जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी के 16 पायदान –

जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी में कोई ऐसी बात तो जरूर है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इसे पढ़ने वाले सभी लोग ,चाहे वो आमिर हों या गरीब सभी आकर्षित होते ही हैं। 

शक्ति सच्ची शिक्षा से मिलती है ! जिस किसी व्यक्ति ने किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति मन की शक्तियों को व्यवस्थित करना ,श्रेणीबद्ध करना और बुद्धिमता पूर्वक निर्देशित करना नहीं सीखा वो शिक्षित नहीं है। 

आइये एक एक करके 16 पायदान सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं –

पायदान : 1 : जीवन में निश्चित लक्ष्य। 

निश्चित शब्द के महत्व को नजरअंदाज न करें ,क्यूंकि यही शब्द जीवन  निश्चित लक्ष्य वाक्यांश का सबसे अहम् शब्द है। निश्चित के बिना वाक्य में कोई डैम नहीं है ,क्यूंकि सफल होने के लिए अस्पस्ट लक्ष्य तो सभी के पास होते हैं। 

निचित लक्ष्य और उसे हासिल करने की योजना लिखें ,मैं लिखने पर जोर दे रहा हूँ क्यूंकि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है ,जिसे आप आगे के पायदान में  समझेंगें। 

पायदान :2 – आत्मविश्वास 

जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य बनाना या इसे हासिल करने की योजना बनाना तब तक कारगर नहीं ,जब तक व्यक्ति  में आत्मविश्वास न हो वैसे तो सभी व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है लेकिन चंद लोगों में उस  खास तरह का आत्मविश्वास होता है जिसे जादुई सीढ़ी का दूसरा पायदान कहते हैं। 

पायदान :3 – पहल 

पहल एक दुर्लभ गुण है। इसका मतलब है की किसी दूसरे के कहे बिना ही वह काम करना ,जो किया जाना चाहिए। सभी महान लीडरों में पहल एक अनिवार्य गुण है। पहल के बिना कोई सेनापति नहीं बन सकता ,न कोई तो कोई युद्ध में न ही कारोबार में ,क्यूंकि गहन कर्म पर आधारित सेनापतित्व ही सफल होता है। 

पायदान 4 : कल्पना 

कल्पना मानव मस्तिष्क की वह कार्यशाला है जिसमें पुराने विचार नए विचार के तालमेलों और योजनाओं को ढलते हैं। सारे महान अविष्कार का अस्तित्व ही कल्पना है। चाहे वो बल्व का हो या हवाई जहाज ,चाहे इंटरनेट या कुछ भी आज जो आप धरातल पर देख प् रहे हैं पहले वह किसी की कल्पना ही थी। 

नोट – लीडर हमेशा कल्पना और पहल वाले होते हैं। 

पायदान : 5 – कर्म 

संसार केवल आपको एक ही चीज के बदले में पैसा देता है ,यह है कर्म। संगृहीत ज्ञान का कोई मोल नहीं है ,इससे तबतक कोई फायदा नहीं होता जब तक की इसे कर्म में न बदल दिया जाये। 

हो सकता है आप बहुत ज्ञानी हैं ,आप सबसे कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ें हो -यह भी मुमकिन हो आपके दिमाग में सरे विवकोशों के सरे तथ्य भरे पड़ें हों -लेकिन तब तक इस ज्ञान का कोई फायदा नहीं जब तक इसे आप कर्म न बदलें। 

आगे के पायदान के बारे आगे के ब्लॉग में जानेंगे सफलता के  जादुई सीढ़ी ,पर दोस्तों आपसे रिक्वेस्ट है की अगर आपको मेरा पोस्ट पसंद आ रह है तो लाइक और शेयर करना न भूलें धन्यवाद। 

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