जीवन एक भेलपुरी है- KADVE PRAVACHAN

जीवन एक भेलपुरी है , बर्फी का टुकड़ा नहीं। जीवन भेलपुरी की तरह कभी खट्टा तो कभी मीठा है। हमें ध्यान रखना होगा की जिंदगी में सुख के साथ  दुःख होना लाजमी है।

दिन के बाद रात्रि और रात्रि के बाद दिन – यह शास्वत- नियम है। दिन ही नहीं टिकता तो रात कहाँ से टिकेगी ? सुख नहीं टिकते तो दुःख कहाँ से टिकेंगे ? बुरे समय में बस यही याद रखें की जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे भी ज्यादा समय तक रहने वाले भी नहीं है। अँधेरा गहरा हो जाये तो समझना सुबह होने को है।

जीवन का एक-एक पल अमूल्य है। इसे व्यर्थ की निंदा में मत गवां देना।  , ऑफिस की छुट्टी है तो ऐसा नहीं सोंचना की कहीं घूम आते हैं ,किसी होटल में बढ़िया खाना खा लेते हैं।

नहीं  समय की हत्या है। छुट्टी है तो कहीं मत जाओ घर में ही बैठो भजन करो। भजन  में मन न लगे तो चादर तानकर सो जाओ लेकिन किसी की निंदा या बुराई मत करो।

आँख बड़ी नालायक है।  अनर्थों की जड़ मनुष्य की आँख ही है। आँख बिगड़ती है तो मन बिगड़ता है ,मन बिगड़ता है तो वाणी बिगड़ती है। वाणी बिगड़ती है तो व्यवहार बिगड़ती है ,व्यवहार बिगड़ता है तो पूरा जीवन बिगड़ जाता है।

सीता को देखकर रावण की आँख ही तो बिगड़ी थी तो उसका मन बिगड़ गया. फिर रावण का जीवन बिगड़ गया।


मन पर अंकुश रखने के लिए पतंग उड़ाना सीखिए। पतंगबाज जब हवा अच्छी होती है तो पतंग ढीली छोड़ देता है की , कहाँ जाती है ? मगर हवा कमजोर पड़ती है ,पतंग निचे आने लगती है तब वह डोर खिंच लेता है।

इसी प्रकार जब तुम्हारा मन शुभ और पुण्य की ओर जाता है तो जाने देना। मगर जब बुराई और पाप की ओर जाने लगे तो उसे उधर से तुरंत खिंच लेना।

चार चीजें कभी टिकती नहीं है। एक फ़क़ीर के हाथ में धन। दो चलनी में पानी। तीन श्रावक का मन और चार संत-मुनि के पैर।

चार चीजें जो कभी नहीं भरती है। एक – गाँव का शमसान। दो लोभ का गड्ढा। तीन पानी का समुद्र और चार मनुष्य का मन।

अंग्रजी के AND और END . AND का अर्थ और। थोड़ा है ,थोड़ा और चाहिए। जबकि END का अर्थ है – बस ! अब और नहीं।


Related Post-

कड़वे प्रवचन

उठना सीखो 

जीवन एक भेलपुरी है-kadve pravachan

positive shareing
2Shares

इच्छा

इच्छा इच्छा – सफल होने के लिए प्रेरणा किसी मकसद को हासिल करने की गहरी इच्छा से जन्म लेती है। इच्छा बहुत ही जरुरी तत्व है सफलता के लिए। नेपोलियन हिल ने भी लिखा है -इंसान का दिमाग जिन चीजों को सोंच सकता है,  पर यकीं कर सकता है ,उन्हें हासिल भी कर सकता है। 

 

 

आखिर सफलता के लिए इच्छा कैसा होना चाहिए ?  छोटा सा कहानी बताने जा रहा हूँ। 

 

एक यूवक सुकरात ( जो की बहुत ही सफल व्यक्ति थे ) से सफलता का रहस्य पूछा ? सुकरात ने उस युवक से अगर आप सफलता का रहस्य जानना चाहते हैं कल सुबह  नदी के किनारे मिलना। दूसरे दिन युवक सुकरात से मिलने नदी के किनारे सुबह-सुबह पहुँच गया ,अभी सूर्य की लालिमा आने को थी। 

सुकरात ने उस युवक को बोला की आप मेरे पीछे-पीछे आओ और वो खुद नदी के अंदर धीरे-धीरे जाने लगे। सुकरात पानी के उस तल तक नहीं पहुँच गए जहाँ पे पानी उनके गर्दन तक पहुंच रहा था और उस युवक के भी पानी उसके गर्दन डूबने तक था।

 

तो अचानक से सुकरात पीछे मुड़कर अचानक युवक सर पानी  दिया। युवक पानी से निकलने  छटपटाने लगा वो बहुत जोर से अपने हाथ पैर को चलाने लगा की कैसे सुकरात के चंगुल से बच जाएँ। लेकिन चूँकि सुकरात ताकतवर थे और शरीर से हट्टे-कट्टे थे तो युवक विफल रहा छुड़ाने में। 

 

सुकरात ने उस युवक को पानी में डुबोये रखा। युवक का शरीर नीला पड़ने लगा, तब सुकरात ने उसका सर को पानी से बाहर निकाला ,उस युवक का सर जैसे ही पानी से बाहर आया उस युवक ने सबसे पहले गहरे-गहरे सांस लेने लगा बिना कुछ बोले। जब थोड़ शांत हुआ सबकुछ तो उस युवक ने पूछा -ऐसा क्यों किया आपने ?

