kadve pravachan in Hindi-कड़वे प्रवचन

आज तरुण सागर जिनके अनमोल विचार पड़ने वाले हैं ।मुनिश्री के कड़वे प्रवचन आपके ज़िंदगी में मिठास भरने के लिए काफ़ी है ।

इनकी वाणी कड़वी दवाई के तरह हि आपकी ज़िंदगी में काम करेगी ।

kadve pravachan in Hindi
kadve pravachan in Hindi muni shree tarun sagar ji 

kadve pravachan in Hindi –

मुनिश्री तरुण सागर जी  कहते हैं आपसे निवेदन है की जीवन  लिए जीवन के परिवर्तन के लिए इस मुल्क के आधत्यम ने कहा- चेहरों को कितना का कितना भी चमका लो दोबारा कल फिर से वैसा ही हो जायेगा इस से अच्छा है मन को चमका लो जीवन अपने आप चमक जाते हैं।

kadve pravachan in Hindi-कड़वे प्रवचन

कड़वे प्रवचन– मुनिश्री तरुण सागर जी  कहते हैं लोग मंदिर कपडे बदल-बदल कर जाते हैं मेरा अपना मानना  है की सिर्फ कपड़ों को बदल कर मत जाइये अपना मन बदल कर जाइये ,लेकिन आज का आदमी इतना बईमान है ,

kadve pravachan in Hindi-कड़वे प्रवचन

मंदिर में बैठा है और मन में बोल रहा होता है -हे भगवान मैं सुखी रहूं

मेरे  बच्चे सुखी रहें बाकि दुनिया जाये भाड़ में ,

लेकिन उसको पता नहीं है की दुनिया भाड़ में जाये न जाये तू जरूर जायेगा भाड़ में।

 

कड़वे प्रवचन –

हमारा बच्चा रोता  है तो दिल में दर्द  होता है और दूसरे  का बच्चा रोता  है तो सर में दर्द।

अपना बच्चा रोये तो दिल  में दर्द ये तो राग है और दूसरे का रोये तो सर में दर्द ये द्वेष है और ये राग द्वेष की वृद्धि ही संसार है।

इसलिए तो इस मुल्क के मुनियों ने,ऋषियों ने ,संतों ने कहा संतों ने कहा -आदत को कोई सुधर ले तो बस हो गया भजन ,मन सुधारिये ,मन को मँजिये , मन को सम्भालिये।

मन पे नजर रखिये।

 

kadve pravachan in Hindi –

 

आप  सबको दंड देते हैं जब किसी और से गलती होती है तो चाहे वो आपके बच्चे हों,आपके पत्नी नौकर हो, लेकिन कभी तो अपनी गलती के लिए खुद को भी दंड दीजिये।

मैं आज का चाय नहीं पिऊंगा ,अगर आपके मुँह से कोई अप्सब्द निकल जाये तो आधे घंटे के लिए मौन रह कर दंड दीजिये ,

अपने आपको दंड देने के लिए तैयार रहिये , समय बहुमूल्य है ,या यूँ कहूं -समय अमूल है।

kadve pravachan in Hindi-कड़वे प्रवचन

लेकिन आज किसी से पूछो उसके पास समय नहीं है ,

वो बीवी-बच्चों के साथ तीन घंटे की मूवी देख लेगा ,

घर बैठकर सबसे बहस करने के लिए समय है
लेकिन समय नहीं है तो किसके लिए नहीं है तो,

सत्संग के लिए नहीं है ,अच्छे कामों के लिहये नहीं है

 

गाय दूध देती नहीं है ,

दूध निकलना पड़ता है।

जीवन में महान कार्य स्वतः ही संपन्न नहीं होते,

उनके लिए प्रयास करना पड़ता है।

सम्मेदसिखर या वैषणवदेवी की यात्रा के लिए

जब सत्तर साल की बड़ी माँ या सात साल का बच्चा ऊपर चढ़ता है तो उनकी नजरेंकेवल ऊपर रहती हैं।

वे तो निचे देखते हैं , पीछे।

संकल्प की शक्ति के दम पर ही वे बिना साँस खोये ऊपर चढ़ जाते हैं।

जिंदगी की विकास यात्रा को ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए ऐसे ही दृढ़ संकल्प की जरूरत है।

तुम नदी में नहाते हो।

सैंकड़ों टन पानी तुम्हारे सर पर होता है लेकिन वजन मालूम नहीं पड़ता।

परन्तु जब घड़े में पानी को डालकर सर पर रखते हैं तो पानी भार हो  जाता है।

भार अपना मानने में है।

संसार में रहना पाप नहीं है ,लेकिन भोजन में भजन को भूल जाना पाप है।

चीजों को जरूरत के रूप  इस्तेमाल करो ,उन्हें विलासिता के रूप में इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं है।

 

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