नियम -ऐसा नियम जो आपकी चिंताओं को देगा

ऐसा नियम जो आपकी  चिंताओं को  देगा 

 जो हो गया है उसे स्वीकार कर लें 

 दुनिया की हर बीमारी का या तो इलाज है,या फिर नहीं है ;

अगर इलाज है तो। उसे ढूंढने की कोसिस करें,

अगर इलाज नहीं है ,तो परवाह मत करो। 

 जो हो गया उसे स्वीकार कर लो। स्वीकार करना ही किसी दुर्भाग्य के परिणामों से उबरने का पहला कदम है। 

इससे पहले की चिंता आपको खत्म कर दे ,आप चिंता को खत्म कर दें 

अपने दिमाग को व्यस्त रखकर चिंता को बाहर निकल फेंके। काम में जुटना ही चिंता का ऊतम इलाज है। 

छोटी -छोटी बातों का बतंगड़ ना बनायें छोटी-छोटी चीजों यानि जीवन की दीमकों को अपनी खुसी बरबाद करने ना दें। 

अपनी चिंताओं को जितने के लिए औसत के नियम का प्रयोग करें खुद से पूछें ,इस बात के होने की कितनी सम्भवना है ? 

अवश्यभावी के साथ सहयोग करें। अगर आप जानते हैं की किसी प्रस्थति को बदला या सुधारना संभव नहीं है तो खुद से कहें ,यह हो चुकी है है। बदल नहीं सकती। 

अपनी चिंताओं पर स्टाप लॉस ऑर्डर लगा दें। यह फैसला करें  किसी चीज पर कितनी चिंता करनी चाहिए -और फिर उससे ज्यादा चिंता ना करें। 

अतीत को दफ़न कर दें। आरी से बुरादा न चीरें। 

आपने आपको छोटी-छोटी बातों से विचलित होने की अनुमति न दें ,जिन्हें हमें नजरअंदाज कर देना चाहिए और भूल जाना चाहिए। याद रखें ,जिंदगी जितनी छोटी है की घटिया नहीं चाहिए। 

कड़वे प्रवचन – मंगल  (ग्रह ) पर जीवन है या नहीं दुनिया में इस बात पर बहस चल रही है लेकिन जीवन में मंगल है या नहीं इस बात की किसी को कोई फ़िक्र नहीं 

मैं निवेदन नहीं करुँगा की मंगल पर जीवन ढूंढने के वजाय जीवन में यदि मंगल ढूंढा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। जीवन मंगल है। मगर नासमझी के कारण वह दंगल बना हुआ है। 

आपको जिंदगी में यह चुनाव करना है की आप अनुसासन की कीमत चुकाएंगे  अफ़सोस की। 
-टीम कोनर।

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अनुरोध-आपसे अनुरोध है की आप सभी घर पे ही रहें। 

confirm cases of corona – 1000 crossed in india.

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आकर्षण का नियम

आकर्षण का नियम अचूक है-आकर्षण का नियम अचूक है और हर व्यक्ति को वही मिल रहा है जो वह मांग रहा है ,हालाँकि ज्यादातर समय हर व्यक्ति को ईस बारे में जानकारी ही नहीं होती है की वह मनचाही चीजें मांग रहा है। 

कृतज्ञ महसूस करते हुए दिन की शुरुआत करें। जिस विस्तर पर आप सोए थे ,उसके लिए कृतज्ञ बनें। यह आकर्षण के नियम को मजबूत करेगा। 

इस नियम की सुंदर है की बहुत प्रतिक्रियाशील है और हर पल देता रहता है ताकि हम अपने जीवन का अनुभव कर सकें। 

यह नियम कभी नहीं बदलता है -हमें यह सीखना होता है की हम इस नियम के सामंजस्य में कैसे रहें। यह हर इंसान के लिए सबसे बड़ा कार्य है। 

यह याद रखना महत्वपूर्ण है की  हमारे विचार और भावनाएं आकर्षण के नियम के साथ मिलकर सृजन करते हैं। 

कल्पना शक्ति को पहचाने

आप इन दोनों को अलग-थलग नहीं कर सकते। यह भी याद रखें की आपकी समस्त आवर्ती तरंगों का सार बता रही है और यह भी की आप इस पल क्या आकर्षित करके उसका सृजन कर रहे हैं। 

तो आप इस वक़्त कैसा महसूस कर रहे हैं ? क्या इससे ज्यादा अच्छा महसूस कर सकते हैं ? तो फिर बेहतर महसूस करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं ,करें। 

आपको याद रखना चाहिए की हमारे विचरों के अलावा कोई भी चीज पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं। 

आप जब भी गाड़ी में कहीं जाएँ ,तो सृष्टि की शक्ति का इस्तेमाल करें। यात्रा सुरु करने से पहले यह इरादा कर लें की ट्रैफिक बाधारहित रहेगा ,आप तनावरहित व् खुश होंगें और सही समय पर गंतव्य स्थान तक पहुँच जायेंगे यह आकर्षण नियम है। 

आप कभी नहीं कह सकते की आकर्षण का नियम काम नहीं कर रहा है ,क्यूंकि यह हर वक़्त काम कर रहा है। अगर आप यह समझ लेते हैं ,तो आप अपनी अविश्वसनीय शक्ति को नई दिशा दे सकते हैं। ताकि आपकी मनचाही चीज को आप आकर्षित करे।  

Kadve pravachan

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नियति की शक्ति

नियति की शक्ति -जिस ब्रह्माण्ड का हम हिस्सा हैं वो सौर्य मंडल का हिस्सा है ,वो सौर्य मंडल एक गैलेक्सी का हिस्सा है गैलेक्सी पुरे ब्रह्माण्ड में करोड़ों हैं।

आपको पता है की इतने बड़े ब्रह्माण्ड को कोई न कोई ऊर्जा एक दूसरे को जोड़े हुए है और हर किसी का अपना एक नियति है , बिना नियति के इस ब्रह्माण्ड में कुछ भी नहीं है। 

नियति की शक्ति-एक कृष्णा नाम का व्यापारी था वह एक किराना दुकान चलाता था। एक दिन एक संत कृष्णा के दुकान पे आये और अनाज लेने की इक्षा जाहिर की। संत बहुत अनुभवी थे।

