अर्धजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियाँ

sub concious mind

 

अर्धजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियाँ के बारे में जानकार आपको आश्चर्य होगा ।

इक्षा  मृत्यु -control of

Death आपको यह जानकार ताज्जुब होगा की आप यह भी निश्चित कर सकते हैं की आपको कहाँ , कब और कैसे मृत्यु चाहिए ।हमारे धर्मशास्स्त्रों में बहुत से उदाहरण दिए गए हैं जिसमें कुछ व्यक्तियों को इच्छा मृत्यु शक्ति प्राप्त थी । जैसे की महाभारत में भीष्म पितामह ।

आज के समय का एक ताज़ा उदाहरण देता हूँ आप सभी अब्दुल कलाम जी का नाम तो ज़रूर सुना होंगें । उन्होंने एक बार कहा था की मैं चाहता हूँ की मेरी मृत्यु लोगों के बीच में और पड़ाना मुझे बहुत पसंद है सो पढ़ाते-पढ़ाते दम निकले ।और आप सभी को पता है कि उनकी मृत्यु हिमाचल में पढ़ाते-पढ़ाते हुई थी ।
और भी ऐसे कई उदाहरण आपके पास भी मौजूद होगा ।मृत्यु यानी की शरीर में चलने वाली सभी सभी स्वयं संचालित क्रिया का बंद होना अर्थात अर्धजाग्रत मन की सभी क्रियाओं को रोक देना ।
इससे तह बात साबित होता है की हम अपने अर्धजाग्रत मन को सूचना देकर अपनी इच्छा अनुसार मृत्यु प्राप्त कर सकते हैं ।



संवेदना – संवेदना विशेष रूप से जाग्रत मन का नियंत्रण होता है लेकिन हम जब सोते हैं तब भी कुछ अंश तक हमारी संवेदना चलती रहती है । उदाहरण के रूप में आप सो रहे हैं और टेलीफ़ोन की घंटी बजे तो आप जाग जाते हैं । मच्छर काटता है तब भी हमें पता चलता है । यह बात दर्शाती है की संवेदना के ऊपर जागृत मन की अनुपस्थिति में अर्धजग्रात मन का नियंत्रण होता है ।

हलन-चलन – हलन- चलन के स्नायू भी मुख्य रूप से जाग्रत मन के आदेश से काम करता है । लेकिन कई बार अर्धजाग्रत मन का आदेश भी मानना पड़ता है , यदि ऐसा नहीं होता तो हम नींद में करवट न बदल पाते और और मच्छर काटता तो उसे मारने के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ा पाते । अर्थात संवेदना और हलन-चलन के ऊपर दोनो ( जाग्रत और अर्धजाग्रत ) मन का नियंत्रण होता है ।

 

परिवर्तित क्रिया ( Refleax action) – हम रास्ते पर नंगे पैर चल रहे हों और यदि जलती हुई सिगरेट के टुकड़े पर पैर पढ़ जाए तो एक क्षण का भी विलम्ब किए बिना हम पैर उठा लेते हैं ।

धन्यवाद दोस्तों ,

ऐसे ही बहुत सारी ताकत अर्धजाग्रत मन के पास है जिसका इस्तेमाल करके आप अपनी जिंदगी में सफलता और खुशियां से भर सकते हैं। हम उन सभी वस्तुओं को प्राप्त कर सकते हैं जिनकी हम इक्षा रखते हैं।

इस से जुड़ा हुआ कोई भी प्रश्न आपके  तो जरूर करें और इसके अगले भाग में अर्धजाग्रत मन की और भी शक्तियों के बारे में बात करेंगे।

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अपलाइन पुराण 

दुआ है की कामयाबी के सिखर पर आपका ही नाम हो

आपके  हर कदम पर दुनिया का सलाम हो

दिल आपके लिए करते हैं प्रार्थना की

वक़्त भी एक दिन आपका गुलाम हो

अपलाइन आपको  सफल होते देखना चाहते हैं – वो आपको हर हाल में आपको सफल होते देखना चाहते हैं , इसलिए आप अपलाइन पर दिल से भरोषा नहीं श्रद्धा रखें। 

अपलाइन  के साथ वक़्त बिताइए – यदि आप सफल अपलाइन के साथ वक़्त बिताएंगे तो नकरात्मकता आपको कभी प्रभावित नहीं कर पायेगी। आपको लगातार श्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलेगा।

अपलाइन का अनुकरण करके आप छोटे नहीं होंगे – कुछ अति बुद्धिमान व ईगो वाले नेटवर्कर अपलाइन का अनुशरण  करने में हीनता महसूस करते हैं , शुरुआत में कुछ दिनों तक तो वो अनुकरण करने का दिखावा करते हैं परन्तु बाद में अपलाइन की उपेक्षा करने लगते हैं। अपलाइन की मीटिंग में , ट्रेनिंग में तथा अन्य कार्यकर्मों में सिरकत नहीं करते और स्वयं आयोजित कार्यकर्मों में भजि अपलाइन को नहीं बुलाते।  ये उनकी असफलता की गॅरंटी है।

अपलाइन को डुप्लीकेट कीजिये – सफल अपलाइन की प्रस्तुति के तत्व को समझिये , पूरी तरह से उसके व्यक्तित्व में घुस जाइये। इसके बाद अपने व्यक्तिगत गन उसमें मिला दीजिये , फिर आपकी सफलता को कोई रोक नहीं सकता।

जो व्यवहार अपलाइन से करेंगे वैसा ही डाउनलाइन से पाएंगे -आप नए नेटवर्कर हों या वरिष्ठ हों , परन्तु एक सिद्धांत याद रखिये की जो भी आदत या तरीका या सिद्धांत अपने समूह में फैलाना हो , सबसे आप पालन शुरू कीजिये। यदि आप सिर्फ भाषण दे रहे हैं और आपका आचरण विपरीत है तो आपके भाषण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अपलाइन की आय पर टिपण्णी मत कीजिए -कभी-कभी यह देखने में आता है की नेटवर्कर अपनी मीटिंग में अपलाइन की आय का विस्तृत लेखा-जोखा देकर श्रोताओं को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।  कुछ नेटवर्कर तो यहाँ तक कह देते हैं की हम काम करते हैं और अपलाइन उनकी वजह से कहते हैं। मीटिंग में कभी कभार अपलाइन या अपनी आय का संकेत देना गलत नहीं है,लेकिन हर बार इस विषय को बिच में लाना नुकसानदेह है।

डाउनलाइन पुराण

डाउनलाइन को चेला या भक्त मत समझिये – जिस प्रकार डाउनलाइन की सफलता में अपलाइन का योगदान होता है ,उसी तरह अपलाइन की सफलताओं में डाउनलाइन का योगदान होता है यह सच आपको समझना होगा।



उनके साथ भेदभाव मत कीजिये -अपनी डाउनलाइन शृंखला के साथियों को सिर्फ परिणाम और लगन के तराजू पर तौलिए। उनके साथ भेदभाव मत कीजिए , किसी भी प्रकार से नहीं। सच कहा जाये तो सबको सामान अवसर और सबको कार्य के अनुसार परिणाम ही नेटवर्क मार्केटिंग की खूबी है।

स्मार्ट और सामान्य का पूर्व निर्धारण न करें -अक्सर देखने में आता है की हम किसी व्यक्ति को खास या प्रभावशाली मानकर उस व्यक्ति को अपने नेटवर्क से जोड़ने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं। जब वह नेटवर्क में जुड़ जाता है तो हम उस से ढेर साडी उम्मीद जोड़ लेते हैं  , उसे तव्जब्बो देते हैं , उसका जायदा ध्यान देते हैं , उसकी तुलना में हम अन्य को विशेष ध्यान नहीं देते हैं।  जबकि नेटवर्क मार्केटिन में होता उल्टा है जिसके बारे में हम सोंचते हैं की ये काम करेगा वो ही नहीं करता है और  सोंचते हैं की ये नहीं करेगा वो ही धूम मचा देता है।

डाउनलाइन के बिच में राजनीती मत कीजिये – कुछ अपलाइन अपनी डाउन लाइन श्रृंखला में बांटों और राज करो की निति अपनाते हैं , वे अपने निचे किसी का कद खड़ा नहीं होने देना चाहते हैं। यह मिलजुलकर करने का व्यापार है अगर यहाँ पर जोड़ तोड़ की राज निति करेंगे तो पूरा ग्रुप तबाह हो जायेगा।