 

 

सुकरात ने पूछा -जब तुम पानी के अंदर थे तो तुम्हें सबसे ज्यादा किस चीज की जरुरत थी ? युवक ने जवाब दिया – हवा की 

 

सुकरात ने कहा- सफलता का यही रहस्य है। जब तुम्हें सफलता हासिल करने की वैसी ही तीव्र इच्छा होगी जैसी की पानी के अंदर हवा के लिए हो रही थी , तब तुम्हें सफलता मिल जाएगी। 

 

गहरी इच्छा हर उपलब्धि की शुरुआती बिंदु होती है। जिस तरह छोटी सी आग की लपटें अधिक गर्मी नहीं दे सकती ,वैसे ही कमजोर इच्छा बड़े नतीजे नहीं दे सकती। 

 

MOTIVATIONAL LINE-

 

आप लक्ष्य तक न तो किनारे खड़े रहकर पहुँच सकते हैं, और न ही धारा के साथ बहकर। आपको कभी हवा के साथ ,तो कभी हवा के विपरीत नाव खेनी होगी ,लेकिन उसे लगातार खेते रहना होगा। 

 

 

Related post-

नवान कैसे बने 

जोश में असीम ताक़त है

पालतू तोते की कहानी

 

 

positive shareing
1Shares

मुट्ठी में तक़दीर

मुट्ठी में तक़दीर

मुट्ठी में तक़दीर

यह प्रेरक उद्धरण मैंने लिया रॉबिन शर्मा जी के शानदार किताब मुट्ठी में तक़दीर ( THE MASTER MANUAL ) व्यक्तिगत तथा पेशेवर महानता के जीवन बदल देने वाली मारदर्शिका-

मुट्ठी में तक़दीर-

आप जब यह किताब अपडेंगे तो सच में आपको अहसास हो जायेगा की आपकी तक़दीर आपकी मुट्ठी में हैं।

 

पृथ्वी पर कोई वेवजह लोग नहीं हैं,इससे मेरा मतलब यह है की हम में से हरएक व्यक्ति जो यहाँ एक वजह और खास मिसन से है।

-रॉबिन शर्मा

आप पानी में गिरने से नहीं डूबता ,आप उसी में रह जाने की वजह से डूबता हैं।

-एडविन लुइस कोल।

 

एक बड़ी पहाड़ी पर चढ़ने के बाद एक व्यक्ति हमेशा यह पाता है की चढ़ने को और भी कई पहाड़ियां बाकि हैं। मैं विश्राम के लिए एक पल रुका हूँ,ताकि मैं अपनी चारों ओर फैली शानदार  द्रिश्यवाली की एक झलक ले सकूँ और अपने द्वारा अब तक तय की गई दुरी पर नजर फेर सकूँ। किन्तु मैं केवल एक पल ही रुक सकता हूँ,क्यूंकि आजादी के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। मैं रुके रहने की जोखिम नहीं ले सकता,क्यूंकि ,मेरा लम्बा सफर अभी सम्पत नहीं हुआ है। 

-नेल्सन मंडेला। 



जितना तेज चमकना आपकी नियति रही है,यदि आप उतनी तेजी से नहीं ,चमक सकते,तो आप न केवल खुद के साथ विश्वासघात करते हैं,बल्कि दुनिया को कमतर छोड़ देते हैं,जितनी यह  हो सकती थी। 

-रोबिन शर्मा। 

बेहतर जानकारी के साथ आप बेहतर विकल्प चुन सकते हैं और जब बेहतर विकल्प चुनेंगे ,तो बेहतर नतीजे दिखेंगे।

-रॉबिन शर्मा

 

एक अर्थहिन, लक्ष्यहीन तथा उद्देश्य्हीन जीवन जीने को सहमत होने जैसा अक्षम्य और कुछ नहीं होता। 

-हेलन केलर। 

आप यह जान लें की जोखिम हमेशा फायदेमंद होती है। आप यह जान लेते हैं की क्या करना है और क्या नहीं। 

– जोनस साल्क।

RELATED POST 

शिखर तक पहुँचने के सात क़दम

The Leader Who Had No Title

 

जो व्यक्ति सबकुछ हासिल करने की कोसिस करता है ,वह  हासिल नहीं करता। 

 – रोबिन शर्मा। 

हम जो पाते हैं ,उससे अपनी जीविका चलाते हैं ; हम जो देते हैं,उससे अपना जीवन बनाते हैं। 

– सर विंस्टन चर्चिल। 

positive shareing
1Shares

Kadve pravachan-अपने घर बहुरानी मत लाना

Kadve pravachan- कड़वे प्रवचन को ज़रूर सुनें । इसे सुनने के बाद आप अपने रिश्ते में बहुत सुधार होगा ।इसे ज़रूर सुनें । 
https://youtu.be/_f8llc9ol1A

 

अपने घर बहुरानी मत लाना । 

 

related post-

 

कड़वे प्रवचन -kadve pravachan

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ?

 

लगनशील व्यक्तियों के पुरस्कार उस कष्ट से ज़्यादा बड़े होते हैं , जो विजय से पहले ज़रूर आता है । 

                                              – टेड एंग्ट्रामें 

 

शब्दों में वक़्ता की मानसिक अवस्था, चरित्र एर स्वाभाव की झलक दिख जाती है ।

       – पलूटार्क

ऐसे शब्द चुने जो आपको अपने लक्ष्य की दिशा में प्रेiरित करें ।

            – जेफ़ केलर 

मुस्कान चेहरे को सुंदर बनाने का सबसे सस्ता उपाय है । 

                       अज्ञात ।

अगर आप कहते हैं की आप अच्छे हैं या आपके साथ सबकुछ अच्छा है , तो ईश्वर आपके शब्द सुन लेगा और सच कर देगा । 

     – एल्वा वहिलर विलिकोक्स । 

बच्चों की तरह ही मुश्किलें भी पालने से बड़ी होती है – लेडी हौलैंड । 

 

हंसी के हमले के खिलाफ कुछ भी खड़ा नहीं हो सकता है।

हमेशा सही करो। यह कुछ लोगो को संतुष्ट करेगा और बाकी लोगों को चौंका देगा।

यदि आप करेंगे तो अपने कपड़े में सावधान रहें, लेकिन एक साफ आत्मा रखें।

किसी भी तरह से एक टूटा वादा बेहतर नहीं है।

कोशिश करके हम आसानी से विपत्ति सहन कर सकते हैं। एक और आदमी, मेरा मतलब है।

कपड़े आदमी की पहचान बनते हैं। नग्न लोगों के समाज पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

साहस डर का प्रतिरोध है, डर की निपुणता, डर की अनुपस्थिति नहीं है।

शिक्षा में मुख्य रूप से जो हम अनजान हैं, शामिल होते हैं।

एक अच्छे उदाहरण की परेशानी के मुकाबले कुछ चीजें कठिन होती हैं।

सब कुछ इसकी सीमा है – लौह अयस्क को सोने में शिक्षित नहीं किया जा सकता है।

                            -mark twain.