कृष्णा से थोड़ी देर बात करने के बाद ये उनको पता चल गया की यह व्यापारी अन्य व्यापरियों की तरह चंट-चालाक नहीं है। यह भोला भाला ,सीधा-सादा है। 

तब महर्षि बोले कृष्ण तुम्हारा गुरु कौन हैं ? क्यूंकि जिस तरह का स्वभाव है ,इस तरह के स्वाभवा बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है ,कोई न कोई महान गुरु के तुम शिष्य लगते हो। 

संत की बात सुनने के बाद कृष्णा ने दुकान की तरफ इसारा करते हुए  उत्तर दिया की महाराज मेरा गुरु मेरा व्यापर ही है। 

मैं समझा नहीं मुझे विस्तार से समझाओ। तब कृष्णा ने तराजू उठाया और तराजू में लगी केंद्र में ऊपर की तरफ पॉइंटर की और इसारा किया और बोला मेरा गुरु यही तराजू में लगा पॉइंटर और मेरा ध्यान हमेसा यही होता है बाबा जी की मैं जब भी वजनकरता  हूँ तो तराजू के एक पलड़े पर अनाज और दूसरे पर वजन मापने वाला वाट रखता हूँ। जब काँटा सीधा होता है वजन ठीक है। मैं हमेशा ध्यान रखता हूँ तराजू में कांटा एकदम सीधा हो।

 मैं हमेसा इसी पॉइंटर की तरह ही अपना ध्यान ऊपर यानि ईश्वर की ओर रखता हूँ ,मुझे लगता है की हर ग्राहक एक ईश्वर के रूप में मेरे पास आया है।

मैं उनके साथ ईश्वर  तरह  व्यवहार करता हूँ ,मेरे मन में कोई भी छल-कपट नहीं होता है। मैं अपने ईश्वर के साथ कैसे छल कर सकता हूँ ?

वो तो ठीक है -तुम्हारी दिनचर्या है ?तो कृष्णा बोला रोज सुबह अपना नित्यकर्म करके स्नानधर्म करता हूँ फिर अपना दुकान आ जाता हूँ और इसी दुकान की दिवार पे एक छोटा सा मंदिर लगा है ,

उसी में मैं अपने ईश्वर के दर्शन करता हूँ और आने के बाद  दुकान सौंप देता हूँ ,मैं उनसे कहता आप ही हो दुकान के मालिक मैं तो सिर्फ केयर टेकर हूँ ,मैं तो नौकर हूँ ,अपनी दुकान को सम्भालो। 

संत और ज्यादा उत्साहित हो रहे थे कृष्णा की बात को सुनकर और फिर यह सब सुनकर संत बोले -फिर मुनाफे का क्या करते हो ? 

कृष्णा बोला – मुनाफा सारा मैं  ऊपर खर्च नहीं करता हूँ ,मैं अपना खर्चा निकलता हूँ और जो बचता है उसे जरूरतमंदों की मदद के लिए लगा देता हूँ अच्छे कर्म में लगा देता ,हूँ  ध्यान रखता हूँ की मेरे अंदर कोई अहंकार नहीं आ जाये। मैं अभी हमेशा प्रशन्न रहता हूँ। 

जब तक मैं मालिक अपने-आपको समझता था हमेशा चिंता में रहता था ,आज मैं खुश हूँ क्यूंकि की नियति की शक्ति को मैं जनता हूँ। मैं अपना नियति सही रखता हूँ। 

संत जो कृष्णा के दुकान पर आये थे वो कृष्णा को तो प्रत्यक्ष रूप से तो आशीर्वाद दिया और मन ही मन में प्रणाम भी किया। 

नियति की शक्ति -आप जो भी काम कर रहे हैं बस अपना नियति सही कर लें उस ऊपर वाले की तरफ। अपने ग्राहक में सच में भगवान देखना सुरु कर दें। 

एक सवाल जिसका उत्तर अपने ऊपर वाले को जरूर दें की आपके साथ आज क्या अच्छा हुआ ? इसी उत्तर को देकर भगवान का सुक्रिया अदा करके सोएं। 

यह पोस्ट इससे सम्बंधित है –

आप ग्राहक को राजी कैसे करें ?

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आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है

आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !-एक पिता का पत्र दुनिया के नाम –

ए दुनिया ,आज मेरे बेटे का स्कूल का पहला दिन है !

ए दुनिया मेरे बच्चे का हाथ थम लो ,आज उसका पहला दिन है। कुछ देर के लिए हर चीज नई और अजनबी होगी ,इसलिए मैं उम्मीद करता हूँ की आप नरमी से पेश आएं। आप तो जानते हैं की इसका संसार अब तक घर तक ही सिमित था। इसने अपने चारदीवारी के बाहर कभी झाँका नहीं था। यह अब घर का राजा रहा है। अब तक इसकी चोट पर मरहम लगाने और इसकी ठेस लगी भावनाओं को प्यार का लेप लगाने के लिए मैं हमेसा मौजूद था।

लेकिन अब बात  दूसरी होगी। आज सुबह यह सीढ़ियों से उतरकर अपना नन्हा हाथ हिलायेगा और अपना साहसिक यात्रा सुरु करेगा।

जिसमें शायद शायद संघर्ष भी होगा ,दुःख भी होगा और निराशा भी होगी।

इस संसार में जीने के लिए विस्वास,प्यार,और साहस की जरुरत होगी। इसलिए ए दुनिया मैं उम्मीद करता हूँ की आप इसके नन्हें हाथों को पकड़कर वे सब सिखाएंगे जो इसे जानना चाहिए। सिखाएं जरूर,मगर हो सके तो प्यार से।

मैं जानता हूँ की इसे एक दिन यह समझना पड़ेगा की सभी लोग अच्छे नहीं होते-सभी स्त्री-पुरुष सच्चे नहीं होते। इसे यह भी सिखाएं की संसार में हर धूर्त के लिए एक अच्छा इंसान भी है। जहाँ एक दुशमन है वहां एक दोस्त भी है। शुरू में ही सिखने में मदद करें की बुरे और धौंस ज़माने वाले लोगों को ठिकाने लगाना सबसे आसान है। 

