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कड़वे प्रवचन –

जिंदगी में तीन चीजों का अर्जन जरूर करें। बचपन में ज्ञान का , जवानी में संपत्ति का और बुढ़ापे में पुण्य का। बचपन अध्यन के  बुढ़ापा आत्म-चिंतन के लिए है। किसी छात्र ने पूछा कितने घंटे पढ़ना चाहिए ? जिस क्लास  में हैं ,स्कूल के अलावा उतने ही घंटे ,10 वी में हों तो 10 घंटे और 12 वी  12 घंटे। 

 

कड़वे वचन –

कई तरह के दान में एक रक्तदान भी है। रक्तदान एक पुण्यकार्य है। खून देने से कम नहीं होता है.फिर बढ़ जाता है। ठीक वैसे ही जैसे बाल काटते हैं और फिर बढ़ जाता है।

 

कुएं से पानी निकलते हैं और फिर बढ़ जाता है। हाँ मरते हुए को नई जिंदगी जरूर मिल जाती है। रक्त पानी बने ,इससे पहले उस रक्त से किसी की जिंदगानी बना दो। याद रखें जित जी रक्तदान और ,जाते-जाते देहदान ,जाने के बाद नेत्रदान। 

 

कड़वे वचन –

एक सेठ बीमार बीमार था। दवा खाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा था। आखिर वह हकीम लुकमान से मिला। लुकमान ने कुछ गोलिया दी और कहा -इन्हें तीन बार अपने माथे के पसीने में पिघलकर खा लेना। सेठ कुछ ही दिनों में ठीक हो गया।

 

शिष्य ने कहा- गुरुदेव ! बड़ी चमत्कारी दवा है। लुकमान हँसा और बोला – दवा क्या उपलों की राख थी। पर उसे तीन बार माथे पर पसीने लेन के लिए बड़ी मेहनत  करनी पड़ी होगी। यह चमत्कार उसी पसीने का है। सच्ची नींद और स्वाद चाइये तो पसीना बहाना मत भूलना। 




कड़वे प्रवचन

 

KADVE PRAVACHAN



 

 

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