आलोचना में नियमों का पालन कीजिये – 

  • प्रसंशा सबके सामने करें , आलोचना अकेले में ,
  • आलोचना कार्य व परिणाम की करें , वयक्ति की नहीं।
  • आलोचना करते हुए भाषा सयंमित रखें।
  • आलोचना करते समय हितैषी नजर आएँ।
  • आलोचना करते हुए पुराने मुद्दों को न घसीटें।
  • आलोचना ठोस आधार अपर ही करें।
  • आलोचना संछिप्त व सीधी हो।

डाउनलाइन की सफलता पर जश्न मानाइए – जिस तरह से आपकी सफलता पर आपके डाउनलाइन हंगामा मचा देते हैं , नारे लगते हैं आपको कंधे पे उठाते हैं , आपको विजय को अपनी विजय समझते हक़ीन उसी तरह आप भी उनकी सफलता पर खुल कर जश्न मनाइए। अपने भाषणों में उनका उदाहरण दीजिये। दूसरों के बिच में उनकी सफलता के उदाहरण दीजिये।

धन्यवाद दोस्तों




उम्मीद करता हूँ की आज  का ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा जिसे मैंने लिया था डॉक्टर उज्जवल पाटनी के शानदार किताब नेटवर्क मार्केटिंग कितना सच कितना झूट।  यदि आप नटवर्क मार्केटिंग ,में हैं हैं तो इसे अवस्य पड़ें। मैंने यही किताब को 190 /- में रेलवे स्टेशन से लिया था लेकिन आप चाहे तो इसे निचे दिए गए लिंक से घर बैठे आर्डर कर किताब को मंगवा सकते हैं , जो की मात्र 75 /- में उपलब्ध है।  

 

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दिमाग और मन में फर्क

हकीकत यह है की दिमाग और मन बिच फर्क के विषय में लोगों को पूरा ज्ञान नहीं है। लेकिन कंप्यूटर की भाषा में दिमाग हार्डवेयर है और मन सॉफ्टवेयर। मन के बारे में आगे समझने से पहले यह स्पष्ट रूप से जान लें की मन के दो प्रकार हैं

जाग्रत मन ( concious mind )

अर्धजाग्रत मन ( subconcious mind )




हम जब जाग्रत अवस्था में होते हैं तब जाग्रत मन कार्यरत होता है और जब सो जाते हैं अथवा मूर्छा की अवस्था में होते तब वह काम करना बंद कर देता है। जबकि अर्धजाग्रत मन २४ घंटे काम करता है अर्धजाग्रत मन विषय में लोग अज्ञात हैं और जबकि अर्धजाग्रत मन ही हमें सुख समृद्धि और इक्षित वस्तु दिलवाने में सक्षम होता है।

जाग्रत मन के पास १० प्रतिसत और अर्धजाग्रत मन के पास प्रतिसत शक्ति है। जबकि जाग्रत मन मालिक और नौकर होता है , अर्धजाग्रत जाग्रत मन के सभी आदेशों का पालन करता है बिना फ़िल्टर किये।

कजाग्रत मन के कार्य और उसकी शक्तियां

संवेदना (SENSES ) – हमारी पाँचों ज्ञाननेद्रियाँ को जाग्रत मन नियंत्रित करता है। जैसे-देखना.सूंघना ,स्वाद लेना। और स्पर्श का अनुभव करना।

 

2 हलन-चलन ( MOVEMENT)- हमरे हिलने चलने तथा बोलने के स्नायु पर जाग्रत मन का नियंत्रण होता है।

 

3 विचार ( थिंकिंग )- हम जाग्रत अवस्था में तब निरंतर विचारशील होते हैं। जिसके ऊपर जाग्रत मन का नियंत्रण है। अर्थात हम नकरात्मक सोंचें या सकरात्मक हमारे हाटों में है। प्रत्येक कार्य का आरम्भ विचार के द्वारा ही होता है।

 

तर्क (लॉजिक )- प्रत्येक विचार के साथ तर्क जुड़ा हुआ है। यह तर्क शक्ति जाग्रत मन के पास है तर्क हमें कई बार गलत निर्णय लेने से बचाता है और सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करता है।

पृथक्करण – हमें कई बार निर्णय लेने से पहले परिस्तिति का पृथक्करण करना पड़ता है।

बुद्धि का अंक -I.Q.

 

हम कई बार देखते हैं की कुछ लोगों का I.Q. ऊँचा होता है तो कुछ लोगों का I.Q. निचा होता है और अधिकांश लोगों का I.Q. सामान्य।

समाज में ऐसी मान्यता है की व्यक्ति का I.Q. जितना ऊँचा उसके सफल होने की सम्भावना उतनी अधिक। I.Q. स्कूल और कॉलेज के दौरान अधिक खिलता है।

 

लेकिन इसके साथ यह समझना जरुरी है की जीवन में सुखी और समृद्ध होने के लिए I.Q. से ज्यादा ( E.Q.- EMMOTIONAL QUOTIENT – भावना का अंक ) का महत्व अधिक है और ज्यादा आदिक महत्त्व आध्यत्मिक अंक ( S.Q.- SPRITUAL QUOTIENT ) का है।

 

अवसर ( मौका पहचानना और झपटना , न्याय करना , निर्णय , अमल करना , पसंद नापसंद , ईक्षा की उत्पत्ति ,अर्धजाग्रत मन दरवाजे पर चौकीदारी

 

आज का ये पोस्ट मैंने लिखा है प्रेरणा का झरना के किताब से जिसके लेखक हैं डॉ जीतेन्द्र हड़िया।




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पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है

पंचतंत्र की कहानी आपका किया अपमान आपका पीछा करती है ।ये कहानी है दंतिल की ।

 

बहुत समय पहले की बात है एक शहर था जिसका नाम वर्धमान था, वहां पे एक अमीर  बिजनेसमैन रहा करता था उसका नाम दांतिल और उस राज्य का वो का मुखिया था ,

दांतिल ने अपने काम से राजा को खुश किया था  अपनी  शादी के दौरान,दांतिल ने राजा, रानियों और मंत्रियों को आमंत्रित किया और उन सभी को सम्मान दिया। उसी समय एक मेहतर उसका नाम था  गोरंभ और उसने सबसे उच्च सीट पर कब्जा कर लिया यह राजा का अपमानजनक था इसलिए स्वीपर को दांतिल ने हवेली से निकाल दिया।





गुस्सा और अपमान महसूस करते हुए, गोरंभ कई रातों को नहीं सोया नहीं था , गोरंभ प्रतिशोध के लिए मौके की तलाश में था वह हमेशा राजा और दांतिल के बीच दरार पैदा करने के तरीकों के बारे सोंचता रहता और वो दरार पैदा करने में कामयाब रहा ।

एक दिन सुबह में ,जब राजा सो रहा था गोरंभराजा के शयनकक्ष खिड़की के नजदीक जाकर जोर से कहा : यह आश्चर्यजनक है कि डांटिल इतने बोल्ड हो गए हैं कि वह रानी को जाता है और गले लगाता है।

यह सब सुनकर राजा उठा और उसने गोरंभ से पूछा अभी जो कह रहे थे क्या वो सब सही है क्या सच में दांतिल ने रानी को गले लगाया ?

गोरंभ ने जवाब दिया : महाराज कल रात जब हम अपने दोस्तों के साथ पत्ते खेल रहा था इसलिए पूरी रात सो नहीं पाया था ,मेरा एक दोस्त है बार बार दांतिल के घर आता जाता रहता है।

वह कह रहा था है कि वह दांतिल को कहते हुए सुना था की रानी के साथ निकट संपर्कों का आनंद ले रहा है। लेकिन मुझे याद नहीं कि उसने सटीक शब्दों में क्या कहा था । मुझे अब बहुत नींद आ रही है, इसलिए मुझे नहीं पता कि मैं क्या बकवास करता हूं।

राजा ने सोचा कि ,गोरंभ रोज यहां आता जाता रहता है और दांतिल भी एक नियमित आगंतुक था। यह संभव हो सकता है कि शायद रानी को गपशप करते दांतिल के साथ देखा हो।

यह भी कहा जाता है कि वह व्यक्ति जो दिन के दौरान सचेत इच्छा रखता है, उनकी नींद के दौरान उन्हें बताता है पीने या सपने देखने के दौरान एक व्यक्ति की अव्यक्त भावना या भावना व्यक्त की जाती है।



यही कारण है कि किसी को महिलाओं को नहीं समझा जाना चाहिए क्योंकि वे एक से बात करते हैं और एक दूसरे को इच्छुक आँखों से देखते हैं और उनके दिल तीसरे के बारे में सोचते हैं।आग लकड़ी से संतुष्ट नहीं है ,