इसे किताबों की खूबियों के बारे में बताएं और पढ़ने के लिए प्रेरित करें। कुदरत के छिपे सौंदर्य जैसे-आसमान में उड़ते पंछी ,गुनगुन करते भौरें और हरीभरी वादियों में खिले फूलों को करब से देखने और जानने के लिए पूरा समय दें। इसे यह भी सिखाएं की बेईमानी की जित से हार जाना कहीं अच्छा है। इसे तब भी अपने विचारों पर विस्वास रखना सिखाएं जब सब कह रहे हों की वह गलत है। 

मेरे बच्चे को वह शक्ति दें जिससे वह भीड़  का हिस्सा न बनकर भेड़चाल न चले ,जबकि सारा संसार चल रहा हो। इसे यह तो सिखाएँ की दूसरे की बात  सुनें,लेकिन हर बात सच्चाई के तराजू  पर परखें और उनमें से सिर्फ सच्चाई को ही अपनाये। 

अपनी अंतरात्मा का आवाज को सोने -चाँदी के सिक्कों से न तौले। इसे यह सिखाएं की वह लोगों के कहने में न आये और  अगर अपनी सोंच में खुद को सही पाता है तो सही इरादों पर डटा रहे और संघर्ष करे।  ईसे नरमी से सिखाएँ लेकिन ए दुनिया ,इसे बिगाड़ें मत और कमजोर न बनाएँ क्यूंकि लोहा आग में तपकर ही फौलाद बनता है। 

वैसे तो ऐसा कर पाना एक बहुत बड़ी बात है,मगर ए दुनिया ,फिर भी आप ऐसा करने की कोसिस जरूर करें। आख़िरकार वह एक बहुत प्यारा बेटा है। 

                                                                                               हस्ताक्षर 

                                                                                        – अब्राहम लिंकन। 

एक लड़की की जीवन बदल देने वाली कहानी 

कड़वे प्रवचन 

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कोरोना वायरस (COVID-19)-आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें

कोरोना वायरस (COVID-19)-आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें – एक नाविक की कहानी आज बताने जा रहा हूँ जो की मैंने शिव खेड़ा जी किताब जीत आपकी से लिया है। इस कहानी के माध्यम से एक शानदार सन्देश आप सभी को। 

एक नाविक तीन साल से एक ही जहाज पर काम कर रहा था। एक रात वह नसे में धुत हो गया। ऐसा पहली बार हुआ था। कप्तान ने इस घटना को रजिस्टर में इस तरह दर्ज किया नाविक आज रात नशे में धुत था। नाविक ने यह बात पढ़ ली।

वह जानता था की इस बात से उसके नौकरी पर असर पड़ेगा ,इसलिए वह कप्तान के पास गया ,माफ़ी मांगी और कप्तान से कहा की उसने जो कुछ भी लिखा है उसमें यह जोड़ दे की ऐसा तीन साल में पहली बार हुआ है ,क्यूंकि पूरी सच्चाई यही है। 

कप्तान ने मना कर दिया और कहा-मैंने जो कुछ भी रजिस्टर में लिखा है असली सच्चाई वही है। 

अगले दिन रजिस्टर भरने की बारी नाविक की थी। उसने लिखा ,आज कप्तान ने शराब नहीं पी। कप्तान ने यह पढ़ा और   नाविक से कहा इस वाक्य को वह या तो बदल दे अथवा पूरी बात लिखने के लिए आगे और कुछ लिखे क्यूंकि जो लिखा गया था ,उससे जाहिर होता था की कप्तान हर रात शराब पिता था। नाविक ने कप्तान से कहा उसने जो कुछ भी लिखा रजिस्टर में वही सच है। 

दोनों बात सही थी ,लेकिन दोनों से जो सन्देश मिलता है ,वह एकदम भटकाने वाला है,और उसमें सच्चाई की झलक नहीं है। 

बढ़ा-चढ़ाकर कहना -इससे हमारी बात का असर कम होता है ,और हमारी विश्वसनीयता घटती है। 

यह एक तरह की लत है। यह आदत बन जाती है। कुछ लोग बात को बढ़ाये-चढ़ाये बिना  सच कह ही नहीं पाते हैं। 

अभी आप सबको पता है कोरोना वायरस (COVID-19) बहुत बुरी तरह से पैर पसार चूका है और इसमें गलत अफवाह या अधूरी जानकरी बहुत खतरनाक है आज की ही न्यूज़ है है की कई लोग ईरान में शराब पिने से उनमें ये गलतफहमी हो गई की उनको कोरोना वायरस (COVID-19) नहीं होगा। और कई मौत हो गई शराब को गलत तरीके से पिने से।

भारत में इसी तरह से कई गलत बातें फ़ैल रही है की आपको शराब या गांजा पिने  होगा कोरोना वायरस (COVID-19)ये बात पूरी तरह से गलत है, जबकि सच्चाई यह है की शराब और धूम्रपान से आपकी इम्मयून सिस्टम कमजोर होगा,आपको यदि एक बार करना वायरस पकड़ा तो आप जल्दी रिकवर नहीं कर पाएंगे।  

आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें 

नोट – आधे-अधूरे और गलत ढंग से पेश किये गए सच से बचें ,प्लीज् आप सभी भारतीय है या संसार के किसी भिओ कोने से आप पढ़ प् रहे हैं 21 दिन घर पे ही रहें। अपने फैमली के साथ इस पल को इंजॉय करें। घर पे रहकर किताब पढ़ें ,ऑनलाइन कोर्स करें। 

याद रखें आप ही कोरोना वायरस (COVID-19) को घर लाएंगे वह अपने आप नहीं आएगा।  

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सफलता के निश्चित नियम होते हैं

सफलता के निश्चित नियम होते हैंसफलता के  लिए केवल  तीन चीजें जरुरी हैं। सबसे पहले तो तय करें की आप जीवन में सचमुच क्या चाहते हैं दूसरी यह तय करें की  आप अपनी मनचाही चीजों को प्राप्त करने के लिए  कीमत चुकाने लिए तैयार हैं ,तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण चीज ,उस कीमत को चुकाने का संकल्प करें।

