पैरेडाइम की शक्ति

पैरेडाइम की शक्ति 

पैरेडाइम उन सही सिद्धांतों को आत्मसात करने का प्रतिनिधित्व करती है , जो स्थायी सुख और सफलता की निव है । 

पैरेडाइम की शक्ति

पैरेडाइम( paradigm) शब्द ग्रीक भाषा से आया है । यह मूलतः वैज्ञानिक शब्द है और आजकल इसका प्रयोग आमतौर पर प्रतिमान, सिद्धांत, मान्यता या दृष्टिकोण के अर्थ में किया जाता है ।

अधिक सामान्य रूप में, यह वह तरीक़ा है जिससे हम दुनिया को देखते हैं ।

हमारे उद्देश्यों के लिए पैरेडाइमस को समझने का आसान तरीक़ा उन्हें नक्शों के रूप में देखना है । हम सब जानते हैं कि नक़्शा क्षेत्र नहीं होता ।यह तो सिर्फ़ वास्तविक क्षेत्रों के कुछ पहलुओं को स्पष्ट करता है ।और पैरेडाइमस यही करता है ।

मान लीजिए शिकागो में किसी ख़ास जगह पर पहुँचना चाहते हैं ? अगर आपके पास शहर का नक़्शा हो, तो आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचने में मदद मिलेगी । परंतु आपको ग़लत नक़्शा दे दिया जाए , तो आप उस कुंठा और असफलता की कल्पना कर सकते हैं जिसका सामना आपको शिकागो में अपनी मंज़िल तक पहुँचने की कोसिस करते समय करना पड़ेगा ? 

पैरेडाइम परिवर्तन की शक्ति – 

कूहन बताते हैं की वैज्ञानिक प्रयास के हट क्षेत्र में लगभग हर महत्वपूर्ण सफलता परम्परा तोड़ने, सोंचने के पुराने तरीक़े से मुक्त होने और पुराने पैरेडाइमस में परिवर्तन करने से हासिल हुई है ।

पैरेडाइम परिवर्तन की एक कहानी – एक बार ट्रेन में रविवार की सुबह को एक व्यक्ति अपने बेटे के साथ जो की १८ साल का एक जवान था आया और खिड़की के किनारे वो लड़का बैठ गया और जैसे ही ट्रेन चली तो वो लड़का बहुत ज़ोर-ज़ोर से ताली बजाने लगा वाह! वाह ! पापा देखो पत्ते हरे-हरे है। पापा देखो बाहर कितना अच्छा लग रहा है ? हर चीज़ को देखकर ख़ुश हो रहा था । 

यह सबकुछ सामने वाला सीट पे बैठा व्यक्ति देखते- देखते वो चिल्ला उठा अरे भाईसाहब ये पागल है इसे आप संभाल कर रखिए ।

तभी उसके पिता बोले – नहीं, नहीं ये पागल नहीं है अभी-अभी इसका आँख का ऑपरेशन हुआ और ये बचपन से अंधा था , ऑपरेशन सफल रहा। अब ये देख सकता है । इसने अभी- अभी नया सबकुछ देखना सुरु किया जिससे ये उत्साहित है । 

क्या लग रहा है आपको उस व्यक्ति का उस लड़के के प्रति पैरेडाइमस बदला होगा या नहीं ? 

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लीडर

NETWORK MARKETINGFOR SUCCESS IN NETWORK MARKETING-जैसे-जैसे आप  NETWORK MARKETING में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते जाते हैं, आपके साथ Associate/Growline की फौज खड़ी होने लगती है,यदि आप अच्छे लीडर हैं तो वे आपके भक्त बन जाते हैं 

 

 

 जैसा आप करते हैं, वे वैसी ही नकल करते हैं और आपके जैसा बनने का पूरा प्रयास करते हैउसके उलटा एक लीडर का असली दायित्व, साथियों को गलत और सही का बोध कराना होता है

 

लीडर हमेशा साथियों के लिए उदाहरण बनता है|लीडर सकारात्मक आलोचना करता है और स्वयं से गलती हो जाने पर स्वीकार भी करता है|  यदि आपको NETWORK MARKETING में सफलता पानी है, तो अपनी टीम में लीडर पैदा करने होंगे|

  1. उनमें क्षमता का विकास करना होगा|

  2. NETWORK MARKETING  में नये लोगों को जोड़ने के बाद उनमें कई ………… और--- पैदा करने होंगे 

  3. इस तरह से मेरी शारीरिक उपस्थिति भले ही एक जगह होगी परंतु मेरे जैसे अन्य लोग कई जगह परिणाम पैदा करते रहेंगे|

  4. अतः अनुयायी नहीं, अपने नीचे लीडर बनाइये| लीडर का अर्थ नेता नहीं, परंतु ऐसे लोग हैं जिनमें नेतृत्व के गुण होते हैं|  

  5. लीडर चाटुकार नहीं होता, उस पर अपनी टीम की जिम्मेदारी होती है| उसे कई बार दूसरों के दिल को चोट पहुँचाने वाले कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं| यह साहस लीडर ही कर सकता है| 

  6. व्यवहार कुशल लीडर विवादों के बीच भले ही मौन हो जाए या आवश्यकता न होने पर ना बोले परंतु झूठ का साथ नहीं देते| 

    • कभी-कभी टीम की अखण्डता बरकरार रखने के लिए वे लोगों की गलती सुधारने का मौका दे देते हैं, परंतु गलत के साथ नहीं खड़े होते|

    • लीडर यदि सही को गलत बोलेंगे और गलत को सही बोलेंगे तो पतन होना तय है, उसे कोई नहीं टाल सकता

    • लीडर की जिम्मेदारी है कि वह समूह के समग्र हित में कड़वे निर्णय ले, हो सकता है, निर्णय किसी को भला लगे और किसी को बुरा लगे, लेकिन लीडर दृढ़ रहे क्योंकि अंत में परिणाम की पूरी जिम्मेदारी लीडर की होती है 

    लीडर में आग होती है, जुनून होता है

     

    NETWORK MARKETING

     

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विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है  – आज के पोस्ट में मैं आपको बताने जा रहा हूँ की आप किसी भी इंसान का विस्वास हासील कैसे कर सकते हैं ?