महासागर नदी से संतुष्ट नहीं हैं इसी तरह से, महिलाएं भी कई पुरुषों से संतुष्ट नहीं होती हैं।

महिलाओं के चरित्र पर विचार करते हुए, राजा ने खेद महसूस कर रहे थे और एक आदेश को पारित कर दिया कि दांतिल को अब अदालत की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

यह आदेश दांतिल को उलझन में डाल दिया और साथ ही दांतिल को आश्चर्यचकित कर रहा था।

वह इस अप्रत्याशित विकास के पीछे संभव कारण समझ नहीं सका। उसने कोई अपराध नहीं किया था जो राजा को नाखुश बना देगा।

एक दिन दांतिल ने अदालत में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन रक्षकों ने इसे रोक दिया।

यह देखकर, गोरंभ हँसे और गॉर्ड से कहा: हे सैनिक , आदमी खुद को दंड या माफी का फैसला करता है। यदि आप उसे रोकते हैं, तो आपको उसी तरह अपमानित किया जाएगा जिस तरह तुम उसका अपमान कर रहे हो।



दांतिल ने यह सुनकर सोचा कि हो सकता है गोरंभ ने राजा को कुछ कहा जिसके परिणामस्वरूप उनको निर्वासित किया गया हो । इसलिए दांतिल ने गोरंभ के घर और भेंट में कुछ गहने और कपड़ों को भेज आमंत्रित किया।

उनके दुर्व्यवहारों के लिए पश्चाताप किया , ने अपनी क्षमा मांगी गोरंभ ने दांटिल को माफ कर दिया और आश्वासन दिया कि राजा फिर से निवेदित करेगा और आपको अदालत में आमंत्रित करेगा।

सुबह में अगले दिन, गोरंभ राजा के बेडरूम से बाहर खिड़की के पास बड़बड़ाने लगा , वास्तव में यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि राजा एक बेवकूफ की तरह, जो कि खीरा खाता रहता है। उनसे कोई इसके बारे में पूछता है तो सभी को एक ही जवाब देते हैं हैं ये पृकृति का है।

राजा ने यह सुना और नाराज हुआ । उसने गुस्से से पूछा: तुम ये सब बकवास क्यों बोलते हो? आप इस घर के दास हैं, यही कारण है कि मैं आपको माफ़ करता हूं।

गोरंभ ने क्षमाप्रार्थी से जवाब दिया: मैं रात भर में जुए था । मुझे अभी भी बहुत नींद रही है हूँ मुझे नहीं पता कि मैं क्या कर रहा हूं, कृपया मुझे माफ कर दीजिये । मैं वास्तव में अपने होश में नहीं था

अचानक, उसने राजा को लगा कि जैसे स्वीपर ने उसके बारे में कुछ बेतुका कहा, वह दांतिल के बारे में कुछ भी मूर्खतापूर्ण कह सकता था, जब वह होश में नहीं था।

राजा ने सोचा – यह निश्चित था कि दांतिल एक अच्छा आदमी था, जो रानी के साथ कोई अवैध संबंध नहीं था। इसलिए उसे बहाल करने की आवश्यकता है।

उन्होंने अपने मंत्रियों को निरुपित किया और उन्हें आदर और सम्मान के साथ अदालत में आमंत्रित करने को कहा। जब दांतिल ने समाचार सुना तो वह खुश हुआ।

शिक्षा 1 – अफवाह या गपशप पर अपनी कार्रवाई का आधार न दें



निर्णय लेने से पहले सुनिश्चित करें तथ्य अन्यथा गैर-प्रतिकूल परिणामों और संबंधित लोगों से पीड़ित होना है और खुद को भी सामना करना पड़ सकता है ।

शिक्षा 2 – एक गलती के लिए अपमानजनक।

अपने सामाजिक आचरन में यह कठोर इलाज है और जो लीडर करता है वो नेता के योग्य नहीं है।

इस तरह के नेता को भी गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है क्योंकि अधीनस्थ शायद बदला लेने के लिए देखेंगे कि जिसने उसे अपमानित किया वह भी बचे नहीं।

पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है-उम्मीद है की आपको यह पंचतंत्र की कहानी अपमान आपका पीछा करती है पसंद आई होगी। अगर कहनी आपको अच्छी लगी हो तो शेयर न भूलें

धन्यवाद दोस्तों



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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

आज के पोस्ट में मैं आपके लिए एक शानदार किताब से कुछ अंश लिया हूँ जिसका किताब का नाम है दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार , इसके लेखक हैं रॉन्डा बर्न



 

अगर आप अपने जीवन को तेजी से बदलना चाहते हैं तो अपनी ऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए कृतग्यता व्यक्त करें। जब आप अपनी ऊर्जा कृतज्ञता में लगा देंगे तो अपने जीवन में चमत्कार होते दिखेंगे।

 

 

सृर्ष्टि के नैसर्गिक नियमों के अनुरूप अपना जीवन कैसे जिएँ और किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे अहम् बात यह है की इसे जिए। आप सिर्फ जीकर ही इसके स्वामी बन सकते हैं।

 

 

चिंता और अधिक चिंता को खींचती है। तनाव अधिक तनाव को खींचता है। दुःख अधिक दुःख को आकृष्ट करता है। असंतोष अधिक असंतोष को आकृष्ट करता है

 

अपनी प्रस्तिथियों को तुरंत बदलने के लिए हर दिन सौ ऐसी बातों का लिखने का संकलप लें , जिनके लिए आप धन्यवाद देना चाहते हैं। ऐसा तब तक करते रहें , जब तक दिखने लगे। और कृतग्यता को दिल से महसूस करें। आपकी शक्ति कृतग्यता के कोरे शब्दों में नहीं बल्कि आपके भावना में है।

 

 

आपके भीतर जो भावनाएँ होती हैं वही आने वाले कल को आकृष्ट कर रही हैं।और……

 

 

प्रसन्नता अधिक प्रसन्नता को लुभाती है। आनंद अधिक आनंद को आकर्षित करता है। शांति अधिक शांति को आकृषित करती है। कृतज्ञता अधिक कृतग्यता को आकृषित करती है। प्रेम अधिक प्रेम को आकर्षित करता है।




आपका काम अंदरूनी है। अपने संसार को बदलने के लिए आपको बस इतना काम करना है की अपने अंदर के अहसास को बदल लें। यह कितना आसान है !

 

 

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कहाँ हैं , न ही इस बात से की परिस्थितियां कितनी मुश्किल नजर आ रही है। आप हमेशा बैभव कि ओर बढ़ रहें हैं। हमेशा।

 

पृथ्वी और मानव जाति को आपकी जरुरत जरुरत है इसलिए आप यहाँ है हैं।

 

 

बहरी संसार के किसी भी व्यक्ति या शक्ति तुलना उस ताकत से नहीं की जा सकती , जो आपके भीतर है। शक्ति को खोजें ,क्यूंकि यह आपके लिए आदर्श राह जानती है।

 

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आज के सुविचार

आदत की ब्रह्मंडीय शक्ति का नियम 

आख़िरी शब्द 

 

 

 

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद करता हूँ की आपको आज का ये पोस्ट पसंद आया होगा। आप दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार  

कियाब को अवश्य पड़ें क्यूंकि इसके अंदर बहुते अच्छे अच्छे विचार दिए गए हैं , जिसमें में मैंने कुछ ऊपर लिखने हैं ऐसे ही हर दिन के लिए अलग विचार। आप इस बुक को फोलो करके अपने जीवन में जब्बरदस्त बदलाव ला सकते हैं।


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पालतू तोते की कहानी

पालतू तोते की कहानी

safe shop

आज के इस पोस्ट में मैंने एक पालतू तोते की कहानी लिखा है जो network marketing और salesperson को ज़रूर पसंद आएगा ।

एक महिला पालतू जानवरों की दुकान में गई और उसने अपना दिल बहलाने के लिए एक तोता ख़रीद लिया । वह तोते को घर ले गई , परंतु अगले दिन उसने दुकान में आकर कहा , तोते ने एक शब्द नहीं बोला !