शून्य से शुरू करना 

 अमेरिका के लगभग सभी अमीर लोग पहली पीढ़ी के अरबपति हैं ,जैसे बिल गेट्स ,वारेन वफ़ेट ,लैरी एलिसन ,;माइकल डेल और पॉल एलेन। 

80 प्रतिसत ;लखपतियों और  करोड़पतियों ने बहुत कम पैसे से अपने कैरियर की शुरू किया , शुरुआत में वे अक्सर कड़के रहे और कई बार तो वो क़र्ज़ में गले तक  डुबे रहे। 

अपनी पुस्तक द मिलिनेयर नेक्स्ट डोर में थॉमस स्टेनले और विलियम डेंको ने 500 करोड़पतियों के इंटरव्यू लिए और 25 साल से अधिक समय तक 11000 लोगों का सर्वेक्षण किया। 

उन्होंने उनसे पूछा की आखिर आर्थिक स्वतंत्रता कैसे प्राप्त कर ली ,जबकि उनके जैसी ही प्रस्थतियों में रहने वाले अधिकांश लोग अब भी संघर्ष कर रहे रहे हैं। 

 करोड़पतियों की इस नई पीढ़ी के 85 प्रतिसत लोगों का जवाब था ” मेरे पास दूसरों से ज्यादा बेहतर शिक्षा या ज्यादा बुद्धि तो नहीं थी ,लेकिन मुझमें बाकि लोगों से ज्यादा कड़ी मेहनत करने की इच्छा थी। 

नोट – कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है और इसके लिए आत्म-अनुसासन अनिवार्य है। 

सफलता का एक और सिद्धांत यह है -जिस चीज को आपने पहले कभी  प्राप्त नहीं किया उसे प्राप्त करने के लिए आपको ऐसे गुण और योग्यतयें सीखनी पड़ेगी ,जो आपमें पहले कभी नहीं था। 

सफलता के निश्चित नियम होते हैं-आज आप इतने सफल क्यों नहीं हैं ,जितना की होना चाहते हैं ? और कौन सा अनुसासन है ,जिससे आपको अपने सभी लक्ष्य प्राप्त करने में सबसे ज्यादा सहयता मिलेगी ? 

दूसरे आपसे जितनी उम्मीद करते हैं ,उससे ऊँचे पैमाने पर अपना मूल्याँकन करें ,कभी बहाने न बनायें। कभी भी खुद पर दया न करें। अपने प्रति कठोर और बाकि सबके प्रति दयालु रहें। 

सफलता के निश्चित नियम होते हैं-सफलता संयोग से नहीं मिलती। दुर्भाग्य से असफलता भी संयोगवस नहीं मिलती। आप सफल तब होते हैं ,जब आप सफल लोगों जैसे काम तब तक बार-बार करते हैं ,जब तक की आपको इसकी आदत ना पड़ जाती है।

इसी तरह आप असफल तब होते हैं ,जब आप सफल लोगों जैसे काम नहीं करते हैं। दोनों ही प्रस्थति में प्रकृति न पक्षपात करती है और न परवाह करती है। आपके साथ जो होता है ,वह सिर्फ नियम का  है-कारण और परिणाम के नियम का। 

 

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बुनियादी डर के छह भूतों को हरा दें

बुनियादी डर –छठी इंद्री  कभी काम नहीं करेगी ,जब तक की इन तीन – अनिर्णय ,शंका और डर ,नकरात्मक चीजों में से एक भी आपके  रहेगी। 

इन सूक्ष्म शत्रुओं की आदतों से धोखा न खाएं कई बार वे अवचेतन मन छिपे रहते हैं जहाँ उनका पता लगाना मुश्किल होता है और उनका उन्मूलन करना और भी मुश्किल होता है। 

छह बुनियादी डर –

छह बुनियादी डर होते हैं ,जिनके तालमेल से हर इंसान किसी न किसी समय कष्ट उठाता है। ज्यादातर लोग सौभग्यशाली हैं ,अगर वे सभी छह डरो से कष्ट न उठाते हों। 

  • गरीबी का डर 
  • आलोचना का डर 
  • बीमारी का डर 
  • प्रेम  खोने का डर 
  • बुढ़ापे का डर 
  • मृत्यु का डर 

गरीबी का डर – गरीबी और अमीरी में कोई मिलाप नहीं हो सकता ! अगर आप दौलत चाहते हैं तो आपको गरीबी की ओर ले जाने वाली परिस्थति को स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए। गरीबी का डर  कुछ नहीं ये  मानसिक अवस्था है ! लेकिन यह किसी काम में सफलता के अवसरों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। 


इसके लक्षण – उदासीनता ,अनिर्णय शंका ,चिंता ,अति-सावधानी ,टालमटोल। 
आलोचना का डर – आलोचना होने पर ज्यादातर लोग बेहद असहज होते हैं और कुछ मामलों में वे बेहद निराश और और उदाश भी हो सकते हैं। आलोचना आपकी पहलशक्ति ( लीडर का प्रमुख हथियार ) छिन  लेता है , आपकी कल्पना शक्ति को आपसे दूर कर देगा। आलोचना मानव ह्रदय में डर या द्वेष का बीज  बो देगी ,लेकिन इससे प्रेम या स्नेह उत्पन्न नहीं होगा। 

बीमारी का डर – यह डर शारीरिक और सामजिक दोनों तरह की अनुवांशिकता में मिलता  है। एक प्रतिष्ठित चिकत्सक का अनुमान था की वह डॉ के पास इलाज के लिए जाने वाले 75 प्रतिसत लोग ह्य्पोकोंड्रिया ( काल्पनिक बीमारी ) से पीड़ित होते हैं। 
डॉ कई बार रोगियों की सेहत के  किसी नए माहौल में भेज देते हैं क्यूंकि मानसिक  नजरिये बदलना जरुरी होता है। 

चिंता का डर – चिंता डर पर आधारित मानसिक अवस्था। है यह धीरे-धीरे लेकिन लगातार काम करती है। यह हानिकारक और सूक्ष्म होता है। कदम दर कदम यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह खुद को अंदर धकेलती है ,जब तक की यह इंसान की तर्कशक्ति को पंगु नहीं कर देती है। यह ऐसी मानसिक अवस्था है जिसे नियंत्रित किया जा। 