 

 

 

jain muni tarun sagar ji maharaj ke Kadve pravachan-अपने घर बहुरानी मत लाना । 

positive shareing
0Shares

आज के सुविचार

आज के सुविचार-चाहे आप जो भी सोंचें ,आपका हर दिन बेहतर से बेहतर बनता जा रहा है। कोई भी इंसान पीछे की तरफ नहीं जा सकता है। आप सिर्फ आगे जा सकते हैं और ऊपर की तरफ ही जा सकते हैं। 

जब आप आपको महसूस हो की आपकी परिस्थितियां बेहतर नहीं हो रही हैं,तो खुद को याद – आप जो थे वो आज नहीं हैं। आज कहीं ज्यादा अच्छे हैं। 

 

 

आज के सुविचार-आप जिस भी शब्द का इस्तेमाल करते हैं ,इसमें शक्तिशाली अंकुर होता है। यह अंकुर उस दिशा में फ़ैल जाता है,जिधर आपका शब्द संकेत करता है। अंततः  विकसित होकर भौतिक अभिव्यक्ति में बदल  जाता है। मिसाल के तौर पर  चैतन्य आनंद की कामना करते हैं। इसलिए आनंद शब्द के दोहराव से  कम्पन्न की गुणवत्ता तय होती है।

 

जिसे आनंद का अंकुर फैलता है और एक समय ऐसा आता है, आपका पूरा अस्तित्व आनंदमय हो जाता है। यह कोरी कल्पना नहीं ,बल्कि सत्य है।

  •                                         – जेणेवीव बेहरेंड ( 1881 -1960 ) यॉर इनविजिबल पावर।

दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

 

1 प्रतिसत फार्मूला -परिवर्तन का समय आ गया है हम सभी सैंकड़ों चीजों में 1 प्रतिसत बेहतर बन सकते हैं। 1 प्रतिसत फार्मूला का प्रयोग आप अपनी जिंदगी के हर क्षेत्र में कर सकते हैं। हर कोई महान नहीं बन सकता ,लेकिन हर कोई जहाँ भी है,उससे बेहतर जरूर बन सकता है। 

 

बदलाव के लिए तैयार रहें – जब कोई बच्चा छोटा रहता है और वो अपनी माँ की गॉड में आराम महसूस करता है लेकिन जैसे ही कोई उसे माँ की गोद से लेने की कोसीस करता है तो वो बच्चा रोने लगता है।

 

क्यूंकि वो बदलाव को सहन नहीं कफर पाता है और यही हमारी आदत बड़े होने पर भी बनी रहती है,थोड़ा सा बदलाव होता नहीं है की चीखना-चिल्लाना सुरु कर देते हैं वो बच्चे की तरह ही। लेकिन हमें याद रखना चाहिए अब आप बच्चे नहीं रहे। आप बड़े हो चुके हैं इसलिए बदलाव के लिए तैयार रहें।

positive shareing
0Shares

पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?

पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?

FROM WIKI

पुरषों को महिलाओं की कौन सी बात पसंद नहीं आती है ?
महिलाओं को यह याद रखना चाहिए की पुरुष दूसरे गृह से आये हैं इसलिए उनका सोंचने का तरीका अलग है। बिना मांगी सलाह देने या हानिरहित आलोचना से भी पत्नी अनजाने में ही  पति का दिल दुखा सकती हैं। 


निचे कुछ वाक्य दिए गए हैं जिन्हें सुनकर पुरषों को चोट पहुँचती है और ऐसा लगता है जैसे उनकी जिंदगी पर नियंत्रण करने की कोसिस हो रही है –

    1. तुमने इसे खरीदने की बात सोंच कैसे ली ? तुम्हारे पास तो पहले से ही ऐसी शर्ट है। 

    2. बर्तन अभी गीले हैं। जब वे सूखेंगे तो उनमें धब्बे पड़ जायेंगे। 

    3. तुम्हारे बाल बढ़ हैं ,इन्हें कब कटवाओगे ?

    4. वहां पर कार कड़ी करने की जगह है,कार को उसी तरफ मोड़ लो। 

    5. तुम अपने दोस्तों के साथ समय गुजरना चाहते हो ?और मेरा क्या होगा ?

    6. तुम्हें इतना ज्यादा काम नहीं करना चाहिए। 

  1. इस चीज को यहाँ मत रखो। यह गुम हो जाएगी। 

  2. तुम्हें प्लम्बर को बुला लेना चाहिए। वह जनता होगा की इसे कैसे ठीक किया जाये। 

  3. हम टेबल खली होने का इंतजार क्यों कर रहे हैं ?क्या तुमने रिजर्वेशन  नहीं करवाया था ?

  4. तुम्हें बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए। उन्हे तुम्हारी कमी अखरती है। 

  5. तुम बहुत तेज गाड़ी चलाते हो। धीमे चलना चाहिए नहीं तो एक दिन जुर्माना जरूर होगा। 

  6. अपनी उँगलियाँ मत खाओ। देखने वाला तुम्हें फूहड़ समझेगा। 

  7. तुम्हें थोड़ा पहले बताना चाहिए था। अब मैं अपना सारा काम छोड़कर तुम्हारे साथ लंच पर तो नहीं चल सकती। 

  8. तुम्हारे शर्ट तुम्हारे पेंट से मैच नहीं कर रही है। 

बिल ने तीसरी बार फोन किया था। तुम उससे कब बात करोगे ?

 

 

RELATED POST-

 

पुरुष मंगल , महिलाएं शुक्र ग्रह से आई हैं।

महिलाओं को पुरुषों की कौन सी बात पसंद नहीं आती ?