 

दुकान मालिक ने पूछा – क्या आपने तोते के पास आइना रखा है ? तोते आइने में ख़ुद को देखना पसंद करते हैं । इस सलाह पर अमल करते हुए उस महिला ने एक आइना ख़रीदा और लौट गई ।
अगले दिन वह दोबारा आइ । एक बार फिर उसने कहा की तोता अब भी बोल नहीं रहा है ।




दुकान के मालिक ने कहा की सीढ़ी क्यूँ नहीं ख़रीद लेती हैं ? तोते को सीडी पर चड़ना- उतरना पसंद करते हैं । इस सलाह पर अमल करते हुए उस महिला ने सीढ़ी ख़रीद लिया और घर लौट गई ।
ठीक उसी तरह अगले दिन वह फिर दुकान में उसी पुरानी कहानी के साथ लौट आइ – तोता कुछ नहीं बोल रहा है ।
क्या तोते के पास झूला है ? तोतों को झूले पर आराम करना पसंद है अच्छा लगता है । उस महिला ने झूला ख़रीद लिया और घर लौट गई ।
अगले दिन उसने दुकान में आकर यह दुखद सूचना दी कि तोता मर गया है । दुकान मालिक ने कहा , मुझे यह सुनकर बहुत अफ़सोस हुआ ! क्या तोता मरने से पहले कुछ कहा ?

 

हाँ , महिला ने जवाब दिया “ मरने से पहले उसने कहा था , क्या दुकान में कुछ खाने- पीने की चीज़ नहीं मिलती है ? ‘’

इसी तरह से लोग नेट्वर्क मार्केटिंग कम्पनी में जुड़ तो जाते हैं और वो सबकुछ करते हैं , फ़ंक्शन में जाते हैं हर ट्रेनिंग में जाते हैं मोटिवेशनअल ऑडीओ सुनते हैं विडीओ देखते हैं लेकिन कम्पनी का प्लान नहीं दिखाते हैं ।

 

और इसलिए उनका भी हाल तोते जैसा ही होता है । वो कम्पनी में ज़्यादा दिन तक टिक नहीं पाते हैं




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समय का प्रबंधन 

इंसान जो सोंचता है वही बन जाता है।

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद है आपको आज ये पोस्ट पसंद आया होगा । अगर आपको हमारा ये पोस्ट अच्छा लगा तो शेयर और लाइक करना ना भूलें ।

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समय का प्रबंधन करना

अगर आपको जीवन में सफलता चाहिए तो आपको समय का प्रबंधन करना आना ही चाइए । जिसे मैंने इस पोस्ट में बताने का कोसिस किया है ।

 

समय का प्रबंधन एक सरल तंत्र है , जिसका उपयोग करके आप टालमटोल की आदत से उबर सकते हैं। इसमें आत्म-अनुसाशन , इक्षाशक्ति और व्यक्तिगत व्यवस्थापन की आवश्यकता होती है , लेकिन पुरुस्कार भी बहुत बड़े होते हैं। इस तंत्र का उपयोग करने से आपकी उत्पादकता,प्रदर्शन ,परिणाम और आमदनी दो-तीन गुना बढ़ सकती है।

 

दिन की शुरुआत करने से पहले उस दिन करने वाले कार्यों की सूचि बना लें। सूची बनाने का सबसे अच्छा समय एक दिन पहले रात को होता है ,ताकि आपका अवचेतन मन आपके सोते समय भी इस गतिविधि-सूची पर काम कर सके। इसी वजह से सुबह जागने पर आपके मन में अक्सर ऐसे नए विचार आते हैं जिनसे आप दिन के कामों को ज्यादा कारगर तरीके से पूरा कर सकते हैं।

 

फिर अपनी सूचि में ए , बी ,सी , डी , ई विधि का उपयोग करें –

= करना ही होगा – न करने का गंभीर परिणाम ;

बी = करना चाहिए – करने या न करने के हल्के परिणाम ;

सी = करना अच्छा है – चाहे करें या न करें , कोई परिणाम नहीं होता ;

डी = सौंपें – जो काम दूसरों को सौंप सकते हैं , उन्हें लोगों को सौंप कर आप उन कामों के लिए जयादा खाली करते हैं , जिन्हें केवल आप ही कर सकते हैं।

= छोड़ें – वे सारे काम और गतिविधियां छोड़ दें , जो आपके उद्देश्य और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नहीं है।

अगले दिन की गतिविधि-सूचि की समीक्षा करें और काम सुरु करने से पहले हर कार्य के सामने ए , बी ,सी , डी , ई लिख लें।

यदि आपके पास ए श्रेणी के कई कार्य हैं ,तो उन्हें क्रम में जमा लें , जैसे ए-1 ,ए-2 आदि। बी और सी श्रेणी के कार्यों के साथ भी ऐसा ही करें।

 

इसके बाद खुद को अनुशासित करें ,ताकि किसी और अन्य कार्य को पहले सुबह सबसे पहले अपना ए-1 कार्य ही सुरु करें
जब आप अपने सबसे महत्वपूर्ण काम को सुरु कर दें , तो आपको अनुशासित रहकर पूरी एकाग्रता से अपना-सत प्रतिसत समय और ध्यान उस पर केंद्रित रखना होगा , जब तक की वह पूरा न हो जाये।

ए , बी ,सी , डी , ई विधि से पुरे दिन की योजना बनने में दस मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता है याद रखें काम करने से पहले योजना बनाने में एक मिनट का समय लगाते हैं , उससे काम के दौरान आपका दस मिनट का समय बच जाता है।

आज ही समय-प्रबंधन में माहिर होने का निर्णय लें इस दिशा में तब तक काम करें ,जब तक की इसकी आदत न पड़ जाए।

 

याद रखें आपके सपने ही महत्वपूर्ण होना चाहिए बाकि कामों को छोड़ दें अभी जान बूझकर क्यूंकि यदि गैर जरुरी कामों को करते रहेंगे तो आपके पास समय ही नहीं बचेगा , समय तो सभी के पास २४ घंटे ही होते हैं लेकिन जो उन समय का सबसे ज्यादा सद्पयोग करता है वो औरों से ज्यादा सफल होता है।

 

धन्यवाद दोस्तों ,

उम्मीद करता हूँ की आपको हमारे आज के पोस्ट से सेल्ज़ बड़ाने में फ़ायदा मिलेगा ।आज का समय का प्रबंधन करना पोस्ट  एक शानदार किताब आत्म-अनुशासन की शक्ति इसके लेखक ब्रायन ट्रेसी आपको पसंद आया होगा । अगर आपको ये पोस्ट आज का पसंद आया हो प्लीज़ इसे शेयर और लाइक करना ना भूलें ।

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Sales techniques

Sales techniques जानना ज़रूरी है बग़ैर उसके आप sales फ़ील्ड में सफल नहीं हो पाएँगे ।

लोग ख़रीदते क्यूँ हैं ?
कोई आपका प्रॉडक्ट्स या सेवा क्यूँ ख़रीद सकता है , इसके बहुत से कारण होते हैं । आपको यह बात समझ लेनी चाइए की लोग आपके नहीं , उनके कारणों की वजह से ख़रीदते हैं । नौसीखिए सेल्ज़ पीपल एक बहुत बड़ी ग़लती यह करते हैं की वे ग्राहक को अपने कारणों से बेचना चाहते हैं , उन कारणों से नहीं , जो ग्राहक को सचमुच क़दम उठाने के लिए प्रेरित करते हों ।

लोग प्रॉडक्ट्स और सेवाएँ इसलिए ख़रीदते हैं , क्यूँकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनकी स्तिथि बेहतर हो जाएगी । साथ ही उन्हें यह लगता है की वह प्रॉडक्ट्स या सेवा बिलकुल ना ख़रीदना या किसी दूसरे से ख़रीदना उतना लाभकारी नहीं होगा , जितना की आपसे ख़रीदना होगा । वे यह महसूस करते हैं की आपसे वह प्रॉडक्ट्स या सेवा ख़रीदना उनके लिए अच्छा सौदा है ।

बिक्री के हर प्रस्ताव पर हर ग्राहक के पास तीन विकल्प होते हैं । वह आपसे ख़रीद सकता है , वह दूसरे से ख़रीद सकता है या इस वक़्त विलकुल भी नहीं ख़रीदता है । आपका काम ग्राहक को समझ के इस बिंदु तक लाना है कि उसे आपके प्रॉडक्ट्स की कितनी ज़रूरत है की वह ख़रीदारी के प्रतिरोध से उबर जाए , जो बिक्री को पटरी से उतार सकता है ।
यदि कोई प्रॉडक्ट्स आपसे कोई भी ख़रीदता है तो , वह उस स्वतंत्रता को थोड़ा- बहुत गवाँ देता है , जो उसके पास आपको पैसा देने से पहले थी । अगर वह आपसे प्रॉडक्ट्स ख़रीदता है , जिस से वह संतुष्ट नहीं होता , तो स्तिथि और ख़राब हो जाती है । अब उसके पास पैसा भी नहीं बचा है और वह प्रॉडक्ट्स के साथ अटक भी गया है । चूँकि हर प्रास्पेक्ट्स को यह अनुभव एक से ज़्यादा बार हुआ है , इसलिए वह ख़रीदने का एक निश्चित मात्र में प्रतिरोध करता है ।
प्रास्पेक्ट्स इस बात की रत्ती बाहर परवाह नहीं होती जी आपका प्रॉडक्ट्स क्या है । उसे तो सिर्फ़ इस बात की परवाह होती है की आपका प्रॉडक्ट्स उसके लिए क्या करेगा ।