 

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है –विस्वास के  काबिल बनें। असली टेस्ट यह नहीं है की क्या सामने वाला विस्वास करेगा ,बल्कि साली टेस्ट यह है क्या आपको इस पर विस्वास है ? जबकि गलती हम यह करते हैं की दुनिया को समझने की कोसिस करते हैं पर कहीं-न-कहीं शक हमारे दिमाग भी रहता है।

 

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है-अपने आप में विस्वास जगाने के लिए दूसरों का विस्वास हासिल करने का अनिवार्य नियम है-  अपने बिज़नेस का ज्ञान रखिये। ..आधा-अक़दुरा नहीं पूरा रखना होगा ,याद रखें आपके प्रोडक्ट्स की जितनी ज्ञान होगी जीत उतनी आसान होगी क्यूंकि आपके जंग के वही असली हथियार है -ज्ञान। चलते रहिये और ज्ञान बढ़ाते रहिये।

 

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है-दूसरों के विस्वास को जितने और बनाये रखने का एक और तेज तरीका विश्व के महान कूटनीतिज्ञ बेंजमिन फ्रेंक्लिन के नियम  का  पालन करना है- मैं कभी किसी के बारे में जितना अच्छा बोल सकता हूँ ,अच्छा बोलूंगा। अपने प्रतिद्विंदि का भी तारीफ करूँगा। 

 

अतिश्योक्ति के बजाय अंडरस्टेटमेंट या न्यूनोक्ति की आदत डालें। कार्ल की यह फिलॉसोफी याद रखें :हाँ ,परन्तु मैं यह जानता हूँ।

 

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है-किसी का तेजी से विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है : अपने गवाह पेश करो। और वे उतने ही दूर  होते जितना की टेलीफोन। आपके गवाह पेश करने से उसके विस्वास का लेवल बढ़ जायेगा और जल्दी आपके बातों पर विस्वास होगा ,अगर गवाह आपके पास नहीं हैं तो आप टेलीफोन के जरिये भी बात करा सकते हैं।

 

विस्वास हासिल करने का अचूक तरीका है-सर्वश्रेष्ठ दिखें – अपने आपको विशेष्ज्ञ के हवाले कर दें। याद रखें जिस तरह से आप एक सेल्स के विशेषज्ञ है उसी तरह से आपके हुलिए को सुधारने का भी विशेषज्ञ भी है।

 

आपका हुलिया भी बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाता है आपके विस्वास को कायम करवाने में। किसी ने कहा है : कपड़ों से आदमी की पहचान नहीं बनती है परन्तु नब्बे प्रतिसत आदमी इन्ही कपड़ों से ढंका रहता है। जब तक आदमी लायक नहीं दिखेगा तब तक लोगों को यह विस्वास नहीं होगा की उसकी बातें महत्वपूर्ण है। 

 

 

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New latest products

NEW LATEST PRODUCTS OF SAFE SHOP -आर्थिक विशेषज्ञों की राय में आगामी 10 वर्षों में अमीरों की संख्या 1 करोड़ से भी ऊपर पहुँच जाएगी।

विश्व प्रशिद्ध अर्थशास्त्री पॉल जेन पिंजर के अनुसार- अमीरों की संख्या में यह बढ़ोतरी Direct selling व्यवसाय के चलते होगी। आने वाले वर्षों में वर्ष 1990 के मुकाबले हमारी आर्थिक उछाल आएगा तथा इंटरनेट लाखों लोगों के लिए रोजगार मुहैया का माध्यम बनेगा। 

 

प्राकृतिक और नेचुरल। आप इस प्रोडक्ट्स को खरीदकर पार्ट टाइम एक बिज़नेस भी कर सकते हैं जो आपके फुल टाइम नौकरी या बिज़नेस पे आगे चलकर भारी पड़ेगा। विशेष जानकारी के लिए कमेंट बॉक्स में अपना मोबाइल नंबर छोड़ दें , या मेल कर सकते हैं हैं -mail id -kadvepravachan73.com  

आपके मन में जो भी सवाल हों आप पूछ सकते हैं। यह कंपनी पिछले 18 साल से धुआंधार काम कर रही है। 

 



एक बार मीटिंग के बाद एक वयक्ति के बाद आया और पूछा -अगर हम ईमानदारी से बात करें, तो इस काम को करने के लिए कुछ विशेष किस्म के लोगों की आवश्यकता होती है। जो आपने हासिल किया है वो हर कोई हासिल नहीं कर सकता। मैंने उसे जवाब दिया -आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं इस काम को कुछ विशेष तरह के  ही कर सकते हैं। ऐसे लोग जो सुनने और सिखने के लिए तैयार हों और मेरा यकीन है की आप इसे कर सकते हैं। 


बिज़नेस किसके लिए है ?


अगर आप आमिर होते तो क्या आप तब भी वही स्कूल में पढ़ाते जिस स्कूल में अपने बच्चों को भेज रहे हैं ?
क्या आप अमीर होते तो क्या आप वही कपडे पहनते जो आप अभी पहन रहे हैं ?


क्या आप अमीर होते तो आप उसी घर में रहते जहाँ अभी रह रहे हैं ?
अगर आप आमिर होते तो क्या उसी गाड़ी से चलते जिस से चल रहे हैं ?
क्या आपके पास प्रयाप्त समय है ,अपने बच्चों के साथ बिताने के लिए ?
क्या आप boss से परेशान हैं ? 
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छठवाँ स्तर

छठवाँ स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

छठवाँ स्तर तक विकाश करने वाले लोग विरले ही होते हैं। अगर आपने लोगों को इस स्तर तक लेन में मदद की है ,उनके साथ सर्वाधिक प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। वे ऐसे लीडर्स हैं ,जो कहीं भी सफल हो सकते हैं। उनके पास ऐसी योग्यतयें व् दक्षताएं हैं ,जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या उद्योग तक सिमित नहीं हैं।  

अपने जीवन कल में अगर ईश्वर आपको ऐसे एक या दो व्यक्ति प्रदान करता है ,तो आपमें प्रबल सामूहिक क्षमता होगी। जो आपकी व्यक्तिगत क्षमताओं से कहीं आगे जाकर प्रभाव छोड़ सकती है। 

 

स्तर जितना ऊँचा होगा ,वहाँ पर उतने कम लोग होंगे। आप यह भी पाएंगे की स्तर बढ़ने के साथ छलाँग ज्यादा मुश्किल होती जाती है। ऊँचे स्तर  पर पहले वाले स्तर से ज्यादा संकल्प,समर्पण और लगन की जरुरत होती है। 

 

आप जिन व्यक्तियों का विकास कर रहे हैं ,उनमें से प्रत्येक के बारे में आपको कठोर निर्णय लेना होंगे। सिर्फ छठे स्तर तक पहुँचने वाले व्यक्ति को छोड़ कर। जब आप लोगों का विकाश करते हैं ,तो आप हर व्यक्ति से उस स्तर पर मिलते हैं जहाँ पे वह होता है ,आम तौर पर पहले स्तर पर।