 

अगर आप महिला हैं तो मैं आपको यही सुझाव दूंगा की आप अगले सप्ताह अपने पति को किसी किस्म की बिना मांगी सलाह न दें ,उसकी किसी तरह की आलोचना न करें। इसमें न सिर्फ आपका मूड अच्छा रहेगा ,बल्कि वह आपका मूड भी अच्छा रहेगा। 

 


अगर आप पति हैं तो मैं आपको सलाह देना चाहूंगा की आप अगले सप्ताह यह करें ,जब भी आपकी पत्नी बोले तो उसकी भावनाओं को समझने की कोसिस करें। पूरी बात सुने। 

 

positive shareing
3Shares

जिंदगी के पुरस्कार दिलाने वाली नौ आदतें

जिंदगी के पुरस्कार दिलाने वाली नौ आदतें-

पहली आदत – कृतग्यता – जिंदगी में जो चीज मिली है उसके लिए कृतज्ञ रहें। रोजाना उस चीज की प्रशंसा करें जो आपको मिली है।

  ” आज कितना सुन्दर दिन है। ”

 ” भगवन ने कितनी अच्छी सेहत और अच्छा दिमाग दिया है। 

” उन्होंने कितने सुन्दर कपडे दिए और भोजन दिए हैं। ”

” उन्होंने मासिक शांति दी है ”

” उन्होंने मुझे सेवा करने का मौका दिया है ”

दूसरी आदत – भौतिक समृद्धि – हर दिन आपके ,दिमाग में समृद्धि और प्रचुरता की चेतना भरना चाहिए। इसके साथ ही आपको अपने मस्तिष्क से गरीबी और आभाव  को बाहर निकलना चाहिए।

तीसरी आदत – अच्छी सेहत –हर दिन  सोंचें की आप शरीर की कैसी देख्बाहल कर रह हैं,आप क्या खा रहे हैं और अपने तनाव का सामना किस प्रकार से कर रहे हैं। स्वास्थ्य के बारे में सजग रहने से आपकीओ सेहत सुधरती है और अच्छी बानी रहती है। 

चौथी आदत – मानसिक शांति – इसका अभ्यास करें। खुद के बांये  सभी अवरोधों और खुद की बनाई हुई सभी सीमाओं से मस्तिष्क को मुक्त करें। इस तरह अपने शरीर और मस्तिष्क को पूरा आराम दें।  

पांचवी आदत-आशा – आपकी जो भी इच्क्षाएँ पूरी हो चुकी है उनके लिए कृतज्ञ रहें। साथ ही यह आशा भी रखें की आपका आने वाले कल के लक्ष्य भी पुरे हो जायेंगे। 

छठी आदत  – आस्था – आशा की आदत। चाहे आप इसका कुछ भी अर्थ लगाएं। मैं ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हूँ। मैं कृतज्ञ हूँ की उन्होंने वह  काम करने की प्रेरणा दी जिससे मुझे लाभ हुआ और काम करने से रोका,जिसे करने पे मुझे नुकसान होता। 

सातवीं  आदत – प्रेम – इसमें न सिर्फ रूमानी प्रेम शमिल है बल्कि देशप्रेम भी,परिवार का प्रेम ,और समस्त मानव जाती का प्रेम भी शामिल है। अपनी अमीरी को संपर्क में आने वाले लोगों के साथ बाँटने के लिए प्रेरित हों। अपनी जिंदगी में प्रेम के बारे में सचेत रहें ,क्यूंकि इससे जिंदगी मद्गुर बनती है और दूसरे के साथ भी सम्बन्ध मधुर रहता है। 

RELATED POST-

धनवान कैसे बने

सवाल ही जवाब  है

आठवीं आदत -रोमांस – उम्र ज्यादा होने के बावजूद रोमांस युवावस्था को जगा देता है। 

नौवीं आदत – सम्पूर्ण बुद्धिमता – यह आपकी अतीत की असफलताओं,पराजयों , निर्णय और कर्म की गलतियों ,सभी डरों, भूलों,निराशाओं और हर तरह के दुःख को अनमोल व् स्थायी दौलत में बदल देती है। बुद्धिमता के जरिये आप अपनी ईश्वर दी हुई नियामतें गिन सकते हैं और उसे दरों को बाँट सकते हैं जिससे आप अपनी नियामतों को कई गुना और बढ़ा लेते हैं।

ये नौ आदतें बारह दौलतों का लाभ उठाने के लिए आपके मस्तिष्क को तैयार करेंगी नौ आदतें एक माध्यम बन जाती हैं जिसके द्वारा आप अपने मस्तिष्क को मनचाही चीजों पर केंद्रित कर सकते हैं और अनचाही चीजों से दूर ले जा सकते हैं।
positive shareing
3Shares

तरुण सागर जी कथा – Kadve pravachan

तरुण सागर जी की कथा – कुछ लोग कहते हैं की तरुण सागर  जी कथा में हंसाते हैं। मैं कहता हूँ अरे बाबा ! यह सत्संग हंसने के लिए है ?

प्रवचन सुनने के बाद रोना आना चाहिए की अब तक का मेरा जीवन यूँ ही खाने-पिने और सोने में चला गया। कथा को सिर्फ सुनना नहीं बल्कि गुनना भी है। और फिर मैं कथा कहाँ ,मैं जीवन की व्यथा सुनाता हूँ।

तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन – जिस घर को तुमने खून-पसीना एक करके बनवाया है। तुम देखना एक दिन डंडा और कण्डा के साथ घर से बेघर कर दिए जाओगे। मुझे तरुण सागर का निवेदन सिर्फ इतना है की डंडा और कण्डा के साथ घर से बाहर निकाले जाओ या फिर पिच्छी-कमण्डलधारी की सेवा में लग जाओ। कहिये !क्या ख्याल है ?