ग्राहक की आवश्यकताओं के प्रति आग्रह करना –

धन – हर कोई ज़्यादा पैसा चाहता है । यह बुनियादी आवश्यकता है । पैसा ही संसार को चलाता है । जब भी आप अपने प्रॉडक्ट्स को या सेवा का सम्बंध इस बार्ंज़ जोड़ेंगे की ग्राहक पैसे कमा या बचा सकता है तो उसका पूरा ध्यान आकिर्शित कर लेंगे ।
सुरक्षा – हर व्यक्ति में सुरक्षा की बुनियादी आवयकता होती है । ज़्यादातर लोग महसूस करते हैं की अगर उनके पास पर्याप्त पैसा होगा तो , वो पूरी तरह सुरक्षित होंगे । इसलिए यदि आप safe shop (wadmsafeshop) में हैं तो आप बताएँ कि वो यहाँ से कितना पैसा कमा सकते हैं ।

पसंद किया जाना – हर व्यक्ति चाहता है कि दूसरे उसे पसंद करें । इस बात की गहरी ज़रूरत होती है की हमारे आस-पास के लोग हमें स्वीकार करें और सम्मान करें । हम अपने मित्रों , पड़ोसियों और साथियों की प्रशंसा पाना चाहते हैं । इस से हमारी समूहिकता और आत्म- महत्व की आवयकता संतुष्ट होती है ।
आपका प्रॉडक्ट्स ता सेवा यह कैसे कर सकता है की इसकी वजह से दूसरे लोग आपके प्रॉडक्ट्स की वजह से कैसे मिलेगा ?
ओहदा और प्रतिष्ठा – ओहदा या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा लोगों के लिए शक्तिशाली प्रेरणा है । हम चाहते हैं की लोग हमें सम्मान दें और हमारी संपतियों या उपलब्धियों की प्रसंशा करें ।

जब आपके प्रास्पेक्ट्स को यह विश्वास हो जाता है की उसे आपके प्रॉडक्ट्स या सेवा का इस्तेमाल से ज़्यादा प्रशंसा या मान्यता मिलेगी , तो दाम को लेकर उसका प्रतिरोध काफ़ी कम हो जाता है ।
जब आप किसी मित्र , सलाहकार और शिक्षक के रूप में बिक्री की स्तिथि में जाते हैं , तो आप नाटकीय रूप से उस तनाव को कम कर लेंगे , जो प्रतिस्पर्धी बिक्री में होता है ।

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The Leader Who Had No Title

आज के पोस्ट में The Leader Who Had No Title ( लीडर जिसकी उपाधि नहीं ) से लिया है ।आप शिखर पर तब होते हैं

आप शिखर पर तब होते हैं , जब …..

1. आप स्पष्ट रूप से समझ लें की

असफलता मात्र एक घटना है कोई व्यक्ति नहि है ; की आपका पिछली रात को समाप्त हो चुका है और आज आपका बिलकुल नया दिन है ।

2. आपने अतीत के साथ मित्रता की है , आपका ध्यान वर्तमान पर केंद्रित है और अपने भविष्य के प्रति आशावादी हैं ।

3. आप जानते हैं कि सफलता ( एक जीत ) आपको बनाती नहीं है और असफलता ( एक हार ) आपको तोड़ती है नहीं है ।

4. आप विश्वास , आशा और प्रेम से परिपूर्ण है , और क्रोध , लालच अपराधबोध, ईर्ष्या या बदले की भावना से अलग रह कर जीते हैं ।

5. आप पर्याप्त रूप से इतने परिपक्व हैं की अपनी संतुष्टि को थोड़ी देर के टाल सकते हैं और अपना ध्यान अधिकारों से दायित्वों की ओर स्थान्तरित कर सकते हैं ।

6. आप यह बात जानते हैं की जो चिज नैतिक रूप से सही है , उसका समर्थन करने में असफल रहना, आपराधिक रूप से ग़लत चीज़ का शिकार होने की शुरुआत है ।

7. आप जो कुछ भी हैं , उसी में निश्चिन्त हैं , इसलिए आप ईश्वर के साथ सुकून से हैं और आप का मनुष्य के साथ भाईचारा है ।

8. आपने अपने विरोधियों को भी अपना मित्र बना लिया है और आपने उन लोगों से स्नेह और सम्मान अर्जित किया है , जो आपको सबसे अच्छीतरह जानते हैं ।

9. आप इस बात को समझते हैं कि दूसरे लोग आपको आनंद दे सकते हैं , लेकिन असली ख़ुशी तब मिलती है , जब आप दूसरों को के काम आते हैं ।

10. आप अप्रिय लोगों को प्रेम करते हैं, ना उम्मीदों को उम्मीद देते हैं , अशहायों के मित्र हैं और निरुत्साहित व्यक्तियों को प्रोत्साहन देते हैं ।

11. आप क्षमा के लिए अतीत की ओर देख सकते हैं , आशा के लिए भविष्य में करुणा के लिए नीचे और आभार के लिए ऊपर देख सकते हैं ।

12. आप जानते हैं कि आप में से जो भी व्यक्ति सबसे महान बनेगा , वह सभी लोगों की सेवा करेगा ।

13. आप ईश्वर की महिमा के लिए और मानव जाति के कल्याण के लिए ईश्वर की दी हुई शारीरिक, मानशिक व आध्यात्मिक क्षमताओं को समझते हैं, स्वीकार करते हैं, विकसित करते हैं और उनका उपयोग करते हैं ।

14. आप इस ब्रह्मांड के रचियता के सामने खड़े हैं और आपसे कहता है, शबास तुम बहुत अच्छे और वफ़ादार सेवक हो ।

वैसे तो रॉबिन शर्मा सर की सभी  किताबें उनकी अच्छी होती है लेकिन आज का पोस्ट मैंने लिया रॉबिन शर्मा जी शानदार किताब The Leader Who Had No Title से ।

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लीडर के अनिवार्य 21 गुण

लीडर के अनिवार्य २१ गुण  आज का पोस्ट मैंने लिया लेखक जॉन सी मैक्स्वेल के शानदार किताब लीडर के 21 महत्वपूर्ण गुण ।

 

 

चरित्र – चट्टान की तरह दृढ़ बनें – क्या आपने देखा है की बहुत से प्रतिभाशाली लोग एक निश्चित स्तर की सफलता हासिल करने के बाद अचानक से धड़धड़ाकर गिर गए ? इसका मूल कारण चरित्र है ।

ज़िंदगी में बहुत सी चीज़ों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता । हम माता- पिता को चुन नहीं सकते । हम अपने जन्म और परवरिश की जगह नहीं चुन सकते हैं , हम अपनी प्रतिभा और आइक़यू को नहीं चुन सकते लेकिन हम अपने चरित्र का चुनाव ख़ुद करते हैं ।


जादू
: पहली छाप से कामयाबी मिल सकती है । जादू का मतलब है लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना । दूसरों को आकर्षित करने वाला व्यक्ति बनने के लिए इन सूझाव पर अमल करना चाइए –

 

१ जीवन से प्रेम करें ।

२ हर व्यक्ति को १० नम्बर दें ।

३ लोगों को आशा दें ।

४ स्वयं को बाँटें ।

 

मुझे आजतक ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं मिला , चाहे उसका पद कितना भी ऊँचा क्यूँ ना हो , जिसने आलोचना के बजाय प्रसंशा के माहौल में बेहतर काम या ज़्यादा प्रयास ना किया हो ।

– चार्ल्स स्वाब , उद्योगपति ।

 

समर्पण :- यही कर्मठ लोगों को स्वप्नदर्शियों से अलग करता है । लोग उन लीडरस का अनुशरण नहीं करते , जो समर्पित नहीं होते । समर्पण बहुत सी बातों से झलक सकता है । जैसे हि आप अपनी योग्यताओं को बेहतर बनाने के लिए किस तरह काम करते हैं या अपने साथियों के लिए कितना त्याग करते हैं ।




संवाद :- इसके बिना आप अकेले ही यात्रा करते हैं । लीडर को अपना ज्ञान और विचार दूसरों तक पहुँचाने में समर्थ होना चाइए , ताकि वह उन्हें उत्साहित कर सके और महत्वपूर्ण अनुभव करा सके ।