 

इसके बाद आप अपनी यात्रा  सुरु करते हैं। आपका काम यह है की जब तक वह व्यक्ति आगे बढ़ना और विकास करना चाहे ,तब तक आप उसके साथ चलें और उसकी मदद करें। जब वह आगे बढ़ना बंद कर दे ,

तब आपको कठोर निर्णय लेना पड़ता है-आपको उस व्यक्ति को पीछे छोड़ना होता है। हो सकता है आप उससे सम्बन्ध बनाये रखें,परन्तु अब उसका विकास करना छोड़ देते हैं। 

 

लोगों के विकासकर्ता के रूप में यह बहुत मुश्किल काम होता है। हम लोगों को इतना ज्यादा समय , ध्यान,और परवाह देते हैं की किसी को पीछे छोड़ना अपने बच्चे को छोड़ने की तरह मुश्किल होता है ,परन्तु आप किसी को सबसे ऊँचा स्तर तक विकास करने के बाध्य नहीं कर सकते हैं।

 

आपको उस व्यक्ति को उसी के स्तर पर छोड़ने का कठोर निर्णय लेना होता है। यह मुश्किल होता है ,परन्तु लोगों का विकास करने के लिए यह कीमत  चुकाना ही पड़ता है। 

 

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लीडर्स के छह स्तर

लीडर्स के छह स्तरकिसी भी लीडर्स का विकास उसके स्तर के अनुसार ही होता है। जॉन सी. मैक्सवेल के अनुसार लीडर्स के छह स्तर होते हैं। 

 

पहला स्तर : धीमा विकास 

कुछ लोग बहुत धीमी गति से विकास करते हैं और उनके विकास में दिशा नहीं होती है। ये लोग इतनी धीमी गति से यह करते हैं की नजर ही नहीं आता है। हो सकता है वो अपने काम में निपुण हों,परन्तु वे कभी उभर कर नहीं आ पाते हैं। 

 

दूसरा स्तर : विकास उन्हें सक्षम बनाता है 

कई लोग यह गलती से यह मान लेते हैं अपने काम को अच्छी तरह से करना ही उनके विकास का अंतिम लक्ष्य है। ऐसा नहीं है। अच्छे विकासकर्ता या व्यक्तिगत विकास की प्रबल इच्छा के बिना लोग विकास की प्रक्रिया में यहीं रुक जाते हैं। 

 

तीसरा स्तर : विकास उन्हें स्वयं को बहुगुणित करने में समर्थ बनाता है 

विकास के इस स्तर पर लोग अपने मूल्य में वृद्धि करते हैं ,क्यूंकि वे अपनी विशेसग्यता के क्षेत्र में दूसरों को प्रशिक्षित करने में समर्थ हैं। जो लोग तकनिकी रूप से शसक्त होते हैं ,परन्तु जिनमें लीडरशिप की योग्यताएं काम होती हैं ,

 

वे ऐसा करने में समर्थ होते हैं ,प्रबल लीडरशिप योग्यताओं वाले दूसरे लोग यह कर सकते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं काम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,भले ही उनकी तकनिकी योग्यताएं कम हों। जो लोग दोनों क्षेत्रों में ससक्त होते हैं ,वे अगले स्तर तक आगे बढ़ जाते हैं। 

 

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चौथा स्तर : विकास उन्हें ऊँचे स्तर वाले काम तक ले जाता है 

तीसरे स्तर से चौथे स्तर तक की छलाँग मुश्किल होती है। इसके लिए यह जरुरी होता है की लोग व्यक्तिगत और व्यवसायिक दोनों दृष्टियों से विकाश करने हेतु स्वयं को समर्पित करने के लिए तैयार हों।

 

जब वे अपनी सोंच और अनुभव को व्यापक बना लेते हैं ,तो वे ज्यादा सक्षम बन जाते हैं और अपने संगठन तथा लीडर्स के लिए अधिक मूलयवान भी बन जाते हैं। 

पांचवां स्तर  : विकाश उन्हें दूसरों को ऊंचाई पर ले जाने में समर्थ बनाता है 

इस स्तर पर महान लीडर्स उभरते हैं। वे दूसरों के सच्चे विकाशकर्ता होते हैं और वे सिर्फ अपने लीडर्स तथा संघठन के मूल्यों में वृद्धि नहीं करते हैं-वे इसे बहुगुणित करते हैं। 

 

 

छटवां स्तर : विकास उन्हें किसी भी काम को करने में समर्थ बनाता है। 

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नेटवर्क मार्केटिंग

आज 21 वी सदी का सबसे क्रन्तिकारी तरीका है नेटवर्क मार्केटिंग है। लेकिन लोगों के मन में बहुत से सवाल होते हैं इन कंपनियों को लेकर। लेकिन मैं आपको बता देना चाहता हूँ की सच में नेटवर्क मार्केटिंग एक बहुत ही शानदार और बिज़नेस की तरह ही है

जिसे आप बहुत कम इन्वेस्टमेंट के साथ शुरुआत कर सकते हैं। इस बिज़नेस की खास बात यह है की आपको जो भी चैलेंज आने वाला है पहले ही पता चल जाता है और परिणाम भी।


नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी आज के समय की जरुरत है क्यूंकि आपको पता है जॉब की मारामारी और यदि आपका कैसे करके लग भी जाये तो बॉस जीना हराम कर देता है।

तो यदि आपको समय की आजादी और पैसे की आजादी चाहिए तो आपको अपना नेटवर्क बनाना पड़ेगा। और नेटवर्क बनाने के लिए आपको सीखना पड़ेगा।

 

चेतावनी -एक महत्वपूर्ण बात इसमें भी और बिज़नेस की तरह ट्रेनिंग की जरुरत होती है और उसके बाद भी अन्य व्यवसाय के तरह ही कोई गरंटी नहीं होती है की आप सफल हो ही जाएँ।

 

स्कोप इन इंडिया -अगर मैं भारत में बात करें तो बहुत कम लोग नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में जुड़े है अगर एक सर्वे के अनुसार और एक किताब में छपे लेख के अनुसार भारत की जनसंख्या है 1 अरब 30 करोड़ लेकिन इसमें सिर्फ ५ करोड़ लोग ही नेटवर्क मार्केटिंग में ज्वाइन हुए हैं और सफल चंद मुट्ठी भर लोग।

लेकिन धीरे-धीरे सफल लोगों की संख्या बढ़ रही हैं और लोग जागरूक भी हो रहे हैं।

कौन सी कंपनी भागती है– आप भी सोंचते होंगे की कौन सी कंपनी में जुड़े और कौन से में नहीं। मैं इस परिस्थिति को समझ सकता हूँ ,क्यूंकि मुझे भी नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी में आने पहले ऐसी बहुत सी बातों का असमंजस था।