जिंदगी में बदलाव जरुरी है। सिर्फ दो लोग हैं जो कभी नहीं बदलते-एक तो मुर्ख और दूसरा मुर्दा। अगर आप कहते हैं की आप जहाँ हैं वहां तो कोई नहीं पहुँच सकता है तो इसका अर्थ हुआ की आप प्रमोशन नहीं चाहते। सीडी और सड़क बैठने के लिए नहीं होती।

इन पर चलते रहना जरुरी है। बदलाव का यह मतलब गतिशीलता। पानी ठहर जाये तो गन्दा हो जाता है। जीवन अगर ठहर जाए तो धुंधला हो जाता है।

गाय दूध देती नहीं है ,दूध निकलना पड़ता है। जीवन में महान कार्य स्वतः ही संपन्न नहीं होते,उनके लिए प्रयास करना पड़ता है। सम्मेद-सिखर या वैषणव-देवी की यात्रा के लिए जब सत्तर साल की बड़ी माँ या सात साल का बच्चा ऊपर चढ़ता है तो उनकी नजरें केवल ऊपर रहती हैं।

वे न तो निचे देखते हैं ,न पीछे। संकल्प की शक्ति के दम पर ही वे बिना साँस खोये ऊपर चढ़ जाते हैं। जिंदगी की विकास यात्रा को ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए ऐसे ही दृढ़ संकल्प की जरूरत है।

तुम नदी में नहाते हो। सैंकड़ों टन पानी तुम्हारे सर पर होता है लेकिन वजन मालूम नहीं पड़ता। परन्तु जब घड़े में पानी को डालकर सर पर रखते हैं तो पानी भार हो  जाता है।

भार अपना मानने में है। संसार में रहना पाप नहीं है ,लेकिन भोजन में भजन को भूल जाना पाप है। चीजों को जरूरत के रूप  इस्तेमाल करो ,उन्हें विलासिता के रूप में इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं है।

तरुण सागर जी कथा- Kadve pravachan

कड़वे प्रवचन

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है 

मुनिश्री तरुणसागर जी : एक सफर

अनमोल वचन

तरुण सागर जी कथा- kadve pravachan

कथा

Kadve pravachan

positive shareing
0Shares

कड़वे प्रवचन

कड़वे वचन  –

अगर आप तरुणसागर का कहा मानें तो मैं आपसे एक निवेदन करना चाहूंगा की अपने मित्र,चरित्र को हमेसा रखें पवित्र क्यूंकि यही है जिंदगी का असली इत्र। आपको पता है की चरित्र के पतन में प्रायः गलत मित्रों और गलत चित्रों का हाथ होता है। गलत मित्र और गलत चरित्र को नष्ट करने वाला अमोल -शस्त्र है। अथवा कभी खाली न जाने वाला ब्रह्मस्त्र है। 




कड़वे प्रवचन –

जिंदगी में तीन चीजों का अर्जन जरूर करें। बचपन में ज्ञान का , जवानी में संपत्ति का और बुढ़ापे में पुण्य का। बचपन अध्यन के  बुढ़ापा आत्म-चिंतन के लिए है। किसी छात्र ने पूछा कितने घंटे पढ़ना चाहिए ? जिस क्लास  में हैं ,स्कूल के अलावा उतने ही घंटे ,10 वी में हों तो 10 घंटे और 12 वी  12 घंटे। 

 

कड़वे वचन –

कई तरह के दान में एक रक्तदान भी है। रक्तदान एक पुण्यकार्य है। खून देने से कम नहीं होता है.फिर बढ़ जाता है। ठीक वैसे ही जैसे बाल काटते हैं और फिर बढ़ जाता है। कुएं से पानी निकलते हैं और फिर बढ़ जाता है। हाँ मरते हुए को नई जिंदगी जरूर मिल जाती है। रक्त पानी बने ,इससे पहले उस रक्त से किसी की जिंदगानी बना दो। याद रखें जित जी रक्तदान और ,जाते-जाते देहदान ,जाने के बाद नेत्रदान। 

कड़वे वचन –

एक सेठ बीमार बीमार था। दवा खाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा था। आखिर वह हकीम लुकमान से मिला। लुकमान ने कुछ गोलिया दी और कहा -इन्हें तीन बार अपने माथे के पसीने में पिघलकर खा लेना। सेठ कुछ ही दिनों में ठीक हो गया। शिष्य ने कहा- गुरुदेव ! बड़ी चमत्कारी दवा है। लुकमान हँसा और बोला – दवा क्या उपलों की राख थी। पर उसे तीन बार माथे पर पसीने लेन के लिए बड़ी मेहनत  करनी पड़ी होगी। यह चमत्कार उसी पसीने का है। सच्ची नींद और स्वाद चाइये तो पसीना बहाना मत भूलना। 




कड़वे वचन  –

आज स्टेटस बड़ी चीज है।   पहले लोग अपनी प्रतिष्ठा दिखाने के लिए दरवाजे पर हाथी पालते थे। फिर घोड़े पालने  लगे। आज-कल कुत्ते पाल  रहे हैं। कुत्ता आज स्टेटस-सिम्बल बन गया है। पहले घर में कोई कुत्ता न घुस जाये इसके लिए आदमी रख लेते थे। आज घर में कोई आदमी न घुस जाये इसके लिए कुत्ता रख लेते हैं। 

positive shareing
0Shares

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ?

गणेश जी

गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ? मैं इसका कोई धार्मिक जवाब देने वाला नहीं हूँ । मैंने एक प्रवचन में सुना था अच्छा लगा तो मैंने सोंचा क्यूँ ये आपलोगों से शेयर किया जाए । हम अपने ग्रंथों से बहुत कुछ सिख सकते हैं ।इसका एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ । इनके कहानी से एक सकरात्मक मेसज देना चाहता हूँ ।





जन्म –

आप देखिए लोगों को सबकुछ मिलता है , उनके माँ-पिताजी दिल से अपना सबकुछ देना चाहते हैं , कितना दे पाते हैं वो बड़ी बात नहीं पर कोसिस तो सबकुछ और १०० प्रतिशत देने की होती है । पर गणेश जी मामले में कुछ अलग था ।

आप  देखिए गणेश जी का जब जन्म हुआ , तब वो ( शंकर भगवान उनके पिता ) तपश्या में लीन थे । वो जब तपस्या से लौट कर आए तो एक – दूसरे को पहचान नहीं रहे होते हैं ।