 जिस व्यक्ति के मन में डर भरा होता है ,वह न सिर्फ बुद्धिमतापूर्ण कामों के अवसरों को नष्ट कर देता बल्कि ये विनाशकारी कम्पन्न दूसरों के मन तक पहुंचाकर उनके अवसरों को नष्ट कर देता है। 

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प्रॉस्पेक्ट्स -प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया

प्रोस्पेक्टिंग की प्रक्रिया 

प्रॉस्पेक्ट्स का विचारमग्नता तोड़ें  – आपकी निति यह होनी चाइये की आप सामने वाले की विचारमग्नता तोड़ दें। आप जिस से भी संपर्क करते हैं ,वह व्यस्त है और दूसरी  में सोंच रहा है।

वह पूरी तरह से अपने काम-काज ,खुद की समस्यायों ,परिवार ,स्वास्थ्य या बिलों में उलझा हुआ है। जब तक आप प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता को न तोड़ दें ,आपको कभी प्रस्तुति देने का मौका ही नहीं मिलता। 

कुछ सेल्स पीपल फ़ोन करके अपना परिचय देते हैं और तुरंत ही अपना प्रोडक्ट्स या सेवा के बारे में बात करने लगते हैं इससे बेहतर तरीका यह है की आप अपना परिचय दें और फिर पूछें मुझे आपका दो मिनट समय चाहिए। क्या यह बात करने के लिए सही समय है ? जब प्रॉस्पेक्ट कह दे की उसके पास दो मिनट का समय है ,तभी आप कोई सवाल पूछते हैं ,जिसका उद्देश्य आपके प्रोडक्ट्स के परिणाम या लाभ को बताना है। 

प्रोडक्ट्स नहीं ,अपॉइंटमेंट बेचें 

कभी भी फ़ोन अपने प्रोडक्ट्स या अपने भाव के बारे में बात न करें जब तक आप प्रॉस्पेक्ट्स नहीं मिले पूरी बिक्री नहीं हो सकती है। यह महत्वपूर्ण नियम है। 

अपने शब्द  सावधानी से चुनें 

जब कोई सलेसपर्सन किसी प्रॉस्पेक्ट्स से पहली बार मिलता है,तो वह तुरंत ही अपने प्रोडक्ट्स के बारे में बताने लगता है हालाँकि प्रॉस्पेक्ट सुन रहा हो या नहीं आपको ,इससे आपको कोई लेना देना नहीं ये गलत है। 

आपके शब्द तो उतने ही धमाकेदार होने चाहिए मानो किसी ने कांच पे पत्थर माफर दिया हो। ऐसा कथन तैयार करें जिससे उसका पूरा ध्यान आपके ऊपर केंद्रित हो जाये। इस वाक्य का लक्ष्य हमेशा वह परिणाम या लाभ बताना होना चाहिए ,जो ग्राहक को आपके प्रोडक्ट्स या सेवा से मिलेगा ,लेकिन प्रोडक्ट्स का उल्लेख नहीं होना चाहिए। 

लाभ दिखाएँ – आप जब तक लाभ नहीं दिखायेंगे आपकी बिक्री हो नहीं सकती है। 

अच्छी शुरुआत आधा अंत है 

अच्छी शुरुआत ,एक प्रबल प्रश्न जिसका लक्ष्य आपके प्रोडक्ट्स का परिणाम या लाभ बताना हो ,आपको बिक्री के क्लोज तक ले जा सकता है ,प्रबल शुरुआत प्रॉस्पेक्ट की विचारमग्नता तोड़ती है। 

 आपका समय सिमित है

प्रॉस्पेक्ट्स का पूरा ध्यान खींचने के लिए मुलाकात के सुरु में आपके पास तीस सेकण्ड्स का समय होता है। पहले तीस सेकण्ड्स में ही प्रॉस्पेक्ट्स यह निर्णय ले लेता है की वह आपकी बात सुनने वाला है , अगर आप भटकते है और इधर-उधर की बातें करने लगते हैं तो आपका प्रॉस्पेक्ट्स बैचैन।  दोबारा फिर पटरी पर लाना बड़ा मुश्किल है। 

 आपके मुँह से निकले पहले पंद्रह से पच्चीस शब्द बाकि बातचीत का माहौल तैयार कर देते हैं। 

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चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –

चिंताजनक स्थितियों को सुलझाने का जादुई फार्मूला –
क्या आप चिंताजनक स्थितियों का  फार्मूला जानना चाहते हैं ,तो तत्काल काम करें -एक ऐसा  उपाय जिसे आप अभी आजमा सकते हैं ,जिसे आप आगे ध्यान से  करें।  तीन कदम जो आपके चिंता को दूर करने के लिए अचूक बातें है जिसे मैंने एक –  चिंता छोड़ो सुख से जियो ,जिसके लेखक है – डेल कार्नेगी। 


पहला कदम – बिना डरे ,ईमानदारी से स्थति का विश्लेषण करें और अनुमान लहाएं की  असफलता के परिणामस्वरुप  बुरा से बुरा  क्या हो सकता है ?-कोई असफल  पर आपको जेल नहीं भेजने वाला है और न ही कोई आपको फांसी पर लटकाने वाला है। हो सकता है आपको कुछ पैसों का घाटा हो  रहा हो। 
अगर कोई बीमारी है तो ज्यादा से ज्यादा क्या  है आपकी मौत ! ( जो की आज नहीं तो कल हर किसी के साथ होना है ये प्रक्रिया। ) 

जो हमारे सामने है ,उसका पूरा आनंद ले लो ,

इससे पहले की हम मिटटी में मिल जाएँ ;

 माटी मिलेगी माटी में ,और माटी के निचे दब जाएगी ,

बिना शराब ,बिना गीत ,बिना साकी और बिना अंत के !


