तरुण सागर जी के कड़वे वचन-KAVDE VACHAN IN HINDI

राष्ट्रसंत श्री तरुण सागर जी के अनमोल कड़वे वचन ,जो आपको सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। तरुण सागर जी के कड़वे वचन-KADVE VACHAN IN HINDI

तरुण सागर जी के कड़वे वचन-KAVDE VACHAN IN HINDI
तरुण सागर जी के कड़वे वचन-KAVDE VACHAN IN HINDI

अकेला पैसा नहीं कमाना है

आज हर आदमी संघर्ष कर रहा है। सुबह से देर रात तक हर आदमी को संघर्ष से जूझना पड़ता है। संघर्ष आजादी के पहले जो संघर्ष था ,वह समाज ,वह समाज और राष्ट्र के भलाई के लिए था।

आज वो संघर्ष है वह मैं और मेरा परिवार बस इसके लिए है। हमें आदर्शों के लिए संघर्ष। अकेला पैसा नहीं कमाना है ,प्रसन्नता और प्रतिष्ठा भी कमाना है। अकेला पैसा तो वैश्या भी कमा लेती है।

तरुण सागर जी के कड़वे वचन (KADVE VACHAN )

भोजन में सबकुछ हो,सिर्फ नमक ना हो तो भोजन बेकार है। मंदिर में और सब कुछ

हो ,सिर्फ मूर्ति ना हो तो मंदिर बेकार है। अस्पताल में सबकुछ हो ,सिर्फ डॉक्टर ना हो तो अस्पताल बेकार हैं। गाडी में और सबकुछ हो ,सिर्फ ब्रेक ना हो तो गाडी बेकार है।

जीवन में और सबकुछ हो सिर्फ मन की शांति ना हो तो जीवन बेकार है।

गाँठ नहीं खोलेंगे तो हमारा भला नहीं होने वाला है

कुछ व्यक्ति एक रात नाव में बैठे। उन्हें नदी पार करनी थी। रात भर चप्पू चलाते रहे। सुबह हुई तो देखा तो किनारा था। ,किन्तु जहाँ पहुंचना था बल्कि वहीँ का जहाँ से उन्होंने शुरू किया था,क्यूंकि उन्होंने नाव की रस्सी  किनारे के पेड़ से बंधी थी वह खोली नहीं थी।

 

भाषण से नहीं अपने आचरण से श्रेष्ट बनता है।

रात भर उद्द्म किया पर सब व्यर्थ रहा। उसी प्रकार जब तक हम भी जीवन की बुराइयों की गाँठ नहीं खोलेंगे तो हमारा भला नहीं होने वाला है।

शेर अपनी मांद से बाहर आया और जंगल में टहलने लगा। रास्ते में खरगोश मिला। शेर ने पूछा-जंगल का राजा कौन है ? आप ही तो हैं। शेर खुश हुआ और आगे बढ़ा एक भेड़िया मिला ,

पूछा-जंगल का राजा कौन ?

श्रीमान ! आप ही तो हैं। शेर फिर खुश हुआ आगे बढ़ गया। फिर एक हाथी मिला। शेर ने वही सवाल किया तो शेर को अपनी सूंढ में लपेटा और दूर फेंक दिया। अब शेर का हाल बेहाल था बोला -ये भी कोई बात हुई ,

अगर आपको नहीं पता था तो मत बताइये ,पर नाराज होने की इसमें क्या है ?

भाषण से नहीं अपने आचरण से श्रेष्ट बनता है।

लक्ष्मी के तीन प्रकार हैं।

लक्ष्मी के तीन प्रकार हैं। अलक्ष्मी ,लक्ष्मी और महालक्ष्मी।

जो अनीति से प्राप्त हो वह है अलक्ष्मी। जो निति से प्राप्त हो वह है लक्ष्मी। और जो निति,प्रीति और रीती से प्राप्त हो वह है महालक्ष्मी।

लक्ष्मी विकास को लाती है और महालक्ष्मी विकास के साथ शांति को भी लाती है। आप अनीति के धन से अपनी पत्नी को सोने का कंगन तो पहना सकते हैं लेकिन यह भी मुमकिन है की इसके लिए आपको लोहे के कंगन पहननी पड़ जाये। कहिये क्या ख्याल है ?

चार चीजें कभी नहीं टिकती है।

चार चीजें कभी नहीं टिकती है। एक फकीर के हाथ में धन। दो चलनी में पानी ,श्रावक का मन और चौथा -संत-मुनि के पैर।

चार चीजें कभी नहीं भरती ,एक गाँव का शमसान। दो लोभ का गड्ढा ,तीन पानी का समुद्र और चार-मनुष्य का मन।

अंग्रजी के दो शब्द हैं AND और END

एंड का अर्थ है थोड़ा है थोड़ा और चाहिए। जबकि END का अर्थ है बस! अब और नहीं।

नसरूद्दीन की कहानी

नसरूद्धीन दिल्ली जा रहा था दोस्तों ने कहा-जरा संभल कर जाना और रहना। वहां हर चीज का दाम दोगुना बताते हैं। वह दिल्ली पहुंचा ,उसे छाता लेना था,छाता लेने दुकान गया और पूछा -छतरी कितने का है ? दुकानदार बोला 100 रुपये। मुल्ला को गाँव वाले की सलाह याद आई तो उसने बोला -50 में दोगे ?

दुकानदार बोला-80 में दूंगा।

मुल्ला बोला -40 में लूंगा।

दुकानदार बोला -न तेरी ना मेरी चलो 60 में ले लो।

मुल्ला बोला -मैं तो 30 दूंगा।

अब तो दुकानदार चीड़ गया और गुस्से में बोला -मुफ्त में ले लो।

मुल्ला कहा -बड़े मियां ! तब तो एक नहीं लूंगा ,दो लूंगा।

आदमी का मन भी ऐसा ही है।

कड़वे वचन-मेरी वाणी कठोर हो सकती है ।

लेकिन ज़िंदगी जा सार इसी कठोर वाणी में है । तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे ज़ख्मों पर मरहम -पट्टी कर दूँ  और छोड़ दूँ ।

पर ऐसा नहीं करूँगा क्यूँकि यह ज़रूरी है ।बीमारी का लक्षण मिटाने से बीमारी नहीं मीटती ।

तुम्हें बुख़ार चढ़ा हो और ठंढे पानी में बैठ जाओ तो शरीर तो ठंढा हो जाएगा ।

साथ ही तुम भी ठंढे हो जाओगे ।

लक्षणों का इलाज नहीं करना है , बल्कि बीमारी का इलाज करना है ।

 

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