जाता है। 

वैसे में यह किताब चिंता छोड़ो सुख से जियो आपके लिए मार्गदर्शिका का काम करेगी , में हर चिंता पर विजय  प्राप्त कर सकते हैं इसके  बहुत ही अच्छे तरीके से बताया गया है ,जैसे -चिंता के बारे में मूलभूत तथ्य ,जो आपको पता होने चाहिए। 

चिंता छोड़ो सुख से जियो-वर्तमान में एक-एक दिन जियें -हमारा काम यह देखना नहीं की दूर धुधंलके में क्या दीखता है , करना है  सामने है।

 बाइबल के शब्द -आने वाले कल की चिंता मत करो। वही खुस है और केवल वही खुस है ,जो आज को अपना कह सकता है ,जो आत्मविश्वास से कह सकता है ;कल तुम्हें जो करना है कर लेना ,मैंने आज जी लिया है। 

चिंता छोड़ो सुख से जियो-चिंताजनक स्थतियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला के बारे में बताया गया है –

पहला कदम – बिना डरे ,ईमानदारी से स्थिति का विश्लेषण करें और अनुमान लगाएं की बुरा-से-बुरा क्या हो सकता है ?

दूसरा कदम – बुरे-से बुरे परिणाम के लिए खुद को तैयार करें 

तीसरा कदम -इसके बाद अपनी पूरी ऊर्जा लगा दें की इस स्थति को कैसे सुधारा जा सकता है ,बुरे-से-बुरे परिणाम को कम कैसे किया जा सकता है ?


चिंता आपका क्या बिगाड़ सकती है ? जो चिंता से लड़ना नहीं जानते ,वे जवानी में ही मर जाते हैं -डॉ अलेक्सिस कैरेल। 


चिंता आपके साथ क्या कर सकती है चिंता से हाई ब्लड प्रेसर होता है चिंता से गठिया हो सकता है आपको पेट की बीमारी हो सकती है चिंता से थॉयरॉइड की बीमारी हो सकती है चिंता से डाईबिटिज की बीमारी हो सकती है। 
इससे पहले की चिंता आपको खत्म कर दे आप चिंता को ही खत्म कर दें। चिंता छोड़ो सुख से जियो

मैं तो आपको बोलूंगा की आप इस किताब को आज ही मंगवाएं ,इसे जरूर पढ़ें। मैंने निचे लिंक दे दिया है आप चाहो तो किताब को यहाँ से भी आर्डर कर सकते हैं ,इस शानदार किताब चिंता छोड़ो सुख से जियो  के लेखक डेल कार्नेगी जी जो विश्विख्यात लेखक हैं। 

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प्रेरणा – FOR DAILY MORNING

प्रेरणा 

लोग अकसर कहते हैं की प्रेरणा कायम नहीं रहती। देखिये ,स्नान भी नहीं रहता -इसलिए हम प्रतिदिन करने की सलाह देते हैं। 

 – जिग जिग्लर। 

प्रोत्साहन अकेले ही काफी नहीं है। अगर आपके पास एक मुर्ख है और आप उसे प्रोत्साहित  देते हैं ,तो अब आपके पास एक प्रोत्साहित मुर्ख होता है। 

– जिम रॉन। 

आम धारणा यह है की प्रेरणा कर्म से आती है , लेकिन इसके विपरीत सच  यह है की – कर्म प्रेरणा से पहले आता है। आपको पम्प में पानी डालना , ताकि माहौल बन जाये ,जो आपको अपने लक्ष्यों पर काम करने के लिए प्रेरित करता है। गति में आना काम का सबसे मुश्किल हिस्सा है और अक्सर पहला कदम उठाना ही प्रायप्त है , जो आपको अपने दिन का सर्वश्रेष्ठ लाभ उठाने के लिए  प्रेरित कर देता है। 

– रॉबर्ट जे. मैकेन। 

आपकी कार की बैट्री की तरह ही सेल्समैन की ऊर्जा भी लगातार कम होती रहती है। जब तक की उसे बार-बार रिचार्ज न किया जाये ,वह जल्द ही ऊर्जाहीन हो जाता है। यह बिक्री नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां में से एक है। 

– जियान – कार्लो मेनोटो। 

जो लोग खुद को प्रोत्साहित नहीं कर पाते हैं वे सामान्य जीवन ही गुजारेंगे ,चाहे उनके गन कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों। 


– ली आयकोका।

 

सफल लोग दूसरे सफल लोगों को प्रेरणा के साधन की तरह देखते हैं। वे दूसरे सफल लोगों को मॉडल की तरह देखते हैं ,जिनसे सीखा जा सकता है। वे खुद से कहते हैं ,अगर वे यह काम कर सकते हैं ,तो मैं भी कर सकता हूँ। 

– टी. हर्व एकर। 

जो आगे नहीं देखता है ,वह पीछे रह जाता है। 

-स्पेनिश सूक्ति। 


ब्रिटिश कहावत है ,ख़राब विद्यार्थी कोई नहीं होता;सिर्फ खराब शिक्षक होते हैं। मैं मानता हूँ की यह कहावत कंपनियों पर भी लागु होती है। ख़राब कर्मचारी कोई नहीं होता ; सिर्फ ख़राब मैनजर होते हैं। 

– टी. एस. लिन। 

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खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे

खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे -ये नुस्खे आजमाएं हुए हैं और अचूक हैं। 

प्रत्येक दिन का आरम्भ और समापन अपने जीवनसाथी के लिए प्यार की घोषणा से करें  संभव हो सके तो बस बात करने  और अपने प्यार को व्यक्त करने के तीन मिनट लगाइये। 

कभी-कभी उपहार अथवा कार्ड भेंट करके चकित कीजिये। कभी-कभी डाक में प्रेम-पत्र डालिये। उपहार या पत्र लिखने के पीछे छिपे भावनाओं में जादू है। 

साथ में कुछ अच्छा  समय बिताइए। साथ टहलने जाएँ ,अपने जीवनसाथी को ऐसा अनुभव कराएं जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। भले ही इस वक़्त आपको  बात  अहसास ना हो। 

अच्छा श्रोता बनिए, दुनिया में सबसे ज्यादा लड़ाई इसी चीज की है की कोई किसी को सुन ही नहीं रहा है। बच्चा अपने पिता को नहीं सुनता ,वहीं बच्चे को शिकायत है की पिता मेरी बात नहीं सुनते हैं। पति और पत्नी के अक्सर इसी बात को लेकर झगड़े होते हैं की वो एक-  दूसरे को सुनते ही नहीं हैं। 