जो चिंता से नहीं लड़ना नहीं जानते ,वे जवानी में ही मर जाते हैं। – डॉ अलेक्सिस कैरेल। 


दूसरा कदम -बुरे से बुरे परिणामों का अनुमान लगाने के बाद आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को स्वीकार करने के लिए अपने आपको  तैयार करें-  आप जब भी बुरे से बुरे स्थति को स्वीकार कर लेंगे तो आपका मन शांत हो जायेगा।  आप एक बेहतर स्थति में पहुंच जायेंगे। 


तीसरा कदम – अपना पूरा समय और पूरी ऊर्जा शांति के साथ इस काम में लगा दें की बुरे से बुरे स्थति और बुरे परिणामों को कैसे सुधारा जा सकता है – इस कदम को उठा कर आप देखें की आप अपने घाटे को कैसे कम कर सकते हैं। 

NOTE- अपने आपको ऐसी छोटी-छोटी बातों में विचलित न होने की अनुमति न दें ,जिन्हें हमें नजर अंदाज कर देना चाहिए। याद हम नजर अंदाज कर देना चाहिए और भूल जाना चाहिए। याद रखें ,जिंदगी है की घटिया नहीं होना चाहिए। 

धनवान कैसे बने 

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जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी के 16 पायदान –

जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी में कोई ऐसी बात तो जरूर है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इसे पढ़ने वाले सभी लोग ,चाहे वो आमिर हों या गरीब सभी आकर्षित होते ही हैं। 

शक्ति सच्ची शिक्षा से मिलती है ! जिस किसी व्यक्ति ने किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति मन की शक्तियों को व्यवस्थित करना ,श्रेणीबद्ध करना और बुद्धिमता पूर्वक निर्देशित करना नहीं सीखा वो शिक्षित नहीं है। 

आइये एक एक करके 16 पायदान सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं –

पायदान : 1 : जीवन में निश्चित लक्ष्य। 

निश्चित शब्द के महत्व को नजरअंदाज न करें ,क्यूंकि यही शब्द जीवन  निश्चित लक्ष्य वाक्यांश का सबसे अहम् शब्द है। निश्चित के बिना वाक्य में कोई डैम नहीं है ,क्यूंकि सफल होने के लिए अस्पस्ट लक्ष्य तो सभी के पास होते हैं। 

निचित लक्ष्य और उसे हासिल करने की योजना लिखें ,मैं लिखने पर जोर दे रहा हूँ क्यूंकि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है ,जिसे आप आगे के पायदान में  समझेंगें। 

पायदान :2 – आत्मविश्वास 

जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य बनाना या इसे हासिल करने की योजना बनाना तब तक कारगर नहीं ,जब तक व्यक्ति  में आत्मविश्वास न हो वैसे तो सभी व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है लेकिन चंद लोगों में उस  खास तरह का आत्मविश्वास होता है जिसे जादुई सीढ़ी का दूसरा पायदान कहते हैं। 

पायदान :3 – पहल 

पहल एक दुर्लभ गुण है। इसका मतलब है की किसी दूसरे के कहे बिना ही वह काम करना ,जो किया जाना चाहिए। सभी महान लीडरों में पहल एक अनिवार्य गुण है। पहल के बिना कोई सेनापति नहीं बन सकता ,न कोई तो कोई युद्ध में न ही कारोबार में ,क्यूंकि गहन कर्म पर आधारित सेनापतित्व ही सफल होता है। 

पायदान 4 : कल्पना 

कल्पना मानव मस्तिष्क की वह कार्यशाला है जिसमें पुराने विचार नए विचार के तालमेलों और योजनाओं को ढलते हैं। सारे महान अविष्कार का अस्तित्व ही कल्पना है। चाहे वो बल्व का हो या हवाई जहाज ,चाहे इंटरनेट या कुछ भी आज जो आप धरातल पर देख प् रहे हैं पहले वह किसी की कल्पना ही थी। 

नोट – लीडर हमेशा कल्पना और पहल वाले होते हैं। 

पायदान : 5 – कर्म 

संसार केवल आपको एक ही चीज के बदले में पैसा देता है ,यह है कर्म। संगृहीत ज्ञान का कोई मोल नहीं है ,इससे तबतक कोई फायदा नहीं होता जब तक की इसे कर्म में न बदल दिया जाये। 

हो सकता है आप बहुत ज्ञानी हैं ,आप सबसे कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ें हो -यह भी मुमकिन हो आपके दिमाग में सरे विवकोशों के सरे तथ्य भरे पड़ें हों -लेकिन तब तक इस ज्ञान का कोई फायदा नहीं जब तक इसे आप कर्म न बदलें। 

आगे के पायदान के बारे आगे के ब्लॉग में जानेंगे सफलता के  जादुई सीढ़ी ,पर दोस्तों आपसे रिक्वेस्ट है की अगर आपको मेरा पोस्ट पसंद आ रह है तो लाइक और शेयर करना न भूलें धन्यवाद। 

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प्रेरणा – FOR DAILY MORNING

प्रेरणा 

लोग अकसर कहते हैं की प्रेरणा कायम नहीं रहती। देखिये ,स्नान भी नहीं रहता -इसलिए हम प्रतिदिन करने की सलाह देते हैं। 

 – जिग जिग्लर। 

प्रोत्साहन अकेले ही काफी नहीं है। अगर आपके पास एक मुर्ख है और आप उसे प्रोत्साहित  देते हैं ,तो अब आपके पास एक प्रोत्साहित मुर्ख होता है। 

– जिम रॉन। 

आम धारणा यह है की प्रेरणा कर्म से आती है , लेकिन इसके विपरीत सच  यह है की – कर्म प्रेरणा से पहले आता है। आपको पम्प में पानी डालना , ताकि माहौल बन जाये ,जो आपको अपने लक्ष्यों पर काम करने के लिए प्रेरित करता है। गति में आना काम का सबसे मुश्किल हिस्सा है और अक्सर पहला कदम उठाना ही प्रायप्त है , जो आपको अपने दिन का सर्वश्रेष्ठ लाभ उठाने के लिए  प्रेरित कर देता है। 

– रॉबर्ट जे. मैकेन। 

आपकी कार की बैट्री की तरह ही सेल्समैन की ऊर्जा भी लगातार कम होती रहती है। जब तक की उसे बार-बार रिचार्ज न किया जाये ,वह जल्द ही ऊर्जाहीन हो जाता है। यह बिक्री नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां में से एक है। 

– जियान – कार्लो मेनोटो। 

जो लोग खुद को प्रोत्साहित नहीं कर पाते हैं वे सामान्य जीवन ही गुजारेंगे ,चाहे उनके गन कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों। 


– ली आयकोका।

 