पिता-पुत्र का झगड़ा –

आप देखिए फिर दोनो पहली बार मिले और आपस में लड़ाई होती है और ग़ुस्से में गणेश जी का गर्दन काट देते हैं । गर्दन काट कर जब उन्हें पता भी चलता है की उन्होंने ग़लत किया , ये तो अपना फ़र्ज़ निभा रहे थे और पार्वती माँ का आदेश का पालन कर रहे थे ।

 

 

हाथी का सर

शंकर भगवान जो की उनके पिता थे चाहते तो वो वापस उनका सर अपनी जगह पर लगा सकते थे । पर उन्होंने वैसा नहीं किया उन्होंने उनके सर पे हाथी का सर लगा दिए ।





 

 

सवारी –

शंकर भगवान के दो संतान थे उन्होंने कार्तिकेय को सवारी के रूप में उनको मोर दिया और गणेश जी को सवारी के रूप में मिला चूहा ।

फिर भगवान ने आपस में प्रतियोगिता करवाया की जो सबसे पहले ब्रह्मांड का चक्कर लगा कर आएगा वो विजेता ।

 

इतना आज के कलयुग में दो संतानों के बीच भेदभाव किया जाता तो शायद रो-रोकर पूरी दुनिया को अपनी दर्दभरी कहानी सुनाता और अपने माँ-पिता से कभी बात नहीं करेगा ।

पर गणेश भगवान ने  अपने माँ- पिता जी का चक्कर लगा कर , अपने दोनो हाथों को जोड़कर उनके आगे खड़े हो गए और कहा – हमारे लिए तो पूरा ब्रह्मांड आप ही हैं ।


कितना सकरात्मक विचार ! क्या हम ऐसे हो सकते हैं । मुझे ऐसा लगता है इसलिए वो प्रथम ही पूजे जाने ही चाहिए और पूजे जा भी रहे हैं ।

दोस्तों आप देखिए हम चार भाई हो या दो भाई या दो बहन हों लेकिन हमारे माँ-पिता जी अपने बच्चों को पाल ही लेते हैं । लेकिन हम अपने माँ-पिता जी को पाल नहीं पाते । उनके लिए वृद्धाआश्रम बना दिया गया ।

आप भी अपने माँ-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड मानकर उनके साथ गणेश जी की तरह ही वर्ताव करना सिख नहीं सकते हैं ? अब तो समझ आ गया होगा की गणेश जी की प्रथम पूजा क्यूँ होती है ,क्यूंकि उन्होंने हर हाल में माँ -पिता को ही सबसे ऊपर रखा।



positive shareing
0Shares

मुनिश्री तरुणसागर जी : एक सफर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुनिश्री तरुणसागर जी : एक सफर

 आज मैं मुनिश्री ( एक ऐसे महापुरुष जो कलयुग में भी सबका भला चाहने  वाले , निः स्वार्थ भाव से सबको बराबर नजर से देखने वाले ) के सफर पर लेकर चलता हूँ ,उनकी जीवनीके बारे लिख रहा हूँ जो की मैंने एक किताब कड़वे प्रवचन से लिया है।

 

संसार में प्रत्येक जिव में परमात्मा बनने की शक्ति है। परमात्मा बनने के लिए आत्मा को विशुद्ध करने की आवश्यकता हैऔर मुनिश्री तरुण सागर जी के प्रवचन रूपी मन्त्रों से आत्मा विशुद्ध करने का सरलतम मार्ग है।

                                – जगतगुरु कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी।

 

मुनिश्री तरुणसागर जी : एक सफर

              जन्म – 26 जून , 1967

 

             गहुँचि , जिला – दमोह , मध्य प्रदेश

 

             बागीदौरा , जिला-बांसवाड़ा , राजस्थान।

 

             दीक्षागुरु -आचार्य श्री पुष्पदन्तसागर जी।

  • 13 वर्ष की में जैन सन्यास।

  • 20 वर्ष की में दिगंबर मुनि दीक्षा।

     

  • 33 वर्ष की में लालकिले से राष्ट्र को सम्बोधन।

  • 35 वर्ष की में राष्ट्र संत की पदवी से नवाजे गए।

  • 37 वर्ष की उम्र में गुरु-दीक्षा देने की नई परम्परा की शुरुआत की।

  • 38 वर्ष की में भारतीय सेना को सम्बोधन व सेना द्वारा गॉर्ड ऑफ़ ओनर का सम्मान मिला।

  • 39 वर्ष की में राजभवन (बंगलौर ) में अतिविशिष्ट लोगों को सम्बोधन

  •  40 वर्ष की में अस्वस्थ होने पर भी ( 18 sep ,07 कोल्हापुर ) मुनि पद पर रहने का ऐतिहासिक निर्णय।

  • 43 वर्ष की में आर.एस.एस. के मुख्य पथ संचलन ( नागपुर ) में सम्मिलित स्वयंसेवकों सम्बोधन व मुख्यमंत्री निवास ( रायपुर ) पर प्रवचन।

  • 44 वर्ष की में मध्य प्रदेश विधानसभा (27 जुलाई 2010 ) व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री निवास पर सम्बोधन।

  • 45 वर्ष की में गिनिज वर्ल्ड रिकार्ड्स ( 2 अक्टूबर 2012 ,अहमदाबाद ) एवं 28 अगस्त 2012 को ही लिम्का बुक रिकार्ड्स में नाम दर्ज।

  • 46 वर्ष की में 2500 वर्ष के जैन इतिहास में पहली बार दिगंबर व स्वेताम्बर मुनियों का संयुक्त चातुर्मास ( जयपुर 2013 )

  • 47 वर्ष की में 14 वर्ष के पश्चात डायमंड बुक्स द्वारा 14 भाषाओँ में संयुक्त बहुचर्चित कृति कड़वे-प्रवचन का प्रकाशन।

  • 49 वर्ष की उम्र में ( 15 मार्च 2016 मुख्यमंत्री निवास दिल्ली पर सम्बोधन एवं आर्ट ऑफ़ लिविंग के कार्य कर्म ( 12 मार्च 2016 ) में दुनिया भर के 2000 शीर्षस्थ संतों में मध्य अग्रणीय।


