सफलता का वास्तविक रहस्य क्या है

कुछ लोग ज्यादा सफल होते हैं ? कुछ लोग दूसरों से ज्यादा पैसा कमाते हैं ? ज्यादा सुखी जीवन क्योँ बिताते हैं और उतने ही वर्षों में ज्यादा उपलब्धियां क्यों  पा  लेते हैं ? सफलता का वास्तविक रहस्य क्या है ?

 सफलता का पहला और स्पस्ट नियम है- बहाना बनाना छोड़ दें ,

कोई भी काम करें या न करें लेकिन बहाने न बनायें। काम न करने के बाद उसे उचित ठहराने  और न्यायसंगत तर्क गाड़ने के अपने अविश्वसनीय मस्तिष्क का दुरपयोग करना छोड़ दें।  कुछ भी करें।  आगे बड़े।  मन ही मन बार-बार दोहराएं : अगर मुझे यह करना ही है तो इसका दारोमदार मुझ पर है। परजीत लोग बहने बनाते हैं और विजेता प्रगति करते हैं।  कहा जाता है की लोग अपनी असफलता के बहने में जितनी ऊर्जा खर्च कर देते हैं उतनी अगर वे सही लक्ष्य प्राप्त करने में लगाएं तो वे सफल हो जायेंगे।  लेकिन सबसे पहले आपको बहनराटिस रोग से छुटकारा पाना होगा आपको उस द्वीप से बहार निकलना ही होगा।

 

आत्म अनुसासन सफलता की कुंजी है। आत्म-अनुशासन को आत्म विजय भी कहा जा सकता है।  जो लोग अपनी क्षुधाओं पर काबू नहीं कर पते हैं वे कमजोर और भोगी होने के साथ-साथ अविश्वसनीय भी हो जाते हैं। आत्म-अनुशासन को आत्म-नियंत्रण भी कहा जा सकता है। श्रेष्ठ व्यक्ति की यही पहचान है की स्वयं को अपने विचारों और कार्यों को नियंत्रित करने की क्षमता हो। आत्म-अनुशासन को आत्म-दमन भी कहा जाता है। यानि आपको उन आसान खुशियों के चक्कर में नहीं फंसना चाहिए ,जिनके कारन इतने सारे लोग भटक जाते हैं। इसके वजाय आपको अनुशासित रह कर सिर्फ कार्य करने चाहिए जो दीर्घकालीन और वर्तमान दोनों दृष्ट्यों से उचित हों।

 

अनुसासन का अर्थ है विलम्ब से मिलने वाली दीर्घकालीन संतुस्ती पर गौर करने की योग्यता , आगे चलकर ज्यादा बड़े पुरुस्कार पाने के लिए अल्पकालीन संतुस्ती का त्याग करने की क्षमता।दूर तक सोंचे

 

लोंग्फेल्लो ने एक बार लिखा था –

महान व्यक्ति जिस सिखर पर पहुंचे और बने रहे,

वहां वे अचानक उड़ान भरकर नहीं पहुँच गए थे।

वास्तव में , जब उनके साथी सो रहे थे ,

तब वे हर रात ऊपर चढ़ने का श्रम कर रहे थे।

आत्म-अनुशासन की आदत डालने के लिए सबसे पहले  तो यह दृढ़ निर्णय लें की आप किसी विशेष क्षेत्र में कैसा व्यवहार या कार्य करेंगे।  जब तक की आपको उस क्षेत्र में आत्म-अनुशासन की आदत पद जाये तब तक रत्ती भर ढील न दें जब आपसे चूक हो , जैसा की होगा , तो आत्म-अनुशासनके अभ्यास का दुबारा संकल्प करें

 

मिठाई से पहले भोजन

आत्म-अनुशासन का एक बहुत ही सरल नियम है : मिठाई से पहले भोजन पूरा खत्म करें

भोजन का एक तर्किक क्रम होता है जिसमे मिठाई अंत में आती है।  पहले आपको रोटी सब्जी खत्म करके थाली साफ़ करते हैं , इसके बाद ही आपको मिठाई मिलती है।

नेपोलियन हिल ने अपनी बेस्ट सेल्लिंग बुक द मास्टर की टू रिचेस  के अंत में कहा था आत्म-अनुशासन ही अमीरी की कुंजी है 

बड़े पुरूस्कार –

उच्च स्तरीय अनुसासन विकसित करने के पुरूस्कार भी बहुत बड़े हैं। अनुसासन और आत्म-सम्मान के बिच सीधा संबंध होता है

आप आत्म-विजय और आत्म-नियंत्रण का  जितना ज्यादा अभ्यास करते हैं , खुद को उतना ही ज्यादा पसंद करते हैं और महत्वपूर्ण मानते हैं।

 

आप खुद को जितना ज्यादा अनुशासित  करते हैं  , आपमें आत्म-सम्मान और आत्म-गौरव का अहसास होता है।

 

आप आत्म-अनुशासन का जितना ज्यादा अभ्यास करते हैं , आत्म -छवि  बेहतर होती है।  आप खुद को ज्यादा अच्छे रूप में देखते हैं और अपने बारे में सकरात्मक अंदाज में सोंचते हैं।  आप ज्यादा खुस और सक्तिशाली महसूस करते हैं।

 

 जब आपमें आत्म-अनुशासन  की शक्ति आ जाएगी तो , कोई बाधा आपको रोक नहीं पाएगी। आप प्रकृति की शक्ति की तरह अजय बन जाते हैं जिसे कोई रोक नहीं सकता। तब आप कभी भी  प्रगति न करने के बहाने नहीं बनाएंगे ,बल्कि तेजी से आगे बाद रहे होंगे।  वास्तव में।  अगले कुछ महीने और वर्षों में आप इतना जयादा प्राप्त कर लेंगे की जितना अधिकांस लोग अपने पुरे जीवन में प्राप्त नहीं कर पाते।

 

 

धन्यवाद दोस्तों

 आज का  पोस्ट को आत्म-अनुसासन की शक्ति  से लिया है जिसके लेखक हैं ब्रायन ट्रेसी।  बहुत शानदार किताब जो की क्षमता रखता है आपकी जिंदगी बदलने की।

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