लेकिन आप भी जानते हैं की दुनिया में चीजें एक सामान नहीं होती है। अगर रूपया असली है तभी उसका नकली बनता है। एक पानी का गिलास होता है और एक बुलेट प्रूफ सीसा होता है ,पानी के गिलास वाला सीसा तुरन्त टूट जाता है और बुलेट प्रूफ सीसा पे आप गोली भी मारो तो टूटता नहीं है।

 

इससे यह सिद्ध होता है की दुनिया में दो तरह की कम्पनियां होती है एक रहने वाली और एक बहगने वाली। कंपनी के बग्ने के पीछे मूलतः कुछ कारण होते हैं –

जो गैर क़ानूनी हो – आपको बता दें वैसे तो भारत सरकार भी बहुत प्रयास कर रही है की ग्राहक को जागरूक करें और समय-समय पर लोगों के लिए advisroy और gudielines पारित करती रहती है। आपको बता दें की अभी-अभी कुछ दिन पहले कंस्यूमर अफेयर ने गाइडलाइन्स निकला है की

अगर ये-ये पॉइंट्स है तो ये कंपनी लीगल है 209 कंपनियों की लिस्ट निकाला है।

 

जो घाटे में आ जाये – नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनी ही नहीं कोई भी कम्पनी बंद हो अजयेगी यदि वो घाटे में आ जाये तो।

जिसका मैनजेमेंट फेल हो जाये – यदि कम्पनी का मैनजमेंट सही ना हो तो।

वो कंपनी को जो बहुत सारा पैसा इकठ्ठा कर ले -ऐसी कम्पनी जो आपको प्रयास करती है की आपको कुछ करना नहीं पड़ेगा बस आपको तो जुड़ जाना है और बैठे-बैठे पैसा आएगा। हर महीना निश्चित तौर पर आपको पैसा आता रहेगा।

आपको पता होना चाहिए की नटवर्क मार्केटिंग भी एक आम बिज़नेस की तरह ही है और इसमें भी अप -डाउन होता है अगर कोई फिक्स पैसे देने का वादा करती है तो आप सावधान हो जाएँ।

 

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अपलाइन पुराण

उठना सीखो 

21 वी सदी का व्यवसाय

 

 

ऐसी कम्पनी का मकसद ही भागने का होता है। लालच में ना आएं। अपनी अक्ल लगाएं बिना काम के पैसा नहीं आता काम तो आपको करना ही होगा।


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1 प्रतिसत फार्मूला

1 प्रतिसत फार्मूला1 प्रतिसत फार्मूला -परिवर्तन का समय आ गया है हम सभी सैंकड़ों चीजों में 1 प्रतिसत बेहतर बन सकते हैं। 1 प्रतिसत फार्मूला का प्रयोग आप अपनी जिंदगी के हर क्षेत्र में कर सकते हैं।

 

हर कोई महान नहीं बन सकता ,लेकिन हर कोई जहाँ भी है,उससे बेहतर जरूर बन सकता है। 

मैं आपको एक ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जो केवल चाँद ही लोग जानते हैं ,क्यूंकि मुझे यह अहसास हो रहा है की आपके लिए भी परिवर्तन का समय आ गया है। 

आप कोई कार्य करके शुरुआत हैं -चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो-और  बार जब आप  सफलता हासिल कर लेते हैं ,तो आपकी प्रेरणा बढ़ जाती है। 

आप  किसी कार्य को जितना ज्यादा करते हैं ,आप उसे करने के लिए उतने ही ज्यादा प्रेरित होते हैं। इसलिए अगर आप ज्यादा कार्य करेंगे तो आपको ज्यादा प्रेरणा मिलेगी। यह खुद को पोषण देने वाला सतत चक्र है ! 

चूँकि न्यूटन का नियम कारगर है,इसलिए खुद को एक बार जब आप खुद को गति में ले आते हैं,आप गति में ही बने रहेंगे। 

 

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समय का प्रबंधन 

जोश में असीम ताक़त है

 

फिसलने को गिरने में न बदलने दें-  यह आपके हाथों में है की हो सकता है आप फिसल गए हों पर सम्भलना। 

 

बदलाव के लिए तैयार रहें – जब कोई बच्चा छोटा रहता है और वो अपनी माँ की गॉड में आराम महसूस करता है लेकिन जैसे ही कोई उसे माँ की गोद से लेने की कोसीस करता है तो वो बच्चा रोने लगता है।

क्यूंकि वो बदलाव को सहन नहीं कर पाता है और यही हमारी आदत बड़े होने पर भी बनी रहती है,थोड़ा सा बदलाव होता नहीं है की चीखना-चिल्लाना सुरु कर देते हैं वो बच्चे की तरह ही। लेकिन हमें याद रखना चाहिए अब आप बच्चे नहीं रहे। आप बड़े हो चुके हैं इसलिए बदलाव के लिए तैयार रहें। 

 

दोस्तों आज का पोस्ट मैंने लिखा है 1 प्रतिसत फार्मूला 30 दिनों को अपने जीवन के सर्वश्रेस्ट कैसे बनाएं। आप इस किताब को अवश्य पड़ें। इसके लेखक हैं-टॉम कॉनेलन।आपको मेरा पोस्ट अगर पसंद आया हो इसे शेयर और लाइक करना ना भूलें। 

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नेटवर्किंग

नेटवर्किंगजिम रॉन ने कहा था की आपकी आमदनी अक्सर अपने पांच सबसे करीबी मित्रों की औसत आमदनी के बराबर होती है। और आपने यह भी सुना होगा की सामान प्रवृति वाले लोग साथ-साथ रहते हैं। यह अमीर लोगों,गरीब लोगों और मध्यमवर्गीय लोगों के बारे में भी सच है। दूसरे शब्दों में अमीर लोग अमीरों के साथ नेटवर्किंग करते हैं और मध्यमवर्गीय लोग दूसरे मध्यमवर्गीय लोगों के साथ उठते-बैठते हैं।

 

यह सुनना आपको शायद पसंद नहीं आएगा,लेकिन यदि आप अपने जीवन में एक अलग अर्थव्यवस्था गढ़ना चाहते चाहते हैं तो आपको नई नौकरी की जितनी जरुरत है,उस से ज्यादा जरुरत नए दोस्तों की हो सकती है। क्यों ? क्यूंकि भले ही वे आपसे प्रेम करते हों और भले ही उनका ऐसा इरादा ना हो,लेकिन इस वक़्त आप जिन दोस्तों के साथ रहते हैं ,हो सकता है की वे ही आपको पीछे रोके हुए हों।