जब आप असहमत होते हैं तो याद रखिये की आप अस्वीकार्य हुए बिना भी असहमत हो सकते हैं। तथापि आपको अनसुलझे मतभेदों के साथ कभी भी विस्तर पर सोने के लिए नहीं जाना चाहिए। ना तो आप सो पाएंगे और ये मतभेद आपके अवचेतन मन में घर कर लेंगे तथा निरंतर समस्या के श्रोत  बन जायेंगे। आप ईमानदार  एक दूसरे के प्रति संवेदनशील बने रह सकते हैं। 

याद रखिये आपको अपने जीवनसाथी को खुश करने या समझने के लिए अक्सर पीठ से पीछे की ओर झुकना पड़ेगा। यह मुद्रा थोड़ी कष्टदायक हो सकती है परन्तु यह आपको और आपके विवाहित जीवन के मुँह के बल गिराने से रोकती है। 

खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे को आजमाइए ;

  1. कप – प्यार 
  2. कप -एकनिष्ठा 
  3. कप – क्षमाशीलता 
  4. औंस – विस्वास 
  5. चमच्च – उम्मीद 
  6. कप – मित्रता 

और 1 बैरल हंसी। 


प्यार और एकनिष्ठा को लेकर विस्वास के साथ पूरी तरह मिलाएं। इसे नरमी उदारता और समझदारी से मिश्रित करें। उसमें मित्रता व् उम्मीद डालें। भरपूर तरीके से हंसी छिड़के।

सूरज की धुप में इसे पकाएं और फिर प्रत्येक दिन इसे जी भरकर पेश करें। 


याद रखिये खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे में सबसे महत्वपूर्ण है पहल ,चाहे  प्यार  इजहार करने के लिए हो या आपस के मतभेद मिटाने की पहल। जो पहल करता है वह अधिक परिपक्वता और प्यार दर्शता है। 

धन्यवाद ,
दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको आज का या पोस्ट-खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे पसंद आया होगा ,जिसे मैंने लिया है एक शानदार किताब जिसका नाम है शिखर पर मिलेंगे और जिसके लेखक हैं -जिग जिग्लर। 

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बिक्री में सफलता

बिक्री में सफलता कैसे प्राप्त करें ?-बिक्री करते समय मिनटों का अभ्यास करें।

यह सिद्धांत कहता है की यदि आप ग्राहकों के साथ कुछ मिनट रहकर पैसे कमा रहे हैं तो इस काम में ज्यादा समय या मिनट लगाकर आप अपनी बिक्री बढ़ा सकते हैं। 

जब कोई सलेसपर्सन संभावित ग्राहकों के साथ फोन पर या आमने-सामने बिताये गए मिनटों की संख्या को दोगुना कर लेता है,तो प्रायः हर प्रकरण में उसकी बिक्री दोगुनी हो जाती है। यह कोई संयोग नहीं है। यह तो एक नियम के कारण होता है : संभानाओं का नियम। 

बिक्री में सफलता की कुंजियाँ –

बिक्री के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मामले में आपकी दो जिम्मेदारियां हैं :

1. सबसे पहले तो  आपकी  छन्नी हमेशा भरी होनी चाहिए। दिन भर में आप जितने  प्रॉस्पेक्ट्स से मिल सकते हों , आपके पास उससे ज्यादा प्रॉस्पेक्ट्स की सूचि होनी चाहिए। कभी भी आपकी छन्नी खली न रहने दें। कभी प्रॉस्पेक्ट्स की कमी न पड़ने दें। 

2. दूसरी बात , बिक्री के हर चरण में निरंतर बेहतर बनते रहें। प्रोस्पेक्टिंग , प्रस्तुति और सेल्स क्लोज करने की अपनी योग्यताओं को लगातार निखारते रहें। इसके लिए ऑडियो प्रोग्राम सुनें। आप जितने ज्यादा निपुण बनते हैं ,छन्नी के निचे से बिक्री निकालने के लिए आपको छन्नी के ऊपर उतने ही कम प्रॉस्पेक्ट्स की जरुरत पड़ेगी। 

बिक्री में सफलता के लिए जल्दी सुरु करें-

खुद को अनुशासित करके अपनी पहली कॉल सुबह 7 – 8  बजे तक कर लें। जब आप संभावित ग्राहक को सामान बेचकर अपना दिन सुरु करते हैं तो आपमें ज्यादा ऊर्जा होगी और आप दिन भर बेचते रहने के लिए प्रोत्साहित होंगें। 

स्वयं को सेल्स कारपोरेशन का प्रेजिडेंट माने ,जो बिक्री के परिणामों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। सर्वोच्च आमदनी वाले सेल्स पीपल का यही नजरिया होता है। 

सटीकता से तय करें आपको वास्तव में अपनी मनचाही आमदनी कमाने के लिए कितने प्रोडक्ट्स या सेवाएं बेचने की जरुरत है ?

खुद को समर्पित कर  दें ,आप हरदिन पुस्तकें पढ़कर ,कार यात्रा में ऑडियो टेप सुनकर और सेल्स सेमिनार्स में हिस्सा लेकर बिक्री निरंतर बेहतर करते बनेंगे। 

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मन गांठें खोलो

आज के पोस्ट में एक शानदार कहानी जो की मैंने सूर्या सिन्हा के किताब कहानी बोलती है से लिया है ,कहानी का शीर्षक है – मन  गांठें खोलो

मन  गांठें खोलो -पुराने ज़माने की बात है। एक व्यापारी ऊंटों पर सामान लादकर शहर-शहर जाता और व्यापर करता। एक बार सामान बेचकर वह वापस अपने देश लौट रहा था रास्तें में रात हो गई वह एक सराए पर रुका।

सराए के बहार एक पेड़ के निचे व्यापारी अपने ऊंटों को बाँधने लगा। चार ऊंट बाँध दिए ,मगर पांचवे ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई। जो ऊंट खड़ा था ,उसे इन्तजार था की मालिक भी उसे खूंटे से बांधेगा तो वह भी बैठकर जुगाली करे और थकन मिटायें ,मगर मालिक परेशान था। 
 कहीं ,रास्ते में खो गई थी अब ऊंट को बांधे कैसे ? यदि ना बंधा ऊंट तो दर था की ऊंट रात को कहीं चला ना जाये ,अब व्यापारी क्या करे !


जब कुछ ऊंट के मालिक को कुछ नहीं सुझा तो उसने सोंचा की क्यों ना सराय के मालिक से मदद मांगी जाये और यही सोंचकर आगे बड़ा तो उसने देखा की एक मस्तमौला फ़क़ीर सीधी पे बैठा हुआ था। वह काफी देर से व्यापारी को देख रहा था। व्यापारी करीब आया तो उसने पूछा की क्या परेशानी है ?