 

योग्यता :- यदि आप योग्य हैं , तो लोग आएँगे । योग्यता का अर्थ लीडर के रूप में इस तरीक़े से बोलना , योजना बनाना और कार्य करना है , ताकि दूसरों को दिख जाए की आपको उस काम का पूरा पूरा ज्ञान है और वे आपका अनुशरणकरने लग जाए ।

 

साहस :- अकेला साहसी व्यक्ति भी बहुमत में होता है । साहस एक आंतरिक युद्ध से सुरु होता है । आप लीडर के रूप में जिस भी परीक्षा का का सामना करते हैं , वह हर परीक्षा आपके भीतर से सुरु होता है । साहस की परीक्षा भी अलग नहीं है । मनोचिकित्सक शेलडन कोप ने कहा है – सभी महत्वपूर्ण युद्ध मनुष्य के भीतर लड़े जाते हैं ।साहस डर का अभाव नहीं है यह तो उस काम को करना है , जिसे करने से आपको डर लगता है ।


विवेक
:- अनसुलझे रहस्यों को सुलझाए ।

एकाग्रता :- यह जितनी पैनी होती है , आप भी उतने ही पैने होंगे । यदि आप दो ख़रगोशों का पीछा करेंगे , तो दोनो ही बचकर भाग निकलेंगे ।


– अज्ञात ।

उदारता :- जब आपका दीपक किसी दूसरे दीपक को रोशन करता है , तो आपके दीपक को कोई नुक़सान नहीं होता है । पाने के लिए आज तक किसी को भी सम्मानित नहीं किया गया । सम्मान हमेशा उसी को मिलता है , जिसने कुछ दिया है ।

– कैलविन कलिज , अमेरिकी राष्ट्रपति

 

पहल शक्ति :- इसके बिना आप घर से बाहर क़दम नहीं रख सकते । अवसर आपके चारों ओर है बस उसे आपकी पहल की ज़रूरत है ।

 

सुनना :- लोगों के दिल से जुड़ने के लिए अपने कानों का प्रयोग करें । एक अच्छा लीडर अनुयायियों को वह सब बताने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है, जो सुनना चाहता है । इसके बजाय वह तो उन्हें वह बताने के लिए प्रोत्साहित करता है , जो वह जानना चाहता है ।

– जॉन सी मैक्स्वेल ।

जोश
:- जीवन से प्रेम करें । जब कोई लीडर किसी से जोश के साथ मिलता है , तो बदले में प्रायः उसे जोश ही मिलता है । हल्की फूलकी कोसिस तो कोई भी कर सकता है , लेकिन जब वह प्रबल इक्षा आपके ख़ून में उबाल ले आती है , तो फिर लोगों के लिए आपको रोक पाना बहुत मुश्किल हो जाता है । जोश उपलब्धि की ओर पहला क़दम है ।


सकारात्मक नज़रिया
:- अगर आपको यक़ीन है की आप कर सकते हैं तो आप सचमुच कर सकते हैं । मेरी पीडी की महानतम खोज यह है की अपने मानशिक नज़रिए को बदलकर मनुष्य अपना जीवन बदल सकता है ।


समस्या सुलझाना :- अपनी समस्या को संकट में ना बदलने दें । आप किसी भी लीडर के स्तर को उसके द्वारा सुलझाई जाने वाली समस्याओं से नाप सकते हैं । वह हमेशा अपनी आकार की समस्या की तलाश करता है ।

 

सम्बंध :- यदि आप चलते हैं , तो वे आपके साथ- साथ चलते हैं । लोगों को यह परवाह नहीं होती की आप कितना जानते हैं , जब तक वे यह ना जानते हों की आपको उनकी कितनी परवाह है ।

 

ज़िम्मेदारी :- यदि आप ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं कर सकते हैं , तो आप अपने टीम का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं । किसी भी बड़ी सफलता के लिए यह आवस्यक होता है की आप ज़िम्मेदारी स्वीकार करें ……. अंतिम विश्लेषण में , सभी सफल लोगों में यह गुण होता है की उनमें ज़िम्मेदारी लेने के लिए की योग्यता होती है । एक लीडर कुछ भी छोड़ सकता है सिवाय अंतिम ज़िम्मेदारी के ।

 

सुरक्षा :- दक्षता कभी भी असुरक्षा के भाव की भरपाई नहीं कर सकती । यदि आपको लोगों की ज़रूरत है , तो आप लोगों का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं । वह व्यक्ति कभी महान लीडर नहीं बन सकता , जो सारा काम खुदकरना चाहता है या उसे करने का सारा श्रेय ख़ुद लेना चाहता है ।

 

आत्मनुशासन :- आप जिस पहले व्यक्ति का नेतृत्व करते हैं , वह आप स्वयं हैं ।ख़ुद पर विजय सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ जीत है ।

 

सेवा भाव :- आगे पहुँचने के लिए दूसरों को पहले स्थान पर रखें । सच्चा लीडर सेवा करता है । लोगों की सेवा । उनके सर्वश्रेष्ठ हितों की सेवा । ऐसा करके हमेशा के लिए लोकप्रिय नहीं हो जाता , हमेशा प्रभावित नहीं कर पाता । लेकिन चूँकि सच्चे लीडर व्यक्तिगत प्रशंसा की इक्षा के बजाय प्रेमपूर्ण परवाह की भावनाएँ प्रेरित होते हैं । इसलिए वे क़ीमत चुकाने के लिए तैयार रहते हैं ।

 

सिखने की योग्यता :- नेतृत्व करने के लिए सिखते रहें । यह मान लें की सुनने और पड़ने में बिताया गया समय बोलने वाले पलों से लगभग दस गुणा ज़्यादा मूल्यवान होता है । इससे आपको यक़ीन हो जाएगा की आप सिखने और आत्म-सुधार के मार्ग पर निरंतर अग्रशर हैं ।



धन्यवाद दोस्तों उम्मीद करते हैं की लीडर के अनिवार्य 21 गुण ये पोस्ट पसंद आया होगा । अगर आपको अच्छा लगा हो तो प्लीज़ शेयर और लाइक करना ना भूलें

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सक्सेस सिंड्रोम क्या है

आज के पोस्ट में आपको सक्सेस सिंड्रोम क्या है इसके बारे में बता रहा हूँ बहुत सारे लोग एक सीढ़ी सफलता के चढ़ने के बाद उनमें सक्सेस सिंड्रोम आ जाता है ।

 

घर से निकले बिना नहीं होगा। -सुनने का भी भी भय मिटाओ कॉल करो प्लान दिखाओ। उनकी सोंचिये जिनका क़र्ज़ चुकाना है। माँ – बाप तुम्हारे लिए सबसे बड़े देवता हैं , उनकी दुआएं व आशीर्वाद लेना न भूलना।

हर रोज खुद से सवाल कीजिये
. आज का दिन मैंने जिया क्या मेरे लक्ष्यों में था ?

. कौन से ऐसे दो कार्य थे जिन्हे मैंने पूरी श्रेष्टता दिया ?

. आज ऐसे कौन से जरुरी काम थे,मगर मैं उन्हें कर नहीं पाया ?

. आज मैंने कौन सी नई बात सीखी ?

आज ऐसी कौन सी गलती हुई जिसे भविष्य में नहीं दोहराना चाहिए

याद रखिये ,ये सवाल खुद ईमानदारी से कीजियेगा,क्यूंकि खुद से बेईमानी करने वालों को तो ऊपर वाला भी ठुकरा देता है।
जब भी बिपरीत समय चल रहा हो तो बैठकर आँशु बहाने से अच्छा है दुगुनी मेहनत कीजिये।

जब भी मुश्किल आपका हौसला तोड़ने लगे ,शांत बैठकर आँखें बंद कीजिये और अपने सपने को फिर से देखिये , उस सपने के साथ आने वाले सुखों को सोंचिये। मुश्किलें बौनी लगने लगेंगी।

दूसरों के हाथ में जिंदगी की डोर मत दो – लोग क्या कहेंगे सोंचकर अधिकांश उमंगों और अभिलाषाओं अंदर ही दफ़न कर लेते हैं। सोंचिये ,आप जी किसके लिए रहे हैं ? अपने लिए या दूसरों के लिए। आपकी जिंदगी किसकी है आपकी या।

सक्सेस सिंड्रोम क्या है –  सक्सेस सिंड्रोम से बचिए -नटवर्क मार्केटिंग में जितना कठिन है सफलता पाना है , मुश्किल उस सफलता को संभाल पाना है।