सफल लोग दूसरे सफल लोगों को प्रेरणा के साधन की तरह देखते हैं। वे दूसरे सफल लोगों को मॉडल की तरह देखते हैं ,जिनसे सीखा जा सकता है। वे खुद से कहते हैं ,अगर वे यह काम कर सकते हैं ,तो मैं भी कर सकता हूँ। 

– टी. हर्व एकर। 

जो आगे नहीं देखता है ,वह पीछे रह जाता है। 

-स्पेनिश सूक्ति। 


ब्रिटिश कहावत है ,ख़राब विद्यार्थी कोई नहीं होता;सिर्फ खराब शिक्षक होते हैं। मैं मानता हूँ की यह कहावत कंपनियों पर भी लागु होती है। ख़राब कर्मचारी कोई नहीं होता ; सिर्फ ख़राब मैनजर होते हैं। 

– टी. एस. लिन। 

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सेल्स लाइन में ग्राहक को राजी कैसे करें ?

सेल्स की दुनिया में सबसे अहम् सवाल यही है : आप ग्राहक को राजी कैसे करें ? जवाब है आप ग्राहक के किसी सवाल पूछने पर उसका जवाब न देकर बदले उस सवाल के सवाल पूछकर राजी कर सकते हैं। 


आपमें जिन लोगों ने भी बाइबिल पढ़ी होगी वे जानते होंगे की ईसा मसीह लोगों को राजी करने और विस्वास दिलाने मून बेजोड़ थे। क्यूंकि आप जब बाइबिल को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको आचर्यजनक चीज पता चलेगी। जब लोग ईसा मसीह से सवाल पूछते थे तो वे पलटकर सवाल पूछते थे या फिर कोई निति कथा सुनते थे-ये दोनों बातें विस्वास दिलाने के लिए अचूक उपाय हैं। 


सही सवाल और गौर से सुनने से सम्बन्ध मजबूत बनाने में मदद मिलती है ,जो  राजी करने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। 
एफसीबी लिबर कार्टज पार्टनर्स के वाइस चेयरमैन लॉरेल कहते हैं ,-जीवन मूल्य व्यवहार तय करते हैं : व्यवहार प्रतिष्ठा तय करता है ; प्रतिष्ठा मुनाफा तय करती है। आज ही अखंडता की छवि बनाना शुरू करें। मैं आपसे जल्द ही सफलता के सिखर पर मिलूंगा। 


आपको यह याद रखना चाहिए की नजरिया हमेशा आपकी टीम का खिलाडी होता है। 
अगर आप सेल्स लाइन में हैं तो आपको यह याद रखना चाहिए की कई मौके पर लोग दरवाजे को आपके मुँह पे धड़ाम से बंद कर देंगे। वे बिना किसी कारण के फ़ोन काट देंगे। कुछ लोग सामजिक समरोह में आपसे कतराने लगेंगे। यह सेल्स लाइन का साइड इफेक्ट्स है। 


अगर आप सेल्स प्रोफेशनल लोगों को खरीदने के लिए राजी करने की योग्यताओं को कम्पनी के हेडक्वार्टर में पहुंचना चाहते हैं तो स्पस्ट रूप से उन्हें दूसरों को राजी करने का तरीका भी आना चाहिए। 

सेल्स की दुनिया में ग्राहक एक और चीज को हमेसा महत्व देता है। यह चीज है विस्वास ,जो सेल्समैन की अखंडता का सिद्धांत का सीधा प्रतिबिम्ब है। 

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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार 

धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है सेलिंग 101 किताब से जिसके लेखक है -जिग जिग्लर । अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज शेयर जरूर करें। सच में आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें।

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आत्म- अनुसासन और लगन

आत्म- अनुसासन और लगन – लगन सक्रीय आत्म-अनुसासन है। जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है आप कितनी बार निचे गिरते हैं। सारा फर्क तो इस बात से पड़ता है की आप कितनी बार उठकर दोबारा खड़े होते हैं। अगर आप किसी काम में आत्म- अनुसासन और लगन –  के साथ जुटे रहेंगे तो अंत में आप सफल हो जायेंगे। 


 लगन एक सक्रीय अनुशासन है।

विपत्तियों और अस्थायी असफलताओं के वावजूद काम करने की क्षमता जीवन में सफलता पाने के लिए अनिवार्य है। 

नेपोलियन हिल ने कहा था -लगन चरित्रवान व्यक्ति के लिए वैसी ही है ,जैसे कार्बन स्टील के लिए। लगन सफलता का प्राथमिक कारण है। 

जल्दी से महान बनने के प्रयास से सचेत रहें। 10000 में से एक प्रयास ही कामयाब हो सकता है। यह बहुत भयावह अनुपात है।

                           – बेंजमिन डिजराइल। 

पहचाने की आपके जीवन का वह क्षेत्र कौन सा है ,जिसमें आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने केलिए ज्यादा लगन से काम करना चाहिए। फिर उस क्षेत्र में काम सुरु करें। 

अपने जीवन का लक्ष्य पहचाने ,जिसे प्राप्त करने में आप सिर्फ इसलिए नाकाम रहे ,क्यूंकि आप अंत तक लगन नहीं रख पाए। उस क्षेत्र में सफल होने के लिए आप आज कौन से कदम उठा सकते हैं ?

पहचाने की आप किस बड़े लक्ष्य को सिर्फ इसलिए प्राप्त कर पाए ,क्यूंकि आप लगन से जुटे रहे और अपने मुश्किलों के वावजूद हार मानने से इंकार कर दिया। 

जीवन में अपना प्रमुख लक्ष्य तय करें -वह लक्ष्य जिसे प्राप्त करने से आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा। 

आज ही निर्णय लें की चाहे जो हो जाए ,आप सफलता मिलने तक जुटे रहेंगे ,क्यूंकि मुझे सफल होने से रोक नहीं सकता। 

 

महत्वपूर्ण लक्ष्य तय करने और उसे प्राप्त करने का संकल्प करें। यह संकल्प करें की आप राह में आने वाली अवश्यम्भावी मुश्किलों ,समस्याओं और विपत्तियों के वावजूद तब तक जुटे रहेंगे ,जब तक की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल न हो जाएँ।