बाबा ऊंट की हिफाजत कैसे करूँ , एक ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई है। 


फ़क़ीर हंसा ,मगर व्यापारी उसकी हंसी का अर्थ नहीं समझा – जैसे ही व्यापारी आगे  तो ,क्यूंकि वयापारी ने सोंचा की सराय के मालिक से रस्सी मांगू। 
इसकी कोई जरुरत नहीं है ,जाओ पांचवें ऊंट को वैसे ही बांधों जैसे चार ऊंट को बाँधा है। 
मगर रस्सी…… ?


मैंने कहा न , रस्सी की कोई जरुरत नहीं है ,तुम जाओ और सिर्फ बाँधने का अभिनय करो ऊंट को ऐसे लगे की सच में तुम रस्सी से बाँध रहे हो ,वह फिर कहीं नहीं जायेगा। 


वयापारी ने फ़क़ीर की बात मान ली और वापस जाकर वैसा ही जैसा की फ़क़ीर ने कहा था ,उसने कल्पना की रस्सी से बाँधने का अभिनय किया और कमल की बात यह थी की काल्पनिक रस्सी से बांधते ही वह ऊंट इत्मीनान से बैठ गया और जुगाली करने लगा अन्य ऊंटों की तरह ही।

सुबह हुई। व्यापारी को अब सफर में आगे वापस अपने देश निकलना था। उसने ऊंट भी हांका ,जिसे काल्पनिक रस्सी से बनवा वह ऊंट उठा ही नहीं बाकि सभी ऊंटों के रस्सी खोलते ही उठ खड़ा हुआ। 
उसने ऊंट को डंडे से पीटने लगा क्यूंकि ऊंट के अड़ियलपन पे बहुत गुस्सा आया ,ये उठ नहीं रहा है। 


तभी फ़क़ीर वहां आ गया -इस बेजुबान पर जुल्म क्यों कर रहे हैं ?


देखिये न बाबा ! यह कम्बख्त उठ ही नहीं रहा है  , यह उठेगा कैसे तुमने कल रात को काल्पनिक रस्सी इसके  था खोला तुमने ? 

अगर तुमने रात को रस्सी से नहीं बंधा होता कहीं चला जाता न ऊंट तुम्हारा ,हाँ बाबा पर मैंने तो सिर्फ अभिनय किया बांधने का। 

बिलकुल ठीक जैसे तुंमने बाँधने का अभिनय किया था उसी तरह खोलने का भी करो। व्यापारी ने ठीक वैसे ही खोला जैसे रात को काल्पनिक रस्सी से बंधा था ,उसने पेड़ से रस्सी खोलने और फिर उसके बाद ऊंट के गले से रस्सी खोलने का अभिनय किया। 


आश्चर्यजनक तरीके से ऊंट उठ खड़ा हुआ और अपने साथियों  से जा मिला। व्यापारी ने फ़क़ीर को देखा तो वह मुस्कुरा रहा था। 
जिस तरह यह ऊंट अदृश्य रस्सी  बंधा था और उठ नहीं रहा था , उसी तरह लोग रूढ़ियों से बंधे हैं

इसलिए एक ही जगह पर चलना चाहते हैं यह संसार इसलिए दुखी है और कास्ट में है ,क्यूंकि रूढ़ियों से बंधा है ,मन से बंधा है। 
यह कहकर फ़क़ीर चला गया और व्यापारी ुसवके शब्दों में छिपे गूढ़ रहस्य को समझने की कोसिस करने लगा। 
शिक्षा – इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की –


हमारी असफ़लतों का मूल कारण यही है की हलोग मन से बंधे हैं। पुराणी और घिसी-पीती परम्परओं और रूढ़िवादी विचारों से बंधे हैं। इसलिए चल नहीं रहे हैं। घिसत रहे हैं। यह ऊंट भी ोइन्तेजार में है की रस्सी खोले कौन ?

सभी बंधे पड़े हैं काल्पनिक रस्सी के गांठों से। 
अपने मन से असफ़लता का काल्पनिक भय निकालो। कारण यह वह रस्सी है बांधे हुए हैं और आगे बढ़ें से रोक रही है ,उस रस्सी को तोड़ो और आगे बढ़ने के लिए कमर कस लो।

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बाज का बच्चा

एक घने जंगल में एक बार एक बाज का अंडा किसी तरह जंगली मुर्गी के अण्डों के बिच चला गया और बाकि बाकि अण्डों के साथ मिला गया ,चूँकि अंडे तो सभी सामान होते हैं क्या मुर्गी और क्या बाज। 

जैसे मुर्गी अपने अन्य अंडे का सेवा कर रही थी वैसे ही उसने बाज के अंडे का भी सेवा किया और कुछ दिनों के बाद समय आने पर अंडा फूटा। 

सभी अण्डों से चूजे निकले और बाज के अंडे से भी चूजा निकला। बाज का बच्चा यह अंडे से निकलने के बाद यह सोंचता हुआ बड़ा हुआ की वह एक मुर्गी है।

बाज का बच्चा भी वही काम करते जो अन्य मुर्गी के बाचे करते थे। जैसे अन्य बच्चे जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता और मुर्गी के बच्चे की तरह चूं-चूं करता था।

जब बच्चे खेल-खेल में कुछ फिट तक उड़ते थे और बाज का बच्चा भी वही कोसिस करता था और वह भी कुछ फिट तक उड़ता था।

एक बार की बात है जब बाज का बच्चा उन मुर्गी के बच्चे और मुर्गी के साथ जंगल में अपने दिनचर्या में लगे थे तभी सभी ने आकाश में एक बाज को उड़ते हुए देखा और उन्होंने देखा की बाज आकाश में कुलांचे भर भर रहा था ,मंडरा रह था। 


बाज का बच्चा  ने पूछा माँ इस सुब्दर सी चिडयां का क्या नाम है ? मुर्गी ने कहा – उस सुन्दर चिड़िया का नाम है बाज। फिर उस बच्चे ने -बाज के बच्चे ने पूछा -माँ क्या मैं भी इस बाज की तरह ही उड़ सकता हूँ ? बाज ने कहा-कभी नहीं ! तुम मुर्गी हो और मुर्गी उस बाज की तरह नहीं उड़ सकते हो। 

उस बाज के बच्चे ने बिना सोंचे-विचारे इस बात को मान लिया और विडंबना देखिये की वह बाज का बच्चा ने मुर्गी के बिच में रहकर मुर्गी की तरह जिया और मुर्गी की तरह ही वह मर गया।

सोंचने की क्षमता न होने के कारन वह विरासत को खो बैठा। कितना बड़ा नुकसान हुआ। वह जितने के लिए पैदा हुआ था , पर वह दिमागी रूप से हार के लिए तैयार हुआ।

Moral -अधिकतर लोगों के लिए यही बात सच है। जैसा की ओलिवर बेंडहाल होम्स ने कहा है – हमारे जिंदगी का दुर्भाग्यपूर्ण पहलु यह है की ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इक्षा लिए ही कब्र में चले जाते हैं।