 

यदि आप भी अमीर बनना चाहते हैं तो आपको भी उनलोगों के साथ नेटवर्किंग करने की जरुरत है,जो या तो अमीर हैं या अमीर बनने में आपकी मदद कर सकते हैं।




कई लोग पूरा जीवन बिता देते हैं ऐसे लोगों के साथ उठने -बैठने और नेटवर्किंग करने में बिता देते हैं, जो आर्थिक दृष्टि से उन्हें पीछे रोककर रखते हैं। नेटवर्क मार्केटिंग व्यवसाय में आप ऐसे लोगों के साथ उठते बैठते हैं ,जो आपको ज्यादा अमीर बनाने में मदद करते हैं।

 

खुद से यह पूछें : मैं जिन लोगों के साथ समय बिताता हूँ ,क्या वे मुझे अमीर बनाने के प्रति समर्पित हैं ? या उनकी ज्यादा इस बात में रूचि है कि कड़ी मेहनत करता रहूं ?

 

 

नेटवर्क मार्केटिंग न सिर्फ बेहतरीन व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करती है बल्कि यह मित्रों का एक बिलकुल नया संसार भी उपलब्ध कराती है -ऐसे मित्र ,जो आपकी ही दिशा में जा रहे हैं और उनकी बुनियादी जीवनमूल्य भी वही है ,जो आपके हैं।




यह एक नई सदी है
जब मैं बच्चा था,तो मेरे माता-पिता ने मुझे सफलता का वही फार्मूला सिखाया ,जो शायद आपको भी सिखाया गया होगा :स्कूल जाओ,मेहनत से पढ़ो और अच्छे ग्रेड लाओ,ताकि तुम्हें सुरक्षित ,ऊँची तनख्वाह तथा अन्य लाभ वाली नौकरी मिल सके – इसके बाद तुम्हारी कंपनी तुम्हारी परवाह करेगी।

 

 

लेकिन यह औद्योगिक युग की सोंच थी और आजकल हम औद्योगिक युग में नहीं रहते हैं। आपकी कंपनी आपकी परवाह नहीं करेगी। सरकार आपकी परवाह नहीं करेगी। कोई आपकी परवाह नहीं करेगा। यह नई सदी है और इसके नयम बदल गए हैं।

 

यदि आपने अपने अपनी कंपनी में तरक्की की सीढ़ी चढ़ने में बरसों लगाएं हैं ,तो क्या आपने कभी ठहर कर इस बात पर किया है कि आपको सामने कौन सा नजारा दिखता है ? आप पूछते हैं हैं ,कौन सा नजारा ? अपने आगे वाले व्यक्ति का पिछवाड़ा ?आपको बस वही नजर आता है।

 

 

अगर आप  अपने बाकि जीवन में भी यही नजारा देखना चाहते हैं तो न तो यह किताब और न शायद नेटवर्क मार्केटिंग आपके लिए है। लेकिन यदि आप किसी का पिछवाड़ा देखते-देखते थक  और उकता चुके हैं ,तो आगे पड़ते रहें।





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नेटवर्क मार्केटिंग में असफल क्यूँ होते हैं

सवाल ही जवाब  है

पेशेवर क्लोसेर्स 

 

 

बॉस ( BOOS) और लॉस (LOSS ) से छुटकारा

सच्चाई तो यह है की आदमी अक्सर डर से जीता रहता है…….. नौकरी में बॉस का डर

और बिज़नेस व खेती में लॉस का डर। अगर आपने नेटवर्किंग में अपना नेटवर्क बनाया  तो राजा की तरह जिंदगी जी  सकते हैं। क्या आप स्वतंत्र जिंदगी जीना चाहते हैं। यदि हाँ ,तो यह मौका, आपके लिए  है।

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लक्ष्य की विशेषताएँ

लक्ष्य की विशेषताएँ -लक्ष्य में निम्न गुण होने चाहिए ताकि लक्ष्य को साकार करने में मदद मिल सके । ताकि लक्ष्य को कोई भी ऐसी ग़लती ना हो





 

  1. बड़ा – लक्ष्य बड़ा होना चाहिए जिससे की हमें प्रेरणा मिलती रहे । ऊँचा लक्ष्य नहीं होगा तो कार्य करने के प्रेरणा नहीं मिलेगी । छोटा लक्ष्य व्यक्ति को प्रेरित नहीं कर पाता है ।

  2. उत्साहवर्धक – लक्ष्य हमें उत्तेजना देने वाला होना चाहिए व्यक्ति के मन की प्रफुल्लता बड़ा सके । लक्ष्य के प्रति एकाग्रता बढ़ाने के लिए आकर्षक और मज़ेदार होना आवश्यक है ।

  3. विसिष्ट- लक्ष्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना बहुत ज़रूरी है ।

  4. मापने योग्य – लक्ष्य को हमेशा मापने योग्य , आदि अंकों में रखें , ताकि उसे मापा जा सके ।मुझे धन कमाना है के बजाय मुझे पचास लाख कमाने हैं ।

  5. प्राप्ति योग्य – लक्ष्य अपनी सीमाओं में रहते हुए बनाएँ , ताकि आप संसाधनों से प्राप्त कर सकें , हवाई , काल्पनिक व बहुत अव्यवहारिक लक्ष्य ना बनाएँ । कहा जाता है की – आपका दिमाग़ जिस चीज को कन्सीव कर सकता है आप उस चीज़ को अचिव कर सकते हैं ।




  6. तार्किक – लक्ष्य का कोई आधार होना चाहिए । जो लक्ष्य हम तय करें उसे प्राप्त कर सकने की हमारी क्षमता, समझ व अवसर मिलने की सुविधा होना चाहिए । लक्ष्य तय करते वक़्त स्वयं को अपने कारणों को खोज लेना चाहिए की उक्त लक्ष्य को इन परिस्थितियों में प्राप्त कर लूँगा ।

  7. समय सीमा – लक्ष्य निर्माण करते वक़्त उसको प्राप्त करने में लगने वाले समय की सीमा ज्ञात होनी चाहिए । समय की योजना हो इस समय में इस प्रकार इसे साकार किया जा सकता है ।

यदपी इस सीमा को परिस्तिथि अनुसार परिवर्तित किया जा सकता है । लेकिन समय की सीमा रखना ज़रूर चाहिए । प्रत्येक व्यक्ति को अपने लक्ष्य स्पष्ट करने हेतु लिखना चाहिए व साथ ही उपरोक्त दिए गए सातों सूत्र से उसकी जाँच भी करनी चाहिए ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें ।