धन को कमाना जितना कठिन है ,उस से कहीं ज्यादा मुश्किल उस धन को सहेज कर रखना है। धन को गवां देने की इसी प्रक्रिया को सक्सेस सिंड्रोम कहा जाता है। जब आप धन गवां देते हैं , उसी वक़्त अपना सम्मान ,साथी ,आत्मविश्वास और अपने सपनों को भी खो।
सक्सेस सिंड्रोम जब हावी होते है , तो आप पूरी तरह शून्य हो जाते हैं।अगर आप एक करोड़ साल में नहीं कमाते हैं तो इस दुनिया में आप 2 करोड़ लोगों से 200 साल पीछे हैं।

अपने साथियों से बेहतर नजर आएं – बेहतर नजर आना इसलिए जरुरी है , क्यूंकि उत्पाद एक है ,प्लान एक है ,पेमेंट के तरीके एक हैं नियम कानून एक है। ऐसे में प्रॉस्पेक्ट किसी दूसरे नेटवर्कर की जगह आपको क्यों चुने ? यह ईमानदार प्रश्न स्वयं से कीजिये और कारण ढूंढिए।

आपको इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए अन्य नेटवर्कर की तुलना में बेहतर ,तेज और प्रभावशाली नजर आना होगा।

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गीता श्लोक

आज के इस पोस्ट में मैंने गीता श्लोक का हिंदी में समझाने की कोसिस की है ।

गीता श्लोक

गीता श्लोक -।।१३।।

देहिनःअस्मिनयथा देहे कौमारं यौवनं जरा। तथा देहान्तरप्राप्तिः धीरः तत्र न मुह्यति।।१३।।
देहिनः = देहधारी , अस्मिन =इस , देहे =मनुसयशरीर में , यथा =जैसे , कौमारं=बालकपन ,
यौवनम =जवानी(और) ,जरा= वृद्धा अवस्था (होती है ),तथा =ऐसे ही , देहान्तरपराप्तिः = दूसरे शरीर की प्राप्ति होती है।

तत्र = उस विषय में , धीरः=धीर मनुष्य , न मुह्यति = मोहित नहीं होता।

अर्थात- देहधारी के इस शरीर में जैसे बालकपन , जवानी (और) वृद्धा अवस्था ( होती है ) ऐसे ही दूसरे शरीर की प्राप्ति होती है। उस विषय में धीर मनुष्य मोहित नहीं होता है।

देहिनःअस्मिनयथा देहे कौमारं यौवनं जरा- शरीरधारी के शरीर में पहले वाल्यावस्था आती है ,फिर युवास्था आती है ,और फिर वृद्धावस्था आती है। तात्पर्य है की शरीर में एक अवस्था नहीं रहती ,उसमें निरंतर परिवर्तन होता रहता है।




यहाँ शरीरधारी इस शरीर में- ऐसा कहने से सिद्ध होता है की शरीरी अलग और शरीर अलग है।

तथा देहान्तरप्राप्तिः -जैसे शरीर की कुमार ,युवा अदि अवस्थाएं होती है ,ऐसे ही देहान्तर की अर्थात दूसरे शरीर की प्राप्ति होती है। जैसे स्थूल शरीर बालक से जवान एवं जवान से बूढ़ा हो जाता है ,तो इन अवस्थाओं के परिवर्तन को लेकर शोक नहीं होता ,ऐसे ही शरीरी एक शरीर से दूसरे शरीर में जाता है ,तो इस विषय में शोक नहीं करना चाहिए।

अब विचार यह करना है की स्थूलशरीर का तो ज्ञान होता है ,पर सूक्ष्म और कारण -शरीर का ज्ञान नहिं होता। अतः जब सूक्ष्म और कारण-शरीर का ज्ञान भी नहीं होता ,तो इसका परिवर्तन का ज्ञान हमें कैसे हो सकता है ?

धीरस्तत्र न मुह्यति- धीर वही है जिसको सत और असत का बोध हो गया है। ऐसा धीर उस विषय में कभी मोहित नहीं होता ,उसको कभी संदेह नहीं होता।




यहाँ एक संका हो शक्ति है की स्थूलशरीर का परिवर्तन का ज्ञान तो होता है ,पर शरीरांतर की प्राप्ति होने पर पहले के शरीर का ज्ञान क्यों नहीं होता ?

पूर्व शरीर का ज्ञान न होने में कारण यह है की जन्म और मृत्यु के समय बहुत ज्यादा कष्ट होता है उस कष्ट के कारण पूर्वजन्म की स्मृति नहीं रहती ,जैसे लकवा मार जाने पर, अधिक वृद्धा अवस्था होने पर बुद्धि में पहले जैसा ज्ञान नहीं रहता ,

ऐसे ही मृत्युकाल और जन्मकाल बहुत बड़ा धक्का लगने के कारण पूर्वजन्म का ज्ञान नहीं रहता ।


परतुं जिसकी मृत्यु में ऐसा कष्ट नहीं होता जो मनुष्य सहसा मृत्यु को प्राप्त होकर फिर कहीं सहसा जन्मा ले लेते हैं ,

उनका पुराना अभ्यास या संस्कार कुछ काल तक बना रहता है। इसलिए वे लोक में पूर्वजन्म बातों के ज्ञान से युक्त होकर जन्म लेते हैं और जातिस्मर कहलाते हैं। फिर ज्यों-ज्यों वे बढ़ने लगते हैं त्यों-त्यों उनकी स्वपन-जैसी पुराणी स्मृति नष्ट होने लगती है।

मेरा विचार -यह मेरा विचार है हो सकता हो गलत हो या सही बह पता नहीं लेकिन इस श्लोक को पड़ने और समझने से मुझे याद आ रहा है मैं आर्मी में था और पोस्टिंग जम्मू में था हमरे यूनिट में एक मंदिर था और वहां

मैं पहली बार गया गया था पर वहां के रास्ते जिसपे कंकड़ पत्थर पड़े थे उस से होकर मंदिर तक जाता था ,मुझे वहां महसूस हुआ की मैं वहाँ पहलेभी आया था।! क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ है ? प्लीज कमैंट्स जरूर बताएं इस से लोगों को बहुत बातों का पता चल पायेगा आपके प्रसांगिक अनुभव से।


धन्यवाद्।

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उठना सीखो

जिर्राफ के बच्चे की संघर्ष की कहानी

आज के पोस्ट मैं मैं जो तथ्य रखने जा रहा हूँ वो मैंने एक वीडियोको देखकर लिया है और मुझे तो बहुत पसंद आया तो मैंने सोंचा की क्यूँ न आपसे शेयर किया जाये उम्मीद करता हूँ की आपको मेरा आज का पोस्ट पसंद आया होगा ,अगर आपको मेरा पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज लाइक और कमेंट करना न भूलें।



ये वीडियो है श्री गोपाल प्रभु गौर जी का है।इस वीडियो के माध्यम से वो सबको यही सन्देश दे रहे हैं की जिंदगी में कभी प्रॉब्लम भी आये तो हिम्मत नहीं हारना चाहिए और दोबारा उठ खड़ा होना चाहिए।

अगर आप जीवन में आप सफलता पाना चाहते हैं तो जिंदगी में चैलेंजेज आता है PORBLEMS आते हैं लेकिन

सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है निराशा। यदि आप निराश हो जायेंगे तो सबकुछ खो बैठेंगे।

 

 

जब भी आप निराश हो जाओ तो माँ जिराफ को याद कर लेना ,जब माँ जिराफ अपने बच्चे को जन्म देती है तो ,चूँकि माँ जिर्राफ बहुत ऊँची होती है बच्चा ऊंचाई से जोर से गिर जाता है और जैसे ही बेचारा समझने का प्रयत्न्न करता की मैं कहाँ गिर गया ?