हम अपनी ही दूरदर्शिता की कमी के कारण से ही बेहतरी हासिल नहीं कर पाते हैं।

हमें यह बात हमेशा याद रखना चाहिए आप भी एक बाज हैं और आप उड़ने के लिए पैदा हुए हैं ,जब कोई काम अन्य कोई कर सकता है ,सफल हो सकता है तो आप क्यों नहीं।

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उठना सीखो

धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है जित आपकी किताब से जिसके लेखक है –शिव खेड़ा। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज शेयर जरूर करें। सच में आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें। 


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तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द

आप शांति से विचार करेंगे तो ख्याल आएगा की आप आज जिस परिस्थिति में जी रहे हों उसमें कहीं ना कहीं ईश्वर का पावरफुल शब्द का इस्तेमाल आपने जाने या अनजाने में करवाया है – तथास्तु !ऐसा आपको काफी समय से से लग रहा था।

इसलिए तो लग कहते हैं की –

मैं जानता था की मुझे देर हो जाएगी –

मैं जनता ही था की हम ट्रैन चूक जायेंगे –

मैं जनता ही था की तू कुछ नहीं करने वाला नहीं है –

मैं जनता ही था की वहां कुछ मिलेगा नहीं 

मैं जनता था की ये  में टाइम पास कर रहा है कुछ खरीदेगा नहीं –

मैं जनता था की आप बीमार पड़ने  वाले हो-

मैं जनता था  उसकी बहुत लम्बी नहीं चलेगी –

मैं जनता अब धंधा  चलेगा अब बंद करने का समय आ गया है। 

मैं जनता था की तू परिवार का नाम डुबोएगी या डुबाएगा।

हम कितनी बातें ही क्यों ना जानते हों यह जानकारी या खबर कुछ नहीं है केवल अपने मन की कल्पना होती है।

पक्की कल्पना ही होती है ,श्रिस्टी के महान रहस्यों में एक रहस्य यह है की हमारी प्रत्येक कल्पना के ऊपर ईश्वर के पास देने के लिए सिर्फ  शब्द है वो है – तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

यूँ ही कुछ भी नहीं हुआ है ,हर कल्पना पर तथास्तु हुआ है। 

श्रिस्टी की सर्वोत्तम सत्ता यह नहीं देखती है आपको क्या चाहिए ये आपकी मन से उत्पन्न कल्पना की तरंगों को पहचानती है और आपकी ख़िदमती में इसे वास्तविकता में आपके सामने पेश करती है।

तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द है। वह तो मात्र तथास्तु करते हैं चाहे आपके मन की कल्पना आपके विचार आपके जीवन में खुशियां लेट हों या दुःख।

अनजाने में भी की गई कल्पना पर भी तथास्तु। जान बूझकर की गई कल्पना पर भी तथास्तु !

और हाँ यह तथास्तु का जादू आपके जीवन में 24 घंटे चलता रहता है चाहे आप या न ,ध्यान आप देते हैं या नहीं कोइ फर्क नहीं पड़ता है इसपर। 

दोस्तों ,हमें यह तय करना है की हम तथास्तु किस पे कराना चाहते हैं वो भी सुबह जागते ही। हमें तय करना ही होगा।

आप या जिंदगी जैसी चल रही वैसी ही चलने दें या अपने मुताबिक आप डिज़ाइन करें।

आपको पता चल चूका है की तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

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धनवान कैसे बने 

उम्मीद है आपको मेरा आज का पोस्ट पसंद आया होगा। अगर आपने यह पोस्ट पढ़ा है और आपके मन में कोई भी प्रश्न उत्पन्न हुए हैं आप कमेंट बॉक्स में डालकर पूछ सकते हैं। और प्लीज अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करना न भूलें। 

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नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका – 
अपनी नियामतें गिने – दस नियामतों की सूचि बनायें। लिखें की आप क्यों कृतज्ञ हैं। अपने सूचि दोबारा पड़ें और हर नियामत के अंत में कहें धन्यवाद ,धन्यवाद ,धन्यवाद धन्यवाद। उस नियामत के अधिकतम कृतग्यता महसूस करें। 

कृतज्ञ सभी परिस्थितिओं में कृतज्ञ होता है। 

– बहाउल्ला ( 1817 – 1892 ) 

चाहे सम्बन्धोंए में उलझन हो , आर्थिक दबाव हो, स्वास्थ्य की गड़बड़ी हो या नौकरी की समस्या लम्बे समय तक कृतग्यता की कमी के कारण नकरात्मक परिस्थितयां उत्पन्न हो जाती है।

चीजों को नजरअंदाज करना नकरात्मकता का एक प्रमुख कारण है,क्यूंकि जब हम चीजों को नजरअंदाज करते हैं

तो हम  धन्यवाद नहीं दे रहे हैं और इसके फलस्वरूप अपने जीवन में आप जादू सक्रीय होने से रोक रहे हैं।

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका , आप जब भी किसी नकरात्मक स्थिति में हो तो आप क्या कह सकते हैं ,इसके उदाहरहण दिए जा रहे हैं :

मैं बहुत कृतज्ञ हूँ की इस दौरान मेरे पास अपने परिबार के लिए अधिक समय है।

मैं कृतज्ञ हूँ की खाली समय होने के कारण अब मेरा जीवन बेहतर जीवन बेहतर व्यवस्थित हो गया है – जब आपको यह लगे की आपका जीवन अव्यवस्थित हो रहा है।

मैं कृतज्ञ हूँ की मेरे पास जीवन में अधिकतर समय नौकरी रही है और मैं अनुभवी हूँ – जब आपको नौकरी में कोई दिक्कत लग रही हो तो।

मैं कृतज्ञ हूँ की रोजगार के नए-नए अवसर आ रहे हैं और हर दिन नै नौकरियां सामने आ रही है – जब आप बेरोजगार हों और नौकरी की तलाश हो। 

मैं अपने परिवार के प्रोत्साहन और समर्थन के लिए कृतज्ञ हूँ – जब आपको ऐसा लगे की आपको अपने परिवार का साथ न मिल रहा हो तो।

मैं सचमुच में कृतज्ञ हूँ की मेरे पास  क्यूंकि कठिन समय के बिच अच्छे समय भी रहे हैं और पिताजी के साथ आगे भी और अच्छे समय रहेंगे और मैं इस बात के लिए ईश्वर का कृतज्ञ हों।

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10 मानसिक शक्ति के प्रभावशाली नियम

दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

धन्यवाद दोस्तों ,मुझे उम्मीद है आपको मेरा आज का यह पोस्ट पसंद आया होः तो इसे शेयर करना और अपने मित्रों को बताना ना भूलें। यह पोस्ट में लिया है बेस्ट सेल्लिंग बुक्स जादू ( the secret ) रांडा बर्न। इसके लेखक हैं