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21 वी सदी का व्यवसाय

NETWORK  MARKETING

21 वी सदी का व्यवसाय  में आपका स्वागत है। नियम बदल गए हैं – 2009 में USA टुडे ने अमेरिकियों का सर्वेक्षण किया ,जिसमें 60 प्रतिसत ने कहा की वर्तमान आर्थिक हालात का वे जीवनकाल के सबसे बड़ा संकट मानते हैं।

अभी के इस संकट के दौर में नेटवर्क मार्कटिंग बहियत बेहतरीन उद्योग उभरकर आ रहा है क्यूंकि नेटवर्क मार्केटिंग एक प्रजातान्त्रिक तरीका है पैसा कमाने का। नो बॉस नो लॉस।

 

अपनी आर्थिक स्तिथि की बागडोर थामें – या फिर जीवन भर दूसरों के आदेशों का पालन करने की आदत डाल लें। आप या तो धन के स्वामी होते हैं या फिर दास। विकल्प आपके हाथ में है। आप अपने भविष्य की बागडोर अपने हाथ में थामने के लिए खुद का व्यवसाय जरुरी है।

नेतृत्व वह शक्ति है जो सारी  चीजों को एक साथ जोड़ती है। नेतृत्व ही वह शक्ति है जिसकी बदौलत व्यवसाय बेहतरीन बनता है, और यहाँ नेटवर्क मार्केटिंग में आपके लीडर के सभी गन डेल जाते हैं जिसकी वजह से आप नेतृत्व कर  पाते हैं।

 

यहाँ पे लोगों को ग़लतफ़हमी हो जाता है की पैसा सबसे अच्छे प्रोडक्ट्स वाले व्यवसाय की ओर आकर्षित नहीं होता। यह तो सबसे अच्छे लीडर की ओर प्रवाहित होता है।

 

असली दुनिया की व्यवसायिक शिक्षा – यदि आप वित्तीय दृष्टि से सफल होना तो आपको तीन प्रकार की शिक्षा की जरुरत होती है – स्कूली , पेशेवर और वित्तीय शिक्षा।

इसका एजुकेशन सिस्टम भी बहुत प्यारा होता है ,जो नेटवर्क मार्केटिंग की असली दुनिया की शिक्षा में सिखाई जाती है –

  • सफलता का नजरिया

  • सफलता के लिए पोशाक

  • व्यक्तिगत ,दरों शंकाओं और आत्मविश्वास की कमी से उबरना

  • अस्वीकृत के डर से उबरना

  • संवाद कुशलता

  • लोक-व्यवहार की योग्यताएं

  • समय प्रबंधन

  • जवाबदेही की योग्यताएं

  • व्यवहारिक लक्ष्य – निर्धारण

  • धन-प्रबंधन

स्वप्नदर्शी चार  तरह के होते हैं-

जो अतीत में सपने देखते हैं जो सिर्फ छोटे सपने देखते हैं

जो एक सपने को  हैं और उसके बाद  जीवन नीरस  बिताते हैं।

जो बड़े सपने देखते हैं तो हैं , लेकिन उनके पास साकार करने की योजना नहीं होती है ,इसलिए वो अंततः नाकाम हो जाता है।

जो सपने बड़े देखते   हैं , उन्हें हासिल करते हैं और फिर उस से भी ज्यादा बड़े सपने देखने लगते हैं- इन्ही के लिए नेटवर्क मार्केटिंग है। अगर आप बड़ा सोंच नहीं सकते हैं तो आपके लिए नहीं है।

सेल्स प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण है वो अपनी प्रस्तुति सुरु करने से पहले आप उनको प्रभावित करने वाले प्रश्न करें।

2 1 वी सदी का  व्यवसाय  नेटवर्क मार्केटिंग है। 

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  बेचना सीखो और सफल बनो

दुनिया सिर्फ नतीजों को इनाम देती है –

बेचना सीखो और सफल बनो

File picture

एक रेस में  जितने वाले घोड़े और हारने वाले घोड़े में सिर्फ मिली सेकण्ड्स का अंतर होता है लेकिन इनाम तो जितने वाले घोड़े को ही मिलता है

 

 जब तक आपकी नजर लक्ष्य पर होती है

आपको मुसिबत नहीं दिखाई नहीं देती है

और जब आपकी नजर लक्ष्य से हटती है तो

आपको मुसीबत ही मुसीबत दिखाई देती है।

जब तक व्यवहार में बदलाव नहीं आता है तब तक जिंदगी में

सीख हासिल नहीं होती है। बदलाव तभी आता है जब जानकारियां

आपके अंदर जाती है ,आपके अंतर्मन को छूती है।

बेचना जीत या हार का खेल है

 

 

बेचना किसे कहते हैं ?

बेचना और कुछ नहीं ,खरीदने और बेचने वाले के बिच उत्साह का लेन देन होता है।

बेचना है  90 % अपने प्रोडक्ट्स पर बिस्वास ,जोश  और १०%  बेचने का तरीका।

 

 

बेचना सीखो और सफल बनो-अगर आप गौर से देखें की ऊंचाई पर पहुंचे सेल्समेन ऊँचे स्तर की शिक्षा या कोई आकर्षक वयक्तित्व के स्वामी नहीं हैं उनमे ये तीन बातें होती है

 

 नजरिया –       सकरात्मक नजरिया आपको हमेसा कामयाबी दिलाता है।

महत्वकांछा – अपने लक्ष्य को पाने की गहरी इक्षा।

कार्य –            सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए आपको कार्य करना पड़ेगा।

 

 

अनुसाशन  – 

 
                        

अनुसाशन का मतलब है जो करना है जब करना है उसे उसी समय करना है ,चाहे आप पसंद करे या नहीं ,चाहे आपका दिल करे या न करे। 

एक साधारण ठण्ड में लगी सर्दी आपकी दवाई से ठीक हो सकती है ,लेकिन सकरात्मक सोंच निरंतर प्रयास से ही आपके अंदर विकसित होगी

 

 

दोस्तों आज मैंने जिस बुक (बेचना सीखो और सफल बनो) को चुना है वह बहुत शानदार है यह किताब आपके जीवन में एक नया आयाम लेकर आएगा। आप एक नतीजा देने वाला सेल्समेन बनकर उभरेंगे। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात होती है जानना और फिर मानना। क्योँकि सिर्फ जानने से नहीं होगा। इस किताब का नाम है बेचना सीखो और सफल बनो। 