यह प्रक्रिया बार-बार तब तक दोहराते रहें ,जब तक की लगन की आदत न पड़ जाए। 

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नौकरी में सफलता

कोई भी नौकरी घटिया नहीं होती ,सिर्फ घटिया नजरिया होते हैं।
– विलियम बेनेट।

कामकाज ज्यादा तेजी से सफलता पाने लिए फोर्टीप्लस फार्मूला का उपयोग करें। इस फॉर्मूले के अनुसार हर सप्ताह चालीस घंटे बाद आप जितना ज्यादा काम करते हैं उसी से पता चलता है की आज से पांच साल बाद आप कहाँ होंगे ?
– ब्रायन ट्रेसी।

नौकरी में सफलता – कोई भी नौकरी घटिया नहीं होती ,सिर्फ घटिया नजरिया होते हैं।
– विलियम बेनेट।

हर ग्राहक के साथ ऐसे व्यवहार करें ,जैसे वे आपकी तनख्वाह के चेक पर हस्ताक्षर करते हों -क्यूंकि वे करते हैं।
– अज्ञात।

यहाँ नौकरी के क्षेत्र सफलता पाने का तीन सरल फार्मूला बताया जा रहा है – थोड़ी जल्दी आएं ,थोड़ी ज्यादा मेहनत से काम करें और थोड़ा ज्यादा देर तक ऑफिस में रुकें। इस फॉर्मूले का पालन करने पर आप अपने प्रतिस्पर्धा से इतना आगे निकल जायेंगे की वे कभी आपकी बराबरी नहीं कर पाएंगे।
-ब्रायन ट्रेसी।

यदि आप किसी क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए की उस क्षेत्र में सफलता कैसे की जाती है। फिर आपको उन योग्यताओं और गतिविधियों को तब तक बार-बार अभ्यास करना चाहिए ,जब तक की आपको परिणाम न मिलने लगें।

– ब्रायन ट्रेसी।
 

कोई भी मनुष्य यह नहीं मानना चाहता की उसने अपने पेसे के चयन में कोई ग़लती की है ।

– शर्लट ब्रैंट्ली ।

चाहे करियर चुनना हो या किसी परोपकारी संस्था के साथ जुड़ने का निर्णय लेना हो चुनाव दिल से होना चाहिए । अंततः आप ही हैं जिसे हर सुबह उठना पड़ता है और अपने काम का आनंद लेना है, इसलिए यह सुनिस्चित करें की यह आपके लिए मायने रखता हो ।

– डेव टामस ।

नौकरी

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टीमवर्क-Teamwork

महान चुनौतियों में महान टीमवर्क की जरुरत होती है। किसी मुश्किल चुनौती के दबाव का सामना कर रही टीम के साथियों में सबसे जरुरी गुण हैं-सहयोग।  

जॉन मैक्सवेल। योग्यता मैच जिताती है,लेकिन चैम्पियनशिप टीमवर्क जिताता है।

   -माइकल जॉर्डन।

एक व्यक्ति किसी टीम के लिए अति महत्वपूर्ण घटक हो सकता है,लेकिन एक व्यक्ति टीम नहीं बन सकता है।                                                                        लिंडन बेन्स जॉनसन।

जब कोई अँधा किसी लंगड़े  उठाकर चलता है , दोनों आगे बढ़ते हैं।                                                                                -जोसफ स्टालिन। 

समूह में तब काम करना मुश्किल होता है ,जब खुद को सर्वशक्तिमान समझते हैं।                                                                           -स्टार ट्रैक।

 समस्याएं अवसर बन सकती हैं,बशर्ते सही लोग एकजुट हो जाएँ।                                                       -रोबर्ट रेडफ्र्क।

 यदि कोई टीम को अपनी क्षमता तक पहुंचना है,तो हर कोई खिलाडी को अपने व्यक्तिगत ध्येय टीम के हिट के अधीन रखने के लिए तैयार रहना चाहिए।                                                                         – बड विल्किंसन। 

अगर मुझे नेतृत्व का कोई एक अचूक साधन बताना हो,यह संवाद होगा।                                                                            – जॉन डब्ल्यू गार्डनर। 

यह न पूछें की टीम के साथी आपके लिए क्या कर सकते हैं। यह पूछें की आप टीम के साथियों के लिए क्या कर सकते हैं।                                                                          -ईयरविन

 यदि कोई चीज बुरी होती है,तो वह मैंने की है। अगर कोई चीज आधी अच्छी होती है। तो हमने की है। अगर कोई चीज सचमुच अच्छी होती है ,तो वह आपने की है। फुटबॉल मैच जितनेव में लोगों को प्रेरित करने के लिए बस इतने की ही जरुरत होती है।                                                                                 – बियर ब्राएंट।

यदि आप सुरक्षित जीवन जीने का विकल्प चुनते हैं , तो आप कभी नहीं जान पाएंगे की जितना कैसा होता है।                                                                                 -रिचर्ड ब्राइंस। 


प्रतिष्ठा बनाने में  20 साल लग जाते हैं और उसे बर्बाद करने में सिर्फ पांच मिनट लगते हैं। अगर आप इस बात को ध्यान में रखते हैं ,तो आप चीजों को अलग तरीके से करेंगे।                                                                                       – वारेन बफेट। 

पागलपन क्या है ? 

पागलपन वही चीज़ बार-बार करना और भिन्न परिणामों की आशा करना है ।

  • आइंस्टाइन ।

कारण और परिणाम का नियम :- यदि आप वह करते हैं , जो दूसरे सफल लोग करते हैं, तो परिणाम अंततः वही परिणाम मिलेंगे, जो दूसरे सफल लोगों को मिले हैं ।

  • ब्रायन ट्रेसी ।

यदि आप परिणामों की पर्याप्त परवाह करते हैं, तो आप निश्चित रूप से इसे हासिल कर लेंगे ।

  • विलियम जेम्स ।

विपत्ति से बेहतर शिक्षक दूसरा नहीं है । हर पराजय, हर दुःख , हर नुक़सान में इसका ख़ुद का बीज , इसका ख़ुद का सबक़ छिपा होता है की आप अगली बार अपने प्रदर्शन को कैसे बेहतर बना सकते हैं ।

  • मण्डिनो ।

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