और मैंने भी इस जादू को अपने जीवन में महसूस किया है शायद आपने भी। कृतग्यता में जादू है आप भी इसे महसूस करेंगे आप  से किसी को धन्यवाद और कृतज्ञ होते हैं तो आप जादू का निर्माण करते हैं जिस से कुछ भी संभव है। 


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चमत्कार की उम्मीद करें -चमत्कार हो जायेगा।

चमत्कार की उम्मीद करें -चमत्कार हो जायेगा।- जब कोई व्यक्ति चमत्कार की उम्मीद करने लगता है तो उसका मस्तिष्क इतना ग्रहणशील हो जाता है की वह दरअसल चमत्कार करने लगता है।

वह चमत्कार की  वेवलेंग्थ पर पहुँच जाता है। उसकी नैसर्गिक योग्यताएं नकरात्मक के वजाय सकरात्मक रूप से केंद्रित हो जाता है। उसकी मस्तिष्क की शक्तियां सक्रीय हो जाती हैं।


 जिन नकरात्मक आशंकाओं ने उम्मीद को दूर भगा दिया था ,उनकी जगह अब सकरात्मक उम्मीदें आ जाती हैं जो सकरात्मक परिणामों को आकर्षित करती है। 


डिक्सनरी में चमत्कार की एक परिभाषा यह है  ” गुणवत्ता का अद्भुत उदाहरहण ” और हम इसी गुणवत्ता के बारे में बात करना चाहते हैं ,मस्तिष्क की वह गुणवत्ता जिसमें अद्भुत का सृजन करने की क्षमता है।

यह इस बात पर यकीं करने की काबिलियत है की हर अच्छी चीज सच हो सकती है।  यह चमत्कार की उम्मीद करने और सचमुच चम्तकार ( अद्भुत काम ) करने की क्षमता है। 


 चमत्कार की उम्मीद -करें -चमत्कार हो जायेगा- 

सबसे पहले , चमत्कार की उम्मीद करें और अद्भुत चीजों के अहसास को बढ़ाएं

प्रेरणा हासिल करें ,गहरा आत्मविश्वास रखें और कभी किसी व्यक्ति या वस्तु के कारण कम न होने दें। वाल्ट डिजनी को याद रखें।

गर्व करें  देश में रहते हैं की जहाँ चमत्कार हो सकते हैं – जहाँ अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।

हमेशा उत्साह से सोंचें – सोंचें कभी भी अपने दिमाग को वैचारिक लकवा न होने दें।

हमेसा उस बड़े विचार की तलाश में रहें जो आपकी जिंदगी बदल सकता है।

जान लें की आप खुद एक चमत्कार हैं। और यकीं रखें की सोंचने ,प्रार्थना करने ,विस्वास करने , और लोगों की मदद करने से आप चम्तकार कर सकते हैं।

याद रखें ककी चमत्कार वे लोग , जो सोंचते है की वे कर सकते हैं। 

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बेचना सीखो और सफल बनो

सवाल ही जवाब  है

धन्यवाद दोस्तों ,यह आज पोस्ट मैंने लिया है एक सहनदार किताब जिसका नाम है – बुलंद इरादे निश्चित कामयबी और जिसका लेखक हैं -नार्मन विन्सेंट पिल। आप  को पूरा पढ़ें। 

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नेतृत्व क्या है ?- who is leader ?


नेतृत्व का ना तो आपके बिज़्नेस कार्ड पर दिए गए परिचय से कुछ लेना- देना है और ना ही आपके कार्यालय के आकार से नेतृत्व का ना तो आमदनी से कुछ लेना है और ना आपके पहने जाने वाले कपड़ों से ही सरोकार है । 

नेतृत्व एक दर्शन है , एक दृष्टिकोण है ।यह मनोस्थिति है ।यह प्राकृति की दें हम में से प्रत्येक व्यक्ति को मिली हुई है ।

हर समस्या में एक अनमोल अवसर छिपा रहता है, ताकि चीज़ों में सुधार लाया जा सके । नेता वही है जो अवसर को ढूँढ निकाले ।

नदी की धारा जितनी शुद्ध होगी , उसका जल उतना ही अच्छा होगा ।

किसी संघठन का नेता जितना महान होगा , वह संघठन उतना ही सफल बनेगा ।

एक नेता होने के लिए एक बड़ा दर्जा हासिल करना ज़रूरी नहीं है ।

एक नेता होने का अर्थ है अपने कार्य को ऐसे अवसर के रूप में देखना जिससे दुनिया में बदलाव लाकर उसे बेहतर बनाया जा सके । 

फिर इससे अंतर नहीं पड़ता हैंकी आप कार्य क्या करते है । 

व्यक्तिगत बदलाव का मिथक – बहुत से लोग ऐसा मानते हैं की एक इंसान के तौर पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए उन्हें क्रांतिकारी बदलाव करने पड़ेंगे । और हम में अधिकांश लोगों के लिए यह एक भयानक विचार है । 

बिना धैर्य के कोई भी व्यक्ति प्रतिभावान नहीं हो सकता । 

आपको यह बात याद रखना चाहिए की दुनिया का निर्माण करने वाले लोग असफलता के साथ तो जी सकते हैं लेकिन वे बिना प्रयास के किए नहीं जी सकते । 

अच्छा महसूस करने के लिए अच्छा करें – निराश व्यक्ति के लिए आशावादी होना अच्छा है , बजाय एक निराशावादी के जिसके मन में कोई उम्मीद नहीं है ।

मैंने आज का या पोस्ट लिया है best selling books रॉबिन शर्मा के किताब से जिसका नाम है – जादुई सफलता पाने शुत्र । आप इस किताब को ज़रूर पड़ें। नेतृत्व क्या है ?- who is leader ? 


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पैरेडाइम की शक्ति

पैरेडाइम की शक्ति 

पैरेडाइम उन सही सिद्धांतों को आत्मसात करने का प्रतिनिधित्व करती है , जो स्थायी सुख और सफलता की निव है । 

पैरेडाइम की शक्ति

पैरेडाइम( paradigm) शब्द ग्रीक भाषा से आया है । यह मूलतः वैज्ञानिक शब्द है और आजकल इसका प्रयोग आमतौर पर प्रतिमान, सिद्धांत, मान्यता या दृष्टिकोण के अर्थ में किया जाता है ।

अधिक सामान्य रूप में, यह वह तरीक़ा है जिससे हम दुनिया को देखते हैं ।

हमारे उद्देश्यों के लिए पैरेडाइमस को समझने का आसान तरीक़ा उन्हें नक्शों के रूप में देखना है । हम सब जानते हैं कि नक़्शा क्षेत्र नहीं होता ।यह तो सिर्फ़ वास्तविक क्षेत्रों के कुछ पहलुओं को स्पष्ट करता है ।और पैरेडाइमस यही करता है ।

मान लीजिए शिकागो में किसी ख़ास जगह पर पहुँचना चाहते हैं ? अगर आपके पास शहर का नक़्शा हो, तो आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचने में मदद मिलेगी । परंतु आपको ग़लत नक़्शा दे दिया जाए , तो आप उस कुंठा और असफलता की कल्पना कर सकते हैं जिसका सामना आपको शिकागो में अपनी मंज़िल तक पहुँचने की कोसिस करते समय करना पड़ेगा ? 