 

 

तब तक उसकी माँ उस बच्चे के ऊपर खड़ी रहती है और उसको बहुत जोर से लात मरती है और बच्चा बहुत दूर उड़ता हुआ जाकर गिर जाता है बस अपनी सुधबुध दोबारा इकट्ठा करने की कोसिस करता है तबतक फिर उसकी माँ उसके ऊपर दोबारा आकर खड़ी रहती है फिर दोबारा बहुत जोर लात मरती है बच्चा समझ जाता है की यदि मैं कुछ न करूं न तो लात खाते रहनी पड़ेगी

 

 

अपने बड़े कमजोर पैरों पे खड़े रहने का प्रयत्न्न करता है फिर दोबारा उसकी माँ आकर उसे लात मरती है बच्चा फिर गिर जाता है और समझ जाता है की अगर मैं खड़े होकर भागूं नहीं तो बस लात खाते रहना पड़ेगा और बच्चा अपने पैरों पर खड़े होकर तेजी से भागने का प्रयत्न करता है और तभी माँ आकर अपने बच्चों को चूमती है आलिंगन करती है। माँ जिर्राफ ऐसा क्यों करती है क्यूंकि माँ जिर्राफ भली भांति जानती है की जंगल में खूंखार प्राणी शेर ,भेड़िये ,लोमड़ी आदि रहते हैं जिन्हे नवजात शिशु का मांश बेहद पसंद हैं।

 

 

और माँ जिर्राफ बच्चे के साथ हर समय नहीं रह सकती है तो जब बाहर चली जाये तो इसकी रक्षा कौन करेगा ? इसलिए सबसे पहले जब उसका जन्म होता है तो लात मरती है क्यूंकि वो उठना सीखे दोबारा लात मरती है क्यूंकि उसे उठने की वो क्रिया याद रहे फिर दोबारा लात मारती हैं क्यूंकि सिर्फ उठे नहीं दौड़ना प्रारम्भ करे ,

 

 

जीवन में कई बार आपको चुनौतियाँ आएँगी और हम गिरेंगे हम फ़ैल होंगे उस समय , माँ जिर्राफ और उसके बच्चे को याद कर लेना। जब भी चुनौतियाँ आये जब भी कोई CHALLENGE आये जितनी बार भी आप गिरो उठना सीखो

उस बच्चे से उठना सीखो ,उठकर खड़े रहना सीखो खड़े रहकर भागना सीखो। अगर उठोगे खड़े रहोगे भागना सीखोगे तब यश ,सफलता के उच्च सिखर पर पहुंचना सीखोगे।

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रियल हीरो की कहानी


बचपन से एक ही बात-एक ही बात बेटे पैसे पेड़ पे नहीं उगते हैं । ग़लती से एक पेंसिल भी टूट जाता था तो एक ही रिपीटेड ड़ाइलोग पेंसिल टूटा कैसे क्या तुम्हें पता नहीं है की कितना मेहनत करके पैसे मैं कमाता हूँ और तुमको अहमियत ही नहीं है पैसे का । बात बात पे एक बात ही सुनने को मिलता था पैसा पेड़ पे नहीं उगते , पैसे पेड़ पे नहीं उगते ।सुनने मिलता था शयद आपको भी यही सुनने को मिलता हो और बचपन से ही यह अहसास कराया जाता है हमें की पैसा कामना बहुत मुश्किल है।

 

लेकिन जब आप थिंक एंड ग्रो रीच किताब को पड़ने के बाद आप बोलेंगे की हाँ पैसे पेड़ पे ही उगते हैं बस वो पेड़ आपके दिमाग़ में उगने चाइए । एक बार जब आपके विचार बन जाते हैं तो आपके लिए पैसे पेड़ पे ही उगते हैं ।

 

अशराफुल आलोम बांग्लादेश में बोगरा जिले के इकलिया गांव में पैदा हुआ. बाप ‘चनाचूर’ (खास तरह का नमकीन मिक्सचर) बेचा करते थे. महज 10 साल का था, तभी उसके बाप ने दूसरी शादी कर ली. और छोड़ दिया उसको

उसकी मां के साथ. वो जिंदा रहा. अपनी मां के लिए और तुम जैसे लोगों की सोच को धिक्कारने के लिए. 10 साल के बच्चे का संघर्ष शुरू हुआ. मां का सहारा बना और चनाचूर बेचने लगा. गरीबी और मेहनत ने पढ़ाई पर ब्रेक लगा दिया. वो सातवीं के इम्तिहान में फेल हो गया और स्कूल छुट गया. लेकिन अपनी किस्मत को नहीं हारने दिया.



एक दिन उस शॉप के मालिक ने उस शॉप को बेचने का मन बना लिया. अशराफुल ने उससे कहा, ‘ये दुकान मत बेचो मैं चला लूंगा, लेकिन मेरे पास पैसे नहीं. मैं तुम्हें इंस्टालमेंट में देता रहूंगा.’ दुकानदार काफी मिन्नतों के बाद उसकी बात मान गया.

अभी वो 15 साल का भी नहीं था कि दो-दो बिजनेस चलाने लगा. हर सुबह घर से चनाचूर बेचने निकलता. और शाम होते ही वीडियो शॉप खोलकर बैठ जाता.जब भी खली समय मिलता था वो मूवी देखता था , उसका शौक़ था कि विडीओ बनाने का । फिर उसने एक गाने में काम किया और उस गाने ने उनकी ज़िंदगी बदल दी ।

जिससे उसके मन में भी हीरो बनने का विचार उत्पन्न हुआ । आज वह बांगला देश का superstaar है । लोग उसके औटोग्राफ के लिए मरते हैं । सिर्फ़ एक विचार ने ही असरफुल आलोम की आज ज़िंदगी को सफलता से भर दिया ।




असरफुल आलोम जब हीरो बन सकता है एक सूपर स्टार बन सकता है तो मैं बिलकुल कह सकता हूँ कोई कुछ चाह ले दिल से तो भी जो चाहे बन सकता है ।डाइमंड (Diamond) बनना तो छोटी सी बात है ।

धन्यवाद दोस्तों , उम्मीद है कि आपको ये मेरा आज का पोस्ट पसंद आया होगा प्लीज़ लाइक एंड शेयर करना ना भूलें ।



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Kadve pravachan

आज का मैंने पोस्ट लिया है मुनि श्री तरुण सागर जी के प्रवचन से जो की मथुरा में ज्ञान ज्ञान वर्षा कर रहे थे। उम्मीद करता हूँ की ये पोस्ट आपको पसंद आएगा।

अपनी सेहत का ध्यान रखो क्यूंकि ये सच है अगर आपका सेहत अच्छी है तो सब कुछ हैऔर आपका सेहत अच्छा नहीं सबकुछ होते हुए भी उसका कोई मतलब नहीं।

कड़वे प्रवचन -अनीति से कमाया हुआ पैसा १० साल से ज्यादा नहीं रुकता है। इसलिए हमेशा निति और ईमानदारी का कमाइए।

कड़वे प्रवचन – एक आदमी सिगरेट पर भासन देता था लम्बे लम्बे भाषण देता था एक दिन वो खुद ही सिगरेट पि रहा था तो उसे मुनिश्री ने कहा -आप ही सिगरेट पि रहे हो ? तो वो कहता है -मैं सिगरेट कहाँ पी रहा हूँ ? मैं तो इसे जला कर राख कर रहा हूँ।


जलता हुआ दिया ही दूसरों को रौशनी दे सकता है जो खुद ही बुझा हुआ है तो वो दूसरों को क्या रौशनी देगा ?

-मुल्ला नसरुद्दीन एक बार सुबह -सुबह उठकर अपनी बीवी से से कहने लगा अगर मैं प्रधानमंत्री बन गया तो मैं इस दुनिया की तस्वीर बदल दूंगा -उसकी बीवी बोलती है की पहले आप अपना पजामा तो बदल लो सुबह से उल्टा पहने हुए हो।

आपको याद रखना होगा की सामने वाला नहीं बदलेगा आपको बदलना होगा।

बेहतर चाहिए तो आपको बेहतर बनना पड़ेगा

मैं आपसे परिस्तथी के बारे में बात कर रहा हूँ

भाग्य के बारे में नहीं भाग्य का क्या है उसमें क्या लिखा है नहीं कौन जनता है इसलिए मैं कह रहा हूँ क्यूंकि मैंने एक मूवी देखी थी उसका नाम था मांझी (the mountain man ) उस मूवी का बड़ा ही फेमस डायलॉग था- भगवान के भरोशे क्यों बैठे हो उनके भरोशे मत बैठो क्या पता भगवान हमारे भरोशे बैठा हो ?

सबको अच्छा और बुरा मिलता है चुनौतियाँ मिलती है कोई उन चुनौतियों के कारण टूट जाता है और कई उन चुनौतियों के कारण रिकॉर्ड तोड़ देते हैं।

हमारे जीवन में तरह तरह की घटनाएं घटती है यह तो मानव जीवन का हिस्सा है इनका का क्या ये तो आते जाते रहेंगे। आप उन परिस्ठिओं में क्या करते हो कैसी बातें करते हो ? बड़ी बात वो है।




कड़वे प्रवचन -मुनि श्री कहते हैं की – दहेज लेना और देना दोनों पाप है।आप कमाई खाओ पाप कमाई नहीं। आप कमाई खाओ ससुर कमाई खाएंगे तो ससुर के घर में अगले जन्म में आपको नौकर बनकर पैदा होना होगा।

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