  • 49 वर्ष की उम्र में ( 26 अगस्त 2016 ) हरियाणा विधानसभा को सम्बोधन।

धन्यवाद ,

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आपको ये पोस्ट पसंद आया होगा। आप इसे शेयर करना न भूलें।


 

jain muni tarun sagar ji maharaj

Related post

कड़वे प्रवचन

positive shareing
0Shares

मुनिश्री तरुण सागर जी -कड़वे प्रवचन

मुनिश्री तरुण सागर जी -कड़वे प्रवचन में कहते हैं – मेरा कहा मानें तो आप अपने घर के सामने कचरा पेटी और दरवाज़े पर खूँटी ज़रूर गाड़कर रखिए ।

वह इसलिए की रात को जब आप दुकान आएँ तो बाहर का किच-किच का कचरा , कचरा पेटी में डाल दें और दिन भर के झंझटों को खूँटी पर टाँग दें और फिर तनाव-मुक्त होकर मुस्कुराते हुए घर में प्रवेश करें । एक बात तय है की काम पर जाओगे तो वहाँ कोई-ना कोई मुश्किल आनी है । पर उन मुश्किलों से तुम्हारी पत्नी एर बच्चों का क्या लेना-देना ?




लोग कहते हैं सप्ताह में सात वार होते हैं लेकिन मैं आठ वार कहता हूँ सप्ताह में । सोमवार से रविवार तक सात वार होते हैं लेकिन यह तो सप्ताह के सात वार हुए ।
मैं आठवाँ बताता हूँ वह है – परिवार ।

७ दिन मिलते हैं तो सप्ताह , ३० दिन मिलते हैं तो माह , १२ माह मिलते हैं तो साल बनता है ।
यही मेल-मिलाप परिवार के साथ भी लागू होता है । आज परिवार का मतलब हम-दो हमारे दो रह गया है ,
इसमें माँ-बाप नहीं आते ।
जबकि Faimly का अर्थ होता है –
F- father
A – and

M- -Mother
I- I
L – love ,
Y – you

 

मुनिश्री तरुण सागर जी -कड़वे प्रवचन

कभी तुम्हारे माँ-बाप डाँट दे तो बुरा नहीं मानना बल्कि सोचना – ग़लती होने पर माँ-बाप नहीं डाँटेंगे तो और कौन डाँटेंगे ?
और कभी छोटों से ग़लती हो जाए तो माफ़ कर देना यह सोंचकर की ग़लतियाँ छोटे नहीं करेगा तो कौन करेगा ?
भूल से मत घबराइए भूल उन्ही से होती है जो कोसिस करते हैं कुछ करने की ।




एक बार चलनी ने सुई से कहा- बहिन ! बुरा मत मानना । तुम इतनी छोटी हो फिर भी तुम में छिद्र है ।

चलनी की बात सुन, सुई मुस्कुराई और बोली – मेरी बड़ी बहन ! मुझे बड़ा आश्चर्य है की मेरा छोटा सा छेद रखे दिख गया और तू जो स्वयं छेदों से भरी है , इसका तुझे पता भी नहीं ।

हमारी ज़िन्दगी का भी यही हाल होता है । हमें दूसरों की थाली की इल्ली तो दिख जाती है लेकिन अपनी थाली की बिल्ली नहीं दिखती ।

positive shareing
1Shares

बाँटने से लाभ होता है

बाँटने से लाभ होता है -आपकी सफलता या खुसी आपसे सुरु होती है। यह बाँटने से बढ़ता है। एक बार एक व्यक्ति ने मुनिश्री तरुण सागर जी से पूछा की महाराज कोई ऐसा आशीर्वाद देदो की कारोबार में लाभ ही लाभ हो तो मुनी जी ने कहा -भला कर !भला…… भला…… =लाभ।

क्रन्तिकारी युद्ध के ख्याति प्राप्त  मेजर एंडरसन एक  लाइब्रेरी के मालिक थे। वे निस्वार्थ व्यक्ति  थे जिन्होंने लाइब्रेरी उस क्षेत्र के युवाओं के लिए खोली थी थी जो और अधिक ज्ञान अर्जित करना चाहते थे। उन युवा  लड़कों में से एक स्कॉटलैंड का था जो मेजर एण्डरसन के घर प्रत्येक शनिवार की सुबह आता था। और पुरे दिन पड़ने की उपलब्ध इस अवसर के प्रति कृतज्ञ था। स्पष्टयता ,उसने इस प्रक्रिया में बहुत कुछ सीखा ,क्यूंकि एंड्र्यू कार्नेगी अमेरिका के इतिहास में सर्वाधिक उत्पादक व् धनी व्यक्ति में से एक बन गए थे।

उसने उस वक़्त 43 व्यक्तियों को करोड़पति बनाया जब करोड़पति गिने चुने थे। कार्नेगी ने इस दयालुता को आगे बढ़ाया। उसने पुरे संयुक्त राज्य अमेरिका में कार्नेगी वाचनालय स्थापित कर दिए। आज भी हजारों लोग इसकी इस विशाल ह्रदय का लाभ उठा रहे हैं।

हाँ जब आप दूसरों में योग्यता को देख पाते हैं और फिर उस योग्यता के विकाश में सहायता करते हैं तो आप कुछ महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वास्तव में यह सर्वाधिक उल्लेखनीय है की जितना अधिक आप दूसरों को देंगे उतना अधिक आपके पास रहेगा।

इसी सन्दर्भ में एक किस्सा चार्ल्स पर्सी का है जिसे 39 वर्ष की आयु में बैल एंड हॉवेल का अध्यक्ष बना दिया गया था। उसने कंपनी के सभी पदों पर कार्य करते हुए ख्याति अर्जित किया। आज वह एक विशिष्ट यूनाइटेड स्टेट सेनेटर। जबकि पर्सी का सेनेटर बनना आश्चर्य से कम नहीं था।