पैरेडाइम परिवर्तन की शक्ति – 

कूहन बताते हैं की वैज्ञानिक प्रयास के हट क्षेत्र में लगभग हर महत्वपूर्ण सफलता परम्परा तोड़ने, सोंचने के पुराने तरीक़े से मुक्त होने और पुराने पैरेडाइमस में परिवर्तन करने से हासिल हुई है ।

पैरेडाइम परिवर्तन की एक कहानी – एक बार ट्रेन में रविवार की सुबह को एक व्यक्ति अपने बेटे के साथ जो की १८ साल का एक जवान था आया और खिड़की के किनारे वो लड़का बैठ गया और जैसे ही ट्रेन चली तो वो लड़का बहुत ज़ोर-ज़ोर से ताली बजाने लगा वाह! वाह ! पापा देखो पत्ते हरे-हरे है। पापा देखो बाहर कितना अच्छा लग रहा है ? हर चीज़ को देखकर ख़ुश हो रहा था । 

यह सबकुछ सामने वाला सीट पे बैठा व्यक्ति देखते- देखते वो चिल्ला उठा अरे भाईसाहब ये पागल है इसे आप संभाल कर रखिए ।

तभी उसके पिता बोले – नहीं, नहीं ये पागल नहीं है अभी-अभी इसका आँख का ऑपरेशन हुआ और ये बचपन से अंधा था , ऑपरेशन सफल रहा। अब ये देख सकता है । इसने अभी- अभी नया सबकुछ देखना सुरु किया जिससे ये उत्साहित है । 

क्या लग रहा है आपको उस व्यक्ति का उस लड़के के प्रति पैरेडाइमस बदला होगा या नहीं ? 

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स्वयं से प्रश्न

स्वयं से प्रश्न

from google

क्या आप स्वयं से प्रश्न पूछते हैं ?-याद करने की कोसिस कीजिये ,पिछली बार,कब आपने एकांत में बैठकर स्वयं से कुछ प्रश्न पूछे और अंतरात्मा से ईमानदार उत्तर लिया। बहुत कम लोग ही ऐसा करते हैं ,खुद से प्रश्न करनेवाले का प्रतिसत दुनिया में बहुत कम है। 

 

खुद से प्रश्न करना बहुत कठिन है क्यूंकि हमारा मन सारे प्रश्नों का उत्तर जानता है। यदि आपका जीवन मूल्य स्पष्ट है और आप उन मूल्यों पर आधारित जीवन जी रहे हैं,तो आपको स्वयं से प्रश्न करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 

 

 

यदि आपके जीवन के लक्ष्य स्पस्ट नहीं है ,आपके कार्य योजना स्पस्ट नहीं है ,आपके जीवन मूल्य स्पस्ट नहीं है तो आपको स्वयं से प्रश्न करने में दिक्कत महसूस होगी। 

 

हर रोज स्वयं से प्रश्न कीजिये जो आपके कानों में मिश्री घोलते हों और ऐसे प्रश्न भी कीजिये जो आपके कानों में सीसा उड़ेलते हों। जिंदगी में सरे उत्तर आपके भीतर से ही पैदा होंगे। 

 

प्रश्न जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। 

  • मेरे जिंदगी जीने का उद्देश्य क्या है , दुनिया से जाने के बाद मैं किस रूप में जाना चाहूंगा ?

  • किस काम को करते हुए  मैं सर्वाधिक खुसी महसूस करता हूँ और करूँगा। 

  • मेरे भीतर कौन-कौन सी प्रतिभा है ,जो मुझे भीड़ से अलग पहचान दे सकती है ?

  • आज से दस वर्ष बाद मैं खुद को किस मुकाम पर देखना चाहूंगा। 

  • आज से दस वर्ष बाद खुद को किस मुकाम पर देखना चाहूंगा ?

 

प्रतिदिन सुबह स्वयं से प्रश्न कजिये –

  • कौन से तीन कार्य ऐसे हैं जिन्हें मैं आज करूँगा। 

  • आज मैं ऐसा क्या करूँ जिससे मेरे आसपास के लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ सके। 

  • आज के दिन को बाईट हुए दिन की तुलना में ज्यादा खास बनाने के लिए क्या कर सकता हूँ ?

 

प्रतिदिन सोने से पूर्व स्वयं से प्रश्न कीजिए –

  • क्या आज मैंने ऐसा कोई गलत कार्य किया है , जिसे मुझे नहीं करना चाहिए था ?

  • क्या आज हर कार्य मैंने अपनी सर्वश्रेष्ठ योग्यता  से किया ?

  • क्या मैंने आज के दिन के समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग किया ?

 

बार-बार खुद से पूछने पर जो आपके अंतर्मन से निकले उत्तर आपकी जिंदगी बदल देगी। 


Motivational lines –


सभी उत्तर जानने से कुछ प्रश्न जानना ज्यादा अच्छा है।                                – जेम्स थर्बर। 

 

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सवाल ही जवाब  है

उठना सीखो

 

 

 

धन्यवाद दोस्तों ,

आप सभी पाठकों का बहुत बहुत सुक्रिया की आपलोगों के कारण इस  ब्लॉग का पॉपुलैरिटी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। दिल से आप सभी का धन्यवाद शेयर और लाइक करने की लिए। आज का पोस्ट मैंने लिया है डॉ उज्जवल पाटनी के किताब – पावर थिंकिंग से। 

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एक महान दिन की शुरुआत करें

एक महान दिन की शुरुआत करें

MORNING HABBITS

एक महान दिन की शुरुआत करें -एक महान दिन जीवन अच्छी तरह जिए गए दिनों की मोतियों के हार की पिरोयी गई श्रृंखला से ज्यादा कुछ नहीं होता। महान दिनों के लिए एकाग्र हों,और एक महान दिन का आना तय है। 

 

    1.  अपने दिन की शुरुआत 10 चीजें लिखकर करें ,जिनके लिए आपको अपने जीवन में कृतज्ञ होना  है। 

    2. ३० मिनटों का समय लेकर  विवेक बढ़ाने वाला साहित्य से कुछ पड़ें ,ताकि आपका नजरिया फिर से बहाल कर सकें और खुद को आप प्रेरित कर सकें। 