  बेचना सीखो और सफल बनो -किताब के लेखक हैं  शिव खेड़ा
 
धन्यवाद दोस्तों।
 

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क्या कारण है की लोग ध्येय(dream) नहीं बनाते।

क्या कारण है की लोग ध्येय(dream) नहीं बनाते।

क्या ध्येय( dream वास्तव में जरुरी है ?
बहुत से लोगों के कान में हावर्ड हिल का नाम सुनते ही घंटियाँ बजने लगती है। वह शायद अब तक का महानतम धनुर्धर ( तीरंदाज ) था। उसका निशाना इतना अचूक था की उसने धनुष और तीर की सहयता से एक नर हाथी , एक बंगाल के टाइगर और एक भैसें को मार गिराया था वह पहला तीर लक्ष्य के केंद्र पर भेजकर , अगले तीर से उसे छितरा देता था।

 

 

अब मेरे अगले कथन से आपकी भौवें छह इंच ऊपर चढ़ जाएँगी। यदि आपका स्वास्थ ठीक है तो आप हॉवर्ड हिल को सर्वश्रेष्ठ दिन भी निशानेबाजी में हरा सकते थे। आप लक्ष्य को हॉवर्ड हिल मुकाबले अधिक अटलता से वेध सकते थे और हो सकता है की बच्चों वाले धनुष बाण के अलावा कुछ न चलाया हो तब भी। स्पस्ट है इसके लिए हॉवर्ड हिल के आँखों पर पट्टी बांधकर उसे एक दो बार घुमाना जरुरी होता। फिर मैं गारंटी दे सकता हूँ की आप उपेक्षा से अधिक अटलता से लक्ष्य भेद देते। मुझे आशा है ,आप सोंच रहे होंगे की यह समानता बेतुकी है और आप कहेंगे , जाहिर है मैं लक्ष्य भेद देता , कोई आदमी लक्ष्य बिना देखे कैसे भेद सकता है ?




यह अच्छा प्रश्न है। अब आपके लिए दूसरा सवाल है यदि हॉवर्ड हिल बिना लक्ष्य को देखे भेद नहीं सकता तो आप कोई लक्स्य रखे बिना कैसे भेद सकते हैं ?

 

बिना किसी गंतव्य के उस पर पहुंचना उसी तरह मुश्किल है जिस तरह किसी जगह पर बिना जाये वहां से वापिस आना।

 

ध्येय(dream) अथवा लक्ष्य के बिना कोई पुरुष या महिला वैसे ही है जैसे बिना मार्गदर्शक के जहाज। हर कोई बहायेगा , चलाएगा नहीं। हर कोई निराशा ,पराजय और विषाद के तटों को प्राप्त होगा। कुछ लोग गतिविधि में कार्य सम्पन्नता का भ्र्म पाल लेते हैं बहुत से लोग यही गलती करते हैं और परिणाम स्वरुप जीवन के कोष से बहुत थोड़ा सा अंश प्राप्त कर पते हैं बगैर ध्येय के।

ध्येय इतने महत्वपूर्ण है तो लोग ध्येय बनाते क्यों नहीं। एक सर्वे के मुताबिक अमेरिका में लोग मात्र ३ % लोग ही अपना ध्येय कागज पर उतारते हैं और भारत में इसका प्रतिसत आप स्वयं ही सोंच लें की इसका क्या प्रतिसत होगा। क्या कारण है की इतने कम प्रतिसत के लोग ही ध्येय बनाते हैं

इसके मूल चार कारण हैं। पहला ,उन्हें कभी इस बारे में समझाया नहीं गया है ,हाँ

पहला -बताया गया है पर समझाया नहीं गया।

दूसरा -उन्हें मालूम नहीं है की यह किस तरह करें।

तीसरा -वे डरते हैं की निर्धारित ध्येय प्राप्त नहीं कर पाएंगे और शर्मिंदा महसूस करेंगे।

चौथा – हीन आत्म-छवि। वे सोंचते ही नहीं की जीवन की अच्छी चीजों के लिए उनमे पात्रता है।

 

अतः जिस चीज की आपमें पात्रता ही नहीं है उसे लिखनी की परेशानी क्यों उठाई जाये जिसका अर्थ है ( उनके दिमाग में ) की उन्हें नहीं मिलेगा। अब एक शसक्त वक्तब्य के लिए तैयार हो जाइये यदि आप वास्तव में मेहनत से लग जायेंगे तो इसमें लिखी वर्णित सिद्धांत और पद्धतियां इन चारों  को संभाल लेगी।

ध्येय(dream) नहीं तो खेल नहीं




आइये , मैं ध्येय के महत्व को बास्केटबॉल चैंपियनशिप के निर्णयात्मक खेल के दृश्य पर नजर डाल कर समझाऊँ । टीमें अपनी प्रारंभिक तयारी कर लेने के बाद खेल के शारीरिक रूप से तैयार हैं। शरीर  में बिजली दौड़ रही और स्पस्ट रूप से एक चैंपियनशिप खेल में जो उत्तेजना होती है उसे खिलाडी महसूस कर रहे हैं।

 

वे अपने ड्रेसिंग रूम में वापस आते हैं और खेल सुरु होने से पहले कोच उन्हें आखरी दिशा निर्देश देता है। बस सब कुछ यही है साथियों आर या पार। आज की रात या तो हम सब जीतेंगे या सब गवां देंगे। शादी में सबसे अच्छे आदमी को कोई याद नहीं रखता और न ही किसी को याद रहता है दूसरे नंबर पर कोण आया। सारा मौसम आज की रात ही है।

खिलाडी इतने जोश में आ जाते हैं की दरवाजों को लगभग चीरते हुए मैदान पर वापिस पहुँचते हैं। जैसे ही वह मैदान पर पहुँचते हैं तो पूरी तरह से दुबिधा में ठिठक जाते हैं। उनकी कुंठा एवं क्रोध साफ़ दिखाई देते हैं , वे इशारा करते हैं की मैदान से गोलपोस्ट हटा दिए गए हैं की बिना गोल पोस्ट के स्कोर का पता ही नहीं चलेगा की उन्होंने ठीक गेंद डाली है या नहीं। वे गुस्से से जानना चाहते हैं बिना गोल के मैच कैसे खेला जा जा सकता है। वस्तुतः वे बिना गोल के बास्केटबाल के गेम को खेलने की कोसिस भी नहीं करेंगे। बास्केट बल के लिए गोल महत्वपूर्ण है , है न ? तो फिर आपके बारे में क्या ख्याल है ? क्या आप जीवन के खेल को बिना गोल के खेलने की कोसिस कर रहे हैं ? यदि आप ऐसा कर रहे हैं तो आपका स्कोर क्या है ?


