अर्धजाग्रत मन का प्रोग्रामिंग किस उम्र में हो सकता है ?

अर्धजाग्रत मन का प्रोग्रामिंग किस उम्र में हो सकता है ?

स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है की - तू स्वयं ही तेरे भाग्य का विधाता है। आप अपना भाग्य बना सकते हैं अपने अर्ध जाग्रत मन की शक्ति के कारण।

गर्भधारण के पहले

बच्चा माँ के पेट में आये  उससे पहले भी प्रोग्रामिंग हो सकती है। अगर पति-पत्नी साथ में बैठकर अपने आने वाले बच्चे के बारे में मानचित्रण  करे और उसके बाद गर्भधारण हो तो बच्चा बिलकुल वैसा होता है जैसा मनोचित्रण किया गया हो।

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गर्भ में

गर्भधारण के दौरान बच्चे की बहुत अच्छी प्रोग्रामिंग हो सकती है। माँ के पेट में बच्चा सुन सकता है। उदाहरण के तौर पर महाभारत के अर्जुन पुत्र अभिमन्यु की चक्रभवयु की बात। माँ के गर्भ में अर्धजाग्रत मन की प्रोग्रामिंग हो सकती है।

पालने में

 

प्रोग्रामिंग तब भी हो सकती है जब बच्चा पालने में होता है। छत्रपति शिवाजी इसका सर्वश्रेठ उदहारण हैं , जिसमें उनकी माता जीजाबाई ने पालने में लोरी गाते समय राम- लक्षमण के बहादुरी का वर्णन करती थी जिससे एक महान  योद्धा  बनने की प्रोग्रामिंग का इतिहास साक्षी है।

हम भी अपने बच्चों को बचपन में ही एक अच्छे नागरिक बनने की प्रोग्रामिंग करके उन्हें शिवाजी और अभिमन्यु की तरह पराक्रमी बना सकते हैं।

हम आये दिन देखते हैं की बच्चे मोबाइल से चिपके रहते हैं वो छोड़ते नहीं हैं उसका भी कारण कहीं न कहीं प्रोग्रामिंग ही है।

स्कूल के दौरान

 

बालक जब स्कूल जाना शुरू करता है उस वक़्त बच्चा अपने स्कूल के अध्यापक से जो सुनता है और देखता है उसके आधार पर भी उसके अर्धजाग्रत मन का प्रोग्रामिंग होता है।

 

बालक के बड़े होने पर-

जब भी बालक बड़ा होता है और अर्धजाग्रत मन ठीक से विकशित होता है तब बालक स्वयं ही अपनी प्रोग्रामिंग करना शुरू कर सकता है। हमारे बालक जब भी 14 -15 के हो जाएँ तब उनको अपने अर्धजाग्रत मन को प्रोग्रामिंग  करने की रीत सीखा देनी चाहिए। 


स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है की – तू स्वयं ही तेरे भाग्य का विधाता है। आप अपना भाग्य बना सकते हैं अपने अर्ध जाग्रत मन की शक्ति के कारण।

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