    3. 5 मिनट का समय लेकर अपने दिन की योजना बनाएं और उसके द्वारा एक ऐसा साँचा की रचना करें ,जिसके आधार पर आप दिन के बाकि घंटे बिताएं। इसके अतिरिक्त 3 ऐसे छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें ,जिन्हें आप इस दिन हर हालत में हासिल करेंगें। 

    4. ऐसे आहार लें ,जिसे एथिलीट अपने जीवन की सबसे अहम् स्पर्धा की तयारी करते हुए लेगा और प्रयाप्त मात्रा में पानी पियें 

    5. अपने दिन के अंत में ,अपने जर्नल में लिखकर गहराई से यह चिंतन करें की आपने इसे कैसे बिताया। अपने कार्यों का मूलयांकन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें, जिन्हें बेहतर करना है। 

  1. अपने दिन को अपनी छोटी-छोटी जीतों पर सोंचते हुए एक ऊँचे स्तर पर समाप्त करें ( जैसे ,वे वचन जो आपने निभाया ,व्यायाम जिनका आपने आनंद उठाया,सम्बन्ध जो आपने बनाये ,सबक जो आपने सीखा। )

 

 

प्रेरक वचन –

 

हमें इसके लिए सावधान रहना चाहिए की हम अनुभव से सिर्फ उसकी सिख निकाल लें और आगे न बढ़ें,वरना हम एक बिल्ली की तरह ही बन जायेंगे ,जो एक गरम चूल्हे के ढक्कन पर बैठ जाती है। वह फिर कभी भी गरम के चूल्हे के ढक्कन पर नहीं बैठेगी और वह ठीक ही होगा, मगर तब वह एक ठंढे चूल्हे के ढक्कन पर भी नहीं बैठ सकेगी। 

                                                                                                 मार्क ट्वेन। 

जीवन छोटा है। अपने जीवन में सबसे अहम चीजें न भूलें : दूसरे लोगों के जीने तथा उनका भला करना। 

                                                                                                  – मार्कस ओरेलिया। 

 नेतृत्व की सबसे बड़ी विडंबना यह है की आप जितना ज्यादा देते हैं ,उतना ही ज्यादा पाते हैं। और जब सब कुछ कहा तथा  है ,तो जो सर्वोत्तम तथा टिकाऊ आप कभी दे सकेंगे ,वह वही  होगा जिसे आप अपने पीछे छोड़ जायेंगे। अपने पीछे आनेवाली पीढ़ियों को अपनी विरासत वे मूल्य होंगे,जिन्हें आप जोड़ेंगे और वे जीवन होंगे ,जिन्हें आप बेहतर करेंगे। 

                                                                                                 – रॉबिन शर्मा।  

 

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प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला

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कृतग्यता

 

 

न्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट एक महान दिन की शुरुआत करें मैंने लिया है एक किताब जिसका नाम है मुट्ठी में तकदीर जिसके लेखक हैं रोबिन शर्मा। इस किताब में जीने का तरीका बताया गया है ,आप इसे जरूर पड़ें। 

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प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला

लोक  व्यवहार- प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला -दिलचस्प शैली और सरल भाषा में अंतरास्ट्रीय बेस्टसेलिंग लेखक डेल कारनेगी प्रैक्टिकल सलाह देते हैं और लोगों को प्रभावित करने के आजमाए हुए अचूक तरीके बताते हैं जिन पर अमल करने के बाद आपका जीवन पहले से अधिक सुखद और संपन्न हो जायेगा। 

 

 

यह पुस्तक आपके लिए आठ काम करेगी –

 

1 – आपके दिमाग पर लगी जंग साफ़ करेगी ,नए विचार देगी ,आपमें नए सपने जगाएगी और नई महत्वकांछाओं को प्रेरणा देगी। 

2 -आपको ऐसा तरीका बतएगी जिससे आप जल्दी से और आसान दोस्त बना सकेंगें। 

3 -आपकी लोकप्रियता बढ़ाएगी। 

4 – लोगों से आपकी बात मनवाने में मदद करेगी। 

5 आपका मान -सम्मान  प्रभाव को बढ़एगी और काम करने  और कराने की योग्यता बढ़एगी। 

6 – शिकायतों से निपटने ,बहस से बचने ,और संबंधों को मधुर बनाने के तरीके सिखयेगी। 

7 -एक अच्छा वक्ता और दिलचस्प बातें करने वाला बनाएगी। 

8 -आपके साथियों में उत्साह भरने का तरीका सिखयेगी। 

इस पुस्तक ने छत्तीस से भी ज्यादा भाषाओं में एक करोड़ से भी ज्यादा पाठकों के लिए काम किया है। 

 

 

लोक  व्यवहार- प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला पुस्तक में  सिद्धांत दिए गए हैं 

 

खंड एक 

लोगों को प्रभावित करने के मूलभूत तरीके 

अगर शहद इकठ्ठा करना हो –तो मधुमक्खी के छत्ते पर लात न मारें 

 

सिद्धांत -1 

बुराई मत करो ,निंदा मत करो ,शिकायत मत करो –लोगों के साथ व्यवहार करने का अचूक रहस्य  

 

सिद्धांत -2 

सच्ची तारीफ करने की आदत डालें –जो यह कर सकता है उसके साथ पूरी दुनिया है 

 

सिद्धांत -3 

सामने वाले व्यक्ति में प्रबल इच्छा जगाएं। 


खंड दो 

 

लोगों का चहेता बनने के  छह तरीके –

 

हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएं 

 सिद्धांत -1 दूसरे लोगों में में सचमुच रूचि लें – तत्काल प्रभावित करने का आसान तरीका 

 

तत्काल प्रभावित करने का आसान तरीका

 सिद्धांत -2 मुस्कुराएं 

 

अगर आप यह नहीं कर सकते हैं तो मुश्किल में हैं 

सिद्धांत -3 –याद रखें किसी व्यक्ति का नाम सबसे महत्वपूर्ण और मधुरतम शब्द होता है। 

 

अच्छा वक्ता बनने का आसान तरीका 

सिद्धांत -4 अच्छे श्रोता बनें। दूसरों को खुद के बारे में बातें करने के लिए प्रोत्साहित करें। 

 

लोगों की दिलचस्पी कैसे जगाएं 

सिद्धांत -5  सामने वाले व्यक्ति की रूचि के विषय में बात करें। 

 

किस तरह लोगों को तत्काल आकर्षित करें 

सिद्धांत -6 सामने वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण कराएं -और ईमानदारी से कराएं। 

 

खंड तीन 

लोगों से अपनी बात कैसे मानवाएँ 

बहस से कोई फायदा नहीं होता 

सिद्धांत -1 बहस से एक ही फायदा हो सकता है और वह है इससे बचना। 

 