धन्यवाद् दोस्तों
आज का पोस्ट मैंने लिखा है किताब से उस किताब का नाम है शिखर पर मिलेंगे इसके लेखक हैं -जिग जिग्लर। उम्मीद आपको आज का पोस्ट पसंद आया होगा ,हमें प्रोत्साहित करने के लिए इसे शेयर और कमेंट करना न भूलें।




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सफलता का वास्तविक रहस्य क्या है

कुछ लोग ज्यादा सफल होते हैं ? कुछ लोग दूसरों से ज्यादा पैसा कमाते हैं ? ज्यादा सुखी जीवन क्योँ बिताते हैं और उतने ही वर्षों में ज्यादा उपलब्धियां क्यों  पा  लेते हैं ? सफलता का वास्तविक रहस्य क्या है ?

 सफलता का पहला और स्पस्ट नियम है- बहाना बनाना छोड़ दें ,

कोई भी काम करें या न करें लेकिन बहाने न बनायें। काम न करने के बाद उसे उचित ठहराने  और न्यायसंगत तर्क गाड़ने के अपने अविश्वसनीय मस्तिष्क का दुरपयोग करना छोड़ दें।  कुछ भी करें।  आगे बड़े।  मन ही मन बार-बार दोहराएं : अगर मुझे यह करना ही है तो इसका दारोमदार मुझ पर है। परजीत लोग बहने बनाते हैं और विजेता प्रगति करते हैं।  कहा जाता है की लोग अपनी असफलता के बहने में जितनी ऊर्जा खर्च कर देते हैं उतनी अगर वे सही लक्ष्य प्राप्त करने में लगाएं तो वे सफल हो जायेंगे।  लेकिन सबसे पहले आपको बहनराटिस रोग से छुटकारा पाना होगा आपको उस द्वीप से बहार निकलना ही होगा।

 

आत्म अनुसासन सफलता की कुंजी है। आत्म-अनुशासन को आत्म विजय भी कहा जा सकता है।  जो लोग अपनी क्षुधाओं पर काबू नहीं कर पते हैं वे कमजोर और भोगी होने के साथ-साथ अविश्वसनीय भी हो जाते हैं। आत्म-अनुशासन को आत्म-नियंत्रण भी कहा जा सकता है। श्रेष्ठ व्यक्ति की यही पहचान है की स्वयं को अपने विचारों और कार्यों को नियंत्रित करने की क्षमता हो। आत्म-अनुशासन को आत्म-दमन भी कहा जाता है। यानि आपको उन आसान खुशियों के चक्कर में नहीं फंसना चाहिए ,जिनके कारन इतने सारे लोग भटक जाते हैं। इसके वजाय आपको अनुशासित रह कर सिर्फ कार्य करने चाहिए जो दीर्घकालीन और वर्तमान दोनों दृष्ट्यों से उचित हों।

 

अनुसासन का अर्थ है विलम्ब से मिलने वाली दीर्घकालीन संतुस्ती पर गौर करने की योग्यता , आगे चलकर ज्यादा बड़े पुरुस्कार पाने के लिए अल्पकालीन संतुस्ती का त्याग करने की क्षमता।दूर तक सोंचे

 

लोंग्फेल्लो ने एक बार लिखा था –

महान व्यक्ति जिस सिखर पर पहुंचे और बने रहे,

वहां वे अचानक उड़ान भरकर नहीं पहुँच गए थे।

वास्तव में , जब उनके साथी सो रहे थे ,

तब वे हर रात ऊपर चढ़ने का श्रम कर रहे थे।

आत्म-अनुशासन की आदत डालने के लिए सबसे पहले  तो यह दृढ़ निर्णय लें की आप किसी विशेष क्षेत्र में कैसा व्यवहार या कार्य करेंगे।  जब तक की आपको उस क्षेत्र में आत्म-अनुशासन की आदत पद जाये तब तक रत्ती भर ढील न दें जब आपसे चूक हो , जैसा की होगा , तो आत्म-अनुशासनके अभ्यास का दुबारा संकल्प करें

 

मिठाई से पहले भोजन

आत्म-अनुशासन का एक बहुत ही सरल नियम है : मिठाई से पहले भोजन पूरा खत्म करें

भोजन का एक तर्किक क्रम होता है जिसमे मिठाई अंत में आती है।  पहले आपको रोटी सब्जी खत्म करके थाली साफ़ करते हैं , इसके बाद ही आपको मिठाई मिलती है।

नेपोलियन हिल ने अपनी बेस्ट सेल्लिंग बुक द मास्टर की टू रिचेस  के अंत में कहा था आत्म-अनुशासन ही अमीरी की कुंजी है 

बड़े पुरूस्कार –

उच्च स्तरीय अनुसासन विकसित करने के पुरूस्कार भी बहुत बड़े हैं। अनुसासन और आत्म-सम्मान के बिच सीधा संबंध होता है

आप आत्म-विजय और आत्म-नियंत्रण का  जितना ज्यादा अभ्यास करते हैं , खुद को उतना ही ज्यादा पसंद करते हैं और महत्वपूर्ण मानते हैं।

 

आप खुद को जितना ज्यादा अनुशासित  करते हैं  , आपमें आत्म-सम्मान और आत्म-गौरव का अहसास होता है।

 

आप आत्म-अनुशासन का जितना ज्यादा अभ्यास करते हैं , आत्म -छवि  बेहतर होती है।  आप खुद को ज्यादा अच्छे रूप में देखते हैं और अपने बारे में सकरात्मक अंदाज में सोंचते हैं।  आप ज्यादा खुस और सक्तिशाली महसूस करते हैं।

 

 जब आपमें आत्म-अनुशासन  की शक्ति आ जाएगी तो , कोई बाधा आपको रोक नहीं पाएगी। आप प्रकृति की शक्ति की तरह अजय बन जाते हैं जिसे कोई रोक नहीं सकता। तब आप कभी भी  प्रगति न करने के बहाने नहीं बनाएंगे ,बल्कि तेजी से आगे बाद रहे होंगे।  वास्तव में।  अगले कुछ महीने और वर्षों में आप इतना जयादा प्राप्त कर लेंगे की जितना अधिकांस लोग अपने पुरे जीवन में प्राप्त नहीं कर पाते।

 

 

धन्यवाद दोस्तों

 आज का  पोस्ट को आत्म-अनुसासन की शक्ति  से लिया है जिसके लेखक हैं ब्रायन ट्रेसी।  बहुत शानदार किताब जो की क्षमता रखता है आपकी जिंदगी बदलने की।

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