धन्यवाद दोस्तों,

 उम्मीद करता हूँ की आपको ये पोस्ट मेरा पसंद आया होगा। अगर पसंद आया हो तो शेयर करना न भूलें।

positive shareing
0Shares

अनमोल वचन


अनमोल वचन –

 सफलता का मतलब सिर्फ़ असफल होना नहीं है , बल्कि सफलता का सही मतलब है पूरा युद्ध जितना , बस ना की छोटी- मोटी लड़ाइयाँ जितना ।
– एडविन सी. लिब्स ।

हमारे सामने मौजूद किसी भी तथ्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण उस तथ्य के बारे में हमारा नज़रिया होता है , क्यूँकि हमारी असफलता उसी से तय होती है ।
– नॉर्मन विंसेंट पिले ।

 

यूनिवर्सिटी की पहली ज़िम्मेदारी ज्ञान देना और चरित्र निर्माण होता है , न की व्यापारिक और तकनीकी सुरक्षा देना ।
– विंसटन चर्चिल ।

 

भाग्य केवल संयोग पर निर्भर नहीं होता , बल्कि हम उसे अपने लिए चुनते हैं । वह इंतज़ार करने की चीज नहीं , बल्कि हासिल करने की चीज़ है ।
– विलियम जेनिंग्स ब्रायन ।

 

सिर्फ़ सफल होने की कोसिस ना करें , बल्कि मूल्य-आधारित जीवन जीने वाला मनुष्य बनने की कोशिश कीजिए ।
– ऐल्बर्ट आइन्स्टाइन ।

 

आलोचक वह होता है जो दाम तो हर चीज़ का जनता है , लेकिन उन चिजों का महत्व नहीं ।
– आस्कर वाइल्ड ।

 

अगर किसी आदमी को सड़क साफ़ करने का काम दिया जाए तो उसे सफ़ाई वैसे ही करनी चाहिए जैसे माइकल एंजेलो पेंटिंग करता हो या बीथोवन संगीत की रचना करता हो या सेक्सपियर कोई कविता लिखता हो । उसे सड़क की सफ़ाई इतनी अच्छी तरह करनी चाहिए की स्वर्ग और पृथ्वी , दोनो जगहों के लोग रुककर बोलें की यहाँ सड़क सफ़ाई करने वाला रहता था , जिसने अपना काम गर्व से और बहुत अच्छी तरह किया ।
– मार्टिन लूथर किंग , जूनियर ।




सफलता का सम्बंध काम से है । सफल लोग हमेशा गतिशील रहते हैं । वे ग़लतियाँ करते हैं , पर मैदान नहीं छोड़ते ।
– कोनरैड हिल्टन ।

 

अगर आप सोंचते हैं की आप कर सकते हैं या आप यह सोंचते हैं की आप नहीं कर सकते हैं , तो आप दोनो हाई तरह ठीक हैं ।
– हेनरी फ़ोर्ड ।

आपको यह ज़िन्दगी में चुनाव करना है की , आप अनुशासन की क़ीमत चुकाएँगे या अफ़सोस की ।
– टीम कोनार ।

महान मस्तिष्कों में उद्दशेय होते हैं अन्य लोगों के पास केवल इक्षाएँ होती हैं ।
– वॉशिंगटन इरविंग़ ।

positive shareing
0Shares

आपके पडोसी कैसे हैं ?

आपके पडोसी कैसे हैं ?-चीजें हमें वैसी नहीं दिखती हैं जैसी वे हैं , बल्कि वैसी दिखती जैसी हम हैं। हमारा व्यव्हार ही हमारा आइना है।

 

 

हम जैसे होंगे वैसे ही हमारे सामने वाले लोग भी होंगें। आप जैसे होंगे आपके पड़ोसी भी वैसे ही होंगें।


यह एक ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति की कहानी है , जो अपने गांव के बाहर बैठा हुआ था। एक यात्री गुजरा और उसने उस व्यक्ति से पूछा – इस गांव में किस तरह के लोग रहते हैं ? क्यूंकि मैं अपना गांव छोड़कर किसी और गांव में बसने किओ सोंच रहा हूँ।

तब उस बुद्धिमान व्यक्ति ने उस यात्री से सवाल किया -तुम जिस गांव को छोड़ना चाह रहे हो ,उस गांव में कैसे लोग रहते हैं ? उस यात्री ने कहा – बहुत स्वार्थी , निर्दयी और रूखे लोग रहते हैं।

 

बुद्धिमान व्यक्ति ने जवाब दिया – यहाँ भी बहुत स्वार्थी , निर्दयी और रूखे लोग ही रहते हैं।

 

 

कुछ समय बाद एक दूसरा यात्री वहां आया ,उसने उस बुद्धिमान व्यक्ति से वही सवाल किया जो पहले यात्री ने किया था – यहाँ इस गांव में कैसे लोग रहते हैं ? तब फिर से उस बुदिमान व्यक्ति ने जवाब दिया – तुम जिस गांव को छोड़ना चाहते हो वहां के लोग कैसे हैं ?

 

 

उस यात्री ने जवाब दिया – वहाँ दयालु ,विनम्र और एक-दूसरे की मदद करने वाले हैं। तब उस बुद्धिमान व्यक्ति ने जवाब दिया इस गांव में दयालु ,विनम्र -दूसरे की मदद करने वाले ही लोग हैं।

 

आम तौर पर हम दुनिया को उस तरह नहीं देखते हैं जैसी वह है , बल्कि जैसे हम खुद हैं , वैसी देखते हैं। ज्यादातर मामलों में,दूसरे लोगों का व्यवहार हमारे ही व्यवहार का आइना होता है।

अगर हमारी नियत अच्छी होती है तो हम दूसरों को भी अच्छी नियत से देखतरे हैं और दूसरों को भी अच्छी नियत वाला ही मानते हैं। हमारा इरादा बुरा होता है तो हम दूसरों के इरादों को भी बुरा मान लेते हैं।

 

 

 

आपके पडोसी कैसे हैं ?-हम जैसे होंगे वैसे ही हमारे सामने वाले लोग भी होंगें। आप जैसे होंगे आपके पड़ोसी भी वैसे ही होंगें।




positive shareing
0Shares