दुश्मन बनाने का अचूक तरीका – और इससे कैसे बचा जाये 

सिद्धांत -2 दूसरे व्यक्ति के विचारों के प्रति सम्मान दिखाएँ। 

 

यह कभी न कहें की ,आप गलत हैं अगर गलती आपकी हो ,तो मान लें 

सिद्धांत -3  अगर गलती आपकी हो ,तो तत्काल और पूरी तरह अपनी गलती मान लें। 

याद रखें लिंकन ने क्या कहा था :एक गैलन सिरके के बजाय शहद की एक बूँद से ज्यादा मक्खियाँ पकड़ी जा सकती है। 

 

सिद्धांत -4 दोस्ताना तरीके से शुरुआत करें। 

 

सुकरात का रहस्य 

सिद्धांत-5 सामने वाले व्यक्ति से तत्काल हाँ ,हाँ  कहलवाएं। 

 

शिकयतों से निपटने का आसान तरीका 

 

सिद्धांत-6 सामने वाले व्यक्ति को ज्यादा बातें करने दें। 

 

सहयोग हासिल कैसे किया जाए 

सिद्धांत-7  दूसरों व्यक्ति को यह लगने दें की यह विचार उसी का है।

 

एक फार्मूला जो आपके लिए चमत्कार कर दे 

 

सिद्धांत -8 ईमानदारी  सामने वाले व्यक्ति का नजरिया समझने की कोशिस करें। 

 

लोग क्या चाहतें है ?

सिद्धांत -9 सामने वाले व्यक्ति के विचरों और इच्छाओं के प्रति सहानभूति पर्दर्शित करें। 

 

हर व्यक्ति यह आग्रह पसंद करता है 

 

सिद्धांत -10 आदरसवादी सिद्धांतों का सहारा लें। 

 

फिल्मों और टीवी में यह होता है ,आपसे क्यों नहीं ?

सिद्धांत-11 अपने विचारों को नाटकीय तरीके से प्रस्तुत करें। 

 

जब कुछ और काम न आए तो यह करें 

 

सिद्धांत-12 चुनौती दें। 

 

खंड चार 

 

ठेस पहुंचाए बिना लोगों को कैसे बदलें 

 

अगर गलती ढूंढनी है तो ऐसे ढूंढे

 

सिद्धांत -1 

तारीफ और सच्ची प्रंशंसा से बात शुरू करें।आलोचना करें , पर ऐसे की सब आपकी तारीफ करें 

 

सिद्धांत -2 

 

लोगों की गलतियां सीधे तरीके से न बताएं-पहले अपनी गलतियां बताएं 

 

सिद्धांत -3 

 

किसी की आलोचना करने से पहले अपनी गलतियां बताएं। कोई नहीं चाहता की आप उस पर हुक्म चलाएं 

 

सिद्धांत -4 

 

सीधे आदेश देने के बजाय –प्रश्न पूछें –सामने वाले व्यक्ति को अपनी लाज रखने दें 

 

सिद्धांत -5 

सामने वाले व्यक्ति को अपनी लाज रखने दें –सफलता के लिए लोगों को प्रेरित करने की विधि 

 

सिद्धांत -6

 

थोड़े से सुधार की भी तारीफ करें और हर सुधार पर तारीफ करें। दिल खोल कर तारीफ करें और

 मुक्त कंठ से सराहना करें बुरे को भला नाम दे दें 

 

सिद्धांत -7 

 

सामने वाले व्यक्ति को एक ऐसी इमेज दे दें ,जिसे वह सही साबित करना चाहे। गलती सुधारना आसान लगना चाहिए 

 

सिद्धांत -8 

 

प्रोत्साहित करें– यह बताएं की गलती सुधारना आसान है। वह तरीका जिससे लोग आपका काम खुशी खुशी कर दें

 

सिद्धांत -9 

सामने वाले व्यक्ति को कोई काम इस तरह सौंपे की वह आपका कहा काम खुशी-खुशी कर दे। 

 

 

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छठवाँ स्तर

छठवाँ स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

छठवाँ स्तर तक विकाश करने वाले लोग विरले ही होते हैं। अगर आपने लोगों को इस स्तर तक लेन में मदद की है ,उनके साथ सर्वाधिक प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। वे ऐसे लीडर्स हैं ,जो कहीं भी सफल हो सकते हैं। उनके पास ऐसी योग्यतयें व् दक्षताएं हैं ,जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या उद्योग तक सिमित नहीं हैं।  

अपने जीवन कल में अगर ईश्वर आपको ऐसे एक या दो व्यक्ति प्रदान करता है ,तो आपमें प्रबल सामूहिक क्षमता होगी। जो आपकी व्यक्तिगत क्षमताओं से कहीं आगे जाकर प्रभाव छोड़ सकती है। 

 

स्तर जितना ऊँचा होगा ,वहाँ पर उतने कम लोग होंगे। आप यह भी पाएंगे की स्तर बढ़ने के साथ छलाँग ज्यादा मुश्किल होती जाती है। ऊँचे स्तर  पर पहले वाले स्तर से ज्यादा संकल्प,समर्पण और लगन की जरुरत होती है। 

 

आप जिन व्यक्तियों का विकास कर रहे हैं ,उनमें से प्रत्येक के बारे में आपको कठोर निर्णय लेना होंगे। सिर्फ छठे स्तर तक पहुँचने वाले व्यक्ति को छोड़ कर। जब आप लोगों का विकाश करते हैं ,तो आप हर व्यक्ति से उस स्तर पर मिलते हैं जहाँ पे वह होता है ,आम तौर पर पहले स्तर पर।

 

इसके बाद आप अपनी यात्रा  सुरु करते हैं। आपका काम यह है की जब तक वह व्यक्ति आगे बढ़ना और विकास करना चाहे ,तब तक आप उसके साथ चलें और उसकी मदद करें। जब वह आगे बढ़ना बंद कर दे ,

तब आपको कठोर निर्णय लेना पड़ता है-आपको उस व्यक्ति को पीछे छोड़ना होता है। हो सकता है आप उससे सम्बन्ध बनाये रखें,परन्तु अब उसका विकास करना छोड़ देते हैं। 

 

लोगों के विकासकर्ता के रूप में यह बहुत मुश्किल काम होता है। हम लोगों को इतना ज्यादा समय , ध्यान,और परवाह देते हैं की किसी को पीछे छोड़ना अपने बच्चे को छोड़ने की तरह मुश्किल होता है ,परन्तु आप किसी को सबसे ऊँचा स्तर तक विकास करने के बाध्य नहीं कर सकते हैं।

 

आपको उस व्यक्ति को उसी के स्तर पर छोड़ने का कठोर निर्णय लेना होता है। यह मुश्किल होता है ,परन्तु लोगों का विकास करने के लिए यह कीमत  चुकाना ही पड़ता है। 

 

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